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Category Archives: Lifestyle

Why is Eid-ul-Azha celebrated and what is its importance?

Eid Ul Adha: इस बार 28 मई को ईद-उल-अजहा यानी बकरीद का त्योहार पूरे देश और दुनिया में मुस्लिम मना रहे हैं। बकरीद इस्लाम धर्म का प्रमुख त्योहार है जिसमें अल्लाह के प्रति अटूट विश्वास और आत्मत्याग के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। बकरीद के दिन सुबह मुस्लिम समुदाय के लोग नए कपड़े पहनकर मस्जिद या ईदगाह में विशेष नमाज़ अदा करते हैं। इसके बाद एक-दूसरे के गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी जाती है। नमाज़ के बाद जो आर्थिक रूप से सक्षम हैं, वे बकरे की कुर्बानी देते हैं और इसके गोश्त को गरीबों और रिश्तोदारों में बांटते हैं। सिर्फ तीसरा हिस्सा खुद के लिए रखते हैं। इस तरह समाज का हर तबका त्योहार की खुशियों और दावतों में शामिल होता है। आपको जानकर हैरानी होगी बकरीद की शुरुआत इस्लाम के आने के बहुत पहले से ही अरब जगत में मनाया जाता था। आइए इसके पूरे इतिहास और इससे जुड़ी कहानियों के बारे में जानते हैं।

ऐसे हुई बकरीद की शुरुआत

बकरीद या ईद-उल-अजहा की शुरुआत पैगंबर हजरत इब्राहिम (अ.स) के दौर में आज से करीब 4,000 वर्ष पहले हुई थी। यह त्योहार मुख्य रूप से अल्लाह के प्रति पूर्ण समर्पण, अटूट विश्वास और त्याग का ऐतिहासिक प्रतीक है। इस त्योहार के पीछे हजरत इब्राहिम के जीवन से जुड़ी एक ऐतिहासिक घटना जुड़ी हुई है। इस्लामिक मान्यताओं के मुताबिक अल्लाह ने हजरत इब्राहिम के सपने में आकर उनकी सबसे प्यारी चीज की कुर्बानी मांगी। इब्राहिम को अपनी ढलती उम्र में मिले इकलौते बेटे, हजरत इस्माइल सबसे ज्यादा प्रिय थे। लेकिन अल्लाह का हुक्म मानकर हजरत इब्राहिम ने अपने बेटे की कुर्बानी देने के लिए तैयार हो गए। जब उन्होंने बेटे को इसके बारे में बताया, तो बेटे इस्माइल ने भी अल्लाह की राह में समर्पित होने की रज़ामंदी दे दी  इब्राहिम अपने बेटे को लेकर मक्का के पास मीना के मैदान की ओर बढ़े। रास्ते में शैतान ने उन्हें इस परीक्षा से डिगाने और भटकाने का प्रयास किया पर उन्होंने उसे कंकड़ मारकर दूर भगा दिया। इसी याद में हज के दौरान आज भी शैतान को कंकड़ मारे जाते हैं। हलांकि, यह अलग कहानी है। बहरहाल, मीना पहुंचकर जब इब्राहिम ने अपनी आंखों पर पट्टी बांधी और बेटे की गर्दन पर छुरी चलाई, तो अल्लाह ने उनके इस सर्वोच्च समर्पण और नीयत को स्वीकार कर लिया और ठीक उसी वक्त अल्लाह ने अपने फरिश्ते जिब्राइल के जरिए जन्नत से एक दुम्बा (भेड़) वहां भेज दिया गया और इस्माइल की जगह उस दुम्बे की कुर्बानी हो गई। इसी ऐतिहासिक घटना की याद में हर वर्ष इस्लामी महीने जुल-हिज्जा की 10 तारीख को दुनिया भर के मुस्लिम सक्षम लोग पशु (बकरा, भेड़, या ऊंट) की कुर्बानी देते हैं। इस पर्व का मूल उद्देश्य सिर्फ खून बहाना नहीं, बल्कि इंसान के भीतर मौजूद अहंकार, स्वार्थ और बुराई को अल्लाह की राह में कुर्बान करना है। इसके गोश्त को तीन बराबर हिस्सों में बांटकर गरीबों, रिश्तेदारों और खुद के लिए रखने का सामाजिक नियम है।

