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Category Archives: Health

A Strong relationship needs regular sex

Regular Sex: शरीर को स्वास्थ्य और एक्टिव बनाए रखने के लिए लोग अक्सर जिम और तरह-तरह के डाइट का सहारा लेते हैं, लेकिन रिश्ते में सेक्सुअल इंटिमेसी दिनों दिन बढ़ते तनाव के अलावा कई समस्याओं को दूर करने का बेहतरीन विकल्प है। दिनभर के कामकाज के बाद नियमित रूप से टेंशन का सामना करना पड़ता है, जो मूड स्विंग की वजह साबित होता है। ऐसे में सेफ सेक्स को रूटीन के तौर पर शामिल करना शारीरिक, इमोशनल और मानसिक स्वास्थ्य के लिहाज से काफी कारगर साबित होता है। वे महिलाएं जो अक्सर सेक्स को एंजॉय करती हैं वे अपने साथी के साथ जुड़ाव वाली फिलिंग महसूस करती हैं। जिससे रिश्ता खुशहाल बन जाता है और कुल मिलाकर उनका जीवन ज्यादा बैलेंस भरा होता है। आइये जानें रेगुलर सेक्स से होने वाले फायदे-

डॉक्टर के मुताबिक नियमित सेक्स कई तरह से आपकी मदद कर सकता है। हांलाकि सेक्स के विषय पर अभी भी लोग खुलकर बात करना पसंद नहीं करते हैं। यौन संबध से मेंटल हेल्थ और शरीर को सक्रिय रखने में मदद मिलती है। खासकर उम्र बढ़ने के साथ नियमित सेक्सुअल एक्टीविटीज़ में शामिल होने से शारीरिक और भावनात्मक स्वास्थ्य दोनों पर सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलता है।

SEX सेहत को प्रभावित करता है?

When do women experience more sexual desire?

अमेरिकन सेक्सुअल हेल्थ एसोसिएशन के अनुसार नियमित सेक्स शरीर को फायदा पहुंचाता है। ये पुरुषों और महिलाओं के लिए कार्डियोवैस्कुलर एक्सरसाइज़ के रूप में फायदा पहुंचाता है। इसके अलावा इम्यून सिस्टम को बूस्ट करने, हृदय रोगों से राहत, कैलोरीज़ स्टोरेज की रोकथाम और मसल्स की मज़बूती को बढ़ाने में मदद करता है।

नियमित सेक्स करने से आपको मिलते हैं ये 8 फायदे

1. इमोशनल बॉडिंग मजबूत होती है

अक्सर उम्र के साथ पति पत्नी के रिश्ते में खिंचाव बढ़ने लगता है। ऐसे में नियमित सेक्स इमोशनल इंटिमेसी और कपल्स के बीच गहरे संबंध को बढ़ाता है। ऑक्सीटोसिन को लव हार्मोन कहा जाता है, जो सेक्स और शारीरिक स्पर्श के दौरान रिलीज़ होता है। ये हार्मोन भावनात्मक बंधन को मजबूत करने में मदद करता है और भागीदारों के बीच विश्वास और स्नेह बढ़ाता है। इससे अधिक संतोषजनक और स्थिर संबंध बनते हैं। जर्नल सेज चॉइस की रिपोर्ट के अनुसार रेगुलर सेक्सुअल एक्टीविटी फिज़िकल और इमोशनल हेल्थ को प्रभावित करती है।

2. अच्छी आती है नींद

इससे शरीर में ऑक्सीटोसिन यानि लव हार्मोन की मात्रा बढ़ने लगती है और सेक्स के दौरान एंडोर्फिन रिलीज होता है। इन दोनों हार्मोन के मिलने से नींद की गुणवत्ता में सुधार आने लगता है। इससे शरीर को ज्यादा आराम महसूस होता है और ऊर्जा का स्तर भी बढ़ने लगता है।

3. इम्यून सिस्टम बेहतर होता है

एक रिपोर्ट के मुताबिक वे लोग जो फ्रीक्वेंट सेक्स करते थे यानि सप्ताह में एक से दो बार या उससे अधिक बार, उनके स्लाइवा में अधिक इम्युनोग्लोबुलिन ए आईजीए पाया जाता है। आईजीए एक प्रकार की एंटीबॉडी है जो बीमारियों को रोकने में महत्वपूर्ण साबित होती है और हयूमन पेपिलोमावायरस या एचपीवी के खिलाफ रक्षा कवच के रूप में कार्य करता है। इससे महिलाएँ बीमारियों और संक्रमणों से लड़ने के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो जाती हैं। रिपोर्ट के अनुसार जैसे जैसे यौन गतिविधि बढ़ती है, वैसे ही रोग प्रतिरोधक क्षमता संक्रमण से निपटने में अधिक सक्षम हो जाती है।

4. हृदय संबधी समस्याएं कम होती हैं

नियमित यौन संबध बनाने से हृदय गति, ब्लड सर्कुलेशन और ऑक्सीजन का प्रवाह बढ़ने लगता है, जो समग्र हृदय स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद करता है। नियमित सेक्स महिलाओं में हृदय रोग और स्ट्रोक के जोखिम को कम करने में भी कारगर है। एक रिपोर्ट के अनुसार नियमित यौन गतिविधि हृदय रोग वाले पुरुषों और महिलाओं के लिए रोगी के साथ साथ साथी के जीवन की गुणवत्ता को भी बढ़ाता है।

5. तनाव में कमी आती है

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इससे लाइफ में दिनों दिन बढ़ने वाले तनाव को कम किया जा सकता है और सकारात्मक मनोदशा को बढ़ावा देने की क्षमता में सुधार आने लगता है। दरअसल, सेक्स के दौरान शरीर एंडोर्फिन जारी करता है, जिससे व्यक्ति खुशी का अनुभव करता है। ये रसायन तनाव और चिंता से निपटने में मदद करते हैं जिससे महिलाएं ज्यादा आराम और संतुष्ट महसूस करती हैं। नियमित सेक्स करने से भावनात्मक कल्याण और समग्र खुशी का एक चक्र बन सकता है। जर्नल ऑफ़ फ़ैमिली साइकोलॉजी के शोध में पाया गया कि दैनिक जीवन में जिन प्रतिभागियों ने यौन गतिविधि कम होने की बात कही, उनमें सेक्स की कमी पाई गई।

