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Author Archives: Pooja Sharma

I have learned to laugh futilely, smiling at lies

मां, वह घर छूटे अरसा हो गया है और वैसे ही वह बेफ़िक्री से सोए हुए अरसा हो गया। तुम्हें याद है मैं हमेशा तुम्हें कह कर सोती थी कि मां मुझे जल्दी उठा देना, लेकिन तुमने कभी मुझे सोते हुए नहीं उठाया। लेकिन सच कहूं तो वो वाली नींद भी वही छूट गई, अब ऐसी नींद आती नहीं। आंखे ना जाने क्यों अलार्म बजने से पहले खुल जाती है। ना जाने किस बात की बेचैनी है। जब से वह घर छूटा है ना, तब से खाना भी अच्छा नहीं लगता ।

पता नहीं तुम आटे में क्या मिलाया करती थी, वैसी रोटी कहीं खाने को ही नहीं मिलती।
कई बार कोशिश की तुम्हारे जैसा स्वाद खाने में लाने की, लेकिन ना जाने क्यों अपने हाथ से बनाया हुआ पनीर भी लौकी जैसा लगता है। और हां, लौक़ी से याद आया तुम्हें याद है, जब जब घर पर लौकी बनती थी तो तुम मेरे लिए कोई और दूसरी सब्जी बना देती थी। मां, तुम कितने अच्छे से जानती थी ना, कि मैं नहीं खाऊंगी, मुझे पसंद नहीं है। तुम्हें पता है मैं अब बड़ी हो गई हूं, अब लौकी बनती है, तो मैं आचार से रोटी खा लेते हूं और जब सवाल करती हूं खुद से कि दूसरी सब्जी?
तो इस दिल-ए-नादान को समझाती हूं- यह पापा का घर नहीं है!

सब से लेट सो कर, सब से लेट उठती थी मैं। वैसे सब से लेट तो यहां पर भी सोती हूं, लेकिन सुबह सबसे पहले उठने के लिए।
अलार्म कई बार बजती है, कई बार मुझसे यह कहते हुए रूठ जाती है कि तुम्हें मेरी क्या जरूरत है? मैं उसे कैसे समझाऊं कि मुझे उसकी जरूरत जागने के लिए नहीं, बल्कि कभी गलती से मीठे सपनों में खो कर आंख ना खुलने पर देर ना हो जाए इसलिए अलार्म लगाती हूं।

I have learned to laugh futilely, smiling at lies

पतंग को देखकर आसमान में दूर तक उड़ जाने के ख्वाब देखने वाली मैं , ये फिजूल के मतलबी रिश्ते निभाते निभाते मशीन हो गई हूं ।
तुम्हें पता है मां, अब दिल दुख होना भी भूल गया है। पहले कोई दिल दुखाता था तो उसकी शक्ल ना देखने की कसम खाने वाली मैं, अब झूठा मुस्कुराना सीख गई हूं। दिल अंदर चीख रहा होता है और बाहर कोई सुन नहीं सकता, मेरी हंसी के पीछे इस मासूम की चीख कुछ भी नहीं है। जब तुम पास थी तो एक छोटी सी खरोच भी बहुत बड़ी चोट होती थी लेकिन अब अक्सर खाना बनाते हुए हाथ जल जाते हैं मेरे, और कमाल देखो मां, तुम्हारी ये बेहतरीन अदाकारा बेटी, मुंह से उफ्फ भी नहीं निकालती।

आज बाजार में एक मां अपनी बच्ची को खिलौना दिला रही थी। बहुत खुश थी वह बच्ची खिलौने लेकर। लेकिन तभी एक ख्याल मन में आया कि आज जब मां पास है तो बाजार के सारे खिलौने अपने लगते हैं, लेकिन जब वही मां पास नहीं होती लोग उसी को खिलौना बना कर खेलते रहते हैं। कभी उसके दिल से और कभी उसके जज्बात से। तुम बहुत याद आती हो मां, जब कभी सड़क पार करनी होती थी तो तुम और ज्यादा कसकर मेरा हाथ पकड़ लेती थी। आज जब कभी अकेले सड़क पार करती हूं , तो लगता है तुम यहीं कहीं मेरे साथ हो।

