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Monthly Archives: July 2026

Foods For Pregnant Woman

Manson Infections: वैसे तो बारिश का मौसम का सभी को इंतजार होता है लेकिन ये मौसम अपने साथ कुछ संक्रमण भी लेकर आता है। बारिश आते ही गर्मी से निजात तो मिलती है पर यह मौसम हेल्थ पर बुरा असर भी डाल सकता है। खासकर प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए यही मौसम कुछ नई परिशानियों का सबब भी बन जाता है। आइये जानते हैं इस मौसम पर एक्सपर्ट की राय-

वह बताती हैं कि गर्भावस्था में शरीर की इ्मयूनिटी अपने आप कुछ हद तक कमजोर हो जाती है। ऐसा इसलिए होता है ताकि शरीर भ्रूण को बाहरी तत्व समझकर रिजेक्ट न कर दे। लेकिन इसी कारण से मानसून की नमी, जगह-जगह जमा पानी और बैक्टीरिया व फंगस के पनपने के लिए अनुकूल माहौल बनने पर प्रेग्नेंट महिलाएं जल्दी इंफेक्शन की चपेट में आ जाती है।

मानसून में बढ़ने लगते हैं UTI के मामले

If you are troubled by vomiting during pregnancy then don't panic

मानसून में गर्भवति महिलाओं में यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन के मामले अचानक बढ़ जाते हैं और डॉक्टर इसकी वजह भी साफ बताती हैं। नमी वाले मौसम में पसीना और गीलापन त्वचा पर काफी देर तक बना रहता है, जो बैक्टीरिया के पनपने के लिए एकदम सही जगह बन जाता है। इसके साथ ही हार्मोनल बदलाव के चलते वेजाइनल पीएच भी बदलता रहता है। इससे यीस्ट इंफेक्शन जैसी फंगल दिक्कतें भी परेशान करने लगती हैं।

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एक्सपर्ट के मुताबिक यहां एक बात ध्यान रखने की जरूरत है कि अगर UTI का समय पर इलाज न हो, तो कुछ गंभीर मामलों में यह प्रीटर्म लेबर यानी समय से पहले डिलीवरी तक की वजह बन सकता है।

ये बीमारियां भी बढ़ा सकती हैं जोखिम

विशेषज्ञ के अनुसार सिर्फ यूटीआई ही नहीं, बल्कि मानसून पानी और मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों का भी सीजन होता है। डेंगू, मलेरिया और टाइफाइड इस मौसम में बड़ा खतरा बनकर सामने आते हैं। प्रेग्नेंसी के दौरान डेंगू होने पर प्लेटलेट्स तेजी से गिर सकते हैं और भी गंभीर रूप ले सकते हैं। वहीं दूषित पानी या खाने से टाइफाइड और पेट के इंफेक्शन होने का खतरा भी बना रहता है। इनका असर सिर्फ मां ही नहीं, बल्कि भ्रूण की सेहत पर भी पड़ सकता है।

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ऐसे करें बचाव?

विशेषज्ञ की सलाह बहुत सीधी है, सूती और ढीले कपड़े पहनें, इंटिमेट एरिया को सूखा-साफ रखें, और पानी खूब पिएं ताकि UTI से बचा जा सके। घर के आसपास पानी जमा न होने दें, मच्छरदानी या रिपेलेंट का इस्तेमाल करें और बाहर का या कटा हुआ खाना खाने से जितना बचा जाए उतना अच्छा। और सबसे जरूरी- बुखार, जलन, अजीब-सा डिस्चार्ज या पेट दर्द जैसी कोई भी बात नज़रअंदाज़ न करें, फौरन अपने डॉक्टर से मिलें।

ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें?

अगर मानसून में आपको ऐसा लगे कि बुखार, जननांगों में जलन, पेशाब करते समय जलन, भ्रूण की हलचल कम महसूस होना, तेज पेट दर्द, ब्लीडिंग आदि हो रहे हैं तो बिना देर किए डॉक्टर के पास जाएं। उन्हें अपनी समस्या बताएं।

फोटो सौजन्य- गूगल

If there is pain in the breast just before periods

Health First: ज्यादातर महिलाएं बिजी दिनचर्या, केयर संबंधी जिम्मेदारियों या अन्य समस्याओं को मामूली समझकर शुरुआती लक्षणों को दरकिनार कर देती हैं। हालांकि महिलाओं में ये अनदेखे लक्षण कभी-कभी सीरियस बीमारियों के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। थकान और अनियमित मासिक धर्म से लेकर शरीर में होने वाले सूक्ष्म बदलावों तक, इन संकेतों को अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए। महिलाओं की आम स्वास्थ्य समस्याओें को समझना, शुरुआती संकेतों को पहचानना और मेडिकल मदद कब लेनी चाहिए, यह जानना जटिलताओं को रोकने और लंबे हेल्थ के एहसास को सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

