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Category Archives: Health

Micro Walk: The risks of sitting in a chair and working all day at the office

Micro Walk:

हमारे साथ रहने वाले ऐसे कई लोग करीब 10 घंटे लगातार कंप्यूटर या लौपटॉप पर अपना कार्य करते हैं। ऐसे में जब एक्सरसाइज की बात आती है तो सबसे पहले जुबान पर एक ही पंक्ति आती है, समय नहीं है पर क्या आप जानते हैं कि 10 घंटे के बीच महज कुछ मिनटों के वॉक से आप खुद को फिट रख सकते हैं। ‘माइक्रो वॉक’ लगातार डेस्क पर काम करने वालों के लिए एक शानदार एक्सरसाइज हो सकती है। सिर्फ कुछ मिनटों की एक्सरसाइज आपको कमर और गर्दन में पेन से राहत दिलाने के साथ-साथ मोटापा, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट डिजीज जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी कम हो सकता है। आइये जानते हैं क्या मसले पर क्या है एक्सपर्ट की राय-

जानें क्या है माइक्रो वॉक-

माइक्रो वॉक यानी दिनभर में कई बार 01 से 10 मिनट तक छोटी-छोटी वॉक करना। यानी आपको जिम जाने या लंबा वर्कआउट करने की जरूरत नहीं है। हर 30 से 60 मिनट बाद अपनी कुर्सी से उठकर कुछ मिनट चलना भी माइक्रो वॉक कहलाता है।

एक्सपर्ट का कहना है कि लंबे समय तक लगातार बैठे रहने की आदत शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकती है। ऐसे में दिनभर के दौरान छोटी-छोटी वॉक करने से शरीर एक्टिव रहता है और कई स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा कम किया जा सकता है।

लंबे समय तक बैठे रहने के नुकसान

पूरे दिन बैठे रहने से शरीर की मांसपेशियां कम सक्रिय रहती हैं। इससे ब्लड सर्कुलेशन धीमा पड़ सकता है और शरीर की कैलोरी खर्च करने की क्षमता भी घट जाती है। इसके अलावा ब्लड शुगर कंट्रोल करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है और समय के साथ हृदय रोग का खतरा भी बढ़ सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी लंबे समय तक बैठे रहने को कई नॉन कम्युनीकेबल डिजीज का एक प्रमुख जोखिम कारक मानता है।

ऐसे मिलते हैं माइक्रो वॉक से फायदे-

Micro Walk: The risks of sitting in a chair and working all day at the office

विशेषज्ञ का कहना है कि हर 30 से 60 मिनट में सिर्फ 05 मिनट की वॉक भी शरीर पर पॉजिटिव असर डाल सकती है, जैसे-

1. ब्लड सर्कुलेशन होता है बेहतर

लगातार बैठे रहने से पैरों और शरीर के निचले हिस्से में ब्लड सर्कुलेशन धीमा हो सकता है। कुछ मिनट की वॉक करने से मांसपेशियां सक्रिय होती हैं और पूरे शरीर में रक्त संचार बेहतर होता है। इससे थकान भी कम महसूस होती है।

2. ब्लड शुगर कंट्रोल करने में मदद

खाना खाने के बाद थोड़ी देर टहलने से शरीर ग्लूकोज का बेहतर उपयोग कर पाता है। कई NCBI में छपी रिपोर्ट में पाया गया है कि नियमित माइक्रो वॉक ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखने में मदद कर सकती है।

3. ब्लड प्रेशर हो सकता है कंट्रोल

रिसर्च बताते हैं कि हर आधे घंटे बाद कुछ मिनट पैदल चलने से ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है। यह आदत हृदय स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक मानी जाती है।

4. मूड और फोकस हो सकता है बेहतर

लगातार स्क्रीन पर काम करने से मानसिक थकान बढ़ सकती है। कुछ मिनट की वॉक दिमाग को आराम देती है और काम पर दोबारा ध्यान लगाने में मदद करती है। इससे तनाव भी कम हो सकता है और उत्पादकता बढ़ सकती है।

ऑफिस में माइक्रो वॉक को कैसे बनाएं आदत?

माइक्रो वॉक को अपनी लाइफस्टाइल में शामिल करना मुश्किल नहीं है। इसके लिए आप कुछ आसान तरीके अपना सकते हैं।

  • हर 30 से 60 मिनट बाद अपनी सीट से उठें।
  • लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करें।
  • किसी सहकर्मी से बात करनी हो तो उसके डेस्क तक पैदल जाएं।
  • फोन पर बात करते समय चलते-चलते बातचीत करें।
  • पानी भरने या प्रिंटर तक जाने के लिए खुद पैदल जाएं।
  • मोबाइल या कंप्यूटर में हर घंटे का रिमाइंडर लगाएं।

एक आसान तरीका है माइक्रो वॉक 

एक्सपर्ट का कहना है कि माइक्रो वॉक लंबे समय तक बैठे रहने के नुकसान को कम करने का एक आसान तरीका है, लेकिन इसे नियमित व्यायाम का ऑप्शन नहीं माना जा सकता। बेहतर हेल्थ के लिए हफ्ते में कम से कम 150 मिनट की एक्सरसाइज आवश्यक है।

फोटो सौजन्य- गूगल

Foods For Pregnant Woman

Manson Infections: वैसे तो बारिश का मौसम का सभी को इंतजार होता है लेकिन ये मौसम अपने साथ कुछ संक्रमण भी लेकर आता है। बारिश आते ही गर्मी से निजात तो मिलती है पर यह मौसम हेल्थ पर बुरा असर भी डाल सकता है। खासकर प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए यही मौसम कुछ नई परिशानियों का सबब भी बन जाता है। आइये जानते हैं इस मौसम पर एक्सपर्ट की राय-

वह बताती हैं कि गर्भावस्था में शरीर की इ्मयूनिटी अपने आप कुछ हद तक कमजोर हो जाती है। ऐसा इसलिए होता है ताकि शरीर भ्रूण को बाहरी तत्व समझकर रिजेक्ट न कर दे। लेकिन इसी कारण से मानसून की नमी, जगह-जगह जमा पानी और बैक्टीरिया व फंगस के पनपने के लिए अनुकूल माहौल बनने पर प्रेग्नेंट महिलाएं जल्दी इंफेक्शन की चपेट में आ जाती है।

मानसून में बढ़ने लगते हैं UTI के मामले

If you are troubled by vomiting during pregnancy then don't panic

मानसून में गर्भवति महिलाओं में यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन के मामले अचानक बढ़ जाते हैं और डॉक्टर इसकी वजह भी साफ बताती हैं। नमी वाले मौसम में पसीना और गीलापन त्वचा पर काफी देर तक बना रहता है, जो बैक्टीरिया के पनपने के लिए एकदम सही जगह बन जाता है। इसके साथ ही हार्मोनल बदलाव के चलते वेजाइनल पीएच भी बदलता रहता है। इससे यीस्ट इंफेक्शन जैसी फंगल दिक्कतें भी परेशान करने लगती हैं।

मानसून के मौसम में बालों पर किन चीजों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए?

