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Category Archives: Fitness

If there is pain in the breast just before periods

Health First: ज्यादातर महिलाएं बिजी दिनचर्या, केयर संबंधी जिम्मेदारियों या अन्य समस्याओं को मामूली समझकर शुरुआती लक्षणों को दरकिनार कर देती हैं। हालांकि महिलाओं में ये अनदेखे लक्षण कभी-कभी सीरियस बीमारियों के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। थकान और अनियमित मासिक धर्म से लेकर शरीर में होने वाले सूक्ष्म बदलावों तक, इन संकेतों को अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए। महिलाओं की आम स्वास्थ्य समस्याओें को समझना, शुरुआती संकेतों को पहचानना और मेडिकल मदद कब लेनी चाहिए, यह जानना जटिलताओं को रोकने और लंबे हेल्थ के एहसास को सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

महिलाएं अक्सर हेल्थ रिलेटेड लक्षणों तो क्यों करती हैं नजरअंदाज-

महिलाएं अक्सर अपने स्वास्थ्य की तुलना में परिवार और काम को प्राथमिकता देती हैं। इससे अक्सर निदान और उपचार में देरी होती है।

  1.  व्यस्त जीवनशैली और एक साथ कई जिम्मेदारियों को निभाना
  2.  असुविधा या दर्द को सामान्य मानने की प्रवृत्ति• लक्षणों के बारे में जागरूकता का अभाव
  3.  यह मान लेना कि लक्षण अस्थायी हैं या तनाव से संबंधित हैं
    स्वास्थ्य संबंधी वे प्रमुख मुद्दे जिन्हें महिलाएं अक्सर नजरअंदाज कर देती हैं।

लगातार थकान रहना

Stress in women can affect scientific and physical health

थकान महसूस होने को अक्सर तनाव या नींद की कमी बताकर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
• यह एनीमिया , थायरॉइड विकार या पोषण संबंधी कमियों का संकेत हो सकता है।
• लगातार थकान महिलाओं में थकान के सबसे आम कारणों में से एक है, जिसका मूल्यांकन उन्हें करवाना चाहिए।
अनियमित मासिक धर्म
मासिक धर्म की अनियमितताओं को अक्सर सामान्य माना जाता है।
• यह हार्मोनल असंतुलन का संकेत हो सकता है।
• यह पीसीओएस, थायराइड की समस्याओं या तनाव से संबंधित हो सकता है।
• अनियमित मासिक धर्म के कारणों में से एक महत्वपूर्ण कारण है।

बेवजह वजन परिवर्तन

जीवनशैली में बदलाव किए बिना अचानक वजन बढ़ना या घटना होना अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
• यह थायरॉइड संबंधी विकार या चयापचय संबंधी समस्याओं का संकेत हो सकता है।
• हार्मोनल असंतुलन के लक्षणों से जुड़ा हुआ
बार-बार सिरदर्द
सिरदर्द को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है या इसका इलाज खुद ही कर लिया जाता है।
• यह तनाव, माइग्रेन या किसी अन्य अंतर्निहित बीमारी के कारण हो सकता है।
• लगातार सिरदर्द होने पर डॉक्टर से परामर्श लेना आवश्यक है।

स्तन में परिवर्तन

Breast Cancer

स्तन स्वास्थ्य में होने वाले बदलावों को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

• गांठें, दर्द या स्राव
• बेहतर परिणामों के लिए शीघ्र निदान अत्यंत महत्वपूर्ण है।
श्रोणि में दर्द
अक्सर इसे मासिक धर्म की असुविधा मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
• यह एंडोमेट्रियोसिस, संक्रमण या अंडाशय संबंधी समस्याओं का संकेत हो सकता है।
• दीर्घकालिक दर्द के लिए मूल्यांकन आवश्यक है
पाचन संबंधी समस्याएं (पेट फूलना, एसिडिटी)
आमतौर पर इन्हें मामूली समस्याएं माना जाता है।
• इसका संबंध आंतों के स्वास्थ्य या हार्मोनल परिवर्तनों से हो सकता है।
• लगातार बने रहने वाले लक्षण गंभीर समस्याओं का संकेत हो सकते हैं।

नींद की समस्याएँ

Your sleeping position reveals your personality

नींद की कमी को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है या इसे सामान्य मान लिया जाता है।
• यह तनाव, हार्मोनल असंतुलन या मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से संबंधित हो सकता है।
• यह समग्र स्वास्थ्य और ऊर्जा स्तर को प्रभावित करता है।
मनोदशा में परिवर्तन और चिंता
भावनात्मक लक्षणों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
• यह हार्मोनल उतार-चढ़ाव से संबंधित हो सकता है।
• यह चिंता या अवसाद का संकेत हो सकता है।

मनोदशा में परिवर्तन और चिंता

भावनात्मक लक्षणों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।

  • यह हार्मोनल उतार-चढ़ाव से संबंधित हो सकता है।
  • यह चिंता या अवसाद का संकेत हो सकता है।

चेतावनी के संकेत जिन्हें कभी भी अनदेखा नहीं करना चाहिए

इन संकेतों पर जरूर दें ध्यान :

  • ऐसे लक्षण जो कुछ दिनों से अधिक समय तक बने रहते हैं
  • समय के साथ बिगड़ती जाने वाली स्थितियाँ
  • एक साथ कई लक्षण प्रकट होना
  • शरीर में अचानक या असामान्य परिवर्तन

इन लक्षणों को नज़रअंदाज़ करने से होने वाले स्वास्थ्य जोखिम

लक्षणों को नज़रअंदाज़ करने से निम्नलिखित समस्याएं हो सकती हैं:

  • गंभीर बीमारियों के निदान में देरी
  • रोग की प्रगति
  • जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है
  • जीवन की गुणवत्ता में कमी

महिलाओं को डॉक्टर से कब परामर्श लेना चाहिए?