सबसे पहले बकरीद की शुरुआत कैसे हुई

ईद-उल-अजहा का इतिहास करीब 4,000 साल पुराना माना जाता है। इस घटना का जिक्र सबसे पहले हिब्रु बाइबिल में लिखा गया है। इसमें हजरत इब्राहिम को अब्राह्म के नाम से जाना जाता है जबकि अब्राह्म के बेटे को इसहाक नाम से जाना जाता है। वहीं, फरिश्ता को एंजिल कहकर पुकारा जाता है। ऐतिहासिक और सामाजिक मान्यताओं के मुताबिक यह घटना मक्का की है लेकिन एक सालाना इस्लामी त्योहार के रूप में ईद-उल-अज़हा को आधिकारिक तौर पर सबसे पहले मदीना में मनाया गया था। दरअसल, 622 ईस्वी में जब पैगंबर मोहम्मद साहब ने मक्का से मदीना हिजरत की, तब उन्होंने देखा कि मदीना के लोग पहले से चले आ रहे कुछ पारंपरिक फारसी त्योहार जैसे नौरोज़ और मेहरजान को मनाते थे। पैगंबर साहब ने उन त्योहारों की जगह इस्लामी सिद्धांतों पर आधारित सिर्फ दो पवित्र दिन तय किए: ईद-उल-फितर यानी मीठी ईद और ईद-उल-अज़हा यानी बकरीद। इस तरह मदीना वह पहला स्थान बना जहां व्यवस्थित रूप से इस त्योहार की और सामूहिक नमाज़ की शुरुआत हुई।

Eid Ul Adha का सांस्कृतिक महत्व

बकरीद का पर्व अहंकार और स्वार्थ का त्याग करने के लिए मनाया जाता है। इसका मूल संदेश सिर्फ जानवर की कुर्बानी देना नहीं है बल्कि इंसान के भीतर छिपे स्वार्थ, लालच और अहंकार की कुर्बानी देना है. इससे समानता और सामाजिक सद्भाव की भावना भी प्रकट होती है। इसमें कुर्बानी के मांस को तीन बराबर हिस्सों में बांटा जाता है। एक हिस्सा परिवार के लिए, दूसरा हिस्सा रिश्तेदारों व दोस्तों के लिए और तीसरा हिस्सा गरीबों व जरूरतमंदों के लिए है। यह व्यवस्था समाज में आर्थिक असमानता को भुलाकर हर तबके को खुशी में शामिल करने का संदेश देती है।

बकरीद के दिन की शुरुआत 

Bakreed

बकरीद के दिन मुसलमान सुबह में जल्दी उठ जाते हैं। सबसे पहले फज्र की नमाज अता करते हैं। इसके बाद घर की साफ-सफाई और स्नान किया जाता है, फिर नए या सबसे साफ कपड़े पहने जाते हैं।

इस दिन आमतौर पर सुबह 8 से 10 बजे के बीच ईद-उल-अजहा की दो रकात विशेष नमाज़ और खुतबा (धार्मिक उपदेश) होता है. नमाज़ खत्म होते ही लोग आपस में गले मिलकर एक-दूसरे को ईद मुबारक कहते हैं। दुश्मनी भूलकर गले मिलने का यह सबसे भावुक पल होता है। मीठी ईद के उलट बकरीद की सुबह नमाज़ बिना कुछ खाए पढ़ी जाती है। नमाज़ के बाद ही लोग पहला निवाला लेते हैं। ईदगाह से लौटने के बाद ही कुर्बानी का सिलसिला शुरू होता है। नमाज़ से पहले दी गई कुर्बानी मान्य नहीं होती। धार्मिक नियमों के तहत बकरे, भेड़ या अन्य स्वीकृत पशु की कुर्बानी दी जाती है। फिर रसोई में गोश्त पकाया जाता है फिर पारंपरिक पकवानों के साथ एक साथ बैठकर परिवार के सदस्य भोजन करते हैं। शाम के वक्त बड़े-बुजुर्ग बच्चों को प्यार से ईदी देते हैं। नए कपड़े पहने बच्चे घर-घर जाकर अपनी ईदी जमा करते हैं। शाम के समय लोग अपने रिश्तेदारों, दोस्तों और हिंदू-मुस्लिम भाइयों के घर ईद मिलने जाते हैं। घरों में मेहमानों को  शीर-खुरमा और मटन के पकवान परोसे जाते हैं। इस दिन का समापन इस संतोष के साथ होता है कि समाज का कोई भी गरीब परिवार आज के दिन भूखा नहीं सोय। आज के दिन लोग रात में शांति व बरकत की दुआ के साथ दिन का समापन करते हैं।

फोटो सौजन्य- गूगल

Eid-ul-Fitra is a symbol of mutual brotherhood, love and unity

Eid-Ul-Fitra: रमजान के 30 रोजे रखने के बाद अब ईद की खुशियों का खास पल आया है। सऊदी अरब, यूएई और अन्य खाड़ी देशों में ईद-उल-फितर मनाई जा रही है, जबकि भारत में 21 मार्च को ईद-उल-फितर मनाई जाएगी। इस मौके को लेकर मुस्लिमों में हर्षोल्लास का माहौल है। हर कोई ईद की तैयारियों में जुटा हुआ है। रोजेदार पूरे महीने रोजा रखने के बाद इस खास दिन का बेसब्री से इंतजार करते हैं। 21 मार्च को ईद-उल-फितर के दिन लोग सुबह ईदगाह या मस्जिदों में जाकर नमाज अदा करते हैं और अल्लाह का शुक्रिया अदा करते हैं।