अब बड़ी हो गई हूं, मां अकेले सड़क पार करने के अलावा जिंदगी की मुश्किलों से लड़ना सीख गई हूं, समझौते करना सीख गई हूं, दिल में बहुत सारा दर्द लेकर हंसना सीख गई हूं और इनमें कोई बुराई भी नहीं है। जिंदगी का दूसरा नाम आजमाइश ही तो है। तुमने हर मोड़ पर मेरा साथ दिया है और आगे भी देती रहोगी, लेकिन सबको अकेले ही अपनी जिंदगी के अंधेरों से लड़ना पड़ता है। और मैं डटकर सारे अंधेरों का सामना करूंगी बस तुम ठीक वैसे ही मेरा हाथ पकड़े रखना जैसे तुम सड़क पार करते वक्त पकड़ती थी।
आई मिस यू मां
आई लव यू लॉट

Because not everyone is big hearted.

कुछ लोगों को जिंदगी से बहुत शिकायतें होती हैं। हर इन्सान को यही लगता है जैसे दुनिया की सारी मुश्किलें भगवान ने उन्हीं की झोली में डाल दी है लेकिन क्या कभी आपने खुद उस लम्हें को महसूस किया है, जब कोई छोटा बच्चा खिलौनों की दुकान के बाहर खड़ा होकर उन्हें ऐसे देख रहा होता है, जैसे कोई जादू है और सच में जादू ही तो है उसके लिए।

वहीं, जादू जिसे वह देख तो सकता है, लेकिन अपने नन्हें हाथों से महसूस नहीं कर सकता। सच में कितना भयानक जोड़ है ना ( गरीबी + बचपन)!

कोई भी बड़ा समझदार इंसान अपने हालातों से समझौता कर सकता है, और हालातों को बदलने के लिए कोशिश करने का भी संकल्प ले सकता है, लेकिन वह बच्चा जिसने अभी दुनिया से अपना रिश्ता नया नया शुरू किया है सोचें उसके लिए कैसा होता होगा।

एक छोटा बच्चा जो मेले के दरवाजे पर खड़ा है और उसके पास अंदर जाने के लिए पैसे नहीं है। हम और आप शायद सोच भी नहीं सकते, कि किस तरह वो मासूम अपने दिल को समझाता होगा। वह कढ़ाई में बनती गरम गरम जलेबी उसे कैसे ललचा रही होंगी और हर हवा के झोंके के साथ जब खुशबू आ रही होती होगी तो उसके कानों में यही कहकर जाती होगी कि तुम सिर्फ महसूस करो।

Because not everyone is big hearted.

झूले पर झूलते वह बच्चे जो इस भयानक जोड़ गरीबी और बचपन का हिस्सा नहीं है जब जब वह झूला झूलते हुए खिलखिलाते है, तो किस कदर वह नन्ना दिल मचल जाता है, वह ढेर सारे झूले झूलने को। और फिर इन सब से 01 मिनट के लिए ध्यान हटा तो वह आइसक्रीम वाले अंकल घंटी बजा देते हैं। वो वाला एक लम्हा इतना भारी हो जाता है कि वह बच्चा सोचने लगता है कि काश उसके पास भी पैसे होते तो वह भी अपने सपनों के महल सजा पाता। बस एक यही लम्हा उसे मजबूर कर देता है, इतना मजबूर कि दिल की सुनना उसके लिए जरूरत बन जाता है। और फिर दिल को मनाने का जो सिलसिला शुरू होता है, वह उसे लोगों से मांगने पर भी मजबूर कर देता है। जब कोई अन्य हाथ में आइसक्रीम लेकर बाहर आता है तो उसे बस यही समझ आता है कि मायूस आंखों से उसे देखने की बजाय उसके आगे हाथ बढ़ाकर मांग ले। और उसके बाद फिर किसी का झूठा भी मिल जाए तो क्या फर्क पड़ता है।