मानसून में कौन से फल खाने चाहिए? ये 5 फल बढ़ा सकती है आपकी इम्यूनिटी आंखों का सफेद हिस्सा लाल क्यों हो जाता है? जानें इसके कारण और कब डॉक्टर से मिलना चाहिए।

एक्सपर्ट के मुताबिक यहां एक बात ध्यान रखने की जरूरत है कि अगर UTI का समय पर इलाज न हो, तो कुछ गंभीर मामलों में यह प्रीटर्म लेबर यानी समय से पहले डिलीवरी तक की वजह बन सकता है।

ये बीमारियां भी बढ़ा सकती हैं जोखिम

विशेषज्ञ के अनुसार सिर्फ यूटीआई ही नहीं, बल्कि मानसून पानी और मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों का भी सीजन होता है। डेंगू, मलेरिया और टाइफाइड इस मौसम में बड़ा खतरा बनकर सामने आते हैं। प्रेग्नेंसी के दौरान डेंगू होने पर प्लेटलेट्स तेजी से गिर सकते हैं और भी गंभीर रूप ले सकते हैं। वहीं दूषित पानी या खाने से टाइफाइड और पेट के इंफेक्शन होने का खतरा भी बना रहता है। इनका असर सिर्फ मां ही नहीं, बल्कि भ्रूण की सेहत पर भी पड़ सकता है।

इसे भी पढ़ें: बच्चों का Smartphone का ज्यादा इस्तेमाल करना न सिर्फ बच्चों की आंखों पर असर करता है बल्कि दिमाग को खोखला कर देता है! देखें रिसर्च

ऐसे करें बचाव?

विशेषज्ञ की सलाह बहुत सीधी है, सूती और ढीले कपड़े पहनें, इंटिमेट एरिया को सूखा-साफ रखें, और पानी खूब पिएं ताकि UTI से बचा जा सके। घर के आसपास पानी जमा न होने दें, मच्छरदानी या रिपेलेंट का इस्तेमाल करें और बाहर का या कटा हुआ खाना खाने से जितना बचा जाए उतना अच्छा। और सबसे जरूरी- बुखार, जलन, अजीब-सा डिस्चार्ज या पेट दर्द जैसी कोई भी बात नज़रअंदाज़ न करें, फौरन अपने डॉक्टर से मिलें।

ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें?

अगर मानसून में आपको ऐसा लगे कि बुखार, जननांगों में जलन, पेशाब करते समय जलन, भ्रूण की हलचल कम महसूस होना, तेज पेट दर्द, ब्लीडिंग आदि हो रहे हैं तो बिना देर किए डॉक्टर के पास जाएं। उन्हें अपनी समस्या बताएं।

फोटो सौजन्य- गूगल

If there is pain in the breast just before periods

Health First: ज्यादातर महिलाएं बिजी दिनचर्या, केयर संबंधी जिम्मेदारियों या अन्य समस्याओं को मामूली समझकर शुरुआती लक्षणों को दरकिनार कर देती हैं। हालांकि महिलाओं में ये अनदेखे लक्षण कभी-कभी सीरियस बीमारियों के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। थकान और अनियमित मासिक धर्म से लेकर शरीर में होने वाले सूक्ष्म बदलावों तक, इन संकेतों को अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए। महिलाओं की आम स्वास्थ्य समस्याओें को समझना, शुरुआती संकेतों को पहचानना और मेडिकल मदद कब लेनी चाहिए, यह जानना जटिलताओं को रोकने और लंबे हेल्थ के एहसास को सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

महिलाएं अक्सर हेल्थ रिलेटेड लक्षणों तो क्यों करती हैं नजरअंदाज-

महिलाएं अक्सर अपने स्वास्थ्य की तुलना में परिवार और काम को प्राथमिकता देती हैं। इससे अक्सर निदान और उपचार में देरी होती है।

  1.  व्यस्त जीवनशैली और एक साथ कई जिम्मेदारियों को निभाना
  2.  असुविधा या दर्द को सामान्य मानने की प्रवृत्ति• लक्षणों के बारे में जागरूकता का अभाव
  3.  यह मान लेना कि लक्षण अस्थायी हैं या तनाव से संबंधित हैं
    स्वास्थ्य संबंधी वे प्रमुख मुद्दे जिन्हें महिलाएं अक्सर नजरअंदाज कर देती हैं।

लगातार थकान रहना

Stress in women can affect scientific and physical health

थकान महसूस होने को अक्सर तनाव या नींद की कमी बताकर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
• यह एनीमिया , थायरॉइड विकार या पोषण संबंधी कमियों का संकेत हो सकता है।
• लगातार थकान महिलाओं में थकान के सबसे आम कारणों में से एक है, जिसका मूल्यांकन उन्हें करवाना चाहिए।
अनियमित मासिक धर्म
मासिक धर्म की अनियमितताओं को अक्सर सामान्य माना जाता है।
• यह हार्मोनल असंतुलन का संकेत हो सकता है।
• यह पीसीओएस, थायराइड की समस्याओं या तनाव से संबंधित हो सकता है।
• अनियमित मासिक धर्म के कारणों में से एक महत्वपूर्ण कारण है।

बेवजह वजन परिवर्तन

जीवनशैली में बदलाव किए बिना अचानक वजन बढ़ना या घटना होना अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
• यह थायरॉइड संबंधी विकार या चयापचय संबंधी समस्याओं का संकेत हो सकता है।
• हार्मोनल असंतुलन के लक्षणों से जुड़ा हुआ
बार-बार सिरदर्द
सिरदर्द को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है या इसका इलाज खुद ही कर लिया जाता है।
• यह तनाव, माइग्रेन या किसी अन्य अंतर्निहित बीमारी के कारण हो सकता है।
• लगातार सिरदर्द होने पर डॉक्टर से परामर्श लेना आवश्यक है।