Eid-ul-Fitra is a symbol of mutual brotherhood, love and unity

नमाज के बाद मुबारकबाद देने का सिलसिला शुरू हो जाता है। लोग अपने घर-परिवार, रिश्तेदारों और पड़ोसियों के साथ मिलकर इस त्योहार को खुशी-खुशी मनाते हैं। ईद-उल-फितर को ‘मीठी ईद’ भी कहा जाता है, क्योंकि इस दिन घरों में खीर, सेवइयां और कई तरह के मीठे पकवान बनाए जाते हैं। लोग एक-दूसरे के गले मिलकर ईद की बधाई देते हैं। इस्लामिक मान्यताओं के मुताबिक रमजान इस्लामी कैलेंडर का 9वां महीना है।

इसी महीने में कुरान शरीफ का नाजिल (अवतरण) हुआ था, जिसे लैलतुल कद्र की पवित्र रात से जोड़ा जाता है। इसी वजह से मुस्लिम समुदाय के लोग पूरे रमजान के महीने में अल्लाह की इबादत करते हैं और रोजे रखते हैं। ईद का यह मुबारक दिन आपसी भाईचारे, मोहब्बत और एकता का प्रतीक है। इस दिन लोग गिले-शिकवे भुलाकर अपने दोस्तों, परिवार और करीबियों को ईद की मुबारकबाद देते हैं।

फोटो सौजन्य- गूगल

Unhealthy Partnership: 4 ways to tell if someone is hiding something from you

Unhealthy Partnership: जिंदगी में रिश्ता कोई भी हो उसे निभाने के लिए केवल आपसी प्यार से भी ज्यादा दोनों के बीच में ट्रस्ट और एक दूसरे का सम्मान होना जरूरी है। जब कभी रिश्तों के बीच में इन तीनों चीजों में से कोई भी कम होता है, तो वह रिश्ता धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगता है। धीरे-धीरे कमजोर पड़ रहे रिश्तों को जब संभाला ना जाए तो वे टूट जाते हैं। पर कुछ लोग यह अनुमान नहीं लगा पाते हैं कि रिश्ते कमजोर पड़ रहे हैं और उन्हें तब ही पता चलता है जब रिश्ता टूटने के कगार पर आ जाता है। एक दूसरे को पर्याप्त समय न दे पाने के कारण से आजकल पति-पत्नी के रिश्ते के बीच खटपट शुरू होने का खतरा बढ़ जाता है।

यह खटपट आहिस्ता आहिस्ता बढ़ने लगता है और एक दूसरे से बातें छुपाई जाने लगती हैं। ऐसा इसलिए किया जाता है, क्योंकि उन्हें लगने लगता है कि उनका जीवन साथी उसकी बातों को समझ ही नहीं पाएगा। अगर आपको लगता है कि आपका लाइफ पार्टनर आपके बातें छिपाने लगा है, तो ऐसा आप उनके बात करने के अंदाज से भी पता लगा सकते हैं। जानें बात करने के वे चार अंदाज जो बताते हैं कि आपका लाइफ पार्टनर आपके बातें छुपाने लगा है।

1. जीवन साथी के बातों को हल्के में लेना

अगर आपका लाइफ पार्टनर पहले आपकी सारी बातों को सुनता था लेकिन अब उसने धीरे-धीरे आपकी बातों को इग्नोर करना शुरू कर दिया है, तो यह एक अच्छा संकेत नहीं है। अगर आपके कुछ पूछने पर भी बातों को इग्नोर किया जा रहा है, तो हो सकता है कि आपका लाइफ पार्टनर आपके कुछ छिपाने की कोशिश कर रहा हो। अगर आपके कुछ पूछने पर किसी और ही बात का जवाब दिया जा रहा है, तो आपको खुलकर बात करने की जरूरत है।

2. किसी भी बात का जवाब हंसकर देना

Unhealthy Partnership: 4 ways to tell if someone is hiding something from you

हर बात को हंसी मजाक में टालना या फिर किसी सीरियस बात का जवाब भी हंसकर देना भी एक हेल्दी रिलेशनशिप का संकेत नहीं है। ऐसा आमतौर पर तब होता है, जब आपका पार्टनर आपको कोई खास बात भुलाने की कोशिश कर रहा है, हालांकि आपको लगता है कि आप किसी भी प्रकार के डॉक्टर के संपर्क

3. जीवन साथी के लिए समय की किल्लत होना

वैसे तो आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में किसी के पास भी टाइम नहीं होता है, लेकिन फिर भी अपने पार्टनर के लिए समय निकालना बहुत जरूरी है। अगर आपका लाइफ पार्टनर आपके लिए समय नहीं निकाल पा रहा है, तो यह भी एक हेल्दी रिलेशनशिप का अच्छा संकेत नहीं है। ऐसा करना कई परेशानियां पैदा कर सकता है, जिसका खास ध्यान रखना जरूरी है।

4. आपको इग्नोर कर प्लान बनाना

अगर आपका जीवन साथी अब आपके बिना ही बाहर घूमने फिरने या फिर पार्टी वगैरह के प्लान बनाने लगा है, तो यह भी एक संकेत हो सकता है। अगर आपके पूछने पर भी वह टालने का प्रयास कर रहा है तो उसके बात करने का यहा तरीका बताता है कि वह आपको इग्नोर करने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में अपने जीवन साथी से खुलकर इस बारे में बात करनी चाहिए, ताकि आपसी बातचीत से किसी भी तरह की उलझन को दूर किया जा सके।