इसी के साथ दुत्कार भी मिलती है, क्योंकि हर इन्सान बड़ा दिल वाला नहीं होता। कुछ छोटे दिल के लोग यह कभी नहीं समझ सकते कि एक छोटे बच्चे के लिए दिल को समझाना कितना मुश्किल होता है। आपकी दिलवाई हुई 10 रुपये की चीज उसे अंदर से कितना खुश कर जाएगी यह शब्दों में बयां नहीं हो सकता। त्योहारों के समय पर इस तरह के बच्चों के लिए शाहा रात में चमकते तारों के जैसे हो आप। इस समय उनके लिए उनके अंधेरों की कालिख में रोशनदान से छनता उजाला हैं आप।

मैं इन बच्चों को भीख या पैसे देने का समर्थन बिल्कुल नहीं करती, लेकिन इस दिवाली किसी एक बच्चे के चेहरे पर आपकी वजह से मुस्कान आ जाए तो समझ ही आपको भगवान की तरफ से दिवाली का तोहफा मिल गया है। किसी भूखे बच्चे को खाना खिलाइए, किसी को कपड़े दिला दीजिए, किसी बच्चे को जूते दिला दीजिए, किसी को उसकी पसंदीदा आइसक्रीम खिला कर, उसे यह समझा सकते हैं कि आप उन्हीं के जैसे हैं। हां, बस भगवान ने आपको थोड़ा ज्यादा इसलिए दिया कि उनके त्योहारों को आप रोशन कर सकें। कम से कम त्योहारों पर किसी की आंखों में आंसू ना हो।

Mountain Man

कभी- कभी इंसान का हौसला और उसका जुनून उसे वह करने पर मजबूर कर देता है जो उसने करने का कभी सोचा भी नहीं होता और ना ही सोच सकता है कि इसका क्या परिणाम होगा। परिणाम रूपी नदी को भूलकर वह सिर्फ अपनी प्यास पर फोकस करने लगता है, और फिर वह होता है जिसकी उसने कल्पना नहीं की होती। ऐसा ही हुआ भारत के ‘माउंटेन मैन’ के साथ। जी हां, माउंटेन मैन यानी दशरथ मांझी।।

दशरथ मांझी वह इंसान हैं जिन्होंने एक छैनी और हथौड़ी की मदद से अपने हौसलों की उड़ान को मंजिल दी है। दरअसल, हुआ यूं कि दशरथ मांझी एक ऐसे गांव से ताल्लुक रखते हैं , जहां इंसान को अपनी छोटी से छोटी जरूरत को पूरा करने के लिए एक पहाड़ को पार करना पड़ता था। इसी वजह से एक बार दशरथ मांझी जब अपने काम पर गए थे, तो उनकी पत्नी उनके लिए दोपहर का भोजन लेकर जा रही थी, तभी उस पहाड़ को पार करते हुए उनका पैर फिसल गया और वह गिर गई। इसके पश्चात समय पर इलाज ना मिलने के कारण उनकी मौत हो गई । इस हादसे का दशरथ मांझी पर बहुत गहरा असर हुआ और उन्होंने ठान लिया कि जिस तरह उस विशालकाय पहाड़ ने उनकी पत्नी के जीवन को खत्म कर दिया उसी तरह वह भी उसको खत्म कर देंगे।

छैनी और हथौड़ी से सिर्फ पहाड़ के गुरूर को जमीन में मिलाया

फिर इन्होंने उस पहाड़ को काटकर रास्ता बनाने का संकल्प लिया। एक छोटी सी छैनी और हथौड़ी के साथ उन्होंने पहाड़ काटना शुरू किया। गांव वालों के लिए यह केवल एक मूर्खता भरा फैसला था लेकिन दशरथ मांझी कुछ अलग ही सोच बैठे थे। हालांकि, गांव वालों ने उनको पत्नी को मौत के सदमे के कारण पागल करार दे दिया था लेकिन इस शख्स ने कभी भी किसी की परवाह नहीं की और लगातार 22 साल इस काम में लगे रहे और उन्होंने कर दिखाया कि अगर हौसले बुलंद हो तो एक पहाड़ को काटकर 360 फुट लंबा, 25 फीट गहरा और 30 फीट चौड़ा रास्ता बनाना मुश्किल काम नहीं है।