यदि निम्नलिखित स्थितियां हों तो चिकित्सीय सलाह लें:

  • लक्षण अपेक्षा से अधिक समय तक बने रहते हैं
  • अचानक या गंभीर असुविधा होती है
  • समस्याएँ बार-बार सामने आती रहती हैं।
  • ये लक्षण दैनिक जीवन में बाधा उत्पन्न करते हैं।

नियमित स्वास्थ्य जांच का महत्व

नियमित जांच रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

  • स्वास्थ्य समस्याओं का शीघ्र पता लगाना
  • मौजूदा स्थितियों की निगरानी
  • निवारक देखभाल और स्क्रीनिंग।
High blood pressure and diabetes cause severe damage to the kidneys

Blood Pressure-Diabetes: भागदौड़ भरी जिंदगी में ब्लड प्रेशर और डायबिटीज की परेशानी काफी ज्यादा हो चुकी है। यह दोनों ही, सबसे तेजी से बढ़ने वाली लाइफस्टाइल डिजीज हैं। इन दोनों बीमारियों को नियंत्रित किया जा सकता है पर जब ये लंबे वक्त तक कंट्रोल में नहीं रहते, तो सबसे अधिक असर किडनी पर पड़ता है। एक डॉक्टर का कहना है कि क्रॉनिक किडनी डिजीज के प्रमुख वजहों में डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर सबसे आगे है। आइये जाने किडनी पर दोनों बीमारियों का क्या असर पड़ता है-

किडनी पर डायबिटीज का क्या है असर

डायबिटीज का असर आपकी किडनी पर पड़ सकता है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डायबिटीज एंड डायजेस्टिव एंड किडनी डिजीज के मुताबिक, डायबिटीज होने पर हमारे शरीर का ब्लड शुगर लेवल लगातार बढ़ा हुआ रहता है। यह हाई शुगर धीरे-धीरे किडनी के छोटे-छोटे ब्लड वेसेल्स को नुकसान पहुंचाने लगता है। किडनी का मुख्य काम ब्लड को फिल्टर करना है। लेकिन जब ब्लड शुगर ज्यादा रहता है, तो यह फिल्टरिंग सिस्टम खराब होने लगता है और प्रोटीन जैसे जरूरी तत्व पेशाब के जरिए बाहर निकलने लगते हैं। इस स्थिति को डायबिटिक नेफ्रोपैथी कहा जाता है।

हाई ब्लड प्रेशर किडनी को कैसे नुकसान पहुंचाता है

ब्लड प्रेशर बढ़ने की स्थिति में किडनी को नुकसान हो सकता है। नेशनल किडनी फाउंडेशन के मुताबिक, हाई ब्लड प्रेशर किडनी की ब्लड वेसल्स पर अतिरिक्त दबाव डालता है। लंबे समय तक यह दबाव किडनी की फिल्टरिंग क्षमता को कमजोर कर देता है। ऐसे में धीरे-धीरे किडनी ठीक से ब्लड को फिल्टर नहीं कर पाती, जिससे शरीर में टॉक्सिस पदार्थ जमा होने लगते हैं। इसे हाइपरटेंसिव किडनी डिजीज कहा जाता है।

जब ब्लड प्रेशर और डायबिटीज साथ में हो, तो किडनी पर क्या पड़ता है असर

High blood pressure and diabetes cause severe damage to the kidneys

अगर किसी व्यक्ति को डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर दोनों होते हैं, तो किडनी पर डबल स्ट्रेस पड़ता है। यह स्थिति सबसे ज्यादा खतरनाक मानी जाती है, क्योंकि किडनी फंक्शन तेजी से गिरता है।इस स्थिति में प्रोटीन यूरिन में बढ़ जाता है और किडनी फेलियर का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे में कई बार डायलिसिस की भी जरूरत पड़ सकती है

किडनी डैमेज होने के शुरुआती लक्षण-

किडनी डैमेज धीरे-धीरे बढ़ता है, इसलिए शुरुआत में लक्षण हल्के हो सकते हैं। इसके कुछ शुरुआती लक्षण निम्न हैं-

  1. शरीर में बार-बार थकान महसूस होना
  2. पैरों और चेहरे पर सूजन
  3. पेशाब में झाग आना
  4. भूख कम लगना
  5. ब्लड प्रेशर का लगातार बढ़ा रहना
  6. किडनी को ऐसे हालात में कैसे रखें सुरक्षित

डॉक्टर कै कहना कि सही समय पर कंट्रोल करके किडनी को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। बस इसके लिए आपको कुछ बातों पर ध्यान देने की जरूरत होती है, जैसे-

  • ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखें।
  • ब्लड प्रेशर को 120/80 के आसपास रखने की कोशिश करें।
  • नमक और प्रोसेस्ड फूड कम खाएं।
  • नियमित रूप से एक्सरसाइज करें।
  • समय-समय पर किडनी टेस्ट कराएं।
  • डॉक्टर की दवा नियमित रूप लें।
FIFA World Cup 2026: How do legendary footballers like Messi and Ronaldo stay so fit?

FIFA World Cup 2026: वर्ल्ड कप में खेल रहे फुटबॉल खिलाड़ियों की बात ही अलग होती है, 90 मिनट तक दौड़ना, शरीर को फुर्तीला और लचीला बनाए रखने के साथ-साथ फोकस्ड रहना पड़ता है, जो उनकी फुल फिटनेस को दर्शाता है। क्रिस्टियानो रोनाल्डो और लियोनेल मेसी जैसे फुटबॉल खिलाड़ी को जब हम मैदान में देखते हैं तो अक्सर सोचते हैं कि ये लोग खुद को इतने चुस्त-दुरुस्त कैसे बनाए रखते हैं और कोई भला इतना फुर्तीला कैसे हो सकता है। हालांकि, हमें यह भी पता है कि उनकी फुर्ती और फिटनेस का राज कहीं न कहीं उनकी जीवनशैली और खानपान में ही छिपा है। आगे हम जानेंगे कि आखिर रोनाल्डो और मेसी जैसे स्टार फुटबॉल प्लेयर अपनी फिटनेस को कायम रखने के लिए कैसी जीवनशैली बना के चलते हैं और उनके डाइट में क्या-क्या शामिल होता है।

रोनाल्डो और मेसी का लाइफस्टाइल

FIFA World Cup 2026: How do legendary footballers like Messi and Ronaldo stay so fit?

क्रिस्टियानो रोनाल्डो और लियोनल मेसी का नाम दुनिया के सबसे बड़े फुटबॉल प्लेयर्स में आता है और इनका खास लाइफस्टाइल इन्हें एक फुर्तीला और फिट प्लेयर बनाता है। कुछ वेबसाइट्स रिपोर्ट्स के मुताबिक जानते हैं इन दोनों दिग्गज प्लेयर्स की डाइट और लाइफस्टाइल कैसी है।

रोनाल्डो की डाइट और लाइफस्टाइल

क्रिस्टियानो रोनाल्डो हमेशा अपनी डाइट का खास ध्यान रखते हैं और दिन में तीन बार हेवी डाइट लेने की बजाय थोड़ा-थोड़ा करके दिन में 06 बार खाते हैं। उनकी डाइट में आमतौर पर हाई प्रोटीन फूड्स जैसे अंडे, चिकन और फिश जैसी चीजों को शामिल करते हैं। अलावा इसके फाइबर के लिए सलाद को अपनी डाइट में शामिल करना नहीं भूलते हैं।

इसके अलावा रोनाल्डो अपनी नींद का खास ध्यान रखते हैं, रिपोट्स के अनुसार रोनाल्डो लंबी नींद नहीं लेते हैं बल्कि छोटे-छोटे स्लीप साइकिल्स की मदद से अपनी नींद पूरी करते हैं। डिसिप्लिन्ड न्यूट्रिशन प्लान के अनुसार, अल्कोहल व स्मोकिंग से भी दूर हैं।

लियोनल मेसी की डाइट और लाइफस्टाइल

FIFA World Cup 2026: How do legendary footballers like Messi and Ronaldo stay so fit?