फोटो सौजन्य- गूगल

These 5 easy ways can help bridge the growing gap in your relationship

Relation:

एक बेहतर और सामाजिक जिंदगी जीने के लिए सभी रिश्तों का साथ मिलना जरूरी है और हर रिश्ते का अपना अलग रोल होता है। बड़े-बुजुर्ग भी कहते हैं कि खुशहाल जीवन जीने के लिए रिश्तों का होना मायने रखता है। पर रिश्तों को बनाकर रखने के लिए भी बहुत सी चीजों का ध्यान रखना पड़ता है। रिश्तों को निभाने के लिए अगर सबसे पहले कुछ चाहिए तो वह समय है और आजकल लोगों के पास समय की किल्लत रहती है। इस भागदौड़ भरे जीवन में हर कोई अपने काम को लेकर इतना बिजी है कि वह अपने रिश्तों को वक्त नहीं दे पाता है। यही वजह है कि आजकल रिश्तों में दूरी बढ़ती जा रही है, जिसके बाद में गंभीर रिजल्ट भुगतने पड़ सकते हैं। अगर लगता है कि आपके रिश्तों की दूरी बढ़ती जा रही है, तो हम आपको कुछ खास तरीके बताएंगे जिनकी सहायता से आप अपने रिश्तों में बढ़ रही खाई को पाट सकते हैं।

वक्त देना शुरू करें

एक अच्छा रिश्ता निभाने के लिए अगर कोई चीज चाहिए होती है, तो वह समय ही है। समय रिश्ते को निभाने के लिए बहुत जरूरी है। इसलिए अपना काम भी करें लेकिन काम के बीच से ही कुछ समय निकाल कर अपने रिश्तों को दें। काम के बीच कुछ दिन की छुट्टी लेकर घर पर रहें या बाहर कहीं घूमने जाएं।

भावनाओं को समझना जरूरी

These 5 easy ways can help bridge the growing gap in your relationship

रिश्तों दूरी पैदा करने वाले सबसे बड़े कारणों में एक है एक दूसरे की भावनाओं को न समझना। आपके लिए भी जरूरी है कि अपने रिश्तों में एक दूसरे की भावनाओं को आप समझें। ऐसा करने से रिश्तों में आपसी जुड़ाव बढ़ता है और धीरे-धीरे दूरी खत्म हो जाती है।

एक दूसरे को कराए स्पेशल फील

रिश्तों के बीच दूरी किसी भी कारण से आई हो, उसे खत्म करने का सबसे अच्छा तरीका है एक दूसरे को स्पेशल फील कराना। ऐसा करके आप रिश्तों मे आए आपसी मनमुटाव कम कर सकते हैं। आप अपने अपनों के लिए पसंदीदा गिफ्ट दें या फिर कोई सरप्राइज घूमने-फिरने का प्लान रखें।

आपसी विश्वास को कायम रखें

अगर रिश्तों के बीच विश्वात मजबूत है, तो दूरी बनना इतना आसान नहीं है। इसलिए अगर आपको डर है कि कहीं आपके रिश्तों के बीच दूरी आ जाए तो अच्छा विकल्प है कि आप एक अपने रिश्तों के की बीच विश्वास को मजबूत करें। खुलकर अपनों से बात करें अपने दिल की सारी बात बताने व सुनने से धीरे-धीरे विश्वास मजबूत होने लगता है।

पर्सनल स्पेस रिश्तों के बीच मजबूती प्रदान करता है

आपसी रिश्तों के बीच पर्सनल स्पेस का होना भी जरूरी है और इसकी रिस्पेक्ट भी करनी चाहिए। इसलिए जब हम रिश्तों के बीच पर्सनल स्पेस में घुसने की कोशिश करते हैं, तभी रिश्तों में दूरी बढ़ने लगती है। लाइफ पार्टनर हो या कोई कितना भी करीबी रिश्ता हो हर किसी के पर्सनल स्पेस की रिस्पेक्ट करनी चाहिए।

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Shab-e-Barat is the night of worship, mercy, forgiveness and virtues

इस्लाम में Shab-E-Barat त्योहार की इस्लाम में बहुत अहमियत है। इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक शाबान महीने की 15वीं तारीख की रात में शब-ए-बारात मनाई जाती है जो मंगलवार को देश भर में मनाई गई। शब-ए-बारात इबादत, रहमत, मगफिरत और फजीलतों की रात के तौर पर मानी जाती है। जिसे लेकर मुस्लिम समुदाय के सभी लोग पूरी रात अल्लाह से अपने किए गए गुनाहों की माफी मांगते हैं।