स्तन में परिवर्तन

Breast Cancer

स्तन स्वास्थ्य में होने वाले बदलावों को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

• गांठें, दर्द या स्राव
• बेहतर परिणामों के लिए शीघ्र निदान अत्यंत महत्वपूर्ण है।
श्रोणि में दर्द
अक्सर इसे मासिक धर्म की असुविधा मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
• यह एंडोमेट्रियोसिस, संक्रमण या अंडाशय संबंधी समस्याओं का संकेत हो सकता है।
• दीर्घकालिक दर्द के लिए मूल्यांकन आवश्यक है
पाचन संबंधी समस्याएं (पेट फूलना, एसिडिटी)
आमतौर पर इन्हें मामूली समस्याएं माना जाता है।
• इसका संबंध आंतों के स्वास्थ्य या हार्मोनल परिवर्तनों से हो सकता है।
• लगातार बने रहने वाले लक्षण गंभीर समस्याओं का संकेत हो सकते हैं।

नींद की समस्याएँ

Your sleeping position reveals your personality

नींद की कमी को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है या इसे सामान्य मान लिया जाता है।
• यह तनाव, हार्मोनल असंतुलन या मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से संबंधित हो सकता है।
• यह समग्र स्वास्थ्य और ऊर्जा स्तर को प्रभावित करता है।
मनोदशा में परिवर्तन और चिंता
भावनात्मक लक्षणों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
• यह हार्मोनल उतार-चढ़ाव से संबंधित हो सकता है।
• यह चिंता या अवसाद का संकेत हो सकता है।

मनोदशा में परिवर्तन और चिंता

भावनात्मक लक्षणों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।

  • यह हार्मोनल उतार-चढ़ाव से संबंधित हो सकता है।
  • यह चिंता या अवसाद का संकेत हो सकता है।

चेतावनी के संकेत जिन्हें कभी भी अनदेखा नहीं करना चाहिए

इन संकेतों पर जरूर दें ध्यान :

  • ऐसे लक्षण जो कुछ दिनों से अधिक समय तक बने रहते हैं
  • समय के साथ बिगड़ती जाने वाली स्थितियाँ
  • एक साथ कई लक्षण प्रकट होना
  • शरीर में अचानक या असामान्य परिवर्तन

इन लक्षणों को नज़रअंदाज़ करने से होने वाले स्वास्थ्य जोखिम

लक्षणों को नज़रअंदाज़ करने से निम्नलिखित समस्याएं हो सकती हैं:

  • गंभीर बीमारियों के निदान में देरी
  • रोग की प्रगति
  • जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है
  • जीवन की गुणवत्ता में कमी

महिलाओं को डॉक्टर से कब परामर्श लेना चाहिए?

यदि निम्नलिखित स्थितियां हों तो चिकित्सीय सलाह लें:

  • लक्षण अपेक्षा से अधिक समय तक बने रहते हैं
  • अचानक या गंभीर असुविधा होती है
  • समस्याएँ बार-बार सामने आती रहती हैं।
  • ये लक्षण दैनिक जीवन में बाधा उत्पन्न करते हैं।

नियमित स्वास्थ्य जांच का महत्व

नियमित जांच रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

  • स्वास्थ्य समस्याओं का शीघ्र पता लगाना
  • मौजूदा स्थितियों की निगरानी
  • निवारक देखभाल और स्क्रीनिंग।
Excessive smartphone use by children

बच्चों के लिए Smartphone का लत लगना नशा की तरह दिमाग पर हावी हो जाता है जिसे लेकर दुनियाभर के पेरेंट्स परेशान रहते हैं। बता दें कि जहां बच्चे दिनभर खेल-कूदते नजर आते थे और शरारतें करतें थे, अब वे चुपचाप एक कमरे के किसी कोने में घंटों वीडियो और शॉर्ट्स स्क्रॉल करने में व्यस्त दिखाई देते हैं। पेरेंट्स को अच्छे से मालूम होता है कि बच्चे अगर अधिक फोन का इस्तेमाल करेंगे तो उनकी आंखें खराब हो सकती हैं, लेकिन यहां बात आंखें खराब होने तक सीमित नहीं है बल्कि ज्यादा स्क्रीन देखने का प्रभाव बच्चों के दिमाग प  र भी बहुत ज्यादा पड़ रहा है जिसे न तो अभी बच्चे नोटिस कर पा रहें हैं और ना ही पेरेंट्स। इस टॉपिक पर दुनियाभर में कई रिसर्च हो चुकी हैं और ज्यादातर में यह मिला है कि स्मार्टफोन या कोई भी डिजिटल स्क्रीन को लंबे समय तक देखना बच्चे की सिर्फ आंखों पर ही नहीं बल्कि दिमाग पर भी असर डालता है। बच्चों के दिमाग पर स्क्रीन से पड़ रहे कुप्रभाव के बारे में ये रही जानकारियां-

क्या स्मार्टफोन्स के इस्तेमाल से खोखल हो रहा बच्चों का दिमाग?

Excessive smartphone use by children

‘साइंस डायरेक्ट’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक Adolescent Brain Cognitive Development Study (ABCD) की एक रिसर्च में 10 से 13 साल के कई हजारों बच्चों पर अध्यन की गई। जिसमें बच्चों के सोशलमीडिया और स्मार्टफोन्स के इस्तेमाल को एनालाइज किया गया और साथ ही में इमेजिंग स्कैन्स की मदद से उनके ब्रेन की संरचना का निरीक्षण किया गया। जिसमें कुछ क्षेत्रों में पाया गया कि जो बच्चे ज्यादा स्क्रीनटाइम दे रहे हैं या समार्टफोन्स का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, उनकी ब्रेन की कोर्टिकल मोटाई थोड़ी कम मिली और साथ ही ब्रेन वॉल्यूम भी अन्य बच्चों से थोड़ी कम मिली। साइंसडायरेक्ट के एक्सपर्ट्स के ब्रेन की ये दोनों चीजें दिमाग के कई जरूरी कार्यों को करने में मदद करती हैं जैसे –

  1. ध्यान देना या फोकस करना
  2. निर्णय लेना (डिसीजन मेकिंग)
  3. सोचना व समझना (रीजनिंग)
  4. याददाश्त या याद रखने की क्षमता