रास्ते का नाम पड़ा- 

उनके द्वारा बनाए गए रास्ते का नाम भी उन्हीं के नाम पर रखा गया। दशरथ मांझी के फैसले का भले ही पहले मजाक उड़ाया गया हो लेकिन यह भी हकीकत है कि उनकी कोशिश ने जालौर के लोगों का जीवन सरल बना दिया। जिस तरह दशरथ मांझी ने दृढ़ संकल्प को जीवन का आधार साबित किया, उसी तरह यह भी साबित किया कि किसी के प्रेम को अर्थ देने के लिए ताजमहल बनाना जरूरी नहीं है उनकी तरह रास्ते की बाधाओं को दूर करना भी प्रेम और समर्पण को दर्शाता है।।

Just don't let your spirits down till you make the impossible possible.
"इतिहास लिखने के लिए कलम नहीं हौसलें की जरूरत होती है"
"जहां तक दिखाई दे वहां तक जाने की कोशिश जरूर करें, जब आप वहां पहुंच जाओगे आप इससे भी आगे देख पाओगे"।।
Like bread, cloth and house, 'sex' is also our physical need.
दोस्तों 'सेक्स' शब्द को हमारी संस्कृति में हय दृष्टि से देखा जाता था। इसके बारे में लोग बात करना तक पसंद नहीं करते थे। और कभी कोई इस तरह की बातें करता था तो लोग उस इन्सान को जरा भी पसंद नहीं करते थे।
Benefits of wearing black thread on hand or foot.
आपने अक्सर कुछ लड़कियों को काला धागा पहने देखा होगा। अक्सर उन्हें पैर में या हाथ में काला धागा पहने देखा जाता है, कुछ लोग इस को धर्म से जोड़ कर देखते हैं और कुछ इसको फैशन से जोड़ते हैं
Friendship with books will never let you feel alone.

पापा अक्सर कहा करते थे कि जिंदगी में अगर दोस्त (Friendship ) बनाना है तो आपका सबसे अच्छा दोस्त किताबें ही कहलाएंगी, जो जिंदगी के किसी भी मोड़ पर आपका साथ नहीं छोड़ेंगी। जब कभी आप जिंदगी के किसी मुश्किल दोराहे पर खड़े होंगे, उस समय में भी यह आपको सही रास्ता दिखाने में मदद करेंगी। किताबों से दोस्ती के बाद आप खुद को कभी अकेला नहीं पाएंगे।

तब तो यह सिर्फ पापा की दी हुई सीख समझकर सुन ली जाती थी, लेकिन बचपन में कभी उनकी इस सीख पर अमल नहीं किया, लेकिन अब जब भी खुद को अकेला महसूस करती हूं, तो किताबों के और करीब चली जाती हूं। और आप यकीन मानो पापा की दी हुई सीख बिल्कुल सटीक थी । उसी की बदौलत आज आपको ऐसी 05 किताबों के बारे में बताती हूं, जो मेरे अनुसार हर महिला को जरूर पढ़नी चाहिए बेशक चाहे वह कामकाजी हो या घरेलू। तो चलिए जानते हैं:

1. हजारों दमकते ख्वाब:

यह दो साधारण सी अफगानी महिलाओं की कहानी है। इसमें इनकी जिंदगी के दर्द और हजारों तकलीफ आपको भावनात्मक रूप से इन से जुड़ने को मजबूर कर देंगी। यह कहानी आपको जिंदगी की असल अहमियत जानने में मदद करेंगी। इस कहानी को पढ़ने के बाद आप समझ पाएंगे, कि आपको भगवान का शुक्रगुजार होना चाहिए कि आप और लोगों से बेहतर स्थिति में हैं।

2. कोई अच्छा सा लड़का:

यह एक ऐसी प्रेम कहानी है जो विभाजन के समय की स्थिति को दर्शाती है। जो स्त्रियां प्रेम जैसी पवित्र भावना में विश्वास करती हैं उनके लिए यह किताब एक उपहार से कम नहीं है।

3. मुझे चांद चाहिए:

यह किताब सुरेंद्र वर्मा ने लिखी है, इस किताब की नायिका वर्षा एक बहुत महत्वकांक्षी लड़की है। जो अपने जीवन में बहुत कुछ करना चाहती है, वह अभिनेत्री बनना चाहती हैं। ये कहानी उसके सपनों और जीवन की हकीकतो के बीच के द्वंद को दर्शाती है। ये कहानी आपको जरूर पढ़नी चाहिए।

4. द्रौपदी की महाभारत:

इस किताब में महाभारत को द्रौपदी की नजरों से दिखाया गया है। द्रौपदी हमारे पुराणों के अनुसार सबसे धैर्यवान महिलाओं में से एक थी। इस किताब के माध्यम से लेखक बताना चाहता है कि औरतों को कभी हार नहीं माननी चाहिए ।

5. मामूली चीजों का देवता:

यह किताब दो बहनों की जिंदगी के सफर को दर्शाती है, इसमें बताया गया है कि कैसे समाज के दायरों के बीच फंसकर बहुत बार हम वह हासिल नहीं कर पाते जो हम डीजर्व करते हैं। इस किताब को लिखने में पूरे 04 साल लगे।

If you have everything in life and if you do not have a mother, then everything seems deserted.

‘मां’ हां ये वही है जिसको सुनते ही एक 60 साल का बुजुर्ग व्यक्ति भी अपने आप को छोटा बच्चा महसूस करने लगता है। दरअसल ये शब्द ही इतना ज्यादा प्यारा है सब को कि कभी हमें कुछ हो जाए तो भी सब से पहले मां ही निकलता है मुंह से..और हम परेशान हो, दर्द में हो तब भी मां ही सबसे पहले याद आती हैं।

“वो किसी ने कहा है ना कि भगवान हर जगह नहीं हो सकते थे इसलिए उन्होंने मां को बनाया”
बिल्कुल सही कहा है, जिंदगी में सब कुछ हो और मां ना हो तो सब अधूरा सा हो जाता है। मां है तो दुनिया की सारी खुशियां हमारी हो जाती है।
आज भी हमारे बीच कुछ लोग है जो अपने मां-बाप को इज्जत नहीं देते..उन्हें वो मान सम्मान नहीं देते जिनके वो हकदार है। बहुत ज्यादा गुस्सा, बुरा व्यवहार और अत्याचार करते है वो अपने मां बाप पर… उनको लगता है कि उन्होंने उनके लिए कुछ नहीं किया और अगर किया भी है तो वो उनकी ड्यूटी थी।। सच कहा जाए तो वैसे लोग कितने बेवकूफ़ है वो.. जिस चीज को वो ड्यूटी समझते है वो उनकी ममता होती है और रही बात ड्यूटी की तो …फिर कुछ ड्यूटी बच्चों की भी तो होती है… तो क्या वो उन्हें पूरा कर रहे हैं, अगर इसका जवाब मिल जाए तो खुद सोचना कि उन्होंने अपने मां-बाप के लिए क्या किया है?

मैं सिर्फ़ इतना ही कहना चाहती हूं ऐसे लोगों से कि जिनके साथ तुम रह रहे हो ना, जिन्होंने तुम्हे चलना सिखाया, कंधे पर बैठा कर दुनिया दिखाया, वो सिर्फ़ मां बाप नहीं हैं.. वो भगवान का रूप है। तुम खुशनसीब हो जो यही उनके दर्शन हो गए। इसलिए उन्हें वो सब दो जिसके वो हकदार है। आज का ये लेख उन लोगों के लिए ख़ास तौर पर लिखा गया है जिनको अपने मां-बाप की कोई अहमियत समझ नहीं आती। हर पल उन्हें सिर्फ यही लगता है कि उनके मां-बाप उनके लिए जो कुछ भी कर रहे है वो कोई अहसान नहीं है बल्कि ये तो उनकी ड्यूटी है जो हर मां-बाप करते है। बहुत नासमझ हैं वो लोग जिनको कभी समझ ही नहीं आता कि मां-बाप भगवान का दिया हुआ वो तोहफ़ा होते है, जो सब के नसीब में नहीं होते। इसलिए इनके लिए हम जितना करें उतना कम है।

