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Category Archives: Fitness

If laziness has made a home in your fitness journey then don't panic

Electronic Gadget का इस्तेमाल और देर रात तक जगे रहने से सुबह उठना काफी मुश्किल हो जाता है। नींद की कमी आलस की मुख्य वजह होती है जिसका कुप्रभाव वर्कआउट रूटीन पर भी पड़ता है। ऐसे में ज्यादातर लोग वर्कआउट रूटीन को स्किप करने लगते हैं जिसका निगेटिव असर उनके स्वास्थ्य पर भी दिखने लगता है। ऐसे में बॉडी को हेल्दी और एक्टिव बनाए रखने के लिए वर्कआउट से पहले महसूस होने वाले आलस्य को दूर करना जरूरी है।

If laziness has made a home in your fitness journey then don't panic

इसे लेकर एक्सपर्ट का कहना है कि नियमित रूप से वर्कआउट में शामिल ना होना आलस्य को काफी बढ़ावा देता है। इसके कारण वर्कआउट रूटीन को नियमित बनाए रखने नामुमकिन लगने लगता है। इससे बचने के लिए सुबह उठते ही गैजेट्स के इस्तेमाल से बचें और बेड पर ही लेग स्ट्रेचिंग योगाभ्यास करें। इससे आलस्य को दूर भगाने में मदद मिलती है। अलावा इसके दूसरे दोस्तों के साथ एक्सरसाइज करने से कॉम्पीटिशन की भावना बढ़ने लगती है।

इन टिप्स की मदद से सुस्ती को दूर किया जा सकता है

1. फिटनेस गोल्स करें सेट

वर्कआउट रूटीन को कामयाब बनाने के लिए सबसे पहले गोल्स को सेट करना बहुत ज़रूरी है। इससे व्यायाम से पहले बढ़ने वाला आलस्य और नींद की समस्या को दूर करने में मदद मिलती है। इसके लिए स्वयं वर्कआउट चैलेंज तय करें और उसे पूरा करने के लिए खुद को प्रोत्साहित करते रहें। समय-समय पर गोल्स सेट करते हैं और उन्हें अचीव करते हुए आगे बढ़ें।

2. आसान एक्सरसाइज़ से करें शुरुआत

If laziness has made a home in your fitness journey then don't panic

वेट लिफ्टिंग और हाई इंटैसिटी एक्सरसाइज़ शुरूआत में थकान का कारण बनने लगते है। इससे शारीरिक तनाव की समस्या बढ़ने लगती है। लेकिन तन और मन दोनों के लिए ही फायदेमंद साबित होती है। ऐसे में व्यायाम को नियमित बनाए रखने के लिए आसान एक्सरसाइज़ को अपने रूटीन का हिस्सा बनाएं और फिर धीरे धीरे उसें बदलाव लेकर आएं। इससे शरीर को न केवल थकान से बचने में मदद मिलती है बल्कि बॉडी फिश्र रहती है।

3. स्ट्रेचिंग से होगा आलस्य दूर

सुबह उठने के बाद आलस्य की समस्या को दूर करने के लिए कुछ देर स्ट्रेचिंग करें। इससे शरीर का ब्लड सर्कुलेशन नियमित हो जाता है और लेज़ीनेस दूर होने लगती है। टांगों की स्ट्रेच करने से लेकर बाजूओं और कमर की स्ट्रेचिंग आवश्यक है। इससे शारीरिक अंगों में महसूस होने वाली स्टिफनेस से बचा जा सकता है और ऑक्सीज़न का फ्लो भी उचित बना रहता है।

4. दोस्तों के साथ करें वर्कआउट प्लान

अपनी फिटनेस जर्नी को रेगुलर बनाए रखने के लिए वर्कआउट पार्टनर चुनें। इससे फिटनेस रूटीन को पूरा करने के लिए कॉपिटिशन की भावना बढ़ने लगती है, जिससे आलस्य की समस्या से राहत मिलती है और सेल्फ मोटिवेशन की भावना काफी हद तक बढ़ जाती है।

5. सोने और उठने का समय तय करें

बहुत बार नींद पूरी ना होना भी लेज़ीनेस को बढ़ा देता है। ऐसे में वर्कआउट से पहले आलस्य को दूर करने के लिए रोज़ाना एक नियमित समय पर सोएं और उठें। इससे न केवल स्वास्थ्य संबधी समस्याओं से बचा जा सकता है बल्कि नींद की गुणवत्ता भी बढ़ने लगती है और शरीर एक्टिव बना रहता है। खुद को वर्कआउट के लिए तैयार करने से पहले 06 से 08 घंटे की नींद रोज़ाना लें और समय से उठें।

फोटो सौजन्य- गूगल

To uplift your breasts and give them the right shape

Breast Uplift: सही ब्रा का इस्तेमाल नहीं करना, गलत पोश्चर, ब्रेस्ट फीडिंग और मेनोपॉज के बाद अक्सर महिलाओं को सैगी ब्रैस्ट की समस्या से दो-चार होना पड़ता है। हार्मोन में आने वाली चैंजिंग ब्रेस्ट की मसल्स को प्रभावित करने लगते हैं। इसके कारण महिलाओं को सैगी ब्रेस्ट की समस्या का सामना करना पड़ता है। ब्रेस्ट के मसल्स में कसावट लाने के लिए आहार में थोड़ा बदलाव के अलावा कुछ समय एक्सरसाइज करना महत्वपूर्ण है। आइये जानते हैं ब्रेस्ट को अपलिफ्ट करने में मददगार 4 अहम एक्सरसाइज-

महिलाओं को क्यों करना पड़ता है सैगी ब्रेस्ट का-

इस बारे में एक्सपर्ट का कहना हैं कि सही पोश्चर में ना बैठने से मसल्स और लिगामेंटस पर उसका असर दिखने लगता है। इससे मसल्स की कसावट कम होने लगती है। इसका असर ब्रेस्ट की आकार पर पड़ने लगता है। इससे ब्रेस्ट धीरे धीरे लटकने लगती है। ब्रेस्ट के नीचे पाए जाने वाले पेक्टोरलिस मेजर और पेक्टोरेलिस माइनर मसल्स मौजूद होते हैं। इनकी मज़बूती को बनाए रखने के लिए दिनभर में कुछ समय मॉफडरेट एक्सरसाइज़ के लिए निकालने से फायदा मिलता है।