हालांकि, एक्सपर्ट्स ने यह भी बताया कि बचपन में कोर्टिकल थाइनिंग ब्रेन डेवलपमेंट का एक सामान्य हिस्सा हो सकता है। क्योंकि इस दौरान ऐसे न्यूरल कनेक्शन को हटाता रहता है, जिनकी जरूरत नहीं होती है ताकि न्यूरल नेटवर्क बिना किसी उलझन के सामान्य रूप से काम करता रहे।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स

Excessive smartphone use by children

एक्सपर्ट के अनुसार अगर बच्चा लंबे समय तक स्मार्टफोन्स देखता या फिर उसका स्क्रीनटाइम ज्यादा है, तो उससे बच्चे की आंखों पर विपरीत असर तो पड़ता ही है, दिमाग की कार्यक्षमता और ब्रेन हेल्थ को भी काफी नुकसान पहुंचता है। रिसर्चों में भी साबित हो चुका है कि जिन बच्चों का स्क्रीनटाइम ज्यादा होता है, अन्य बच्चों की मुकाबले उनके दिमाग की क्षमता कम हो सकती है।

बच्चे की स्मार्टफोन की लत कैसे छुड़ाएं

इस समस्या को लेकर डॉक्टर ने बताया कि बच्चे का स्मार्टफोन एडिक्शन खत्म करने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है उसे टाइम देना और जितना हो सके उसे फिजिकल एक्टिविटी में शामिल करना। इसमें ध्यान रखना होगा कि बच्चे को डांटकर उसकी फोन की आदत नहीं छुड़ानी है, बल्कि उसके लिए नीचे लिखी बातों का ध्यान रखना है-

  • सबसे पहले बच्चे के आगे खुद फोन इस्तेमाल करना बंद कर दें।
  • जितना हो सके फोन्स को बच्चों की पहुंच से दूर रखें और ताकि उन्हें फोन की याद न आए।
  • बच्चे को खुद टाइम देना शुरू कीजिए उनसे बातें करें, कहानियां सुनाएं।
  • बच्चे को घर के छोटे-छोटे काम करना सिखाएं जैसे अपना बैग खुद पैक करना।
  • रोजाना बच्चे को आउटडोर एक्टिविटी कराएं, ऐसे स्पोर्ट्स में शामिल करें जिनमें उसकी ज्यादा रुचि हो आदि।
High blood pressure and diabetes cause severe damage to the kidneys

Blood Pressure-Diabetes: भागदौड़ भरी जिंदगी में ब्लड प्रेशर और डायबिटीज की परेशानी काफी ज्यादा हो चुकी है। यह दोनों ही, सबसे तेजी से बढ़ने वाली लाइफस्टाइल डिजीज हैं। इन दोनों बीमारियों को नियंत्रित किया जा सकता है पर जब ये लंबे वक्त तक कंट्रोल में नहीं रहते, तो सबसे अधिक असर किडनी पर पड़ता है। एक डॉक्टर का कहना है कि क्रॉनिक किडनी डिजीज के प्रमुख वजहों में डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर सबसे आगे है। आइये जाने किडनी पर दोनों बीमारियों का क्या असर पड़ता है-

किडनी पर डायबिटीज का क्या है असर

डायबिटीज का असर आपकी किडनी पर पड़ सकता है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डायबिटीज एंड डायजेस्टिव एंड किडनी डिजीज के मुताबिक, डायबिटीज होने पर हमारे शरीर का ब्लड शुगर लेवल लगातार बढ़ा हुआ रहता है। यह हाई शुगर धीरे-धीरे किडनी के छोटे-छोटे ब्लड वेसेल्स को नुकसान पहुंचाने लगता है। किडनी का मुख्य काम ब्लड को फिल्टर करना है। लेकिन जब ब्लड शुगर ज्यादा रहता है, तो यह फिल्टरिंग सिस्टम खराब होने लगता है और प्रोटीन जैसे जरूरी तत्व पेशाब के जरिए बाहर निकलने लगते हैं। इस स्थिति को डायबिटिक नेफ्रोपैथी कहा जाता है।

हाई ब्लड प्रेशर किडनी को कैसे नुकसान पहुंचाता है

ब्लड प्रेशर बढ़ने की स्थिति में किडनी को नुकसान हो सकता है। नेशनल किडनी फाउंडेशन के मुताबिक, हाई ब्लड प्रेशर किडनी की ब्लड वेसल्स पर अतिरिक्त दबाव डालता है। लंबे समय तक यह दबाव किडनी की फिल्टरिंग क्षमता को कमजोर कर देता है। ऐसे में धीरे-धीरे किडनी ठीक से ब्लड को फिल्टर नहीं कर पाती, जिससे शरीर में टॉक्सिस पदार्थ जमा होने लगते हैं। इसे हाइपरटेंसिव किडनी डिजीज कहा जाता है।

जब ब्लड प्रेशर और डायबिटीज साथ में हो, तो किडनी पर क्या पड़ता है असर

High blood pressure and diabetes cause severe damage to the kidneys

अगर किसी व्यक्ति को डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर दोनों होते हैं, तो किडनी पर डबल स्ट्रेस पड़ता है। यह स्थिति सबसे ज्यादा खतरनाक मानी जाती है, क्योंकि किडनी फंक्शन तेजी से गिरता है।इस स्थिति में प्रोटीन यूरिन में बढ़ जाता है और किडनी फेलियर का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे में कई बार डायलिसिस की भी जरूरत पड़ सकती है

किडनी डैमेज होने के शुरुआती लक्षण-

किडनी डैमेज धीरे-धीरे बढ़ता है, इसलिए शुरुआत में लक्षण हल्के हो सकते हैं। इसके कुछ शुरुआती लक्षण निम्न हैं-

  1. शरीर में बार-बार थकान महसूस होना
  2. पैरों और चेहरे पर सूजन
  3. पेशाब में झाग आना
  4. भूख कम लगना
  5. ब्लड प्रेशर का लगातार बढ़ा रहना
  6. किडनी को ऐसे हालात में कैसे रखें सुरक्षित

डॉक्टर कै कहना कि सही समय पर कंट्रोल करके किडनी को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। बस इसके लिए आपको कुछ बातों पर ध्यान देने की जरूरत होती है, जैसे-

  • ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखें।
  • ब्लड प्रेशर को 120/80 के आसपास रखने की कोशिश करें।
  • नमक और प्रोसेस्ड फूड कम खाएं।
  • नियमित रूप से एक्सरसाइज करें।
  • समय-समय पर किडनी टेस्ट कराएं।
  • डॉक्टर की दवा नियमित रूप लें।
World No-Tabacco Day: This year, WHO has focused on helping youth and children