6. पेल्विक मसल्स मज़बूत होती हैं

इंटिमेसी जहां सेक्सुअल हेल्थ के लिए फायदेमंद है, तो इससे पेल्विक फ्लोर मसल्स की भी मज़बूती बढ़ जाती है। इससे यूटर्स और ब्लैण्डर को भी हेल्दी रखा जा सकता है। सेक्सुअल एंक्टीविटी से जहां आपसी प्यार और अंडरस्टैडिंग बढ़ने लगती है, तो वहीं लोअर बॉडी के मसल्स को मज़बूती मिलती है और स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम कम हो जाता है। इससे वेजाइना से संबधी बीमारियों का जोखिम कम होने लगता है।

7. कम होती है पेट की चर्बी

प्लोस वन के रिसर्च के अनुसार पुरुष सेक्स के दौरान प्रति मिनट लगभग 4.2 कैलोरी जलाते हैं, जबकि महिलाएं प्रति मिनट 3.1 कैलोरी बर्न करती हैं। सेक्स से शरीर में कैलोरी स्टोरेज से बचा जा सकता है और शरीर स्वस्थ रहता है। कैलोरी बर्न होना सेक्स सेशन की स्पीड, समय और पोज़िशन पर निर्भर करता है।

8. नेचुरल पेन किलर है

सेक्स के दौरान एंडोर्फिन का स्राव न केवल तनाव को कम करने में मदद करता है बल्कि यह एक प्राकृतिक दर्द निवारक के रूप में भी काम कर सकता है। एक्सपर्ट के मुताबिक कुछ महिलाओं को यौन गतिविधि में शामिल होने के बाद सिरदर्द, ऐंठन और शरीर के अन्य दर्द से अस्थायी राहत फील होता है।

फोटो सौजन्य- गूगल

Vaginal Infection: Do not ignore the problem of burning and itching in the vagina

Health Tips: एक कहावत है ‘हेल्थ ही असल पूंजी है’, लेकिन अक्सर देखा गया है कि हम महिलाएं अपनी सेहत को इग्नोर कर देती हैं। वक्त की कमी, ऑफिस या घर से संबंधित तनाव, जागरूकता की कमी यौन स्वास्थ्य के बारे में बात करने में झिझकना, सभी ऐसे कारक हैं जो इसमें योगदान करते हैं। लेकिन जनरल हेल्थ समस्याओं को भी आपको नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासतौर से जब वे बदलाव आपकी वजाइना या ब्रेस्ट में नजर आ रहे हों।

महिलाओं की आम शिकायतें होती हैं, जिन्हें ज्य़ादातर इग्नोर कर दिया जाता है। पर यह कुछ ज्यादा गंभीर होने का संकेत हो सकते हैं।

6 स्वास्थ्य समस्याएं जिन्हें महिलाओं को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए

1. सेक्स के दौरान दर्द होना

Do we have to face the risk of UTI after sex?

महिलाएं अक्सर संभोग के दौरान दर्द के बारे में बात करने से हिचकिचाती हैं। हालांकि, दर्दनाक सेक्स एंडोमेट्रियोसिस का लक्षण भी हो सकता है। एक ऐसी स्थिति जिसमें गर्भाशय की अंदरूनी परत गर्भाशय के बाहर जमा हो जाती है। यह पीआईडी ​​​​(पेल्विक सूजन की बीमारी) के कारण भी हो सकता है, जो अक्सर वेजाइनल डिस्चार्ज के साथ रिप्रोडक्टिव ऑर्गन का संक्रमण होता है। अपर्याप्त लुब्रिकेशन और ड्राई वेजाइना के कारण भी सेक्स दर्दनाक हो सकता है।

2. अनियमित या असामान्य माहवारी

मासिक धर्म हर 21-35 दिनों में नियमित रूप से होना चाहिए। भारी प्रवाह, मध्य-चक्र रक्तस्राव या स्पॉटिंग, लंबे समय तक पीरियड साइकिल, यह थायराइड, पीसीओडी या फाइब्रॉएड जैसे हार्मोनल रोगों के कारण हो सकता है, जो गर्भाशय के सौम्य ट्यूमर हैं। सेक्स के बाद रक्तस्राव या रजोनिवृत्ति के बाद रक्तस्राव को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। यह ओवेरियन कैंसर का संकेत हो सकता है और इसकी जांच की आवश्यकता है।

3. ब्रेस्ट में बदलाव

Breast Cancer

स्तनों में गांठ फाइब्रोएडीनोमा जैसी हानिरहित स्थितियों के कारण हो सकती है। हालांकि ब्रेस्ट में गांठ होना भी ब्रेस्ट कैंसर का संकेत हो सकता है। जागरूकता की कमी के कारण महिलाओं में स्तन कैंसर अक्सर उन्नत चरणों में पाया जाता है। स्तनों में गांठ जो स्तन के बाकी टिश्यू से सख्त और अलग लगती हैं या निप्पल से स्राव को चैक किया जाना चाहिए। महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर की जांच के लिए नियमित चेकअप करवाना चाहिए। स्तन में किसी भी परिवर्तन का शीघ्र पता लगाने के लिए ब्रेस्ट सेल्फ टेस्टिंग के तरीकों के बारे में भी पता होना चाहिए।

4. अचानक वजन घटना और बढ़ना

अचानक वजन कम होना खुशी की बात हो सकती है, लेकिन एकाएक वजन कम होना टीबी के साथ-साथ कैंसर या थायरॉयड विकारों का भी संकेत हो सकता है और इसका मूल्यांकन किया जाना चाहिए। अचानक वजन बढ़ना पीसीओडी या थायराइड की समस्या के कारण हो सकता है और अगर इसका पता चल जाए तो इसे बहुत अच्छी तरह से नियंत्रित किया जा सकता है।

5. थकान महसूस होना

बहुत सी महिलाएं हर समय थकान महसूस करती हैं। बार-बार थकान एनीमिया, थायराइड विकार, सूक्ष्म पोषक तत्वों और विटामिन डी की कमी के कारण हो सकती है और इसकी जांच होनी चाहिए। पूरी रात की नींद के बाद भी थकान महसूस होना भी तनाव, चिंता, डिप्रेशन या ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया का कारण हो सकता है। इसलिए इसे कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