Shab-e-Barat is the night of worship, mercy, forgiveness and virtues

खुदा की इबादत का यह दिन बहुत ही खास और पवित्र तरीके से मनाते हैं। शब-ए-बारात के मौके पर मस्जिद और कब्रिस्तानों को खास तरीके के सजाया जाता है। कब्रिस्तान में चारों तरफ रोशनी की जाती है, साथ-साथ कब्रों पर चिराग जलाकर मगफिरत की दुआएं मांगी जाती है। लोग मस्जिदों और कब्रिस्तानों में जाकर अपने पूर्वजों के लिए अल्लाह की इबादत करते हैं। इसे चार मुकद्दस रातों में से एक मानते हैं जिसमें पहली आशूरा की रात, दूसरी शब-ए-मेराज, तीसरी शब-ए-बारात और चौथी शब-ए-कद्र की रात होती है।

Shab-e-Barat is the night of worship, mercy, forgiveness and virtues

मुस्लिम में शिया समुदाय शब-ए-बारात को इमाम-ए-जमाना हजरत मेहदी की पैदाइश की खुशी में मनाते हैं उनका मानना है कि अल्लाह इमाम-ए-जमाना के जन्मदिन की खुशी में अपनी रहमतें बरसाते हैं। इसलिए इस्लाम के सभी समुदाय के लोग रात भर जागकर नमाज़ और कुरान की तिलावत करते हैं। इमाम-ए-जमाना की पैदाइश के मौके पर शिया समुदाय जगह-जगह महफिलों भी करते हैं।

बता दें कि शब-ए-बारात पर घरों को विशेष रूप से सजाते हैं और लजीज पकवान जैसे- बिरयानी, हलवा और हलीम आदि बनाया जाता है और इबादत के बाद गरीबों में भी बांटा जाता है।

फोचो सौजन्य- गूगल

The festival of Makar Sankranti is associated with faith, tradition, social unity and health

Makar Sankranti:

मकर संक्रांति के अवसर पर पूरे देश में तिल-गुड़ और खिचड़ी खाने और खिलाने का रिवाज है। लेकिन हमारे देश में एक हिस्सा ऐसा भी है जहां पर मकर संक्रांति के दिन दही-चुड़ा खाया जाता है।

मकर संक्रांति पर क्यों खाया जाता है?

भारत के हर हिस्से में मकर संक्रांति का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस साल मकर संक्रांति का त्योहार 14 और 15 जनवरी को मनाया जा रहा है। मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे उत्तरायण कहा जाता है।मकर संक्रांति के खास दिन तिल और गुड़ के लड्डू, खिचड़ी, पूरन पोली, गजक और उंधियू जैसे पकवान बहुत ही चाव से खाए जाते हैं। मकर संक्रांति के दिन तिल-गुड़ तो हर हिस्से में खाया जाता है। लेकिन भारत का एक हिस्सा ऐसा भी है जहां पर मकर संक्रांति के दिन दही-चूड़ा खाया जाता है।

मिथिला में मकर संक्रांति के दिन खाया जाता है दही और चूड़ा

The festival of Makar Sankranti is associated with faith, tradition, social unity and health

मिथिला में मकर संक्रांति केवल एक त्योहार नहीं बल्कि आस्था, परंपरा, सामाजिक एकता और स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ उत्सव है। इस दिन सबसे विशेष रूप से दही-चूड़ा खाया ही जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दही को हिंदू धर्म में शुद्ध और सात्विक माना गया है। वहीं, चावल को अन्न का राजा कहा जाता है। मकर संक्रांति पर सात्विक भोजन करने का विधान है। इसलिए मिथिला में मकर संक्रांति के दिन दही-चूड़ा खाया जाता है।

दही -चूड़ा खाने के फायदे

आयुर्वेद के मुताबिक चूड़ा कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होता है और दही शरीर में गर्मी को बनाए रखता है। मकर संक्रांति का त्योहार सर्दियों में मनाया जाता है। दही- चूड़ा को एक साथ खाने से सर्दियों में शरीर को अंदर से गर्म बनाए रखने में मदद मिलती है। ये कॉम्बो शरीर को बीमारियों से लड़ने की ताकत अंदर से देता है।

पाचन तंत्र को करता है मजबूत

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन पर प्रकाशित रिसर्च के अनुसार दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स होते हैं। दही खाने से पेट में गुड़ बैक्टीरिया बढ़ते हैं। इससे कब्ज, गैस और अपच की परेशानी दूर होती है। वहीं, चूड़ा पचाने में आसान होता है। जब आप दही और चूड़ा को एक साथ खाते हैं तो इससे मल नरम होता है। इससे सुबह पेट अच्छे से साफ होता है और पाचन तंत्र को मजबूत बनती है।

इम्यूनिटी स्ट्रांग करता है दही-चूड़ा

दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। मकर संक्रांति के खास मौके पर दही- चूड़ा खाने से शरीर की सर्दी में कम होने वाली इम्यूनिटी बढ़ती है। इससे सर्दी, खांसी और जुकाम की समस्या घटती है। जिन लोगों की इम्यूनिटी काफी कमजोर हैं, उन्हें मकर संक्रांति के दिन दोपहर के खाने में दही- चूड़ा जरूर खाना चाहिए।