World No-Tabacco Day: हर फिल्म से पहले सिनेमा हॉल और टीवी पर एक विज्ञापन चलता है धूम्रपान स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, कृपया इससे दूरी बनाएं। बड़े स्तर पर जागरूकता चलाए जाने के बावजूद भारत के लोग एक बड़ी संख्या में सिगरेट, ई- वेपिंग, बीड़ी और तंबाकू का सेवन करते हैं। तंबाकू सेहत के लिए कितना हानिकारक है, इसके बारे में वैश्विक स्तर पर लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाया जाता है। इस साल विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने युवाओं और बच्चों को तंबाकू और निकोटीन की लत से बचाने पर खास जोर दिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने विशेषकर भारत में युवाओं के बीच तंबाकू के मद्देनजर एक बड़ी चेतावनी दी है।

बड़ी संख्या में तंबाकू का हो रहा है सेवन

आंकड़ों के अनुसार, तंबाकू की वजह से भारत में हर वर्ष करीब 13 लाख लोगों की मौत होती है। सिगरेट और बीड़ी के अलावा गुटखा, खैनी, जर्दा और अन्य तंबाकू उत्पाद भी लोगों की सेहत को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं। भारत में तंबाकू का इस्तेमाल करने वालों की संख्या बहुत ज्यादा है।

सिर्फ मुंह ही नहीं, तंबाकू के सेवन से डैमेज हो सकते हैं शरीर के ये 5 अंग, जानें तंबाकू छोड़ने के आसान उपाय-

पान मसाला और गुटका के विज्ञापनों के लिए फिल्मी सितारे हुए ट्रोल,एक्सपर्ट ने बताया क्यों स्वास्थ्य के लिए ‘खराब’ है तम्बाकू उत्पाद

क्या कहना है विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का ?

World No-Tabacco Day: This year, WHO has focused on helping youth and children

विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि तंबाकू कंपनियां नए-नए तरीकों से युवाओं को अपने प्रोडक्ट्स की ओर आकर्षित करने की हर कोशिश कर रही है और युवा इसके झांसे में आ भी रहे हैं। रंग-बिरंगी पैकेजिंग, फ्लेवर वाले प्रोडक्ट और सोशल मीडिया के जरिए प्रचार से बच्चे और युवाओं के दिमाग को तेजी से प्रभावित कर रहे हैं। इस दौरान WHO ने भारत से तंबाकू और निकोटीन उत्पादों के प्रचार पर सख्ती बढ़ाने की अपील की है।

तंबाकू से होती है घातक बीमारियां ?

तंबाकू शरीर के लगभग हर हिस्से को नुकसान पहुंचाता है। इससे कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसमें मुख्य रूप से शामिल हैः

  • फेफड़ों का कैंसर
  • मुंह और गले का कैंसर
  • दिल की बीमारी
  • हार्ट स्ट्रोक
  • सांस की गंभीर बीमारियां
  • हाई ब्लड प्रेशर
  • प्रेग्नेंसी से जुड़ी परेशानियां

इतना ही नहीं, जो लोग खुद तंबाकू नहीं लेते लेकिन धुएं के संपर्क में रहते हैं, उनकी सेहत पर भी बुरा असर पड़ सकता है।

तंबाकू युवाओं के लिए क्यों है बड़ा खतरा?

हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि ई-सिगरेट और निकोटीन वाले नए उत्पाद युवाओं को तेजी से अपनी गिरफ्त में ले रहे हैं। कई बार बच्चे इन्हें कम नुकसानदायक समझ लेते हैं, लेकिन इनमें मौजूद निकोटीन लत पैदा कर सकता है और दिमाग के विकास को प्रभावित कर सकता है।

तंबाकू छोड़ने के फायदे?

  1. तंबाकू छोड़ने के बाद शरीर खुद को ठीक करना शुरू कर देता है।
  2. 20 मिनट के भीतर दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर सामान्य होने लगते हैं।
  3. 24 घंटे के भीतर दिल के दौरे का खतरा कम होने लगता है।
  4. कुछ हफ्तों में सांस लेने में सुधार महसूस हो सकता है।
  5. लंबे समय में कैंसर और दिल की बीमारी का खतरा काफी कम हो जाता है।
  6. तंबाकू एक ऐसी आदत है जो धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाती है।

भारत में हर साल 13 लाख लोगों की मौत इस वजह से होती है। World No-Tobacco Day हमें याद दिलाता है कि तंबाकू से दूरी बनाकर हम खुद और अपने परिवार को कई गंभीर बीमारियों से बचा सकते हैं।

फोटो सौजन्य- गूगल

A Strong relationship needs regular sex

Regular Sex: शरीर को स्वास्थ्य और एक्टिव बनाए रखने के लिए लोग अक्सर जिम और तरह-तरह के डाइट का सहारा लेते हैं, लेकिन रिश्ते में सेक्सुअल इंटिमेसी दिनों दिन बढ़ते तनाव के अलावा कई समस्याओं को दूर करने का बेहतरीन विकल्प है। दिनभर के कामकाज के बाद नियमित रूप से टेंशन का सामना करना पड़ता है, जो मूड स्विंग की वजह साबित होता है। ऐसे में सेफ सेक्स को रूटीन के तौर पर शामिल करना शारीरिक, इमोशनल और मानसिक स्वास्थ्य के लिहाज से काफी कारगर साबित होता है। वे महिलाएं जो अक्सर सेक्स को एंजॉय करती हैं वे अपने साथी के साथ जुड़ाव वाली फिलिंग महसूस करती हैं। जिससे रिश्ता खुशहाल बन जाता है और कुल मिलाकर उनका जीवन ज्यादा बैलेंस भरा होता है। आइये जानें रेगुलर सेक्स से होने वाले फायदे-

डॉक्टर के मुताबिक नियमित सेक्स कई तरह से आपकी मदद कर सकता है। हांलाकि सेक्स के विषय पर अभी भी लोग खुलकर बात करना पसंद नहीं करते हैं। यौन संबध से मेंटल हेल्थ और शरीर को सक्रिय रखने में मदद मिलती है। खासकर उम्र बढ़ने के साथ नियमित सेक्सुअल एक्टीविटीज़ में शामिल होने से शारीरिक और भावनात्मक स्वास्थ्य दोनों पर सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलता है।

SEX सेहत को प्रभावित करता है?