6. ब्लोटिंग

बहुत सी महिलाएं विशेष रूप से मासिक धर्म से पहले फूला हुआ या गैसी महसूस करती हैं। यह अधिक सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। हालांकि, अगर ब्लोटिंग महसूस करना बहुत बार होता है, तो इसे चैक करवाना चाहिए। यह इरिटेबल बावल सिंड्रोम, एंडोमेट्रियोसिस या यहां तक ​​कि ओवरियन कैंसर का संकेत हो सकता है। जैसा कि मिशेल ओबामा ने कहा कि समुदाय और देश और अंततः दुनिया उतनी ही मजबूत है जितनी उनकी महिलाओं का स्वास्थ्य। इसलिए देश और दुनिया की बेहतरी के लिए हमें अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

फोटो सौजन्य- गूगल

Right time of walking, Avoid walking at the wrong time

Right time of walking for fitness: वेट लॉस करना हो या फिर फिटनेस लेवल बढ़ाना हो एक्सरसाइज का आगाज वॉकिंग के साथ ही होता है। सुबह या शाम के वक्त खुली हवा में टहलना आपकी हेल्थ के लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है। सिंपल तरीके से पैदल चलना या वॉकिंग और ब्रिस्क वॉक जैसी एक्सरसाइज न सिर्फ आसान होती है बल्कि यह महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए लाभदायक साबित हो सकती है।

सर्दी या गर्मी के मौसम में भी आप बस कुछ बातों का ख्याल रखकर टहल सकते हैं। जैसे दिन में किस वक्त और कितनी देर तक वॉक करनी चाहिए। क्योंकि, सही समय पर वॉक ना करने से आपकी हेल्थ को नुकसान हो सकता है। इसलिए वॉक करने से पहले इस बात की जानकारी आपको जरूर होनी चाहिए कि आपको कब वॉक करना चाहिए और कब नहीं।

गर्मियों के मौसम में वॉक करने का सही समय ?

Right time of walking, Avoid walking at the wrong time

इस समय करें मॉर्निंग वॉक

वॉक करने का सबसे ठीक समय है है सुबह सूरज उगने के आसपास का समय। सूरज उगने के साथ ही आप टहलने निकल जाएं और सुबह 8 बजे तक वॉक पूरी कर लें। दरअसल, सूरज निकलने से पहले का समय हवा में प्रदूषण का स्तर अधिक होता है। वहीं, सुबह की हल्की धूप में टहलने से आपको तकलीफ भी नहीं होती। इस तरह आप थोड़ी देर धूप में रहकर विटामिन डी भी प्राप्त कर सकते हैं और आपकी हड्डियों को इसका फायदा हो सकता है।

इवनिंग वॉक

जो लोग सुबह की बजाय शाम को वॉक करना पसंद करते हैं, उन्हें शाम के समय 4 के बाद और 6-8 बजे तक वॉक करने की सलाह दी जाती है। इस समय हवा में ठंडक भी बढ़ने लगती है और प्रदूषण का स्तर भी कम होता है। सबसे खास बात यह भी है कि शाम 4-7 बजे के दौरान शरीर की मांसपेशियां बहुत फ्लेक्सिबल होती हैं। ऐसे में आपके लिए वॉक करना आसान हो सकता है और इससे आपके स्वास्थ्य को वॉक करने के फायदे भी पहुंच सकते हैं।

सर्दियों में कब टहलना चाहिए

Right time of walking, Avoid walking at the wrong time

ठंड के दिनों में सवेरे वॉक करना फायदेमंद होता है लेकिन, सूरज उगने से पहले और कोहरे के माहौल में वॉक करने से हेल्थ पर खराब असर पड़ सकता है। सुबह के समय हवा में ठंड होती है और तापमान भी काफी कम होता है। ऐसे में वॉक करते समय आपको सांस लेने से जुड़ी हुई समस्याएं हो सकती है। इसलिए, सर्दियों में सूरज उगने के बाद ही वॉक करें।

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गलत समय पर वॉक करना है नुकसानदायक

तड़के सुबह यानी अंधेरे में वॉक करना हेल्थ के लिए हानिकारक साबित हो सकता है क्योंकि, ऐसे में हवा में प्रदूषण का स्तर अधिक होता है। जिससे अस्थमा, खांसी और जुकाम जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। ठंडियों में बहुत सुबह वॉक करने से मसल्स में खिंचाव और जॉइंट पेन की समस्या बढ़ सकती है। सुबह की ठंडी हवा और प्रदूषण के कारण फेफड़ों पर भी खराब असर पड़ता है जिससे छाती में भारीपन और दर्द जैसी शिकायतें हो सकती हैं।

फोटो सौजन्य- गूगल

How beneficial is onion consumption in case of heat stroke

Onion for Heat Stroke: क्या गर्मी में आपको भी सिरदर्द, सिर घूमना या जी मिचलाने जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है? अगर आपका जवाब हां है तो ये लू लगने के लक्षण हो सकते हैं। गर्मी के दिन आते ही लू का खतरा काफी बढ़ जाता है। गर्म हवाएं, तेज धूप और शरीर में पानी की कमी से हेल्थ को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। बता दें कि हीट स्ट्रोक तब लगती है, जब शरीर का तापमान बहुत अधिक बढ़ जाता है और शरीर खुद को ठंडा नहीं कर पाता है। ऐसे हालत में तेज बुखार, चक्कर आना, सिर दर्द, जी मिचलाना और कमजोरी जैसे सिंपटम महसूस हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में फौरन इलाज की जरूरत पड़ती है। ऐसे में अक्सर घरों में एक पुराना नुस्खा अपनाया जाता है- प्याज का सेवन। पर, क्या वाकई प्याज खाने से हीट स्ट्रोक से राहत मिल सकती है? आइये जानते हैं प्याज खाने से लू से कितना संभव है बचाव?

लू लगने पर प्याज खाना कितना असरदार?