ब्रेस्ट को अपलिफ्ट करने वाली 4 एक्सरसाइज़

To uplift your breasts and give them the right shape

1. पुशअप्स

मसल्स को मज़बूत बनाने के लिए पुशअप्स का अभ्यास करना चाहिए। इसके करने से शरीर का वज़न कंधों पर आने लगता है, जिससे अपर बॉडी मसल्स में कसावट आने लगती है और सैगी ब्रेस्ट की समस्या से मुक्ति मिल जाती है।

जानें करने की विधि-

इसे करने के लिए जमीनपर पेट के बल लेट जाएं। अब अपने दोनों हाथों को कंधो के पास लेकर आएं। बाजूओं को कंधों से ज्यादा चौड़ाई पर खोलें। अब शरीर के उपर हिस्से को उपर की ओर उठाएं। इससे शरीर का वज़न कंधों पर आने लगता है। इसके बाद पैरों की उंगलियों को जमीन पर टिकाएं। शरीर को उपर की ओर लेकर जाएं और फिर नीचे लेकर आएं। 10 से 15 बार इस एक्सरसाइज़ को 2 से 3 सेट्स में करें।

2. डंबबैल फ्लाई

पेक्टोरल मसल्स की मज़बूती के लिए डंबबैल फ्लाई एक आसान एक्सरसाइज़ है। इसे करने से शरीर में स्टेमिना बिल्ड होने लगता है और ब्रेस्ट में कसावट आने लगती है। डेली इस एक्सरसाइज़ का अभ्यास करने से शरीर में बढ़ने वाली स्टिफनेस को दूर करने में मदद मिलती है।

जानें इसे करने की विधि

इसे करने के लिए सीधे बैंच लेट जाएं और टांगों को जमीन पर टिकाकर रखें। अब दोनों हाथों में वज़न को उठाएं और उपर ले जाने की जगह दोनों हाथों को फैलाएं और फिर एक स्थान पर ले आएं। इस एक्सरसाइज़ को 08 से 10 बार दोहराएं।

3. केबल क्रासओवर

चेस्ट मसल्स को हेल्दी बनाए रखने के लिए केबल क्रासओवर एक्सरसाइज़ का एक्सरसाइज करना जरूरी है। इसे नियमित रूप से करने से शरीर के पोश्चर में सुधार आने लगता है और शरीर में एनर्जी का लेवल भी बढ़ने लगता है।

जानें इसे करने की विधि

इस अभ्यास को करने के लिए सीधे खड़े हो जाएं और दोनों हाथों से रस्सी को अपनी ओर खीचें। इससे मसल्स स्ट्रेच होते हैं और ब्रेस्ट की मांसपेशियों में कसावट आने लगती है। इसके अलावा शरीर में जमा अतिरिक्त कैलोरीज़ को बर्न करने में भी मदद मिलती है।

4. डंबबेल चेस्ट प्रैस

अपर बॉडी को हेल्दी और टोन बनाए रखने के लिए डंबबेल चेस्ट प्रैस बेहद फायदेमंद है। इसे करने ये चेस्ट पर जमा चर्बी को बर्न करने के अलावा ब्रेस्ट अपलिफ्ट करने में भी मदद मिलती है। नियमित रूप से इसका अभ्यास करने से बॉडी में ब्लड का सर्कुलेशन नियमित बना रहता है।

जानें इसे करने की विधि

इसे करने के लिए किसी बेंच के एक कोने पर बॉडी के उपर हिस्से को टिका लें। अब अपनी क्षमता के अनुसार डंबबेल को हाथों में पकड लें। इस दौरान घुटनों को मोड़कर रखें और पैरों को मज़बूती से जमीन पर टिका लें। अब डंबबेल को नीचे लाएं और फिर उपर की ओर लेकर जाएं। इससे चेस्ट मसल्स को पूरी मज़बूती मिलती है।

फोटो सौजन्य- गूगल

4 fitness exercises in your routine to burn armpit fat

Armpit Fat: गर्मी के मौसम में ज्यादातर लोग स्लीवलेस लिबास पहनना पसंद करते हैं लेकिन आर्मपिट पर नजर आने वाला फैट उनकी समस्या की वजह बनने लगता है। शरीर में जमा होने वाले कैलोरीज बाहों और आर्मपिट पर जमा फैट्स का कारण होते हैं। इससे राहत पाने के लिए लोग कई तरह की हाई इंटैंसिटी एक्सरसाइज करने लगते हैं। जानिए आर्मपिट फैट से जुड़ी समस्या के निदान के लिए कुछ जरूरी 4 एक्सरसाइज के बारे में-

इस बारे में जिम सर्टिफाइड फिटनेस ट्रेनर बताते हैं कि आर्मपिट में उम्र के साथ बढ़ने वाले फैटस और स्टिफनेस को दूर करने के लिए एक्सरसाइज़ बहुत ज़रूरी है। उम्र के साथ आर्मपिट के नज़दीक की स्किन लटकने लगती है। इस समस्या को दूर करने के लिए दिनभर में जब भी समय मिले तो आर्म सर्कल और बाहों की स्ट्रेचिंग समेत कुछ आसान एक्सरसाइज़ से बाजूओं और बगल में बढ़ने वाले फैट्स को बर्न करने में काफी मदद मिलती है। साथ ही चेस्ट और कंधों के मसल्स को भी मज़बूती मिलती है।

जानें आर्मपिट फैट बर्न करने के लिए एक्सरसाइज़

आर्म सर्कल एक्सरसाइज

4 fitness exercises in your routine to burn armpit fat

बाहों पर जमी चर्बी को दूर करने के लिए एक्सरसाइज़ बेहद फायदेमंद है। इससे बाहों की मांसपेशियों को मज़बूती मिलती है और बाहों में बढ़ने वाला दर्द भी कम होने लगता है।