हड्डियों और दांतों के लिए फायदेमंद

बता दें कि दही में कैल्शियम और फॉस्फोरस होता है। जबकि चूड़ा आयरन, फाइबर व प्रोटीन का अच्छा सोर्स है। जब आप दही- चूड़ा को एक साथ खाते हैं तो ये शरीर की हड्डियों और दांतों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। दही-चूड़ा खाने से शरीर को कैल्शियम मिलता है। इससे हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद मिलती है।

शरीर को देता है ऊर्जा

मकर संक्रांति के दिन अक्सर लोग सुबह जल्दी स्नान आदि करके पूजा, पाठ और दान करते हैं। इस प्रक्रिया को अपनाने के बाद शरीर को एनर्जी की जरूरत होती है। दही- चूड़ा खाने से शरीर को तुरंत एनर्जी मिलती है। खाने के बाद दही- चूड़ा तुरंत ग्लूकोज में बदल जाता है। इससे शरीर को ताजगी व एनर्जी मिलती है।

मकर संक्रांति के दिन कब खाएं दही-चूड़ा

परंपरा के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन दही -चूड़ा नाश्ते में तिलकुट, गुड़, सब्जी, अचार और चटनी के साथ खाया जाता है। कुछ लोग दोपहर के खाने में भी दही चूड़ा खाते हैं। आप अपनी हिसाब से मकर संक्रांति के दिन दही-चूड़ा खाने का मजा सकते हैं। ध्यान रहे कि किसी भी परिस्थिति में दही-चूड़ा रात को ना खाएं।

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First Time Sex

Thyroid Affects:आजकल के गलत खानपान और खराब लाइफस्टाइल की वजह से थायराइड प्रॉब्लम लोगों में आम बात हो गई है। बता दें कि थायराइड एक तितली के साइज की ग्रंथि होती है, जो गर्दन के भीतर मौजूद होती है। यह ग्लैंड थायरोक्सिन हार्मोन का उत्पादन करती है, जो शरीर के मेटाबॉलिक रेट और एनर्जी लेवल को नियंत्रित करता है। जब थायराइड ग्लैंड अपना काम ठीक से करना बंद कर देती है, हाइपोथायरायडिज्म और हाइपरथायराइडिज्म की समस्या होती है। थायराइड की बीमारी होने पर कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसकी वजह से तेजी से वजन में बदलाव, कमजोरी, चिड़चिड़ापन, मूड स्विंग्स, मसल्स में दर्द, कब्ज, स्किन ड्राई होना और बाल गिरने जैसी समस्याएं हो सकती है। अलावा इसके थायराइड की समस्या का असर सेक्स लाइफ पर भी पड़ता सकता है। आइए जानते हैं थायराइड के कारण सेक्स लाइफ कैसे प्रभावित होती है-

कैसे प्रभावित करता है महिलाओं की सेक्स लाइफ को थायराइड-

A Strong relationship needs regular sex

हाइपोथायरायडिज्म या कम सक्रिय थायरॉयड के कारण अक्सर थकान, अवसाद और कमजोरी जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं। अत्यधिक थकान या कमजोरी के कारण महिला की सेक्स ड्राइव प्रभावित हो सकती है। इससे यौन इच्छा में बदलाव हो सकता है और यौन क्रिया में कमी भी आ सकती है। अलावा इसके, हाइपोथायरायडिज्म के कारण योनि में सूखापन हो सकता है। दरअसल, थायराइड की समस्या की वजह से वजाइनल ल्युब्रीकेंट कम हो जाता है। यह यौन गतिविधि को असुविधाजनक या यहां तक ​​कि दर्दनाक बना सकता है।

वहीं दूसरी तरफ, हाइपरथायरायडिज्म या अतिसक्रिय थायराइड के कारण चिंता, बेचैनी, एंग्जायटी और सोने में कठिनाई जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इन सभी समस्याओं का सेक्स लाइफ पर बुरा असर पड़ता है। इसके कारण यौन इच्छा में कमी आ सकती है और इंटिमेसी भी प्रभावित होती है। जब आप थायरॉयड विकार से पीड़ित होते हैं, तो आपके टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम हो सकता है। यह आपकी कामेच्छा को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है।

क्या है इलाज?

अगर कोई लेडी इन समस्याओं का सामना कर रही है, तो उसे डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है। दवाओं और उचित उपचार से थायरॉयड के लक्षणों को कम करने में मदद मिल सकती है। संतुलित आहार और नियमित व्यायाम से हार्मोनल संतुलन बनाए रखा जा सकता है और ऊर्जा के स्तर में सुधार किया जा सकता है। इसके अलावा, अपनी भावनाओं और समस्याओं के बारे में अपने साथी के साथ खुलकर बात करें। इससे आपका रिश्ता मजबूत होगा और आपका पार्टनर उपचार प्रक्रिया के दौरान आपको भावनात्मक समर्थन प्रदान कर सकता है। ध्यान रखें कि थायराइड का समय पर इलाज किया जाए और इसे दवाओं से कंट्रोल में रखा जाए, तो लगभग सभी सेक्स प्रॉब्लम आसानी से दूर हो सकती हैं।