How beneficial is onion consumption in case of heat stroke

गर्मी में प्याज खाने की सलाह दी जाती है। कहा जाता है कि प्याज खाने से लू से बचाव होता है और गर्मी कम लगती है। दरअसल, प्याज में एंटीऑक्सीडेंट्स, सल्फर कंपाउंड्स और हल्का कूलिंग इफेक्ट होता है, जिससे लू से बचा जा सकता है।

लू से बचाव के लिए कच्चा प्याज खाना फायदेमंद होता है।
प्याज का रस पीने से भी लू से बचाव संभव है।
कई लोग तलवों और माथे पर प्याज का रस लगाने की सलाह देते हैं।

इन बातों का रखें ध्यान

  • प्याज खाने से शरीर को ठंडक मिलती है। इसलिए आपको समर डाइट में प्याज जरूर शामिल करें।
  • प्याज खाने से तेज बुखार या हीट स्ट्रोक के लक्षणों को कम नहीं किया जा सकता है।
  • गर्मी की वजह से होने वाली बेहोशी को प्याज खाकर ठीक नहीं किया जा सकता है।
  • प्याज लू का इलाज नहीं है। बल्कि, प्याज खाने से लू से काफी हद तक बचा जा सकता है।

लू लगने पर क्या करना चाहिए?

  1. अगर आपको लू के लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो कुछ बातों का ध्यान रखें।
  2. ठंडी जगह पर बैठें और आराम करें।
  3. शरीर को ठंडा करें। आप नहा सकते हैं या शरीर को गीले कपड़े से पोंछ सकते हैं।
  4. ओआरएस का पानी पिएं। आप नारियल पानी और नींबू पानी भी पी सकते हैं।

वैसे तो लू को इन टिप्स से ही ठीक किया जा सकता है। लेकिन कुछ गंभीर मामलों में लू लगने पर अस्पताल में भर्ती की जरूरत पड़ सकती है।

हीट स्ट्रोक से बचने के लिए क्या करें?

  • लू से बचने के लिए दिन में 12 से 4 बजे के बीच में बाहर जाने से बचें।
  • दिनभर खूब सारा पानी पिएं। लिक्विड डाइट पर फोकस करें।
  • हल्के और ढीले कपड़े पहनें।
  • छाता या टोपी का इस्तेमाल करें।
  • डाइट में प्याज, दही, छाछ, तरबूज आदि शामिल करें।

अगर आपको भी गर्मी में अक्सर ही लू से जुड़ी समस्या रहती है, तो प्याज का सेवन करना फायदेमंद हो सकता है। प्याज का सेवन करने से शरीर को ठंडक मिलती है और लू से बचाव होता है।

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Birth Control Pill: Scientists have created a male contraceptive pill that puts a temporary brake on sperm production

Birth Control Pill: दशकों से गर्भनिरोधक की जिम्मेदारी ज्यादातर महिलाओं पर ही रही है, जबकि पुरुषों के पास सीमित विकल्प कंडोम या नसबंदी के रूप में उपलब्ध है। लेकिन अब साइंस की नई खोज इस सोच को बदलने जा रही है। हाल ही में पब्लिश एक स्टडी में विज्ञानिक ने पुरुषों के लिए ऐसी गर्भनिरोधक दवा की दिशा में बड़ी कामयाबी हासिल की है, जो बिना हार्मोन असर के काम कर सकती है और जिसका प्रभाव अस्थायी हो सकता है।

जाने क्या है ये नई खोज ?

Birth Control Pill: Scientists have created a male contraceptive pill that puts a temporary brake on sperm production

अमेरिका की कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने अपनी रिसर्च में बताया कि शरीर में एक खास प्रक्रिया को रोककर स्पर्म बनने की प्रक्रिया को अस्थायी रूप से बंद किया जा सकता है। सबसे खास बात यह है कि इससे शरीर को कोई स्थायी नुकसान नहीं होता और दवा बंद करने पर फिर से सामान्य स्थिति लौट सकती है।

इस रिसर्च में साइंटिस्ट ने मियोसिस नाम की एक अहम जैविक प्रक्रिया पर ध्यान दिया, जो स्पर्म बनने के लिए जरूरी होती है। इस्तेमाल के दौरान एक खास कंपाउंड का प्रयोग कर इस प्रक्रिया को चूहों में अस्थायी रूप से रोक दिया गया। इसका नतीजा यह हुआ कि स्पर्म बनना बंद हो गया, पर जब दवा बंद की गई, तो उनकी प्रजनन क्षमता वापस लौट आई और वे स्वस्थ संतानों को जन्म देने में सक्षम रहे।

यह खोज क्यों अहम है?

यह खोज इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि अब तक पुरुष गर्भनिरोधक तरीकों में कई दिक्कतें सामने आती रही हैं। हार्मोन आधारित तरीकों से मूड में बदलाव और यौन इच्छा में कमी जैसी समस्याएं होती हैं, जबकि नसबंदी स्थायी समाधान है और इसे आसानी से वापस नहीं किया जा सकता है। ऐसे में बिना हार्मोन वाला और अस्थायी तरीका उम्मीद की किरण के तौर पर देखा जा रहा है।

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यह तकनीक ऐसे काम करती है ?

यह नई तकनीक स्पर्म के विकास के एक खास फेज को रोककर काम करती है। जब यह प्रक्रिया बाधित होती है, तो स्पर्म सही तरीके से विकसित नहीं हो पाते और प्रजनन क्षमता कुछ समय के लिए ठहर जाती है। हालांकि, जैसे ही दवा का असर खत्म होता है, शरीर दोबारा सामान्य रूप से काम करने लगता है। जबकि साइंटिस्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि अभी प्रयोग किया गया कंपाउंड इंसानों के लिए पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा सकता। इसमें कुछ संभावित दुष्प्रभाव हो सकते हैं, इसलिए फिलहाल इसे एक शुरुआती कदम के तौर पर देखा जा रहा है। इसका मकसद ऐसे सुरक्षित विकल्प विकसित करना है, जो इसी प्रक्रिया को निशाना बनाकर काम कर सकें।

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Gas After Eating

Gas after Eating: आजकल लोगों का खानपान काफी खराब होता जा रहा है, जिसका सीधा असर आपके हेल्थ पर पड़ रहा है। देखा जा रहा है कि लोगों को अक्सर खाना खाने के बाद गैस बनना, पेट में दर्द और सूजन जैसी समस्याओं से जूझना पड़ता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स भी मानते हैं कि अगर आपका खानपान सही नहीं है, तो इसके पीछे का सबसे बड़ा कारण अनियमित खानपान, जंक फूड का अधिक सेवन, देर रात तक जागना और मानसिक तनाव इसके प्रमुख कारणों में से एक हैं।