गर अभी भी कुछ लोगों को समझ नहीं आया तो मैं कुछ पंक्तियों के जरिए एक कोशिश और करना चाहूंगी-

एक छोटा सा घर है हमारा, मगर उसे बनाने में खूब पसीने बहाए हैं,
चूल्हे की आंच पर रोटियां पकाते हुए, कई बार मां ने अपने हाथ भी जलाए हैं,
ज़िम्मेदारी के बोझ ने कुछ ऐसे दिन भी दिखाए हैं,
कि सालों तक त्यौहार मां ने एक ही साड़ी में मनाए हैं।।

दो समय की रोटी के लिए, मां ने कई दिन सिर्फ पानी पीकर बिताए हैं,
बच्चे भूखे ना सो जाए इसलिए भारी भारी बोझ भी उठाए हैं,
जी हां, ज़िम्मेदारी के बोझ ने कुछ ऐसे दिन भी दिखाए हैं,
की सालों तक त्यौहार मां ने एक ही साड़ी में मनाए है।।

बहुत मुश्किल था वो दौर, उस दौर में शायद ही दो पैसों की बचत हो पाए लेकिन फिर भी जैसे तैसे करके मां ने वो बचाए है,
मेरे बच्चों का भविष्य बहुत सुनहरा हो, रातों को जाग कर मां ने ये सपने सजाए है,
जी हां, ज़िम्मेदारी के बोझ ने कुछ ऐसे दिन भी दिखाए है,
की सालों तक त्यौहार मां ने एक ही साड़ी में मनाए है।।

एक बार यूंही देखे मैंने उनके हाथ, उनके हाथों में बहुत सारी दरारें हैं,
हमारी परवरिश के लिए, उन्होंने अपने सुंदर हाथ भी बिगड़े है,
हमारे सारे सपने पूरे हों, इसलिए उसने अपने सारे सपने दांव पर लगाए हैं,
अपनी पसंद, अपने शौक सब छोड़ दिया, कहती हैं कि मुझे मेरे बच्चे उन सब से प्यारे हैं,
ज़िम्मेदारी के बोझ ने कुछ ऐसे दिन भी दिखाए हैं,
कि सालों तक त्यौहार मां ने एक ही साड़ी में मनाए है।।

जिंदगी की इस तपती राह पर हमारे लिए, उसने अपने पांव जलाए है,
पीठे की वो मिठाई जो उन्हे बहुत पसंद है, उसके लिए बचाए पैसे भी हमारे आने वाले कल के लिए बचाए है
जी हां, ज़िम्मेदारी के बोझ ने कुछ ऐसे दिन भी दिखाए है,
कि सालों तक त्यौहार मां ने एक ही साड़ी में मनाए है।।

जब जब मैंने खुद को मुश्किलों से घेरा है, तब तब मैंने अपनी मां को मेरे साथ खड़ा हुआ पाया है,
भगवान को देखा नहीं कभी मैंने लेकिन, वो मेरी मां ही है जिसने उनके होने का अहसास कराया है,
बहुत किया है उन्होंने मेरे लिए लेकिन अब मुझे उनके लिए कुछ करके दिखाना है,
जो कुछ भी छोड़ा उन्होंने मेरे लिए वो उन्हें वापिस भी तो दिलाना है…
इन्हीं जिम्मदारियों के कारण ऐसा होता आया है,
कि सालों तक हर त्यौहार मां ने एक ही साड़ी में मनाया है।।

There is a lot of crowd here but we cannot call anyone our own.

हाल ही में एक खबर सुनी, जिसमें बताया गया कि एक शिक्षक का तबादला होने के बाद उसके शिष्य फूट-फूट कर रोए। क्या हुआ ? सुनने में अजीब लगा ना ?