ऑकोडायरियो की मेटाबॉलिक पर दी गई जानकारी के मुताबिक मेसी नेचुरल फूड्स पर ज्यादा ध्यान देते हैं और सा ही हाइड्रेशन का भी खास ध्यान रखते हैं। इसके साथ-साथ मेसी को उनकी कंसिस्टेंसी यानी लगातार ट्रेनिंग करते रहने और एक डिसिप्लिन्ड लाइफस्टाइल जीने की आदत के लिए जाना जाता है।

ऐसे बनाएं स्वयं को फुर्तीला और फिट

अगर आप भी फुटबॉल प्लेयर्स की तरह खुद को फुर्तीला और फिट बनाए रखना चाहते हैं, तो आपको भी अपनी डाइट और लाइफस्टाइल से जुड़ी कुछ खास बातों का ध्यान रखना होगा। एक रिपोर्ट के मुताबिक शरीर को फुर्तीला बनाने के अच्छे लाइफस्टाइल से जुड़ी कुछ आदतों में सुधार करना जरूरी है और सामान्य आदतें क्या होती हैं?

  • रोजाना हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करें
  • डेली पर्याप्त पानी पिएं
  • साइकिलिंग, जॉगिंग और स्विमिंग जैसी एक्टिविटी करें
  • ताजे व पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लें
  • रोजाना पर्याप्त नींद लें, सही समय पर सोएं और सही समय पर उठें
  • मानसिक तनाव को कम करने के लिए मेडिटेशन आदि करें
Right time of walking, Avoid walking at the wrong time

Right time of walking for fitness: वेट लॉस करना हो या फिर फिटनेस लेवल बढ़ाना हो एक्सरसाइज का आगाज वॉकिंग के साथ ही होता है। सुबह या शाम के वक्त खुली हवा में टहलना आपकी हेल्थ के लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है। सिंपल तरीके से पैदल चलना या वॉकिंग और ब्रिस्क वॉक जैसी एक्सरसाइज न सिर्फ आसान होती है बल्कि यह महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए लाभदायक साबित हो सकती है।

सर्दी या गर्मी के मौसम में भी आप बस कुछ बातों का ख्याल रखकर टहल सकते हैं। जैसे दिन में किस वक्त और कितनी देर तक वॉक करनी चाहिए। क्योंकि, सही समय पर वॉक ना करने से आपकी हेल्थ को नुकसान हो सकता है। इसलिए वॉक करने से पहले इस बात की जानकारी आपको जरूर होनी चाहिए कि आपको कब वॉक करना चाहिए और कब नहीं।

गर्मियों के मौसम में वॉक करने का सही समय ?

Right time of walking, Avoid walking at the wrong time

इस समय करें मॉर्निंग वॉक

वॉक करने का सबसे ठीक समय है है सुबह सूरज उगने के आसपास का समय। सूरज उगने के साथ ही आप टहलने निकल जाएं और सुबह 8 बजे तक वॉक पूरी कर लें। दरअसल, सूरज निकलने से पहले का समय हवा में प्रदूषण का स्तर अधिक होता है। वहीं, सुबह की हल्की धूप में टहलने से आपको तकलीफ भी नहीं होती। इस तरह आप थोड़ी देर धूप में रहकर विटामिन डी भी प्राप्त कर सकते हैं और आपकी हड्डियों को इसका फायदा हो सकता है।

इवनिंग वॉक

जो लोग सुबह की बजाय शाम को वॉक करना पसंद करते हैं, उन्हें शाम के समय 4 के बाद और 6-8 बजे तक वॉक करने की सलाह दी जाती है। इस समय हवा में ठंडक भी बढ़ने लगती है और प्रदूषण का स्तर भी कम होता है। सबसे खास बात यह भी है कि शाम 4-7 बजे के दौरान शरीर की मांसपेशियां बहुत फ्लेक्सिबल होती हैं। ऐसे में आपके लिए वॉक करना आसान हो सकता है और इससे आपके स्वास्थ्य को वॉक करने के फायदे भी पहुंच सकते हैं।

सर्दियों में कब टहलना चाहिए

Right time of walking, Avoid walking at the wrong time

ठंड के दिनों में सवेरे वॉक करना फायदेमंद होता है लेकिन, सूरज उगने से पहले और कोहरे के माहौल में वॉक करने से हेल्थ पर खराब असर पड़ सकता है। सुबह के समय हवा में ठंड होती है और तापमान भी काफी कम होता है। ऐसे में वॉक करते समय आपको सांस लेने से जुड़ी हुई समस्याएं हो सकती है। इसलिए, सर्दियों में सूरज उगने के बाद ही वॉक करें।

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गलत समय पर वॉक करना है नुकसानदायक

तड़के सुबह यानी अंधेरे में वॉक करना हेल्थ के लिए हानिकारक साबित हो सकता है क्योंकि, ऐसे में हवा में प्रदूषण का स्तर अधिक होता है। जिससे अस्थमा, खांसी और जुकाम जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। ठंडियों में बहुत सुबह वॉक करने से मसल्स में खिंचाव और जॉइंट पेन की समस्या बढ़ सकती है। सुबह की ठंडी हवा और प्रदूषण के कारण फेफड़ों पर भी खराब असर पड़ता है जिससे छाती में भारीपन और दर्द जैसी शिकायतें हो सकती हैं।