यह समस्या न आज केवल शारीरिक असहजता पैदा कर रही है, बल्कि डेली रूटीन को भी प्रभावित कर रही है। आप में से कई लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं, और फिर तब ध्यान देते हैं, जब समस्या काफी भयानक रूप ले लेता है। लेकिन समय रहते समस्या पर ध्यान देना जरूरी है। सही आहार, नियमित दिनचर्या और कुछ आसान उपायों से इस समस्या से राहत पाई जा सकती है। पर कुछ आसान और घरेलू ड्रिंक्स आपकी इस परेशानी को कम कर सकते हैं, जिनके बारे में हम आपको कुछ खास होममेड ड्रिंक्स के खास फायदों के बारे में बताने वाले हैं।

गुनगुना नींबू पानी

अगर आप सुबह हल्का गुनगुना पानी नहीं पीते हैं तो आज से ही पीना शुरू कर दीजिए। नींबू पानी पीने के फायदे आमतौर पर पाचन क्रिया को अच्छा बनाने के लिए सबसे ज्यादा होते हैं। क्योंकि हल्का गुनगुना और नींबू वाला पानी पाचन तंत्र को सक्रिय करने में बेहद असरदार होता है। इसमें मौजूद विटामिन-C शरीर को डिटॉक्स करते हैं और गैस व एसिडिटी को कम कर देते हैं। सुबह खाली पेट इसका सेवन करने से पेट हल्का रहता है और सूजन में कमी आती है।

अदरक का पानी

अदरक में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं। यह दोनों की तत्व पेट की सूजन और गैस को कम करने में सहायता प्रदान करते हैं। एक्सपर्ट बताते हैं कि अदरक का पानी पीने से पाचन बेहतर होता है और भोजन भी आसानी से पच जाता है। यह मतली और भारीपन की समस्या को भी दूर करने में मददगार साबित होता है।

जीरा वॉटर

Water of celery and cumin seeds makes the fat stored in the body disappear

जीरा पाचन के लिए बहुत फायदेमंद है। ऐसे में जीरा वॉटर पेट में गैस बनने की समस्या को कम कर सकता है और मेटाबॉलिज्म को तेज करता है। शोध बताते हैं कि इसमें मौजूद तत्व पाचन एंजाइम्स को सक्रिय करते हैं, जिससे पेट की सूजन और अपच में राहत मिलती है। अगर आप चाहें तो सुबह भी जीरे का पानी पी सकते हैं क्योंकि खाली पेट जीरे का पानी पीने के कई अलग-अलग फायदे भी हो सकते हैं।

अजवाइन का पानी

अजवाइन का पानी भी गैस और सूजन से राहत दिलाता है। इसमें थाइमोल नामक तत्व होता है, जो पाचन क्रिया को मजबूत करता है। अजवाइन का पानी गैस, पेट दर्द और ब्लोटिंग से फौरन राहत दिलाता है। अगर आप हैवी डाइट लेते हैं को उसके बाद इसे पीना बहुत लाभकारी साबित होता है।

शहद व पुदीने वाला पानी

Gas After Eating

शहद और पुदीने का पानी स्वादिष्ट होने के साथ ही पेट के लिए बेहद फायदेमंद होता है। पुदीना पेट को ठंडक देता है और पेट की जलन व सूजन को कम करने का काम करता है, जबकि शहद पाचन को सुधारता है। इन दोनों का मिश्रण गैस और ब्लोटिंग से राहत दिलाने का काम करता है। साथ ही शरीर को ताजगी भी देता है।

फोटो सौजन्य- गूगल

If you urinate shortly after drinking water, it could be a sign of illness

Health Care: दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से शरीर में पानी की कमी नहीं होती है और किडनी सही तरीके से वर्क करती है, लेकिन कई लोगों को यह समस्या होती है कि पानी पीने के कुछ ही समय बाद उन्हें बार-बार पेशाब करने की समस्या से जुझना पड़ता है।

पानी पीने के तुरंत बाद पेशाब आने की वजह

डॉक्टर का कहना है कि हम सबको सबसे पहले यह समझना आवश्यक है कि पानी के बाद पेशाब आना शरीर की सामान्य प्रक्रिया है। जब आप ज्यादा मात्रा में पानी या कोई भी अन्य पेय पदार्थ लेते हैं, तो इससे किडनी का काम फिल्टर करके पेशाब के जरिए बाहर निकाल देता है। अगर आप कम वक्त में बहुत ज्यादा पानी का सेवन करते हैं तो स्वाभाविक रूप से बार-बार पेशाब आ सकता है। अलावा इसके ठंड का मौसम, कैफीन का सेवन या कुछ दवाइयां भी पेशाब की मात्रा में इजाफा कर सकती है।

ओवरएक्टिव ब्लैडर- किसी कारण से अगर आपको बिना ज्यादा पानी पिए भी बार-बार पेशाब आने की परेशानी हो रही है, तो यह ओवरएक्टिव ब्लैडर का संकेत हो सकता है। इसमें मूत्राशय की कोशिकाएं अधिक एक्टिव हो जाती हैं। इससे बार-बार पेशाब आता है।

डायबिटीज– बार-बार पेशाब आना डायबिटीज का भी एक शुरुआती लक्षण हो सकता है। पानी पीने के बाद पेशाब आ रहा है और प्यास भी लग रही है तो एक बार डॉक्टर की सलाह पर डायबिटीज टेस्ट जरूर करवाएं।

यूरिन इन्फेक्शन- अगर बार-बार पेशाब आने के साथ जलन, दर्द या पेशाब में गंध की समस्या हो रही है, तो यह यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI) का संकेत हो सकता है।

किडनी से जुड़ी समस्या- कुछ मामलों में किडनी से जुड़ी समस्याओं के कारण भी बार-बार पेशाब आ सकता है। किडनी शरीर में तरल पदार्थ और इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखती है।

ज्यादा पेशाब आने पर डॉक्टर से कब मिलना चाहिए?