जानें कैसे करें-

इसके लिए बैड पर बैठ जाएं और दोनों टांगों को जमीन पर टिका लें। अब अपनी दोनों बाजूओं को कोहनी से मोड़ लें और बाजूओं को आगे से पीछे की ओर लेकर जाएं और राउंड शेप में घुमाएं। आर्म सर्कल को तीन सेट में 15 से 20 बार करें।

माउनटेन क्लाइंबर्स एक्सरसाइज

4 fitness exercises in your routine to burn armpit fat

बदन की मांसपेशियों को मज़बूती प्रदान करने के लिए एक्सरसाइज़ बेहद आवश्यक है। इससे पेट की चर्बी के अलावा बाजूओं पर जमा फैट्स से भी मुक्ति मिल जाती है। नियमित तौर पर माउनटेन क्लाइंबर्स का एक्सरसाइज बाजूओं को मज़बूत बनाता है।

जानें कैसे करें-

इस एक्सरसाइज़ को करने के लिए मैट पर घुटनों के बल बैठ जाएं और दोनों बाजूओं को जमीन पर टिका लें। अब शरीर को ऊपर की ओर उठाएं और पैरों को सीधा कर लें। पैरों और बाजूओं के मध्य शोल्डर्स से अधिक दूरी बनाकर रखें। अब दाईं टांग को आगे करें और बाएं घुटने को मोड़ते हुए चेस्ट के पास लेकर आएं। फिर बाई टांग से भी आसन दोहराएं।

ऐसे करें पुश अप्स

कंधों और बाहों में बढ़ने वाली स्टिफनेस को दूर करने के लिए पुश अप्स बेहद फायदेमंद साबित होते हैं। इससे बाजूओं के दर्द से राहत मिलती है और अतिरिक्त चर्बी की समस्या भी दूर होने लगती है। इसके अनियमित अभ्यास से शरीर के पोश्चर में सुधार आने लगता है। रोज़ाना पुश अप्स एक्सरसाइज करने से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन नियमित बना रहता है।

जानें कैसे करें-

पेट के बल मैट पर लेट जाएं। अब दोनों हाथों को मज़बूती से जमीन पर टिका लें। इसके बाद पैरों को सीधा कर लें और दोनों बाजूओं को कंधे की चौड़ाई से ज्यादा फैलाएं। इससे पुश अप्स करने में आसानी होती है। पुश अप्स को दो सेट में 15 से 20 बार दिन में तीन बार दोहराएं। इससे बाजूओं और गर्दन पर बढ़ने वाली हंप की समस्या से राहत मिल जाती है।

जंपिग जैक्स एक्सरसाइज

शरीर की मांसपेशियों में बढ़ने वाली ऐंठन को दूर करने के लिए जंपिग जैक्स बेहद कारगर एक्सरसाइज़ है। इसे करने से कंधों, बाहों और टांगों में बढ़ने वाले फैट्स को बर्न करने में मदद मिलती है। शरीर स्वस्थ रहता है और स्टेमिना बूस्ट होने लगता है।

जानें कैसे करें-

जंपिग जैक्स के लिए दोनों पैरों के मध्य गैप मेंटेप कर लें और एकदम सीधे खड़े हो जाएं। अब टांगों और बाजूओं को खोलें और फिर एक साथ ले आएं। इस दौरान सांस पर ध्यान अवश्य केंद्रित करें। 02 से 03 सेट्स में 15 बार जंपिग जैक्स को दोहराने से वेटलॉस में मदद मिलती है।

फोटो सौजन्य- गूगल

The severity of winter increases the danger of 'intimate hygiene'
Viginal Health: मौसम जब सर्दी का हो तो आमतौर पर लोग ज्यादा आलस फील करते हैं, सर्दी के सितम की वजह से किसी भी काम को करने के पहले कई बार विचार करते हैं।

ठंडा मौसम, छोटा दिन, सूरज की ठंडी किरण और छुट्टियों के मौसम जैसे कई वजह हैं जो लोगों को सर्दियों के मौसम में बिल्कुल सुस्त बना सकते हैं। देखा जाए तो यह हर एक इनसान में अलग-अलग होती है। जब कभी घर के बाहर ठंड होती है तो अंदर गर्मी और आराम को छोड़तक एक्सरसाइज (Exercise) करने के बारे में सोचना भी मुश्किल भरा होता है। अलावा इसके सर्दियों के दौरान कम धूप हमारी ऊर्जा और मूड के स्तर को भी प्रभावित कर सकती है जिससे थकान और मोटिवेशन की कमी महसूस हो सकती है। ऐसे में हम कुछ ऐसे नुक्से शेयर कर रहे हैं जो सर्दियों के मौसम में भी एक्सरसाइज करने के लिए मोटिवेट कर सकते हैं।

जानें वो टिप्स जो सर्दियों में भी एक्सरसाइज करने के लिए कर सकते हैं मोटिवेट-

1. सेट गोल्स

ठंड के सर्द मौसम में अपने लिए एक एक्सरसाइज का गोल सेट करें। यह आपको आगे बढ़ने के लिए मोटिवेट करेगा।

2. वर्कआउट शेड्यूल बनाएं

अपने वर्कआउट का पहले से प्लान बनाएं और रेगुलर रूटीन का पालन करें। एक शेड्यूल होने से यह कंफर्म होता है कि आप सर्दियों के महीनों के समय भी रेगुलर एक्सरसाइज के लिए खुद को मोटिवेट कर सकते हैं।

3. अपनी पसंदीदा एक्सरसाइज चुनें

खुद को एक्टिवेट रखने के लिए आप ऐससी चीजों को चुनें जिन्हें करने में आपको मजा आए। फिर वो चाहे इनडोर योग हो, डांस हो, ऐसी एक्सरसाइज ढूंढना जिन्हें करने में आपको मजा आता हो, एक्टिव रहने के लिए आपकी मोटिवेशन मिलेगा।