फोटो सौजन्य- गूगल

Say goodbye to unwanted grey hair

Natural Hair Dye: बचपन में जब हम बालों को लहराते घूमा करते थे और हमें अपने बालों की कोई फिक्र नहीं रहती थी। ऐसा लगता था मानों सबसे खूबसूरत बाल हमारे ही हैं। और आज याद करते हैं कि काश वो बेफिक्री, वो चमक वो खुशी, वो एहसास काश कोई लौटा दे, क्योंकि आजकल कम उम्र में सफेद होते बाल और उनका रुखापन, बेजान होकर झड़ना एक आम बात बन चुकी है। सफेद बालों को तो केमिकल हेयर डाई बालों को तुरंत रंग तो देती है पर लंबे वक्त तक इसका इस्तेमाल करने से नुकसान भी पहुंचाती है। ऐसे में केमिकल हेयर डाई की जगह क्यों ना दादी-नानी के नुस्खे को आजमाया जाए, जो कि भरोसेमंद भी है। वर्षों से अपनाए जाने वाला आंवला नुस्खा जो एक अच्छा प्राकृतिक उपाय है, जो बालों को गहरा रंग देने के साथ-साथ उन्हें मजबूत और चमकदार भी बनाता है। बता दें कि सही तरीके से प्रयोग करने पर यह बालों को नेचुरल ब्लैक टोन देने में मदद भी करता है।

ये है बालों के लिए आंवला के फायदे

Say goodbye to unwanted grey hair

कई शोध इस बात को साबित करते हैं कि आंवला विटामिन- C, एंटीऑक्सीडेंट और मिनरल्स से भरपूर होता है। साथ ही बालों में इसका इस्तेमाल करने से बालों की जड़ों को जबरदस्त मजबूती मिलती है, हेयर फॉल कम करता है और समय से पहले बालों के सफेद होने वाली समस्या कम हो जाती है। साथ ही इसके नियमित उपयोग से बालों में प्राकृतिक चमक आती है और स्कैल्प हेल्दी रहने लगते हैं। यही वजह है कि आंवला को नेचुरल हेयर डाई के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है।

नेचुरल आंवला डाई बनाने का आसान तरीका

आमला से नेचुरल हेयर डाई बनाने के लिए सबसे पहले आपको कुछ नेचुरल चीजों की जरूरत होगी जैसे 4,5 चम्मच आंवला पाउडर, 2 चम्मच मेहंगी, 1 चम्मच कॉफी पाउडर और जरूरत के अनुसार पानी। जब आप इन सभी चीजों को सही मात्रा में तैयार कर लेते हैं, तो उसके बाद आपको ये सभी चीजें एक कटोरे में डालनी हैं और एक गाढ़ा पेस्ट तैयार कर लेना है। अब आप इसको 30 मिनट के लिए ढककर रख दें, ताकि सारे तत्व अच्छी तरह एक्टिव हो जाएं और बालों को सही पोषण प्रदान कर सके।

सही तरह से लगाएं नेचुरल डाई

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इस नेचुरल डाई को लगाने के लिए पहले बालों को हल्का गीला कर लें। अब तैयार पेस्ट को ब्रश या हाथों से बालों की जड़ों तक लगाएं। कोशिश करें कि आपके पूरे बाल कवर हो जाएं। अब कुछ देर के लिए शॉवर कैप पहन लें। इसे करीब एक घंटे तक सिर पर लगाएं। अब आप इसे सादे पानी से धो लें। हां, शैंपू न करें, वरना सारे जरूरी पोषक तत्व खत्म हो जाएंगे।

बेहतर रिजल्ट के लिए जरूरी टिप्स

आप हफ्ते में सिर्फ एक बार इसका इस्तेमाल करें, ज्यादा इस्तेमाल बालों को नुकसान पहुंचा सकता है लेकिन आप पहले पैच टेस्ट जरूर करें, ताकि बालों को किसी भी तरह के नुकसान से बचाया जा सके। साथ ही डाई लगाने के बाद 24 घंटे तक शैंपू न करें, इससे बालों को पोषक तत्वों के अवशोषण का समय मिल जाएगा। वही जब आप इसका नियमित उपयोग करेंगे तो रंग और असर दोनों बेहतरीन हो जाएंगे।

फोटो सौजन्य- गूगल

The secret to Tamannaah's soft and glowing beauty lies in a face mask

नेचुरल इंग्रीडिएंट के इस्तेमाल से निखरती है खूबसूरती

Tamanna Bhatia दक्षिण फिल्म इंडस्ट्री में मिल्की ब्यूटी के नाम से जानी जाती है। इसके कारण तमन्ना की सॉफ्ट और ग्लोइंग त्वचा। तमन्ना की त्वचा क्लिन और हेल्दी ग्लो वाली है। अपनी स्किन को हेल्दी रखने के लिए तमन्ना अपने स्किन केयर रूटीन का बहुत ज्यादा ख्याल रखती हैं। तमन्ना केमिकलयुक्त प्रॉडक्ट्स और ट्रीटमेंट से दूर रहते हुए नेचुरल इंग्रीडिएंट का प्रयोग करती हैं।

नेचुरल इंग्रीडिएंट्स हैं पसंद

The secret to Tamannaah's soft and glowing beauty lies in a face mask

घर में मिलने वाली आम चीजों की मदद से फेस पैक बनाती हैं तमन्ना और अपनी स्किन पर उन्हें इस्तेमाल करती हैं। बता दें कि ये नेचुरल इंग्रीडिएंट कई पीढ़ियों से भारतीय महिलाओं की पहली पसंद रही हैं और उन्हें इन इंग्रीडिएंट्स पर काफी विश्वास रहा है। आइये जानते हैं कि तमन्ना भटिया अपनी स्किन पर कौन सी चीजें अप्लाई करती हैं-

बेसन का फेस पैक

The secret to Tamannaah's soft and glowing beauty lies in a face mask

दो चम्मच बेसन, दो चम्मच गुलाब जल और एक चम्मच दही मिलाएं। सभी चीजों को मिक्स करके फेस पैक बना लें। फिर इस पैक को अपनी गर्दन और चेहरे पर लगाएं। जब फेस पैक सूख जाता है तो अपना चेहरा ठंडे पानी से धो लें।

कॉफी-चंदन का फेस पैक

इस फेस पैक को बनाने के लिए 02 चम्मच चंदन पाउडर, 2 चम्मच कॉफी पाउडर और 2 चम्मच शहद की जरूरत पड़ती है। इन सभी चीजों को मिक्स करके फेस पैक बनाएं। इस फेस पैक को आप अपने चेहरे और गर्दन पर लगाएं। 20-25 मिनट के बाद आप इसे चेहरे से साफ कर दें।

स्किन के लिए बेसन के फायदे

The secret to Tamannaah's soft and glowing beauty lies in a face mask

बेसन चने के आटे से तैयार होता है। इसमें चने के गुण पाए जाते हैं। बेसन लगाने से स्किन पर निखार आता है। यह पिम्पल्स की समस्या से आराम दिलाता है और स्किन टैनिंग को भी साफ करता है।