When do women experience more sexual desire?

अमेरिकन सेक्सुअल हेल्थ एसोसिएशन के अनुसार नियमित सेक्स शरीर को फायदा पहुंचाता है। ये पुरुषों और महिलाओं के लिए कार्डियोवैस्कुलर एक्सरसाइज़ के रूप में फायदा पहुंचाता है। इसके अलावा इम्यून सिस्टम को बूस्ट करने, हृदय रोगों से राहत, कैलोरीज़ स्टोरेज की रोकथाम और मसल्स की मज़बूती को बढ़ाने में मदद करता है।

नियमित सेक्स करने से आपको मिलते हैं ये 8 फायदे

1. इमोशनल बॉडिंग मजबूत होती है

अक्सर उम्र के साथ पति पत्नी के रिश्ते में खिंचाव बढ़ने लगता है। ऐसे में नियमित सेक्स इमोशनल इंटिमेसी और कपल्स के बीच गहरे संबंध को बढ़ाता है। ऑक्सीटोसिन को लव हार्मोन कहा जाता है, जो सेक्स और शारीरिक स्पर्श के दौरान रिलीज़ होता है। ये हार्मोन भावनात्मक बंधन को मजबूत करने में मदद करता है और भागीदारों के बीच विश्वास और स्नेह बढ़ाता है। इससे अधिक संतोषजनक और स्थिर संबंध बनते हैं। जर्नल सेज चॉइस की रिपोर्ट के अनुसार रेगुलर सेक्सुअल एक्टीविटी फिज़िकल और इमोशनल हेल्थ को प्रभावित करती है।

2. अच्छी आती है नींद

इससे शरीर में ऑक्सीटोसिन यानि लव हार्मोन की मात्रा बढ़ने लगती है और सेक्स के दौरान एंडोर्फिन रिलीज होता है। इन दोनों हार्मोन के मिलने से नींद की गुणवत्ता में सुधार आने लगता है। इससे शरीर को ज्यादा आराम महसूस होता है और ऊर्जा का स्तर भी बढ़ने लगता है।

3. इम्यून सिस्टम बेहतर होता है

एक रिपोर्ट के मुताबिक वे लोग जो फ्रीक्वेंट सेक्स करते थे यानि सप्ताह में एक से दो बार या उससे अधिक बार, उनके स्लाइवा में अधिक इम्युनोग्लोबुलिन ए आईजीए पाया जाता है। आईजीए एक प्रकार की एंटीबॉडी है जो बीमारियों को रोकने में महत्वपूर्ण साबित होती है और हयूमन पेपिलोमावायरस या एचपीवी के खिलाफ रक्षा कवच के रूप में कार्य करता है। इससे महिलाएँ बीमारियों और संक्रमणों से लड़ने के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो जाती हैं। रिपोर्ट के अनुसार जैसे जैसे यौन गतिविधि बढ़ती है, वैसे ही रोग प्रतिरोधक क्षमता संक्रमण से निपटने में अधिक सक्षम हो जाती है।

4. हृदय संबधी समस्याएं कम होती हैं

नियमित यौन संबध बनाने से हृदय गति, ब्लड सर्कुलेशन और ऑक्सीजन का प्रवाह बढ़ने लगता है, जो समग्र हृदय स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद करता है। नियमित सेक्स महिलाओं में हृदय रोग और स्ट्रोक के जोखिम को कम करने में भी कारगर है। एक रिपोर्ट के अनुसार नियमित यौन गतिविधि हृदय रोग वाले पुरुषों और महिलाओं के लिए रोगी के साथ साथ साथी के जीवन की गुणवत्ता को भी बढ़ाता है।

5. तनाव में कमी आती है

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इससे लाइफ में दिनों दिन बढ़ने वाले तनाव को कम किया जा सकता है और सकारात्मक मनोदशा को बढ़ावा देने की क्षमता में सुधार आने लगता है। दरअसल, सेक्स के दौरान शरीर एंडोर्फिन जारी करता है, जिससे व्यक्ति खुशी का अनुभव करता है। ये रसायन तनाव और चिंता से निपटने में मदद करते हैं जिससे महिलाएं ज्यादा आराम और संतुष्ट महसूस करती हैं। नियमित सेक्स करने से भावनात्मक कल्याण और समग्र खुशी का एक चक्र बन सकता है। जर्नल ऑफ़ फ़ैमिली साइकोलॉजी के शोध में पाया गया कि दैनिक जीवन में जिन प्रतिभागियों ने यौन गतिविधि कम होने की बात कही, उनमें सेक्स की कमी पाई गई।

6. पेल्विक मसल्स मज़बूत होती हैं

इंटिमेसी जहां सेक्सुअल हेल्थ के लिए फायदेमंद है, तो इससे पेल्विक फ्लोर मसल्स की भी मज़बूती बढ़ जाती है। इससे यूटर्स और ब्लैण्डर को भी हेल्दी रखा जा सकता है। सेक्सुअल एंक्टीविटी से जहां आपसी प्यार और अंडरस्टैडिंग बढ़ने लगती है, तो वहीं लोअर बॉडी के मसल्स को मज़बूती मिलती है और स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम कम हो जाता है। इससे वेजाइना से संबधी बीमारियों का जोखिम कम होने लगता है।

7. कम होती है पेट की चर्बी

प्लोस वन के रिसर्च के अनुसार पुरुष सेक्स के दौरान प्रति मिनट लगभग 4.2 कैलोरी जलाते हैं, जबकि महिलाएं प्रति मिनट 3.1 कैलोरी बर्न करती हैं। सेक्स से शरीर में कैलोरी स्टोरेज से बचा जा सकता है और शरीर स्वस्थ रहता है। कैलोरी बर्न होना सेक्स सेशन की स्पीड, समय और पोज़िशन पर निर्भर करता है।

8. नेचुरल पेन किलर है

सेक्स के दौरान एंडोर्फिन का स्राव न केवल तनाव को कम करने में मदद करता है बल्कि यह एक प्राकृतिक दर्द निवारक के रूप में भी काम कर सकता है। एक्सपर्ट के मुताबिक कुछ महिलाओं को यौन गतिविधि में शामिल होने के बाद सिरदर्द, ऐंठन और शरीर के अन्य दर्द से अस्थायी राहत फील होता है।

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Vaginal Infection: Do not ignore the problem of burning and itching in the vagina