4. इनडोर वर्कआउट

अगर ठंड का मौसम रूकावट डाल रहा है तो अपने वर्कआउट को घर के अंदर करें। जिम ज्वाइन करें, फिटनेस क्लासेस में पार्टिसिपेट करें या फिर ऑनलाइन जुम्बा और योगा क्लासेस करें।

5. एक पार्टनर रखें

motivate yourself for exercise like this

अपने वर्कआउट के लिए अपने किसी दोस्त या परिवार के सदस्य को अपने साथ शामिल करें। ऐसा करने से अगर आप आलस करेंगे भी तो दूसरा आपको इसके लिए मोटिवेट कर सकता है।

फोटो सौजन्य- गूगल

कुछ लोगों को हम अक्सर देखते हैं कि वह हर दिन सुबह उठकर जूस पीना पसंद करते हैं लेकिन ऐसा करना अमूमन हेल्थ के लिए सही नहीं होता। ऐसे बहुत से और विकल्प हैं जिन्हें फॉलो कर अपनी दिन की हेल्दी शुरुआत कर सकते हैं।

लोग जानकारी के कमी की वजह से सुबह खाली पेट कुछ ऐसा खा लेते हैं जिसके कारण उनकी पूरी दिनचर्या प्रभावित हो सकती है। अगर आप सुबह का पहला खाना हेल्दी रखते हैं, तो यह आपके पूरे दिन के खाद्य पदार्थों को पचाने में मदद करता है।

सुबह हेल्दी खाने से वेट लॉस, हेल्दी डाइजेशन से लेकर सेहत संबंधी कई अन्य समस्याओं को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। आज हेल्थ शॉट्स के साथ जानेंगे की सुबह खाली पेट आप किन खाद्य पदार्थों को खा सकते हैं और किन खाद्य पदार्थों को खाना आपके स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकता है।

न्यूट्रीशनिस्ट और वेलनेस कंसलटेंट ने बताया है कि किन खाद्य पदार्थों को सुबह खाली पेट नहीं खाना चाहिए साथ ही जानेंगे सुबह किन खाद्य पदार्थों का सेवन हमारे लिए फायदेमंद हो सकता है।

कभी भी खाली पेट न करें इन खाद्य पदार्थों का इस्तेमाल

1. चीनी और राइस सिरप

ज्यादातर लोग इसे खाली पेट लेते हैं, क्योंकि उनका मानना है कि यह फैट बर्न करने में मदद करता है। हालांकि Honey में चीनी की तुलना में ज्यादा कैलोरी और इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स भी अधिक होता है। बिना किसी मिलावट के शुद्ध शहद मिलना बेहद मुश्किल है और ज्यादातर लोग शहद के नाम पर चीनी और राइस सिरप का सेवन करते हैं। यह आपके रक्त शर्करा के स्तर को बढ़ा देता है जिसके परिणामस्वरूप पूरे दिन अधिक खाने की इच्छा होती रहती है। यदि आपके पास रॉ हनी है तब ही इसे अपनी मॉर्निंग डाइट में शामिल करें।

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2. खट्टे फल

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अन्य खाद्य पदार्थों की तुलना में फल बहुत जल्दी पच जाते हैं। इससे हमें एक घंटे के अंदर ही भूख लग जाती है। वहीं खाली पेट खट्टे फल खाने से एसिडिटी हो सकती है। खट्टे फल में कई महत्वपूर्ण विटामिन, मिनरल्स और फाइबर मौजूद होते हैं। परंतु फिर भी इनसे खाली पेट परहेज रखने की सलाह दी जाती है। संतरा, कीवी, अनानास जैसे फलों के सेवन से इनमें मौजूद फाइबर और फ्रुक्टोज की मात्रा आपके मेटाबॉलिज्म को धीमा कर देती है, जिसकी वजह से पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती है।

3. चाय और कॉफी

खाली पेट चाय या कॉफी का सेवन पेट में एसिड पैदा करता है और यह आपके पेट को असंतुलित कर सकता है और पाचन संबंधी समस्याएं पैदा कर सकता है। इसके सेवन से ब्लोटिंग, कॉन्स्टिपेशन, हार्टबर्न जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। इसलिए सुबह चाय और कॉफी पीने से पहले कुछ खा लेना चाहिए और कोशिश करें कि चाय और कॉफी को अवॉयड कर सकें।

4. ब्रेकफास्ट में मीठे की जगह लें नमकीन

नमकीन नाश्ता आपके रक्त शर्करा के स्तर को बनाए रखने के लिए उपयुक्त होता है। यह उन लोगों के लिए बिल्कुल सही है जो अपनी फिटनेस पर ध्यान देते हैं। प्रोटीन और फैट बेस्ड मॉर्निंग मील पूरे दिन की भूख को कम करने में मदद करता है। ऐसे में आप ओवरईटिंग नहीं करती।

मीठा नाश्ता आपके ब्लड शुगर लेवल को बढ़ा देता है या इसे तेजी से कम कर सकता है, जिससे आपको अधिक भूख लग सकती है, विशेष रूप से कार्ब्स की क्रेविंग्स होगी और ऊर्जा शक्ति में भी गिरावट देखने को मिलती है।

5. मसालेदार भोजन

सुबह खाली पेट मसालेदार भोजन करने से आपके पेट मे जलन का अनुभव हो सकता है। साथ ही साथ यह पाचन संबंधी विभिन्न प्रकार की समस्याओं का कारण बनती है, खासकर हार्टबर्न और पेट दर्द। वहीं आप पूरे दिन असहज महसूस कर सकती हैं।

सुबह सवेरे टहलने से लेकर ये तमाम व्यायाम आपकी मेंटल हेल्थ को बनाए रखने का काम करती है। जानते हैं वो एक्सरसाइज़ जो आपको मेंटल तौर पर रखती है फिट और फाइन।