स्किन को सॉफ्ट और ग्लोइंग के लिए तमन्ना का हेल्दी डाइट

स्किन को सॉफ्ट और ग्लोइंग रखने के लिए तमन्ना अपनी डाइट पर खास ध्यान देती हैं। वे ब्रोकोली का सलाद खाती हैं और एवोकाडो भी उनकी डाइट में रहता ही है। इन सबके साथ तमन्ना को रोजाना 8-10 गिलास पानी पीने की आदत है।

फोटो सौजन्य- गूगल

Follow these 3 special measures to make your breasts attractive

Women in 40: अनुभव और थकान से भरी एक ऐसी उम्र जब आप बहुत कुछ समझ चुकी होती हैं। लेकिन करने को अब भी बहुत कुछ शेष होता है। घर और बाहर की दुनिया की कई चुनौतियों को आप ने पार कर लिया है, मगर कामयाबी के कई सितारे अभी आपके कंधों पर सजने बाकी होते हैं। इस उम्र तक आते अधिकतर महिलाएं अपनी सेहत को सबसे निचले लेवल पर ला चुकी होती है। जबकि यह वही उम्र है जब आपको अपनी सेहत का सबसे अधिक ख्याल रखने की आवश्यकता होती है।

वजन, उम्र और पोजिशन कुछ ऐसी हो जाती है कि शारीरिक रूप से एक्टिव रहने का वक्त भी कम होता चला जाता है। जिसके कारण आप अपनी उम्र के पुरषों से ज्यादा बीमारियों के गिरफ्त में होते हो। अगर इन जोखिमों से बचकर, सफलता के साथ आगे बढ़ना है तो आपको खुद को शारीरिक रूप से सक्रिय रखने पर ध्यान देना होगा।

एक सीनियर साइकोलॉजिस्ट और साइकोथेरेपिस्ट के मुताबिक देखने में भले ही यह सामान्य लगे लेकिन यह उम्र आपके मन के स्तर पर बहुत सारे बदलाव लेकर आती है और यह सब हॉर्मोन में हो रहे बदलाव की वजह से होता है। जो आपकी स्किन, पीरियड, मूड और वेट सभी कुछ प्रभावित करते हैं। इसलिए इस समय आपको अपना और ज्यादा ख्याल रखना जरूरी होता है।

महिलाओं में 40 की उम्र में होने वाली सबसे आम समस्याएं

1. हॉर्मोनल असंतुलन

ये उम्र उन हॉर्मोन में बदलाव की उम्र है, जो अभी तक आपके रिप्रोडक्टिव हेल्थ और बाहरी खूबसूरती के लिए जिम्मेदार थे। अनियमित माहवारी और त्वचा पर उग आने वाले बाल बताते हैं कि आपके हॉर्मोन असंतुलित हो रहे हैं। इस समय एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हॉर्मोन में गिरावट आने लगती है।

2. हेयर फॉल और स्किन में बदलाव

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एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हॉर्मोन आपकी प्रजनन क्षमता के साथ-साथ आपके लुक को भी प्रभावित करते हैं। इनमें बाल पहले से हल्के और पतले होने लगते हैं, जबकि त्वचा में लोच और कसाव की कमी दिखाई देने लगती है। बालों का सफेद होना और त्वचा पर झुर्रियां उम्र के इसी पड़ाव पर नजर आने लगती है।

3. पाचन संबंधी समस्याएं

40 की उम्र की महिलाओं का पाचन तत्र पहले से धीमा हो जाता है, जिससे उन्हें पाचन संबंधी समस्याएं बहुत ज्यादा परेशान करने लगती हैं। अक्सर आपने महसूस किया होगा कि पहले आप जिन चीजों को बड़े दिलचस्पी के साथ खाती थीं, अब वही आपके पेट पर बोझ की तरह रहती है। अगर परहेज न किया जाए, तो गैस, एसिडिटी और बदहजमी जैसी समस्याएं इस समय ज्यादा होने लगती हैं।

4. वजन में इजाफा होना

Lose Weight: Now you don't need to sweat to lose weight

मेटाबॉलिज्म धीमा होने और हॉर्मोन असंतुलन होने की वजह से महिलाओं को इस उम्र में पेट के पास चर्बी बढ़ने लगती है। इस समय वजन बढ़ना जितना आसान होता है, उसे नियंत्रित करना उतना ही मुश्किल हो जाता है।

5. कमजोर होने लगती हैं हड्डियां

हालांकि 30 के बाद से ही महिलाओं की बोन डेंसिटी कम होने लगती है, इसलिए उन्हें केल्शियम पर ध्यान देने की सलाह दी जाती है। मगर 40 की उम्र पार करते एस्ट्रोजन की कमी के कारण ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याओं का भी सामना करना पड़ सकता है। इसलिए केल्शियम के साथ-साथ आपको विटामिन-D का लेवल भी चेक करते रहने की जरूरत होती है।

6 मूड स्विंग्स

हॉर्मोन सिर्फ आपकी प्रजनन क्षमता को ही नहीं, बल्कि आपके मूड को भी प्रभावित करते हैं। हॉर्मोनल असंतुलन के कारण इस समय आपको ज्यादा गुस्सा आ सकता है। ज्यादातर महिलाओं के परिवार में यह शिकायत आती है कि वे बहुत चिड़चिड़ी और गुस्सैल हो गई हैं। यह पेरिमेनोपॉज का भी एक संकेत हो सकता है। जब आपको हॉट फ्लैश और मूड स्विंग्स का सामना करना पड़ता है।

इस उम्र में कैसे रहा जाए फिट और हेल्दी

डॉक्टर के अनुसार 40 की उम्र में सक्रिय रहने के लिए तनाव को संतुलित करना, अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखना और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का दृष्टिकोण रखना आवश्यक है। तनाव ऊर्जा को समाप्त करने वाले प्रमुख कारणों में से एक है, इसलिए इसे प्रभावी ढंग से प्रबंधित रहना बेहद जरूरी है।