फोटो सौजन्य- गूगल

Libido: 3 home remedies to increase libido without medication

Libido: कामेच्छा की कमी आधुनिक जीवनशैली में कई लोगों की समस्या बन चुकी है। लोगों की लाइफस्टाइल में तनाव, एंग्जायटी, अनहेल्दी इटिंग और लगातार भागदौड़ के बीच उनकी फिजिकल और मेंटल हेल्थ के साथ-साथ सेक्सुअल लाइफ पर भी प्रभाव पड़ता है और आहिस्ता-आहिस्ता लोगों में सेक्स करने की इच्छा में कमी आने लगती है। लंबे वक्त तक कमेच्छा में कमी की समस्या की वजह से लोगों की शादीशुदा जिंदगी पर भी असर पड़ सकता है और इससे रिश्तों में गैप बढ़ जाता है। हालांकि, कई बार लोग कमेच्छा बढ़ाने के लिए दवाओं का सहारा भी लेते हैं। पर, इन दवाओं के दुष्प्रभाव होते हैं जो लंबे वक्त तक दिखायी दे सकते हैं।

ऐसे में दवाओं के बिना नेचुरली कामेच्छा बढ़ाने के लिए क्या करना चाहिए और किस तरह की सावधानियां बरतने से कामेच्छा की कमी दूर हो सकती है।

नेचुरली कामेच्छा बढ़ाने के उपाय क्या हैं?

Libido: 3 home remedies to increase libido without medication

सेक्स जीवन का एक अहम हिस्सा है और हेल्दी सेक्स लाइफ के लिए कामेच्छा काफी अहम है। अगर आपकी कामेच्छा कम है और आप इसे बढ़ाना चाहते हैं तो आपको खास कर तीन स्टेजेस पर काम करना होगा। ये स्टेज हैं शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्तर।

शारीरिक स्तर पर कामेच्छा बढ़ाने के लिए डाइट में बदलाव जरूरी

अच्छी डाइट हेल्दी शरीर और हेल्दी लिबिडो लेवल के लिए भी जरूरी है। आप अपनी कम कमेच्छा की समस्या से राहत पाना चाहते हैं तो आप अपनी डाइट में बदलाव करें। अपनी डेली डाइट में बदलाव करें। आप जिंक और एल-आर्जिनिन जैसे तत्वों से भरपूर फूड्स जैसे- बींस, सीड्स, लॉब्स्टर्स और प्याज जैसी चीजों का सेवन करें।

कामेच्छा बढ़ाने के लिएआप चॉकलेट, अनार, एवोकाडो, ग्रीन टी, पम्पकिन सीड्स और तरबूज जैसे फूड्स का सेवन कर सकते हैं।

इन सबके साथ आप प्रोसेस्ड फूड्स से परहेज करें क्योंकि, प्रोसेस्ड फूड्स आपके शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं और लिबिडो भी कम करते हैं।

रोजाना करें एक्सरसाइज

रोजाना हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करें। आप मसल्स स्ट्रेंथनिंग एक्सरसाइज, कार्डियाक एक्सरसाइज करें। आप रोजाना योगाभ्यास कर सकते हैं और मेडिटेशन का भी अभ्यास करें। इससे आपको कामेच्छा बढ़ाने में मदद मिलेगी।

नींद की कमी ना होने दें

Libido: 3 home remedies to increase libido without medication

इन सबके अलावा रोजाना 6-7 घंटे की गहरी नींद सोएं। इससे आपका तनाव कम होगा और कामेच्छा बढ़ाने में भी आसानी होगी।

अपनी बीमारियों को करें मैनेज

अगर आपको हाइपटेंशन, मोटापा या अन्य किसी प्रकार की पुरानी स्वास्थ्य समस्या या क्रोनिक डिजिज है तो उसे मैनेज करें और नियंत्रित रखने के लिए जरूरी उपाय करें।

इन आदतों से बचें

अल्कोहल का सेवन करते हैं तो उसे धीरे-धीरे बंद कर दें। इसी तरह स्मोकिंग से भी कामेच्छा कम होती है इसीलिए, आप अपनी धूम्रपान की आदत छोड़ दें।

इंटीमेसी के लिए निकालें कीमती समय

अपनी व्यस्त जीवनशैली के बीच अपने पार्टनर के लिए समय जरूर निकालें। अपने पार्टनर के साथ क्वालिटी टाइम बिताएं और अपनी रिलेशनशिप की अच्छी बातों को याद करें। इससे आपकी रिलेशनशिप में नयी जान आएगी और आपको अपने पार्टनर से इमोशनली कनेक्ट कर पाने में भी मदद होगी।

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Chhath Puja: On Chhath, the great festival of folk faith

CHHATH PUJA: देशभर में लोक आस्था का महापर्व छठ पूरे हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। सोमवार शाम को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने के लिए बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखांड समेत देश के कई हिस्सों में नदियों के घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।