महिलाएं अक्सर हेल्थ रिलेटेड लक्षणों तो क्यों करती हैं नजरअंदाज-

महिलाएं अक्सर अपने स्वास्थ्य की तुलना में परिवार और काम को प्राथमिकता देती हैं। इससे अक्सर निदान और उपचार में देरी होती है।

  1.  व्यस्त जीवनशैली और एक साथ कई जिम्मेदारियों को निभाना
  2.  असुविधा या दर्द को सामान्य मानने की प्रवृत्ति• लक्षणों के बारे में जागरूकता का अभाव
  3.  यह मान लेना कि लक्षण अस्थायी हैं या तनाव से संबंधित हैं
    स्वास्थ्य संबंधी वे प्रमुख मुद्दे जिन्हें महिलाएं अक्सर नजरअंदाज कर देती हैं।

लगातार थकान रहना

Stress in women can affect scientific and physical health

थकान महसूस होने को अक्सर तनाव या नींद की कमी बताकर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
• यह एनीमिया , थायरॉइड विकार या पोषण संबंधी कमियों का संकेत हो सकता है।
• लगातार थकान महिलाओं में थकान के सबसे आम कारणों में से एक है, जिसका मूल्यांकन उन्हें करवाना चाहिए।
अनियमित मासिक धर्म
मासिक धर्म की अनियमितताओं को अक्सर सामान्य माना जाता है।
• यह हार्मोनल असंतुलन का संकेत हो सकता है।
• यह पीसीओएस, थायराइड की समस्याओं या तनाव से संबंधित हो सकता है।
• अनियमित मासिक धर्म के कारणों में से एक महत्वपूर्ण कारण है।

बेवजह वजन परिवर्तन

जीवनशैली में बदलाव किए बिना अचानक वजन बढ़ना या घटना होना अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
• यह थायरॉइड संबंधी विकार या चयापचय संबंधी समस्याओं का संकेत हो सकता है।
• हार्मोनल असंतुलन के लक्षणों से जुड़ा हुआ
बार-बार सिरदर्द
सिरदर्द को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है या इसका इलाज खुद ही कर लिया जाता है।
• यह तनाव, माइग्रेन या किसी अन्य अंतर्निहित बीमारी के कारण हो सकता है।
• लगातार सिरदर्द होने पर डॉक्टर से परामर्श लेना आवश्यक है।

स्तन में परिवर्तन

Breast Cancer

स्तन स्वास्थ्य में होने वाले बदलावों को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

• गांठें, दर्द या स्राव
• बेहतर परिणामों के लिए शीघ्र निदान अत्यंत महत्वपूर्ण है।
श्रोणि में दर्द
अक्सर इसे मासिक धर्म की असुविधा मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
• यह एंडोमेट्रियोसिस, संक्रमण या अंडाशय संबंधी समस्याओं का संकेत हो सकता है।
• दीर्घकालिक दर्द के लिए मूल्यांकन आवश्यक है
पाचन संबंधी समस्याएं (पेट फूलना, एसिडिटी)
आमतौर पर इन्हें मामूली समस्याएं माना जाता है।
• इसका संबंध आंतों के स्वास्थ्य या हार्मोनल परिवर्तनों से हो सकता है।
• लगातार बने रहने वाले लक्षण गंभीर समस्याओं का संकेत हो सकते हैं।

नींद की समस्याएँ

Your sleeping position reveals your personality

नींद की कमी को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है या इसे सामान्य मान लिया जाता है।
• यह तनाव, हार्मोनल असंतुलन या मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से संबंधित हो सकता है।
• यह समग्र स्वास्थ्य और ऊर्जा स्तर को प्रभावित करता है।
मनोदशा में परिवर्तन और चिंता
भावनात्मक लक्षणों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
• यह हार्मोनल उतार-चढ़ाव से संबंधित हो सकता है।
• यह चिंता या अवसाद का संकेत हो सकता है।

मनोदशा में परिवर्तन और चिंता

भावनात्मक लक्षणों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।

  • यह हार्मोनल उतार-चढ़ाव से संबंधित हो सकता है।
  • यह चिंता या अवसाद का संकेत हो सकता है।