1. टेंशन देने वाले कारकों की पहचान करें

सबसे पहले, अपने जीवन में मौजूद तनाव के कारणों की पहचान करें, यानी यह जानें कि तनाव व्यवसायिक, व्यक्तिगत, वित्तीय या सामाजिक जीवन से आ रहा है। तनाव प्रबंधन पर सक्रिय रूप से काम करें और जरूरत पड़ने पर किसी जानकार से मार्गदर्शन लें। जितनी जल्दी कोई व्यक्ति अपने तनाव को पहचानकर किसी विशेषज्ञ से सलाह लेता है, उतने ही ज्यादा अवसर होते हैं कि वह अपने 40 के दशक में सक्रिय और ऊर्जावान रह सके। इसके साथ ही, उचित नींद लेना भी जरूरी है। अच्छी गुणवत्ता वाली नींद हमारे शरीर और दिमाग को ऊर्जावान बनाने के लिए जरूरी होती है।

2. खूब सारा पानी पीएं

हाइड्रेशन भी एक महत्वपूर्ण कारक है। पर्याप्त मात्रा में तरल पेय पीना और आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर संतुलित आहार लेना बहुत जरूरी है। इसके अतिरिक्त, संगीत सुनना, किताबें पढ़ना या रचनात्मक गतिविधियों में शामिल होना मन और संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बना सकता है।

3. चाय-कॉफी कम कर दें

हो सकता है कि सुबह की पहली कॉफी या चाय आपको दिन के लिए तैयार करती हो, मगर यह आपको डिहाइड्रेट भी करती है। इसलिए इन्हें कम करने और धीरे-धीरे छोड़ने की ओर ध्यान दें। साथ ही, निकोटीन, शराब या किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थों से दूर रहना अत्यंत आवश्यक है।

4. हर रोज़ एक्सरसाइज करें

यह आपके लिए सबसे जरूरी एक्टिविटी है। डांस, जुंबा, एरोबिक्स, साइकलिंग, कार्डियो जो भी आपको पसंद है, उसकी मदद से खुद को एक्टिव रखें। हर दिन कम से कम 45 मिनट और सप्ताह में पांच दिन आपका फिजिकल एक्सरसाइज करना बहुत जरूरी है। इससे मेटाबॉलिज्म ठीक रहता है, वजन नियंत्रित रहता है और आपका मूड भी अच्छा रहता है और आप कम बीमार पड़ती हैं।

डॉक्टर का कहना है कि साल में कम से कम एक बार संपूर्ण स्वास्थ्य जांच कराना चाहिए। ये सुझाव किसी भी व्यक्ति को उनके 40 के दशक में सक्रिय और ऊर्जावान बनाए रखने में मदद पहुंचा सकता है।

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Lose Weight: Now you don't need to sweat to lose weight

Lose Weight: वजन कम करना महज एक्सरसाइज और डाइट का मामला भर नहीं है बल्कि इसका असल संबंध आपके पाचन तंत्र से भी होता है। गट हेल्थ विशेषज्ञ का मानना है कि अगर आप अपने पाचन तंत्र का ध्यान रखेंगे तो फैट तेजी से बर्न कर पाएंगे। गट हेल्थ का मतलब हमारे पाचन तंत्र, खासकर आंतों का सही तरीके से काम करना। बता दें कि हमारे गट में ट्रिलियन्स की संख्या में गुड और बैड बैक्टीरिया मौजूद होते हैं, जिन्हें मिलाकर गट माइक्रोबायोम कहा जाता है। जब इन बैक्टीरिया का संतुलन सही रहता है तो पाचन, इम्यून सिस्टम, मेटाबॉलिज्म और मानसिक स्वास्थ्य भी फिट रहता है। खराब गट के कारण गैस, सूजन, कब्ज, स्किन की समस्या और वजन बढ़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। आइये जानते हैं वो रोजाना के हैबिट्स जो आपको हेल्दी गट और फैट लॉस में मददगार साबित होगी।

फाइबर फुड्स से करें दिन की शुरुआत

If the liver is happy then your health will also smile

सुबह के नाश्ते में फाइबर युक्त चीजें जैसे ओट्स, चिया सीड्स या ताजे फल शामिल करें। ये न सिर्फ लंबे वक्त पेट भरा रखते हैं, बल्कि गट में अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ावा देकर पाचन को सुधारते हैं और मेटाबॉलिज्म को सक्रिय बनाते हैं, जिससे फैट तेजी से बर्न होता है। अगर आप वेट कंट्रोल रखना चाहते हैं, तो अपनी डाइट में फाइबर फूड्स को ब्रेकफास्ट से ही शामिल करने की आदत डाल लें। ऐसा करना आपकी पाचन क्रिया को भी हेल्दी बनाए रखने में मदद करेगा।

प्रोबायोटिक फूड

आपको अपनी खाने में प्रोबायोटिक्स शामिल करने की जरूरत है। दही, छाछ, अचार जैसे फूड्स प्रोबायोटिक्स से भरपूर होते हैं, जो गट बैलेंस को सुधारते हैं। ये फूड्स पेट की सूजन कम करते हैं और फैट स्टोरेज को रोकते हैं। शरीर के बढ़ते वजन को कंट्रोल करने के लिए भी अपनी डाइट में प्रोबायोटिक्स से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करना जरूरी है।

कम से कम 30 मिनट खुद को रखें एक्टिव

Never forget to warm up before going for a morning walk

हर दिन चलना, योग करना या हल्का कार्डियो करना गट मूवमेंट को बेहतर बनाता है। इससे पाचन क्रिया तेज होती है, शरीर में सूजन कम होती है और मेटाबॉलिज्म एक्टिव रहता है। नियमित फिजिकल एक्टिविटी फैट बर्निंग प्रोसेस को तेज करने में सहायक होती है और ऊर्जा भी बढ़ाती है। ऐसा सिर्फ वजन कम करने के लिए ही नहीं बल्कि आपके अंदरूनी स्वास्थ्य को सही बनाए रखने के लिए भी बेहद जरूरी है।

मीठे और प्रोसेस्ड फूड से रहें दूर

शुगर और जंक फूड्स का ज्यादा सेवन गट में बैड बैक्टीरिया को बढ़ाता है, जिससे गट बैलेंस बिगड़ जाता है। इससे सूजन, गैस, कब्ज जैसी समस्याएं होती हैं और मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ता है। नतीजतन, फैट बर्न करना मुश्किल हो जाता है और वजन घटाने की प्रक्रिया रुक जाती है। साथ ही बाहर के प्रोसेस्ड फूड्स व ज्यादा चीनी वाले फूड्स स्वास्थ्य से जुड़ी अन्य खई बीमारियों की वजह भी बन सकते हैं।

पर्याप्त नींद के फायदे

Your sleeping position reveals your personality

नींद की कमी और ज्यादा तनाव गट हेल्थ को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे पाचन और फैट बर्निंग प्रोसेस धीमी हो जाती है। डेली 7-8 घंटे की गहरी नींद और मेडिटेशन जैसी तकनीकों से हार्मोन बैलेंस रहता है, मेटाबॉलिज्म सुधरता है और वजन घटाना बेहद आसान होता है।