Chhath Puja

दिल्ली में भी यमुना तट पर पारंपरिक गीतों और पूजा के बीच माहौल आस्थामय दिखा। इस अवसर पर ना सिर्फ आम लोगों के साथ ही नेतागण और भोजपुरी इंडस्‍ट्री के कलाकार भी भक्ति में लीन नजर आए। घाटों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और प्रशासन ने व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष टीम तैनात की थी। छठ पूजा की खासियत यह रही कि लोग सुबह से ही तैयारी में जुटे रहे और शाम होते ही सूर्य को अर्घ्‍य देने के लिए घाटों पर पहुंचे। सोमवार को इस पर्व के तीसरे दिन व्रती महिलाओं ने डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया।

Importance of 'Chhath', the great festival of folk faith, from bathing to Arghya

बिहार में छठ ना सिर्फ आस्था का पर्व है, बल्कि इस बार चुनावी मौसम ने इसमें राजनीति का रंग भी जोड़ दिया है। विधानसभा चुनाव के कारण कई उम्मीदवार घाटों पर पहुंच रहे हैं और श्रद्धालुओं से जनसंपर्क करते नजर आए।

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Chhath Puja: Learn the significance and method of preparation of Kharna

Chhath Puja: महापर्व छठ का आगाज 25 अक्टूबर को हो चुका है। चार दिनों तक चलने वाले छठ पर्व का समापन 29 अक्टूबर को उगते सूर्य को अर्घ्य देकर होगा। पहले दिन नाहय-खाय और आज यानी 26 अक्टूबर को छठ पर्व के दूसरे दिन खरना मनाया जाता है। खरना का भी अपना विशेष महत्व है। छठ में सूर्य देवता के साथ ही छठी मैया की भी पूजा की जाती है। यह त्योहार बिहार का विशेष त्योहार है जिसे झारखंड, उत्तर प्रदेश में रहने वाले लोग बड़े ही आस्था के साथ मनाते हैं। खरना को लोहंडा भी कहा जाता है। खरना पर खास प्रसाद बनाया जाता है जिसका अपना अलग महत्व है। इसी खास प्रसाद को व्रती खाते हैं।

खरना पर प्रसाद में क्या बनता है?

Chhath Puja

खरना 26 अक्टूबर को है। इस दिन गुड़ वाली खीर और रोटी बनती है। यह खीर मिट्टी का नया चूल्हा बनाकर तैयार किया जाता है। वह भी आम की लकड़ी जलाकर बनाने की प्रथा है। दूसरी लकड़ी का इस्तेमाल इसमें वर्जित माना गया है। व्रती पूजा के बाद प्रसाद के तौर पर इसका ही सेवन करते हैं।

खरना प्रसाद का महत्व ?

खरना वाले दिन व्रती पूरे दिन उपवास रखते हैं। शाम के समय जब मिट्टी का चूल्हा बनाया जाता है, तो उस पर गुड़ की खीर, रोटी बनाई जाती है। आप इसे पीतल या मिर्टी के बर्तन में बना सकते हैं। साथ ही गेहूं की रोटी या फिर पूड़ी बनाई जाती है। शाम में सूर्य देव को पूजा-आराधना करके इस प्रसाद को ग्रहण करते हैं।

आम की लकड़ी ही क्यों किया जाता है इस्तेमाल?

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक आम का पेड़ छठी मइया को प्रिय है। आम की लकड़ी शुद्ध, सात्विक होता है। मान्यता है कि आम की लकड़ी पर पके भोजन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। साथ ही इसका धुआं वातावरण को शुद्ध करता है।

खरना का क्या है महत्व?

खरना छठ पर्व के दूसरे दिन पड़ता है और यहीं से 36 घंटे वाला निर्जला व्रत शुरू होता है। खीर और रोटी खाने के बाद व्रती अन्न और जल ग्रहण नहीं करते हैं। खरना के दिन बनने वाली गुड़ की खीर खाने से छठी मइया का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह सेहत, सुख-समृद्धि, संतान सुख भी देता है। व्रती जब सूर्य देव को अर्घ्य दे देते हैं तो इस प्रसाद का सेवन किया जाता है। उसके बाद ही घर के अन्य सदस्य भी इसे खाते हैं। यहां से शुरू होता है व्रती का 36 घंटे का निर्जला व्रत 27 अक्टूबर को संध्या अर्घ्य और 28 को उगते सूरज को अर्घ्य देकर पूजा का पारण होता है।

खरना प्रसाद गुड़ की खीर बनाने की विधि

इसके लिए मिट्टी या पीतल के बर्तन में दूध डालकर उबालें। इसमें चावल को तीन-चार बार साफ पानी से धोकर डालें। जब चावल पक जाए तो उसमें गुड़ डालकर पकाएं, आंच को कम ही रखें, आप इसमें थोड़ा सा शुद्ध घी भी मिला सकते हैं। अपना पसंदीदा ड्राई फ्रूट्स, इलाचयी पाउडर भी डाल दें।

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