तन और मन को हेल्दी रखने के लिए खान पान के अलावा व्यायाम भी बेहद ज़रूरी है। नियमित व्यायाम हमारे माइंड को डिप्रेशन और एंग्जाइटी से दूर रखता है। डब्ल्यूएचओ (World Health Organization) की रिपोर्ट के मुताबिक विश्वभर में साल 2016 में सुसाइड के 7,93,000 मामले सामने आए। दरअसल, दिनभर काम में व्यस्त रहने की वजह से मांइड हर समय एक दबाव में रहता है। जब मस्तिस्क उस प्रेशर को झेलने में सक्षम नहीं होता है, तो लोग मेंटल तौर पर अस्वस्थ्य होने लगते हैं। ऐसे में मार्निंग वॉक से लेकर ये तमाम एक्सरसाइज़ आपकी मेंटल हेल्थ को बनाए रखने का काम करती है। जानते हैं वो एक्सरसाइज़ जो आपको मेंटल तौर पर रखती है फिट एंड फाइन।

इन एक्सरसाइज़ को रूटीन में करें शामिल और मेंटल हेल्थ को करें इंप्रूव

1. योग का अभ्यास

Yoga

योग हमारे मन को शांति का अहसास कराता है। ध्यान लगाने से हम सभी दुश्चिंताओं से मुक्त होने लगते हैं। इससे हमारे माइंड में सेरोटोनिन का लेवल बढ़ने लगता हैं। इससे मांइड रिलैक्स होने लगता है और हम खुशहाली का अनुभव करने लगते हैं। योग करने से शरीर में हल्कापन महसूस होने लगता है। मूड बूस्टर के तौर पर काम करने वाला योग हमें क्रोध और तनाव रहित रखता है। इस बारे में डिवाइन सोल योग के डायरेक्टर डॉ. अमित खन्ना के मुताबिक योग मुद्राओं की मदद से तनावग्रस्त जीवन से मुक्ति मिल जाती है और हमारा माइंड फ्रेश फील करता है। सुबह उठकर कुछ देर ध्यान करने के अलावा कुछ खास योग मुद्राएं आपको फिट एंड फाइन रखने का काम करती है। इसके लिए सुखासन, अधो मुख श्वानासन, उर्ध्व मुख श्वानासन और बालासन बेहद फायदेमंद योग हैं।

2. बॉक्सिंग से माइंड रिलैक्स रहता है

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के मुताबिक बॉक्सिंग हमारे शरीर में कोर्टिसोल के स्तर को कम करके शरीर को तनाव मुक्त रखने में सहायक है। इसकी मदद से बॉडी एग्रेशन अपने आप कम हो जाता है। आपका माइंड रिलैक्स और हेल्दी फील करता है। दरअसल, हर बार पंचिंग बैग पर मुक्केबाज़ी करने से आपका माइंड एंडोर्फिन का प्रोडक्शन बढ़ाने लगता है। इससे न्यूरोट्रांसमीटर से पॉजिटिव थिकिंग का विकास होता है। इसके अलावा पंचिंग मांसपेशियों के तनाव को दूर करने में मदद करता है। आप जैसे जैसे पंच मारते हैं आपका ध्यान एक जगह पर केंद्रित होने लगता है। इससे आपकी एकाग्रता में बढ़ोतरी होने लगती है। बॉक्सिग को रूटीन में शामिल करने से मानसिक स्वास्थ्य के अलावा कैलोरी बर्न करने में भी मदद मिलती है। इसे रोज़ाना करने से सैगी आर्म्स और बैली फैट की समस्या हल हो जाती है।

3. पिलेट्स शरीर को ऐसे करता है बूस्ट

पिलेट्स एक ऐसी एक्सरसाइज़ जो माइंड और बॉडी दोनों को रिलैक्स और बूस्ट करती है। इसकी मदद से शरीर में फ्लैक्सिबिलिटी और मज़बूती दोनों ही बढ़ने लगते हैं। पिलेट्स एक्सरसाइज़ करने से समस्त शरीर की मांसपेशियों में खिंचाव का अनुभव होता है। इससे शरीर में होने वाले दर्द से भी मुक्ति मिल जाती है। पिलेट्स का संबध शारीरिक फिटनेस के साथ मानसिक फिटनेस से भी है। इसे करने से शरीर में एंडोमॉर्फिन यानी प्रोटीन न्यूरोट्रांसमीटर बढ़ने लगते हैं। इससे हम सकारात्मक रहते है और मेंटल स्ट्रेस दूर होने लगता है।

इनहे इस्तेमाल करे:

दो प्रकार के पिलेट्स

मैट बेस्ड पिलेट्स

इस व्यायाम को ज़मीन पर लेटकर किया जाता है। इससे शरीर की मांसपेशियों में होने वाली ऐंठन से मुक्ति मिलती है। इसे नियमित तौर पर करने से शरीर हेल्दी रहता है और शारीरिक शक्ति का विकास होता है।

इक्विपमेंट्स बेस्ड पिलेट्स

कुछ पिलेट्स एक्सरसाइज़ उपकरणों की मदद से की जाती है। बॉल, चेयर, एंकल वेट और स्लाइडिंग डिस्क की मदद से पिलेट्स एक्सरसाइज़ करते है। इससे बॉडी में स्टेमिना बिल्ड होता है और तनाव से शरीर मुक्त हो जाता है।

मेंटल हेल्थ इंप्रूव करने के लिए इन बातों का रखें ध्यान

8 से 10 घंटे की पूरी नींद लें। इससे शरीर में हैप्पी हार्मोस रिलीज़ होते हैं और माइंड रिलैक्स रहता है।

दोस्तों के साथ आउटडोर एक्टीविटीज़ के लिए जाएं।

सेल्फ हैप्पीनेस के लिए पसंदीदा एक्टीविटीज़ को करने में समय बिताएं।

खान पान का पूरा ख्याल रखें। इससे शरीरिक और मेंटल हेल्थ दोनों की हेल्दी होने लगते हैं।

बालों की सही देखरेख न होने के चलते दोमुंहे बालों की समस्या बढ़ जाती है। स्पिल्ड एंडस से छुटकारा पाने के लिए इन splecial टिप्स को ज़रूर फॉलो करें।