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If you are a 'Newly Mom' then take care of yourself like this

Newly Mom: प्रेग्नेंसी शुरू होते ही शरीर में कई तरह के हार्मोनल चेंजिंग दिखने लगते हैं और 09 महीने के फेज के बाद जब डिलीवरी होती है तो मां को सबसे अधिक खुशी का एहसास होता है पर इसके बाद कई सरह के स्ट्रेस भी सामने आते हैं जैसे कि चिड़चिढ़ापन, उदासी, चिंता, बच्चे के साथ जुड़ाव में कमी जैसा प्रॉब्लम होने लगता है। डिलीवरी के बाद शरीर कमजोर हो जाता है और तनाव का कुप्रभाव भी सेहत पर नजर आता है।

प्रेग्नेंसी के बाद पहले जैसा हेल्दी और फिट बनने के लिए अपने रूटीन के साथ ही खानपान का खास ध्यान रखने की जरूरत होती है। वरना कुछ प्रॉब्लम लाइफटाइम परेशानी खड़ा कर सकती है जैसे वजन कंट्रोल न किया जाए तो कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है साथ ही शरीर में दर्द और कमजोरी लंबे वक्त तक बनी रह सकती है। विशेषज्ञ से जानेंगे कि कैसे डाइट को सही तरीकों से लेकर योगा या वर्कआउट करने तक कैसे अपने स्वास्थ्य को ठीक रख सकती हैं।

नई मां की फिजिकल हेल्थ के साथ ही मेंटल हेल्थ भी दुरुस्त रहना बहुत जरूरी होता है, तभी वह अपने बच्चे को भी पूरी तरह से देखभाल कर पाएंगी और बच्चा हेल्दी रहता है। बाद वाली परेशानियों से बचने के लिए सबसे जरूरी होता है फैमिली का इमोशनल सपोर्ट। अलावा इसके भी एक्सपर्ट ने कई छोटी-छोटी ट्रिक बताई हैं और डाइट, वर्कआउट की डिटेल भी दी है ताकि डिलीवरी के बाद मां खुद को स्वस्थ रख सके।

एक्सपर्ट लाइफस्टाइल डिजीज जैसे डायबिटीज, पीसीओडी, थायराइड, ओबेसिटी आदि से लोगों को नेचुरली रिवर्स करने में मदद करती हैं और यह भी बताती हैं कि कैसे आप टेस्टी खाना खाकर भी स्लिम और फिट रह सकते हैं।

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मेंटल हेल्थ दुरुस्त रखने के टिप्स

  • एक्सपर्ट कहती हैं कि नई मां बनी हैं तो रोजाना कुछ देर लाइट वॉक करें और नंगे पैर घास पर चलें।
  • मेंटल हेल्थ को सुधारने के लिए ब्रीदिंग टेक्निक जैसे कपालभाति प्राणायाम और अनुलोम विलोम करना सही रहता है।
  • एक्सपर्ट का कहना है कि कोई भी स्ट्रेस जो आपको परेशान कर रहा हो, उसके बारे में बात करें।
  • स्ट्रेस कम ना हो तो जरूरत के हिसाब से थेरेपिस्ट या काउंसलर से बात करनी है तो वो बिल्कुल नॉर्मल है। जरूर बात करें, स्ट्रेस को कैसे डील करें?

भरपूर नींद लेना है जरूरी

good sleep

एक्सपर्ट के मुताबिक सबसे जरूरी है नई माएं अच्छी नींद लें, क्योंकि नींद न सिर्फ शारीरिक तौर पर आराम देती है, बल्कि मेंटली भी रिलैक्स दिलाने में मदद करती है। इसके लिए स्लीप स्नैचिंग तकनीक का सहारा लेना चाहिए यानी जब बेबी सो रहा हो या फिर फैमिली में किसी और के पास हो तो उस दौरान आप भी पावर नैप लें।

ब्रेस्टफीडिंग करवाना है फायदेमंद

Breast feeding

एक्सपर्ट कहती हैं कि बच्चे को ब्रेस्टफीडिंग जरूर कराएं. ये मां और शिशु दोनों के लिए फायदेमंद होती है। वजन घटाने के लिए पेशेंस रखें, क्योंकि ग्रेचुअल वेट लॉस और ग्रेजुअल फैट लॉस करना ही सेफ रहता है और यही सही तकनीक है पोस्टपार्टम वेट को कम करने की।

कब कर सकते हैं फिजिकल एक्टिविटी

एक्सपर्ट का कहना है कि नॉर्मल डिलीवरी हुई है तो 06 हफ्ते के बाद फिजिकल एक्टिविटी कर सकती हैं और अगर सी-सेक्शन हुआ है तो डॉक्टर्स की एडवाइस के बाद ही किसी तरह का वर्कआउट या योग करना शुरू करें। बाद के दौरान फिटनेस के लिए आप ब्रीदिंग, लाइट वॉक, लाइट स्ट्रेचिंग, योगा को रूटीन में एड कर सकते हैं. ज्यादा जल्दबाजी न करें, अपनी बॉडी को हील होने दें तभी शरीर सही तरह से फंक्शन कर पाएगा।

ये चीजें करें अवॉइड

नई माएं एमटी कैलोरी बिल्कुल न लें, जैसे बिस्किट, शुगरी ड्रिंक्स को अवॉइड करना चाहिए. एक्सपर्ट कहती हैं कि बहुत सारे लोग वेट लॉस के चक्कर में चाय-कॉफी ज्यादा लेते हैं, लेकिन वह यह भूल जाते हैं कि ये बॉडी को एसिडिक कर सकते हैं और कैफीन से शरीर को नकली किक मिलती है। इंस्टेंट एनर्जी के चक्कर में इनको पीने से बचें। चाय-कॉफी पी भी रहे हैं तो शुगर मत मिलाएं और दिन में एक या दो बार ही लीजिए।

हाइड्रेट रहना है लाभदायक

एक्सपर्ट के अनुसार हाइड्रेशन को बनाए रखें, सादा पानी पीने के अलावा जीरा वाटर, धनिया वाटर, कोकोनट वाटर, सौंफ का पानी आदि पीएं, क्योंकि इन मसालों में कैल्शियम से अलावा भी कई मिनरल्स होते हैं। घर का सिंपल खाना खाइए। ये आपके लिए पोस्टपार्टम को डील करने के लिए बेस्ट है।