Health Tips: एक कहावत है ‘हेल्थ ही असल पूंजी है’, लेकिन अक्सर देखा गया है कि हम महिलाएं अपनी सेहत को इग्नोर कर देती हैं। वक्त की कमी, ऑफिस या घर से संबंधित तनाव, जागरूकता की कमी यौन स्वास्थ्य के बारे में बात करने में झिझकना, सभी ऐसे कारक हैं जो इसमें योगदान करते हैं। लेकिन जनरल हेल्थ समस्याओं को भी आपको नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासतौर से जब वे बदलाव आपकी वजाइना या ब्रेस्ट में नजर आ रहे हों।

महिलाओं की आम शिकायतें होती हैं, जिन्हें ज्य़ादातर इग्नोर कर दिया जाता है। पर यह कुछ ज्यादा गंभीर होने का संकेत हो सकते हैं।

6 स्वास्थ्य समस्याएं जिन्हें महिलाओं को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए

1. सेक्स के दौरान दर्द होना

Do we have to face the risk of UTI after sex?

महिलाएं अक्सर संभोग के दौरान दर्द के बारे में बात करने से हिचकिचाती हैं। हालांकि, दर्दनाक सेक्स एंडोमेट्रियोसिस का लक्षण भी हो सकता है। एक ऐसी स्थिति जिसमें गर्भाशय की अंदरूनी परत गर्भाशय के बाहर जमा हो जाती है। यह पीआईडी ​​​​(पेल्विक सूजन की बीमारी) के कारण भी हो सकता है, जो अक्सर वेजाइनल डिस्चार्ज के साथ रिप्रोडक्टिव ऑर्गन का संक्रमण होता है। अपर्याप्त लुब्रिकेशन और ड्राई वेजाइना के कारण भी सेक्स दर्दनाक हो सकता है।

2. अनियमित या असामान्य माहवारी

मासिक धर्म हर 21-35 दिनों में नियमित रूप से होना चाहिए। भारी प्रवाह, मध्य-चक्र रक्तस्राव या स्पॉटिंग, लंबे समय तक पीरियड साइकिल, यह थायराइड, पीसीओडी या फाइब्रॉएड जैसे हार्मोनल रोगों के कारण हो सकता है, जो गर्भाशय के सौम्य ट्यूमर हैं। सेक्स के बाद रक्तस्राव या रजोनिवृत्ति के बाद रक्तस्राव को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। यह ओवेरियन कैंसर का संकेत हो सकता है और इसकी जांच की आवश्यकता है।

3. ब्रेस्ट में बदलाव

Breast Cancer

स्तनों में गांठ फाइब्रोएडीनोमा जैसी हानिरहित स्थितियों के कारण हो सकती है। हालांकि ब्रेस्ट में गांठ होना भी ब्रेस्ट कैंसर का संकेत हो सकता है। जागरूकता की कमी के कारण महिलाओं में स्तन कैंसर अक्सर उन्नत चरणों में पाया जाता है। स्तनों में गांठ जो स्तन के बाकी टिश्यू से सख्त और अलग लगती हैं या निप्पल से स्राव को चैक किया जाना चाहिए। महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर की जांच के लिए नियमित चेकअप करवाना चाहिए। स्तन में किसी भी परिवर्तन का शीघ्र पता लगाने के लिए ब्रेस्ट सेल्फ टेस्टिंग के तरीकों के बारे में भी पता होना चाहिए।

4. अचानक वजन घटना और बढ़ना

अचानक वजन कम होना खुशी की बात हो सकती है, लेकिन एकाएक वजन कम होना टीबी के साथ-साथ कैंसर या थायरॉयड विकारों का भी संकेत हो सकता है और इसका मूल्यांकन किया जाना चाहिए। अचानक वजन बढ़ना पीसीओडी या थायराइड की समस्या के कारण हो सकता है और अगर इसका पता चल जाए तो इसे बहुत अच्छी तरह से नियंत्रित किया जा सकता है।

5. थकान महसूस होना

बहुत सी महिलाएं हर समय थकान महसूस करती हैं। बार-बार थकान एनीमिया, थायराइड विकार, सूक्ष्म पोषक तत्वों और विटामिन डी की कमी के कारण हो सकती है और इसकी जांच होनी चाहिए। पूरी रात की नींद के बाद भी थकान महसूस होना भी तनाव, चिंता, डिप्रेशन या ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया का कारण हो सकता है। इसलिए इसे कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

6. ब्लोटिंग

बहुत सी महिलाएं विशेष रूप से मासिक धर्म से पहले फूला हुआ या गैसी महसूस करती हैं। यह अधिक सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। हालांकि, अगर ब्लोटिंग महसूस करना बहुत बार होता है, तो इसे चैक करवाना चाहिए। यह इरिटेबल बावल सिंड्रोम, एंडोमेट्रियोसिस या यहां तक ​​कि ओवरियन कैंसर का संकेत हो सकता है। जैसा कि मिशेल ओबामा ने कहा कि समुदाय और देश और अंततः दुनिया उतनी ही मजबूत है जितनी उनकी महिलाओं का स्वास्थ्य। इसलिए देश और दुनिया की बेहतरी के लिए हमें अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

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Right time of walking, Avoid walking at the wrong time

Right time of walking for fitness: वेट लॉस करना हो या फिर फिटनेस लेवल बढ़ाना हो एक्सरसाइज का आगाज वॉकिंग के साथ ही होता है। सुबह या शाम के वक्त खुली हवा में टहलना आपकी हेल्थ के लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है। सिंपल तरीके से पैदल चलना या वॉकिंग और ब्रिस्क वॉक जैसी एक्सरसाइज न सिर्फ आसान होती है बल्कि यह महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए लाभदायक साबित हो सकती है।

सर्दी या गर्मी के मौसम में भी आप बस कुछ बातों का ख्याल रखकर टहल सकते हैं। जैसे दिन में किस वक्त और कितनी देर तक वॉक करनी चाहिए। क्योंकि, सही समय पर वॉक ना करने से आपकी हेल्थ को नुकसान हो सकता है। इसलिए वॉक करने से पहले इस बात की जानकारी आपको जरूर होनी चाहिए कि आपको कब वॉक करना चाहिए और कब नहीं।

गर्मियों के मौसम में वॉक करने का सही समय ?