If you urinate shortly after drinking water, it could be a sign of illness

डॉक्टर का कहना है कि पानी पीने के बाद कुछ समय बाद ही आपको कुछ लक्षण खुद में नजर आते हैं, तो इस स्थिति में तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए।

  1. हर 10- 15 मिनट में पेशाब आना
  2. पेशाब करते समय जलन या दर्द
  3. पेशाब में यूरिन के साथ खून आना
  4. पेशाब करते समय पीठ में दर्द रहना
  5. बार-बार प्यास लगना
  6. रात में कई बार पेशाब के लिए उठना

कैसे बचें बार-बार पेशाब आने की समस्या से ?

  • बार-बार पेशाब की समस्या से बचने के लिए कुछ आसान उपाय अपनाए जा सकते हैं:
  • पानी एक साथ ज्यादा मात्रा में न पिएं, बल्कि थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पिएं
  • चाय और कॉफी जैसे ड्रिंक जिसमें कैफीन होता है, उसका सेवन सीमित मात्रा में करें।
  • रात को सोने से पहले ज्यादा मात्रा में पानी पीने से बचें।
  • खाने में तरल पदार्थों का सेवन सीमित मात्रा में करने की कोशिश करें।

फोटो सौजन्य- गूगल

Do these 4 exercises to get pregnant quickly

Pregnant: मां होने की फीलिंग्स हर महिला का सपना होता है। पर क्या को मालूम है कि मां बनने की प्लानिंग के बारे में सोचना जितना आसान होता है उतना मां बनने में नहीं। प्रेगनेंसी के समय हर महिलाओं को कई वजहों से जूझना पड़ता है। लेकिन इन सबके बीच आप शरीरिक रूप से फिट या फिर मजबूत नहीं हैं तो आपको प्रेगनेंसी के दौरान पीठ दर्द, पैर दर्द और अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में आपको शरीरिक रूप से खुद को फिट और मजबूत बनाना चाहिए। प्रेगनेंसी के दौरान खुद को फिट रखने के लिए आपको कुछ व्यायाम को अपने वर्कआउट में शामिल करना चाहिए, जो आपकी प्रेगनेंसी के सफर को सफल बना सके और आप एक स्वस्थ्य बच्चे को जन्म देने में हर तरह की चुनौतियां का सामना आसानी से कर सके। आइये जानते है उन एक्ससरसाइज के बारे में , जो आपकी प्रेगनेंसी की प्लानिंग को सफल बना सकते हैं।

कार्डियो एक्सरसाइज करें

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अगर आप प्रेगनेंसी की प्लानिंग बना रही हैं तो आपके लिए कार्डियो एक्सरसाइज आपके लिए अत्छा विकल्प साबित हो सकता है। अक्सर प्रेगनेंसी के दौरान ब्लड सर्कुलेशन में खून का तेजी से सर्कुलेट होना, अचानक ह्रदय गति का बढ़ जाना आदि समस्याएं उत्पन्न होने लगती हैं जो कि गर्भापात का कारण भी बन सकती हैं। ऐसे में अगर आप नियमित तौर पर इस एक्सरसाइज को करती हैं तो आप इन सभी बीमारियों से छुटकारा पा सकती हैं। अलावा इसके यह तनाव, डिप्रेशन आदि समस्याओं से भी राहत पहुंचा सकता है।

एरोबिक एक्सरसाइज करें

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अगर आप नियमित तौर पर थोड़ा वक्त एरोबिक एक्सरसाइज में निकालती हैं, तो आप प्रेगनन्सी के समय आने वाली सभी तरह की समस्याओं को कम कर सकती हैं। जी हां एरोबिक एक्सरसाइज जिनमें पैदल चलना, साइकलकिंग करना अदि शामिल होते हैं इन्हें करने से बच्चे को जन्म देते वक्त होने वाले दर्द से राहत मिल सकती है।

पेल्विक फ्लोर को करें ऐसे मजबूत

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प्रेग्नेंसी जैसे-जैसे में पेल्विक हिस्से पर ज्यादा तनाव महसूस होता है। इसलिए इस हिस्से का मजबूत होना बेहद जरूरी होता है, नहीं तो इससे कई तरह की असुविधाओं का सामान करना पड़ सकता है। इसके लिए आप क्विक फ्लिक केगल्स, हील स्लाइड, हैप्पी बेबी पोज़, लंग्स और स्क्वैट्स जैसी एक्सरसाइज कर सकती हैं।

कोर की मासंपेशियों के लिए करें पिलाटे एक्सरसाइजप्रेगनेंसी के स्टेज आगे बढ़ते हैं, तो उस दौरान गर्भाशय और पेट के निचले हिस्से में तेजी से विकास होने लगता है। ऐसे में कोर की मांसपेशियों का हेल्दी होना बहुत जरूरी होता है। क्योंकि यह आपके बढ़े हुए पेट को लचीला बनाने में मदद करती हैं। कोर की मासंपेशियों को मजबूत करने के लिए आप पिलाटे एक्सरसाइज का सहारा ले सकती हैं।

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Stress in women can affect scientific and physical health

Tension in Women: महिलाओं में टेंशन उनके भावनात्मक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। आप क्रोध, चिड़चिड़ापन, क्रोध, अवसाद, चिंता, मनोबल में बदलाव और हताशा जैसे संकेतों को पहचानती होंगी। पर यह आपके इनर्जी लेवल, भूख, मेमोरी और एकाग्रता को भी प्रभावित कर सकता है। टेंशन से राहत पाने के लिए कई अलग-अलग उपाय उपलब्ध हैं।

क्या होता है महिलाओं में टेंशन?

तनाव जीवन का एक स्वाभाविक हिस्सा है लेकिन महिलाओं के लिए , जिन पर दूसरों की ज़रूरतों का ध्यान रखने का अधिक दबाव होता है, तनाव प्रेरक और साथ ही साथ अत्यधिक बोझिल भी हो सकता है। यह जागरूकता बढ़ा सकता है और ध्यान केंद्रित करने में मदद कर सकता है या फिर यह चिंता और थकावट का कारण बन सकता है। कई महिलाएं इतनी व्यस्त रहती हैं कि उन्हें यह पता भी नहीं हो पाता कि तनाव उन पर कितना हावी होता है।

जब तनाव लंबे समय तक चलने वाला प्रतीत होने लगता है, तो यह सामान्य लगने लगता है। समय के साथ, यह आपके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है।

घर पर तनाव को नियंत्रित करने के लिए आप कुछ कदम उठा सकते हैं। या फिर अधिक सहायता के लिए आप किसी स्वास्थ्य सेवा प्रदाता से संपर्क कर सकते हैं।

महिलाओं में तनाव पुरुषों में तनाव से किस तरह अगल होता है?