डाइट का ध्यान कैसे रखें

एक्सपर्ट का कहना है कि डिलीवरी के बाद वेट कंट्रोल करना हो तो किसी भी फैट डाइट को फॉलो नहीं करना चाहिए पर वजन कम करने के चक्कर में कोई भी ट्रेंडी डाइट फॉलो करना शुरू न करें। न्यूट्रिशनल डाइट लें, जिसमें कैलोरी भी कम हो और पोषक तत्व भी अच्छी मात्रा में हो, साथ ही रेगुलर लाइट वॉक कीजिए।

नई माएं लें ऐसा खाना

एक्सपर्ट के मुताबिक डिलीवरी के बाद आयरन और कैल्शियम रिच फूड खाएं, जैसे रागी, ड्राई फ्रूट्स और हरी सब्जियां और फल। वह कहती हैं कि मैं तो आपको कहूंगी बादाम, अखरोट, पंपकिन सीड्स, सूरजमुखी के बीज, गोंद आदि को नट्स, सीड्स और ड्राई फ्रूट्स को मिलाकर लड्डू बना लें। दो लड्डू रोज आप दूध के साथ लें. इससे कई न्यूट्रिएंट्स की कमी पूरी हो जाती है और कमजोरी नहीं लगती। डिलीवरी के बाद खाने में अंडा, दाल, नट्स शामिल करें जो प्रोटीन की पूर्ति करेंगे।

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Never forget to warm up before going for a morning walk

Morning Walk: शरीर को पूरे दिन एक्टिव और हेल्दी बनाए रखने के लिए ज्यादातर लोग दिन की शुरूआत मॉर्निंग वॉक से करते हैं। पर्यावरण के नजदीक कुछ देर रहने से पक्षियों की चहचहाहट, ठंडी हवाओं और हरियाली को खुली आंखों से महसूस किया जाता है। इससे बॉडी और माइंड एक्टिव रहता है। हालांकि गर्मी के दिनों में देरी से वॉक के लिए निकलने के कारण पसीना आना, बार-बार गला सूखना और थकान का सामना करना पड़ता है। ऐसे में नियमित वक्त पर वॉक पर जाना बेनिफिशियल साबित होता है। सुबह की सैर पर निकलने से पहले रखें कुछ बातों का खास ध्यान-

एक हेल्थ रिपोर्ट के मुताबिक पैदल चलना सभी उम्र के लोगों के लिए व्यायाम का एक बेहतरीन तरीका है। इसके लिए पैदल चलने की क्रिया को धीरे धीरे शुरू करें। समय के साथ इसकी आदत हो जाने पर रास्ते की लंबाई और चलने की गति बढ़ाते जाएं।

इस बारे में फिटनेस एक्सपर्ट बताते हैं कि शरीर को संतुलित रखने और मांसपेशियों की ऐंठन से बचने के लिए नियमित रूप से व्यायाम करें। इससे शरीर का लचीलापन बढ़ने लगता है और शारीरिक अंगों में बढ़ने वाली थकान से भी बचा जा सकता है। नियमित रूप से इसका अभ्यास शरीर में जमा कैलोरीज को भी बर्न करने में मदद करता है।

मॉर्निंग वॉक पर जाने से पहले रखें इन बातों का ध्यान

Never forget to warm up before going for a morning walk

1. वॉर्मअप होना ना भूलें

वॉक करने से पहले शरीर को एक्टिव करने के लिए वॉर्मअप सेशन बहुत आवश्यक है। इससे शरीर का तापमान उचित बना रहता है और शरीर में लचीलापन रहता है। इसके अलावा कोर मसल्स मज़बूत बनते हैं, जिससे चोटिल होने का खतरा भी कम होने लगता है। वॉक से पहले 15 मिनट का वॉर्मअप मांसपेयियों सेशन बेहद ज़रूरी है। एक रिपोर्ट के अनुसार वॉर्मअप की मदद से मांसपेशियों में बढ़ने वाले खिंचाव को कम किया जा सकता है और ऊर्जा के स्तर को बढ़ाने में मदद मिलती है।

2. बॉडी को हमेशा हाइड्रेट रखें

Never forget to warm up before going for a morning walk

टहलने से कुछ देर पहले पानी पीने से बार-बार प्यास लगने की समस्या हल होने लगती है। साथ ही कार्यप्रणाली में सुधार आने लगता है, जिससे होने वाली थकान से बचा जा सकता है। इससे शरीर के तापमान को नियंत्रित करने, जोड़ों की मोबिलिटी को बढ़ाने और पोषक तत्वों के अवशोषण में मदद मिलती है। इससे शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह उचित बना रहता है।

3. कपड़े और जूतों का ख्याल रखें

गर्मी में वॉक पर जाने के दौरान अधिक टाइट कपड़े पहनने से बचें। इसके अलावा फुल स्लीव्स और कैप को भी अवॉइड करें। इससे गर्मी का स्तर बढ़ने लगता है। ऐसे में हल्के रंग के और खुले कपड़े पहनें। इसके अलावा स्पोर्टस शूज पहनकर ही वॉक पर निकलें। इससे थकान कम होने लगती है और गिरने का जोखिम भी कम हो जाता है।

4. धीमी गति से करें शुरूआत

तेज़ी से चलना जहां एक तरफ आपके समय को तो बचाता है। मगर उससे शारीरिक थकान बढ़ जाती है और बार बार पसीना आने लगता है। ऐसे में शुरूआत धीमी गति से करें और फिर स्टेमिना बिल्ड होने के बाद समय सीमा को बढ़ा दें। इससे स्वास्थ्य को भी फायदा मिलता है।

5. सही तकनीक का करें प्रयोग

आराम से धीरे और बाहों को हिलाते हुए चलें। इसके अलावा वॉक के दौरान शरीर को एकदम सीधा कर लें और लंबे लंबे फुट स्टेप्स लेने से बचें। शुरूआत 20 मिनट की वॉक से कर लें और सप्ताह में 2 से 3 बार ही वॉक के लिए जाएं।

6. खुद को कूल कर लें

आप हमेशा लॉन्ग और फास्ट सैर करने के बाद शांत हो जाएं। शरीर को एक्टिव रखने के लिए टहलने के बाद कुछ स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करें। इससे बॉडी में बढ़ने वाली पेन और थकान कम होने लगती है। इसके बाद बॉडी को कुछ देर रिलैक्स होने के लिए छोड़ दें, जिससे शरीर की एनर्जी दोबारा बूस्ट हो सके।

फोटो सौजन्य- गूगल 

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