लगना स्वाभाविक भी है क्योंकि आजकल इतनी भावुकता दिखाता कौन है? वह भी किसी अन्य के लिए। आज के समाज में लोग अपने अपनो के लिए समर्पित नहीं है, जितना ये शिष्य अपने शिक्षक के लिए हो रहे हैं । सच ही तो है, आजकल जिंदगी फेसबुक सी हो गई है, जिसमें भीड़ तो बहुत है, लेकिन हम किसी को अपना नहीं कह सकते। इस फेसबुक, इंस्टा और व्हाट्सएप ने हमें हमारे अपने अपनों से इतना दूर कर दिया है। आलम यह है कि एक साथ बैठे हुए भी हम एक दूसरे से ना बात कर पा रहे हैं, ना उसे महसूस कर पा रहे हैं।

अंदर की भावनाएं तो जैसे मर सी गई है। ना किसी को अपनी कहनी है, ना किसी की सुननी है ।

कभी-कभी हम अपने से इस हद तक दूर हो जाते हैं कि बहुत परेशानी में हम अपने दिल का गुबार तक नहीं निकाल पाते। ऐसे में शुरू होता है डिप्रेशन का दौर।

इस डिप्रेशन में फिर हम अपनी दिखावटी दुनिया(सोशल मीडिया) से भी दूर होने लगते हैं।
डिप्रेशन एक ऐसी बीमारी है जो व्यक्ति को सामान्य रूप से अपनी दिनचर्या जारी रखने में अक्षम कर देती है।

इसके लक्षण इस प्रकार है:

1. दिन भर उदासी महसूस करते रहना।

2. थकावट और कमजोरी महसूस करना।

3. डिप्रेशन होने पर इंसान हर समय अपने आप को गुनहगार सा महसूस करने लगता है।

4. वह अपने फैसले खुद नहीं ले पाता।

5. नींद पूरी या अच्छी तरह से नहीं ले पाता।

6. उस को हमेशा आत्महत्या का विचार आने आता है।

7. बेचैनी महसूस करते हैं ।

8. दिनचर्या की हर गतिविधि में नीरसता होती है।

वैसे तो यह एक मानसिक स्थिति है, लेकिन यह व्यक्ति को शारीरिक तौर पर प्रभावित करती हैं।
डब्ल्यूएचओ की एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में लगभग 30 करोड लोग डिप्रेशन से ग्रस्त हैं । भारत में इसकी संख्या 5 करोड़ से ज्यादा है । इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह कितनी व्यापक बीमारी का रूप ले चुकी है। लेकिन दिनचर्या में बदलाव, आदतों में बदलाव के साथ हम इस पर काबू पा सकते हैं। चलिए जानते हैं इसके बचाव के उपाय:

1. इससे बचाव का सबसे पहला तरीका यही है कि इंसान 08 घंटे की नींद पूरी लें। इसे उसका दिमाग तरोताजा रहेगा।

2. मन में कभी भी नकारात्मक विचार ना आने दे। हमेशा अपने आप को मोटिवेट करते रहें।

3. 10 मिनट रोजाना सूरज की रोशनी में रहें। इससे आपका डिप्रेशन जल्दी हटेगा।

4. सुबह-शाम बाहर टहलने जाए।

5. योग और ध्यान भी आपको इसमें मदद कर सकता है।

6. अपनी हॉबीज को समय दें। जो आपको पसंद हो वो करे।।

7. अपने आप को हमेशा व्यस्त रखें।

8. इससे छुटकारा पाने के लिए आप संगीत भी सुन सकते हैं।

9. हमेशा प्रकृति के साथ समय बिताएं।

10. परिवार के साथ बाहर घूमने जाएं।

11. नियमित अंतराल पर बाहर खाना खाने का प्लान बनाएं।

12. सबसे अहम, कभी भी किसी भी एंटी डिप्रेशन पिल की आदत ना डालें।

Those who desire fame and respect should offer this to Shivling along with Gangajal.