Right time of walking, Avoid walking at the wrong time

इस समय करें मॉर्निंग वॉक

वॉक करने का सबसे ठीक समय है है सुबह सूरज उगने के आसपास का समय। सूरज उगने के साथ ही आप टहलने निकल जाएं और सुबह 8 बजे तक वॉक पूरी कर लें। दरअसल, सूरज निकलने से पहले का समय हवा में प्रदूषण का स्तर अधिक होता है। वहीं, सुबह की हल्की धूप में टहलने से आपको तकलीफ भी नहीं होती। इस तरह आप थोड़ी देर धूप में रहकर विटामिन डी भी प्राप्त कर सकते हैं और आपकी हड्डियों को इसका फायदा हो सकता है।

इवनिंग वॉक

जो लोग सुबह की बजाय शाम को वॉक करना पसंद करते हैं, उन्हें शाम के समय 4 के बाद और 6-8 बजे तक वॉक करने की सलाह दी जाती है। इस समय हवा में ठंडक भी बढ़ने लगती है और प्रदूषण का स्तर भी कम होता है। सबसे खास बात यह भी है कि शाम 4-7 बजे के दौरान शरीर की मांसपेशियां बहुत फ्लेक्सिबल होती हैं। ऐसे में आपके लिए वॉक करना आसान हो सकता है और इससे आपके स्वास्थ्य को वॉक करने के फायदे भी पहुंच सकते हैं।

सर्दियों में कब टहलना चाहिए

Right time of walking, Avoid walking at the wrong time

ठंड के दिनों में सवेरे वॉक करना फायदेमंद होता है लेकिन, सूरज उगने से पहले और कोहरे के माहौल में वॉक करने से हेल्थ पर खराब असर पड़ सकता है। सुबह के समय हवा में ठंड होती है और तापमान भी काफी कम होता है। ऐसे में वॉक करते समय आपको सांस लेने से जुड़ी हुई समस्याएं हो सकती है। इसलिए, सर्दियों में सूरज उगने के बाद ही वॉक करें।

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गलत समय पर वॉक करना है नुकसानदायक

तड़के सुबह यानी अंधेरे में वॉक करना हेल्थ के लिए हानिकारक साबित हो सकता है क्योंकि, ऐसे में हवा में प्रदूषण का स्तर अधिक होता है। जिससे अस्थमा, खांसी और जुकाम जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। ठंडियों में बहुत सुबह वॉक करने से मसल्स में खिंचाव और जॉइंट पेन की समस्या बढ़ सकती है। सुबह की ठंडी हवा और प्रदूषण के कारण फेफड़ों पर भी खराब असर पड़ता है जिससे छाती में भारीपन और दर्द जैसी शिकायतें हो सकती हैं।

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How beneficial is onion consumption in case of heat stroke

Onion for Heat Stroke: क्या गर्मी में आपको भी सिरदर्द, सिर घूमना या जी मिचलाने जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है? अगर आपका जवाब हां है तो ये लू लगने के लक्षण हो सकते हैं। गर्मी के दिन आते ही लू का खतरा काफी बढ़ जाता है। गर्म हवाएं, तेज धूप और शरीर में पानी की कमी से हेल्थ को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। बता दें कि हीट स्ट्रोक तब लगती है, जब शरीर का तापमान बहुत अधिक बढ़ जाता है और शरीर खुद को ठंडा नहीं कर पाता है। ऐसे हालत में तेज बुखार, चक्कर आना, सिर दर्द, जी मिचलाना और कमजोरी जैसे सिंपटम महसूस हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में फौरन इलाज की जरूरत पड़ती है। ऐसे में अक्सर घरों में एक पुराना नुस्खा अपनाया जाता है- प्याज का सेवन। पर, क्या वाकई प्याज खाने से हीट स्ट्रोक से राहत मिल सकती है? आइये जानते हैं प्याज खाने से लू से कितना संभव है बचाव?

लू लगने पर प्याज खाना कितना असरदार?

How beneficial is onion consumption in case of heat stroke

गर्मी में प्याज खाने की सलाह दी जाती है। कहा जाता है कि प्याज खाने से लू से बचाव होता है और गर्मी कम लगती है। दरअसल, प्याज में एंटीऑक्सीडेंट्स, सल्फर कंपाउंड्स और हल्का कूलिंग इफेक्ट होता है, जिससे लू से बचा जा सकता है।

लू से बचाव के लिए कच्चा प्याज खाना फायदेमंद होता है।
प्याज का रस पीने से भी लू से बचाव संभव है।
कई लोग तलवों और माथे पर प्याज का रस लगाने की सलाह देते हैं।

इन बातों का रखें ध्यान

  • प्याज खाने से शरीर को ठंडक मिलती है। इसलिए आपको समर डाइट में प्याज जरूर शामिल करें।
  • प्याज खाने से तेज बुखार या हीट स्ट्रोक के लक्षणों को कम नहीं किया जा सकता है।
  • गर्मी की वजह से होने वाली बेहोशी को प्याज खाकर ठीक नहीं किया जा सकता है।
  • प्याज लू का इलाज नहीं है। बल्कि, प्याज खाने से लू से काफी हद तक बचा जा सकता है।

लू लगने पर क्या करना चाहिए?

  1. अगर आपको लू के लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो कुछ बातों का ध्यान रखें।
  2. ठंडी जगह पर बैठें और आराम करें।
  3. शरीर को ठंडा करें। आप नहा सकते हैं या शरीर को गीले कपड़े से पोंछ सकते हैं।
  4. ओआरएस का पानी पिएं। आप नारियल पानी और नींबू पानी भी पी सकते हैं।

वैसे तो लू को इन टिप्स से ही ठीक किया जा सकता है। लेकिन कुछ गंभीर मामलों में लू लगने पर अस्पताल में भर्ती की जरूरत पड़ सकती है।

हीट स्ट्रोक से बचने के लिए क्या करें?

  • लू से बचने के लिए दिन में 12 से 4 बजे के बीच में बाहर जाने से बचें।
  • दिनभर खूब सारा पानी पिएं। लिक्विड डाइट पर फोकस करें।
  • हल्के और ढीले कपड़े पहनें।
  • छाता या टोपी का इस्तेमाल करें।
  • डाइट में प्याज, दही, छाछ, तरबूज आदि शामिल करें।

अगर आपको भी गर्मी में अक्सर ही लू से जुड़ी समस्या रहती है, तो प्याज का सेवन करना फायदेमंद हो सकता है। प्याज का सेवन करने से शरीर को ठंडक मिलती है और लू से बचाव होता है।

फोटो सौजन्य- गूगल