Stress in women can affect scientific and physical health

हालांकि हर कोई तनाव का अनुभव करता है, लेकिन यह महिलाओं और पुरुषों को अलग-अलग तरह से प्रभावित कर सकता है। जैसे कि, अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन के 2023 के ‘स्ट्रेस इन अमेरिका’ रिसर्च में निम्नलिखित निष्कर्ष निकले-

  1. महिलाओं ने पुरुषों की तुलना में तनाव का औसत स्तर अधिक बताया।
  2. पुरुषों की तुलना में महिलाओं के यह कहने की संभावना अधिक थी कि उन्हें अधिक भावनात्मक समर्थन की आवश्यकता हो सकती थी।
  3. पुरुषों की तुलना में महिलाएं वित्तीय चिंताओं से अधिक “परेशान” महसूस करती हैं।
  4. महिलाओं में पुरुषों की तुलना में पारिवारिक जिम्मेदारियों और रिश्तों को अपने जीवन में प्रमुख तनाव के कारकों के रूप में मानने की संभावना अधिक थी।
  5. शोधकर्ताओं का मानना ​​है कि जैविक कारक (जैसे हार्मोन ) इस बात को प्रभावित कर सकते हैं कि प्रत्येक लिंग तनाव का अनुभव अलग-अलग तरीके से कैसे करता है। सामाजिक प्रभाव (जैसे समर्थन या परित्याग) भी तनाव को प्रभावित कर सकते हैं।

महिलाओं में तनाव के लक्षण क्या हैं?

तनाव के कई लक्षण होते हैं। हर व्यक्ति तनाव पर अलग-अलग तरह से प्रतिक्रिया करता है। महिलाओं में तनाव के सामान्य लक्षणों में शामिल हैं:

शारीरिक लक्षण : सिरदर्द , नींद आने में कठिनाई , मांसपेशियों में तनाव, दर्द (अक्सर पीठ और गर्दन में), अधिक खाना/कम खाना, त्वचा संबंधी समस्याएं, नशीली दवाओं और शराब का दुरुपयोग , ऊर्जा की कमी, पेट या आंतों में गड़बड़ी, यौन संबंध या अन्य चीजों में रुचि कम होना जिनका आप पहले आनंद लेते थे।

भावनात्मक : चिंता, अवसाद , क्रोध, उदासी, चिड़चिड़ापन, नियंत्रण से बाहर होने की भावना, मनोदशा में उतार-चढ़ाव , हताशा

मानसिक लक्षण : भूलने की बीमारी, चिंता, निर्णय लेने में असमर्थता, नकारात्मक सोच, ध्यान केंद्रित करने में कमी, ऊब, जिन चीजों में आमतौर पर आनंद आता है उनमें रुचि का अभाव, प्रेरणा की कमी, जीवन में अर्थ का अभाव, खालीपन, क्षमा न कर पाना, संदेह, अपराधबोध, निराशा

व्यावसायिक : काम का बोझ, तनाव , लंबे समय तक काम करना, तनावपूर्ण संबंध, एकाग्रता में कमी

सामाजिक : कम घनिष्ठता, अलगाव, पारिवारिक समस्याएं, अकेलापन

महिलाओं में तनाव के क्या कारण होते हैं?
तनाव के कुछ सबसे सामान्य कारण निम्नलिखित हैं:

  • फाइनेंस
  • हेल्थ
  • रिलेशन
  • स्कूल या काम

कई महिलाओं का कहना है कि बच्चों, माता-पिता और घर के कामों जैसी पारिवारिक जिम्मेदारियों से तनाव और अस्वस्थता बढ़ती है। अक्सर महिलाएं अपना ध्यान रखने की बजाय दूसरों की जरूरतों को पूरा करने में अधिक समय व्यतीत करती हैं। हर काम में अच्छा प्रदर्शन करने की चाह रखना स्वाभाविक है। और कभी-कभी, समय या ऊर्जा की कमी होने पर भी “ना” कहना मुश्किल हो जाता है। इससे तनाव के लक्षण भी उत्पन्न हो सकते हैं।

तनाव मेरे स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करता है?

Stress Effects

जब आप लंबे समय तक तनाव महसूस करते हैं, तो इसे दीर्घकालिक तनाव कहा जाता है। इससे कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं, जैसे:

गंभीर या बार-बार होने वाले सिरदर्द ( तनावग्रस्त सिरदर्द और माइग्रेन )
हृदय संबंधी समस्याएं ( उच्च रक्तचाप , हृदय रोग और दिल का दौरा )
चिड़चिड़ा आंत्र सिंड्रोम (आईबीएस)
मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं ( पैनिक डिसऑर्डर , सामान्यीकृत चिंता विकार , गंभीर अवसाद)
मांसपेशियों में तनाव और दर्द
मोटापा (तनाव के कारण वजन बढ़ना)
आघात
कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली (बीमारी के बाद ठीक होने में कठिनाई)
किसी स्वास्थ्य सेवा प्रदाता के मार्गदर्शन में, तनाव का प्रबंधन करने से आपको इन जटिलताओं को रोकने में मदद मिल सकती है।

महिलाएं तनाव को बेहतर तरीके से कैसे प्रबंधित कर सकती हैं?