बालों को स्वस्थ बनाने के लिए हम कई तरीक के प्रोडक्टस का इस्तेमाल करते हैं। जो बालों को कई तरह से नुकसान पहुंचाने का भी काम करते हैं। इससे स्पिल्ट एंडस की समस्या बढ़ने लगती है और उसका प्रभाव हेयर ग्रोथ पर दिखने लगता है। बालों की शाइन खो जाती है और दोमुंहे बालों से रूखापन दिखने लगता है। डल, फ्रीजी और टूट रहे बालों को पोषण प्रदान करने के लिए हमें कुछ बातों का ख्याल रखना होगा।

जानते हैं, वो आसान दिप्स जिससे आप दोमुंहे बालों कर समस्या से बच सकती हैं।

स्प्लिट एंड्स क्या होते हैं (split ends)

स्प्लिट एंड्स बालों के टिप पर होते हैं। दरअसल, हेयर एंडस पर मौजूद क्यूटिकल की एक मज़बूत परत जब हट जाती है, तो उस वक्त टिप्स पर स्प्लिट एंड्स नज़र आने लगते हैं। टिप्स पर पहले ये दो हिस्सों में फिर तीन से चार हिस्सों में भी बंटे हुए नज़र आने लगते हैं। दो मुंहे बाल बनने से उनके टूटने की समस्या भी बढ़ने लगती है।

दोमुंहे बालों की समस्या को सुलझाने के लिए इन स्टेप्स को करें फॉलो (how to prevent split ends)

1. बालों को रेगुलर ट्रिम करें

अगर आपके बाल दोमुंहे नज़र आ रहे हैं, तो उन्हें नियमित तौर पर ट्रिम करके उनकी ग्रोथ को बढ़ाया जा सकता है। दरअसल, उन बालों को रिपेयर करना संभव नहीं होता है, जिसका प्रभाव बालों की लेंथ पर दिखने लगता है। अगर आप बालों को ज्यों का त्यों छोड़ दते है। तो बालों में रफलेस बढ़ने लगती है। रेगुलर ट्रिम होने से बाल शाइनी और हेल्दी बने रहते हैं। इससे बालों का विकास अपनी गति से होने लगता है।

2.हेयर स्टाइलिंग से बचें

रोज़ाना बालों पर हीट स्टाइलिंग टूल का प्रयोग करने से बचें। इससे स्पिल्ट एंडस बढ़ने लगते हैं और बालों की रूटस को नुकसान पहुंचने लगता है। नजीतन बाल दोमुहे होकर झड़ने लगते हैं। हीट.स्टाइलिंग टूल का सीमित मात्रा में इस्तेमाल करके और रेगुलर हेयर ट्रिमिंग से बाल पहले जैसे मुलायम और शाइनी बने रहते हैं। इसके अलावा आप हेयर सीरम भी उपयोग कर सकते हैं, जो बालों की खोई चमक और रूखेपन को दूर रखते हैं। बालों को नया लुक देने के लिए उस तरह के हेयर स्टाइल्स को अपनाएं, जिससे आपके बालों को ज्ञटाइल करने के लिए टूल्स का इस्तेमाल न हो।

इनहे ट्राई करे:
3. हेयर मास्क को करें हेयर केयर रुटीन में शामिल

इस समस्या से निपटने के लिए हेयर मास्क का इस्तेमाल ज़रूरी है। इसके लिए एक चम्मच एवोकाडो में दो चम्मच नारियल का तेल मिलाएं। अब समान मात्रा में ऑलिव ऑयल को एड करें। इससे जब एक क्रीमी पेस्ट बन जाए, तो उसे बालों की जड़ों और लैन्थ दोनों पर ही पूर्ण रूप से अप्लाई करें। 30 से 45 मिनट तक लगे रहने के बाद बालों को माइल्ड शैम्पू से धो लें। इससे बालों का रूखापन दूर होने लगेगा। सप्ताह में दो से तीन बार अप्लाई करें। एवोकाडो में मौजूद विटामिन्स, मिनरल्स, प्रोटीन और फोलिक एसिड बालों को मज़बूत बनाकर ग्रोथ में सहायक साबित होते हैं। इससे दो मुंहे बालों की समस्या कम होती है।

4. हेल्दी बालों के लिए जरूरी है हेल्दी डाइट

Hair tips

आपको डाइट में सामान्य बदलाव करने की ज़रूरत है। डाइट में बीटा कैरोटीन की मात्रा को बढ़ाएं। इसके अलावा विटामिन्स और मिनरल्स आपके शरीर के अलावा बालों की सेहत के लिए भी ज़रूरी है। स्पिल्ट एंडस की समस्या से बचने के लिए पत्तेदार साग, नट्स और अंडे को डाइट में शामिल करें। जो स्वस्थ बालों के विकास को बढ़ावा देता है और बाल टूटने से भी रोकता हैं।

5. ऑयलिंग से मिलेगा labh

बालों को दोमुहे बनने से रोकने के लिए ट्रिम करना ज़रूरी हैं। ट्रिम करने के अलावा बालों को सेहतमंद बनाए रखने के लिए जड़ों में ऑयलिंग करें। इससे बालों को पोषण मिलने लगता है। साथ ही रूखे और बेजान दिखने वाले बालों में नमी बरकरार रहती है। इससे बालों की ग्रोथ बढ़ती है। बालों में सप्ताह में दो से तीन बार तेल लगाएं। इससे बालों का टेक्सचर भी सुधरने लगता है। ऑयलिंग के लिए आप एसेंशियल ऑयल की कुछ बंदों को नारियल के तेल में मिलाकर लगाएं।

अगर आप रोज़ाना बालों पर नए प्रकार के शैम्पू और कंडीशनर को अप्लाई करेंगी, तो इसका प्रभाव बालों की ग्रोथ पर दिखने लगता है। इससे फॉलिकल्स कमज़ोर होंगे और बाल झड़ने की समस्या बनी रहेगी। ऐसे में बालों पर नेचुरल प्रोडक्टस का अप्लाई करें। ध्यान रखें कि आंवला, शिकाकाई औरीठा जैसे पदार्थ बालों को जड़ों से मज़बूत बनाते हैं। इन्हें प्रयेग करके बाल झड़ने और स्पिल्ट एंडस की समस्या दूर होगी।