“हर हर महादेव” जी हां, अब आप हर दिन किसी न किसी से यह जादुई शब्द सुनेंगे । हर तरफ सिर्फ भक्ति की धुन और श्रद्धा की खुशबू फैल जाएगी। यह सब मुमकिन है क्योंकि सावन मास जो शुरू हो चुका है । दोस्तों गुरु पूर्णिमा के साथ आषाढ़ महीने का अंत हो जाता है तथा इसके अगले दिन से सावन मास की शुरुआत होती है ।

यह हिंदुओं का सबसे महत्वपूर्ण व पवित्र महीना माना जाता है। इस बार सावन महीने की शुरूआत 14 जुलाई से हो रही है और इसका समापन 12 अगस्त को होगा।

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि सावन में भोलेनाथ की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है । सावन में सोमवार के व्रत उपवास करने का भी एक अलग महत्व है। सावन के पूरे महीने शिवभक्त शिवलिंग पर जल चढ़ाते हैं, मंदिरों में खासी भीड़ होती है।

सावन के महीने में कुछ श्रद्धालु कावड़ लेने भी जाते हैं। नंगे पैर हर हर भोले नाथ के नारों के साथ ही पूरा वातावरण पवित्र हो जाता है। कुछ लोग अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए संकल्प के साथ सोलह सोमवार का व्रत भी करते हैं जिसकी शुरुआत सावन के महीने के पहले सोमवार से की जाती है । वैसे तो भोलेनाथ बहुत भोले हैं । भक्तों द्वारा सिर्फ गंगा जल अर्पण करने भर से ही वो प्रसन्न हो जाते हैं और भक्तों को उनकी मन वांछित वस्तु देते हैं। लेकिन कुछ आसान उपायों के साथ आप भोलेनाथ से अपनी मनोकामना जल्द पूरी करा सकते हैं चलिए आज ऐसे ही कुछ उपायों के बारे में जानते हैं:

1. अगर आपको कहा जाए कि शिवलिंग पर जल चढ़ाने भर से ही महादेव आप के कष्टों को दूर कर देंगे तो आप यह जरूर करना चाहेंगे।
तो चलिए आज हम बताते हैं कि जल के साथ ऐसी कौन सी वस्तु आप शिवलिंग पर अर्पण करें जिससे आपकी मनोकामना जल्दी पूरी हो:
अगर आप आरोग्य होने की इच्छा से शिवलिंग की आराधना करते हैं तो आप शिवलिंग पर दूध अर्पण करें ।

2. जीवन में सुकून और शांति के लिए आपको शिवलिंग पर जल चढ़ाने के साथ ही दही अर्पण करना चाहिए। इससे आपको सुकून और शांति की प्राप्ति होगी।

3. अगर आप समाज में लोकप्रिय होना चाहते हैं, फेमस होना चाहते हैं, फेम पाना चाहते हैं तो शिवलिंग पर गंगा जल के साथ शहद अर्पण करें ।

4. जो व्यक्ति सुख समृद्धि की इच्छा रखते हैं, उन्हें शिवलिंग पर जल के साथ शक्कर चढ़ाने की सलाह दी जाती हैं। शक्कर चढ़ाकर वह सुख समृद्धि की प्राप्ति अवश्य ही कर पाएंगे ।

5. यश और मान सम्मान की इच्छा रखने वाले मनुष्य को गंगाजल के साथ चंदन शिवलिंग पर अर्पण करना चाहिए। जिससे उनको यश और मान-सम्मान की प्राप्ति होगी।

6. अक्सर देखा जाता है कि आजकल पति पत्नी के झगड़े बहुत बढ़ गए हैं, आपसी दूरियों के कारण वह आपस में मिलजुल कर नहीं रह पाते हैं, तो अपने दांपत्य जीवन को खुशहाल बनाने की इच्छा रखने वाले लोगों को शिवलिंग की आराधना करते वक्त शिवलिंग पर गंगाजल के साथ केसर अर्पण करना चाहिए। इससे उनका जीवन सुखमय हो जाएगा और प्रेम भी बढ़ेगा।

7 संतान की इच्छा रखने वाले दांपत्य को सलाह दी जाती है कि वह शिवलिंग पर गंगाजल के साथ गेहूं भी अर्पण करें। इससे उनको संतान की प्राप्ति होगी ।

8. काले तिल चढ़ाने से पापों का नाश और रोगों का नाश होगा। जी हां, जो लोग अपने पापों का नाश और रोगों का नाश करने की इच्छा रखते हैं उन्हें शिवलिंग पर गंगाजल के साथ काले तिलों को अर्पण करना चाहिए।

फोटो सौजन्य- गूगल