महिलाएं स्वस्थ आत्म-देखभाल रणनीतियों को प्राथमिकता देकर और उनका अभ्यास करके तनाव को नियंत्रित कर सकती हैं। शुरुआत करने के लिए यहां कुछ सुझाव दिए गए हैं:

संज्ञानात्मक पुनर्परिभाषित करना (यह कहने के बजाय कि “मुझे यह करना है,” यह कहना कि “मुझे यह करने का अवसर मिल रहा है”)
संतुलित आहार लें (जैसे भूमध्यसागरीय आहार )।
प्रकृति का आनंद लें (टहलने जाएं और कुछ देर के लिए भाग-दौड़ भरी जिंदगी से दूर हो जाएं)।
व्यायाम करें या ऐसी शारीरिक गतिविधि में भाग लें जिससे आपका शरीर हिलता-डुलता रहे।
पर्याप्त नींद लें (प्रति रात सात से नौ घंटे)।
विश्राम की तकनीकों का अभ्यास करें (जैसे योग , ध्यान , गहरी सांस लेना)।
कृतज्ञता का अभ्यास करें
अपनी पसंद की गतिविधियों/शौकों के लिए समय निकालें।
दोस्तों और परिवार के साथ समय बिताएं और मेलजोल बढ़ाएं।
डायरी लिखना शुरू करें

इसके बाद, आप अपने मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित करने वाले कुछ सुझावों का पालन कर सकते हैं:

अपने तनाव के स्रोतों को पहचानें। दिन भर आप कैसा महसूस करते हैं और क्या करते हैं, उसे लिख लें। आप कार्यों को बाँटने या ज़रूरत पड़ने पर मदद मांगने के लिए कार्य योजनाएँ बना सकते हैं। विनम्रतापूर्वक लेकिन दृढ़ता से “ना” कहना और अपने लिए सीमाएँ निर्धारित करना महत्वपूर्ण है ।

10 तक गिनें- अगर आप किसी स्थिति से नाराज़ हैं, तो वहां से दूर जाकर 10 तक गिनने की कोशिश करें। तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय कुछ गहरी सांसें लें और रुकें।

जैसे आप दूसरों का ख्याल रखते हैं, वैसे ही खुद का भी ख्याल रखें । आप दूसरों के प्रति दयालु हैं, इसलिए खुद के प्रति भी दयालु रहें। याद रखें, किसी और की मदद करने से पहले आपको खुद को ऑक्सीजन देनी होगी।

सामाजिक सहयोग प्राप्त करें । जरूरत के समय मदद मांगना मुश्किल हो सकता है। कई महिलाओं को मुश्किल समय में किसी ऐसे व्यक्ति का साथ मददगार लगता है जिस पर वे भरोसा कर सकें।

डिजिटल/सोशल मीडिया से कुछ समय के लिए दूरी बनाएं । जब भी संभव हो, स्क्रीन से ब्रेक लें ।

मदद लें- जरूरत पड़ने पर किसी स्वास्थ्य सेवा प्रदाता से बात करना ठीक है। वे तनाव से निपटने में आपकी मदद करने के लिए थेरेपी जैसे विभिन्न संसाधनों की सलाह दे सकते हैं ।

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First Time Sex

Thyroid Affects:आजकल के गलत खानपान और खराब लाइफस्टाइल की वजह से थायराइड प्रॉब्लम लोगों में आम बात हो गई है। बता दें कि थायराइड एक तितली के साइज की ग्रंथि होती है, जो गर्दन के भीतर मौजूद होती है। यह ग्लैंड थायरोक्सिन हार्मोन का उत्पादन करती है, जो शरीर के मेटाबॉलिक रेट और एनर्जी लेवल को नियंत्रित करता है। जब थायराइड ग्लैंड अपना काम ठीक से करना बंद कर देती है, हाइपोथायरायडिज्म और हाइपरथायराइडिज्म की समस्या होती है। थायराइड की बीमारी होने पर कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसकी वजह से तेजी से वजन में बदलाव, कमजोरी, चिड़चिड़ापन, मूड स्विंग्स, मसल्स में दर्द, कब्ज, स्किन ड्राई होना और बाल गिरने जैसी समस्याएं हो सकती है। अलावा इसके थायराइड की समस्या का असर सेक्स लाइफ पर भी पड़ता सकता है। आइए जानते हैं थायराइड के कारण सेक्स लाइफ कैसे प्रभावित होती है-

कैसे प्रभावित करता है महिलाओं की सेक्स लाइफ को थायराइड-

A Strong relationship needs regular sex

हाइपोथायरायडिज्म या कम सक्रिय थायरॉयड के कारण अक्सर थकान, अवसाद और कमजोरी जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं। अत्यधिक थकान या कमजोरी के कारण महिला की सेक्स ड्राइव प्रभावित हो सकती है। इससे यौन इच्छा में बदलाव हो सकता है और यौन क्रिया में कमी भी आ सकती है। अलावा इसके, हाइपोथायरायडिज्म के कारण योनि में सूखापन हो सकता है। दरअसल, थायराइड की समस्या की वजह से वजाइनल ल्युब्रीकेंट कम हो जाता है। यह यौन गतिविधि को असुविधाजनक या यहां तक ​​कि दर्दनाक बना सकता है।

वहीं दूसरी तरफ, हाइपरथायरायडिज्म या अतिसक्रिय थायराइड के कारण चिंता, बेचैनी, एंग्जायटी और सोने में कठिनाई जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इन सभी समस्याओं का सेक्स लाइफ पर बुरा असर पड़ता है। इसके कारण यौन इच्छा में कमी आ सकती है और इंटिमेसी भी प्रभावित होती है। जब आप थायरॉयड विकार से पीड़ित होते हैं, तो आपके टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम हो सकता है। यह आपकी कामेच्छा को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है।

क्या है इलाज?

अगर कोई लेडी इन समस्याओं का सामना कर रही है, तो उसे डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है। दवाओं और उचित उपचार से थायरॉयड के लक्षणों को कम करने में मदद मिल सकती है। संतुलित आहार और नियमित व्यायाम से हार्मोनल संतुलन बनाए रखा जा सकता है और ऊर्जा के स्तर में सुधार किया जा सकता है। इसके अलावा, अपनी भावनाओं और समस्याओं के बारे में अपने साथी के साथ खुलकर बात करें। इससे आपका रिश्ता मजबूत होगा और आपका पार्टनर उपचार प्रक्रिया के दौरान आपको भावनात्मक समर्थन प्रदान कर सकता है। ध्यान रखें कि थायराइड का समय पर इलाज किया जाए और इसे दवाओं से कंट्रोल में रखा जाए, तो लगभग सभी सेक्स प्रॉब्लम आसानी से दूर हो सकती हैं।

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