Sexual intimacy helps in recovering from loneliness and depression

फोरप्ले (Fore Play) के दौरान अपने पार्टनर के नर्व एंडिंग यानी की वासनोत्तेजक क्षेत्र पर आइस क्यूब्स का स्पर्श देने से उन्हें ठंडक और आराम पहुंचेगा। साथ ही यह उत्तेजना को भी बढ़ावा दे सकता है।

गर्मी में अक्सर लोगों की सेक्स फ्रीक्वेंसी कम हो जाती है। बढ़ता तापमान लो लिबिडो का कारण हो सकता है। यदि आप इस गर्म मौसम में अपनी इंटिमेसी को एन्जॉय करना चाहती हैं तो समर सेक्स टिप्स को ध्यान में रखें साथ ही कुछ नया ट्राई कर सकती हैं। अपने सेक्सुअल एक्टिविटी में आईसी ट्रिक्स को शामिल करना एक अच्छा आईडिया रहेगा। आइस क्यूब्स की कूलिंग इफ़ेक्ट (Icy Tricks for Summer Sex) आपकी इंटिमेसी को ज्यादा मजेदार बना देंगी।

Some Natural Ways To Spice Up Your Sex Life

फोरप्ले के दौरान अपने पार्टनर के नर्व एंडिंग यानी की वासनोत्तेजक क्षेत्र पर आइस क्यूब्स का स्पर्श देने से उन्हें ठंडक और आराम पहुंचेगा। साथ ही यह उत्तेजना को भी बढ़ावा दे सकता है। दोनों पार्टनर एक दूसरे को इसका आनंद दे सकते हैं। तो चलिए जानते हैं ऐसेही कुछ खास आईसी ट्रिक्स जो आपके समर सेक्स को एक्सिटिंग बना देगी। आप बेफिक्र होकर इसे अपनी इंटिमेसी का हिस्सा बना सकती हैं।

हेल्थ शॉट्स ने सेक्सुअल एक्टिविटी और फोरप्ले के दौरान आइस के इस्तेमाल को लेकर ऑरा क्लिनिक, गुड़गांव की डायरेक्टर एवं क्लाउड नाइन हॉस्पिटल, गुड़गांव की सीनियर कंसलटेंट डॉ रितु सेठी से सलाह ली। उन्होंने आइस के इस्तेमाल को पूरी तरह से सुरक्षित बताया है। जिस प्रकार सेक्स के दौरान हाइजीन पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी जाती है, ठीक उसी प्रकार आइस का प्रयोग करते वक़्त भी हाइजीन का ध्यान रखना जरुरी है।

सेक्स सेशन को और भी मजेदार बना सकते हैं ये 4 आईसी ट्रिक्स (Icy Tricks)

1. आईसी किस

हम सभी Sex या फिर किसी भी प्रकार की रोमांटिक गतिविधियों की शुरुआत किस के साथ करते हैं। तो क्यों न शुरुआत को अधिक सेंसेशनल बनाया जाए। तो क्यों न इस गर्मी अपने किस को आईसी किस में बदला जाए। इसके लिए आपको हल्के पिघले हुए आइस क्यूब को अपने होठों में दबाना है और उसके बाद अपने पार्टनर को किस करना है। मुंह की गर्माहट और बर्फ की ठंडक पुरे स्पाइन को शिवर करती है और यह उत्तेजना को भी बढ़ा देती है।

2. रबिंग गेम

Fore Play शुरू करने से पहले अपने फ्रीजर से कुछ आइस क्यूब्स निकाल कर उन्हें अपने बेड के बगल में रख लें। फिर अपने पार्टनर को कहें की वे बर्फ के एक टुकड़े को लेकर धीरे-धीरे आपकी त्वचा पर रगड़ें।

होठों को बर्फ के टुकड़ों से छुएं साथ ही पेट के निचला हिस्से, निप्पल, आर्मपिट, क्लिटोरी, जांघों के बिच और अन्य वासनोत्तेजक क्षेत्रों (इरोजेनस स्पॉट) पर बर्फ के टुकड़ों का स्पर्श दें। क्लिटोरी पर पिघलते बर्फ का पानी डालने से उत्तेजित होना आसान हो जाता है इसके अलावा यह काफी रिलैक्सिंग हो सकता है।

इरोजेनस स्पॉट पर जाएं। इससे पुरुषों को भी उत्तेजित होने में मदद मिलती है।

3. पआईसी ओरल सेक्स ट्राई करें

आ Icy ओरल सेक्स भी ट्राई कर सकती हैं। पार्टनर को मुंह में एक आइस क्यूब रखने को कहें और अपने सामान्य ओरल सेक्स को अधिक एक्साइटिंग बनाएं। ऐसा करने से एक ही समय में आइस क्यूब की ठंडक और सांसों की गर्मी महसूस होगी। यह कामोत्तेजना को बढ़ावा देता है।

ओरल सेक्स के दौरान आनंद को बढ़ाने के लिए अपने पार्टनर को नाक का इस्तेमाल करने के लिए कह सकती हैं। यह योनि को ठंडक पहुॅचाता है और आपको रिलैक्स रहने में मदद करता है। ठीक इसी प्रकार महिला पार्टनर भी अपने मुंह में आइस क्यूब रखकर ब्लो जॉब दे सकती हैं जिससे की पुरुषों को भी आराम मिलता है।

4. Sex Toys को दें आईसी इफेक्ट

अगर आप सेक्स टॉय का इस्तेमाल करती हैं तो अपने Sex Toys को ठंडा कर के इस्तेमाल कर सकती हैं। खासकर गर्मी में ठंडे टॉयज का इस्तेमाल करना आपको केवल प्लेजर ही नहीं बल्कि आपके वेजाइना को पर्याप्त ठंडक भी प्रदान करता है। पार्टनर के साथ सेक्स करते हुए यदि टॉयज का इस्तेमाल करती हैं तो अपने पार्टनर से इन्हे ठंडा करने को कह सकती हैं। हालांकि, इन्हे इस्तेमाल करने से पहले अपने हाथ पर रख कर देख लें ताकि आपको आइस बर्न से न जुजरना पड़े।

अपने स्टेनलेस स्टील और रबर टॉयज को अच्छे से क्लीन कर लें और साफ़ पानी में आइस क्यूब्स डाल दें, फिर टॉयज को पानी में डालें और जब ये ठंडा हो जाएं तो इन्हे इस्तेमाल करें।

Breast Feeding

अक्सर लड़कियां अपने ब्रेस्ट साइज को लेकर फ़िकरमंद रहती हैं। फिर चाहे वे छोटे हों, बड़े या बहुत बड़े। एक्सपर्ट मानते हैं कि हर ब्रेस्ट साइज सुंदर है, बशर्ते कि वे स्वस्थ हों।

महिलाएं अपने ब्रेस्ट के आकार को लेकर अक्सर असहज महसूस करती हैं। कुछ महिलाएं इसे बढ़ाना चाहती हैं, तो कुछ घटाना। असल में ब्रेस्ट साइज का कोई पैमाना सही नहीं है। आकार से ज्यादा जरूरी है ब्रेस्ट हेल्थ पर ध्यान देना। आपके ब्रेस्ट की जो भी साइज़ है, उसके साथ सहज रहना जरूरी है। कई योगासन हैं जो ब्रेस्ट को होने वाली बीमारियों के जोखिम को दूर रखकर स्वस्थ रखती हैं। यहां ब्रेस्ट हेल्थ के लिए ऐसे ही कुछ योगासनों के बारे में जानें डॉक्टर से-

ब्रेस्ट हेल्थ के लिए फिजिकल और मेंटल हेल्थ पर ध्यान देना आवश्यक

डॉ. स्मृति अपने इन्स्टाग्राम पोस्ट में कहती हैं, ‘ब्रेस्ट साइज़ बढ़ाने या घटाने के स्थान पर आप यह सोचें आपके अंग कितने स्वस्थ हैं? आपका ब्लड कितना साफ रहता है? अपने गट हेल्थ पर ध्यान दें। अपने मंकी माइंड (Monkey mind) पर कंट्रोल करें। मानसिक स्वास्थ्य (Mental health) पर काम कर मानसिक रूप से स्थिर बनें। अपने शरीर से प्यार करें। जिस दिन शारीरिक रूप से किसी और की तरह दिखना बंद कर देंगी, उस दिन आपका अपना शरीर और ब्रेस्ट साइज़ भी सर्वश्रेष्ठ लगने लगेगा।’

डॉक्टर के बताये योगासन, जो ब्रेस्ट हेल्थ के लिए सभी महिलाओं के लिए जरूरी हैं 

1. भुजंगासन (Bhujangasana or Cobra pose)

भुजंगासन दर्द दूर करने के लिए कंधों और गर्दन को खोलता है। पेट को टोन करता है। पूरी पीठ और कंधों को मजबूत बनाता है। ब्रेस्ट को सही आकार में लाता है। ब्लड फ्लो में सुधार लाकर थकान और तनाव कम करता है।

कैसे करें भुजंगासन (How to do Bhujangasana)

पेट के बल लेट जाएं। कंधों और हथेलियों को अपनी जगह रखते हुए सांस लें।
सिर, छाती और पेट को उठाएं।

कोहनी पर झुके हुए हाथ धीरे-धीरे गर्दन की ओर झुकाएं। ऊपर की ओर देखें।
पेट के बल लेट जाएं। कंधों और हथेलियों को अपनी जगह रखते हुए सांस लें।
सिर, छाती और पेट को उठाएं।

2. सेतुबंधासन (setubandhasana or Bridge Pose)

Yoga for women

सेतु बंधासन करते समय गर्दन, ब्रेस्ट, फ्लेक्सर मांसपेशियों और जांघों के पिछले हिस्से की मांसपेशियों में खिंचाव होता है। यह इन मांसपेशियों को मजबूत करने में मदद कर सकता है। यह हिप्स की मांसपेशियों को मजबूत करने में भी मदद कर सकता है।

कैसे करें सेतुबंधासना (how to do setu bandhasana)

पीठ के बल लेट कर दोनों घुटनों को मोड़ें।
पैरों को हिप्स की चौड़ाई पर फर्श पर सपाट रखें।
पैरों को फर्श पर दबाएं। सांस लें और हिप्स को ऊपर उठाएं।
रीढ़ को फर्श से ऊपर उठाएं।
चेस्ट को ऊपर उठाने के लिए बाहों और कंधों को नीचे दबाएं।
सांस लें और 4-8 सांसों तक रोकें।
ऊपर जाते समय सांस लें और नीचे आते समय सांस छोड़ें। सरवाइकल पेन हो तो अधिक नहीं करें।

3 उष्ट्रासन (Ustrasana or Camel Pose)

उष्ट्रासन चेस्ट, पेट और क्वाड्रिसेप्स की मांसपेशियों को मजबूत करता है। ग्लूट्स और हैमस्ट्रिंग (जांघ के पीछे) की मांसपेशियों को टोन करता है। उष्ट्रासन बैकबेंड में गर्दन को खींचते हुए सर्वाइकल स्ट्रेस को कम कर सकता है। यह कंधों, बाहों, पीठ और पैरों की मांसपेशियों को मजबूत करने में (yoga asanas for breast health) भी मदद कर सकता है।

कैसे करें उष्ट्रासन (how to do Ustrasana)

Yoga for women

घुटनोंसीधा के बल खड़ी हो जाएं। जांघों को पूरी तरह सीधा रखें।
पीछे की दिशा में झुकें।
हिप्स को आगे की दिशा में धकेलें।

सिर और बैक बोन को बिना तनाव के जितना हो सके पीछे की ओर झुकाएं।
शरीर और पीठ की मांसपेशियों को आराम दें।
सेंटर में रहते हुए सांस लें। साइड की तरफ रहते हुए सांस छोड़ें और फिर नॉर्मल सांस लें। सरवाइकल दर्द और पीठ के निचले हिस्से में दर्द होने पर एक हाथ से करें।

 

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