चेतावनी के संकेत जिन्हें कभी भी अनदेखा नहीं करना चाहिए

इन संकेतों पर जरूर दें ध्यान :

  • ऐसे लक्षण जो कुछ दिनों से अधिक समय तक बने रहते हैं
  • समय के साथ बिगड़ती जाने वाली स्थितियाँ
  • एक साथ कई लक्षण प्रकट होना
  • शरीर में अचानक या असामान्य परिवर्तन

इन लक्षणों को नज़रअंदाज़ करने से होने वाले स्वास्थ्य जोखिम

लक्षणों को नज़रअंदाज़ करने से निम्नलिखित समस्याएं हो सकती हैं:

  • गंभीर बीमारियों के निदान में देरी
  • रोग की प्रगति
  • जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है
  • जीवन की गुणवत्ता में कमी

महिलाओं को डॉक्टर से कब परामर्श लेना चाहिए?

यदि निम्नलिखित स्थितियां हों तो चिकित्सीय सलाह लें:

  • लक्षण अपेक्षा से अधिक समय तक बने रहते हैं
  • अचानक या गंभीर असुविधा होती है
  • समस्याएँ बार-बार सामने आती रहती हैं।
  • ये लक्षण दैनिक जीवन में बाधा उत्पन्न करते हैं।

नियमित स्वास्थ्य जांच का महत्व

नियमित जांच रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

  • स्वास्थ्य समस्याओं का शीघ्र पता लगाना
  • मौजूदा स्थितियों की निगरानी
  • निवारक देखभाल और स्क्रीनिंग।
Excessive smartphone use by children

बच्चों के लिए Smartphone का लत लगना नशा की तरह दिमाग पर हावी हो जाता है जिसे लेकर दुनियाभर के पेरेंट्स परेशान रहते हैं। बता दें कि जहां बच्चे दिनभर खेल-कूदते नजर आते थे और शरारतें करतें थे, अब वे चुपचाप एक कमरे के किसी कोने में घंटों वीडियो और शॉर्ट्स स्क्रॉल करने में व्यस्त दिखाई देते हैं। पेरेंट्स को अच्छे से मालूम होता है कि बच्चे अगर अधिक फोन का इस्तेमाल करेंगे तो उनकी आंखें खराब हो सकती हैं, लेकिन यहां बात आंखें खराब होने तक सीमित नहीं है बल्कि ज्यादा स्क्रीन देखने का प्रभाव बच्चों के दिमाग प  र भी बहुत ज्यादा पड़ रहा है जिसे न तो अभी बच्चे नोटिस कर पा रहें हैं और ना ही पेरेंट्स। इस टॉपिक पर दुनियाभर में कई रिसर्च हो चुकी हैं और ज्यादातर में यह मिला है कि स्मार्टफोन या कोई भी डिजिटल स्क्रीन को लंबे समय तक देखना बच्चे की सिर्फ आंखों पर ही नहीं बल्कि दिमाग पर भी असर डालता है। बच्चों के दिमाग पर स्क्रीन से पड़ रहे कुप्रभाव के बारे में ये रही जानकारियां-

क्या स्मार्टफोन्स के इस्तेमाल से खोखल हो रहा बच्चों का दिमाग?

Excessive smartphone use by children

‘साइंस डायरेक्ट’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक Adolescent Brain Cognitive Development Study (ABCD) की एक रिसर्च में 10 से 13 साल के कई हजारों बच्चों पर अध्यन की गई। जिसमें बच्चों के सोशलमीडिया और स्मार्टफोन्स के इस्तेमाल को एनालाइज किया गया और साथ ही में इमेजिंग स्कैन्स की मदद से उनके ब्रेन की संरचना का निरीक्षण किया गया। जिसमें कुछ क्षेत्रों में पाया गया कि जो बच्चे ज्यादा स्क्रीनटाइम दे रहे हैं या समार्टफोन्स का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, उनकी ब्रेन की कोर्टिकल मोटाई थोड़ी कम मिली और साथ ही ब्रेन वॉल्यूम भी अन्य बच्चों से थोड़ी कम मिली। साइंसडायरेक्ट के एक्सपर्ट्स के ब्रेन की ये दोनों चीजें दिमाग के कई जरूरी कार्यों को करने में मदद करती हैं जैसे –

  1. ध्यान देना या फोकस करना
  2. निर्णय लेना (डिसीजन मेकिंग)
  3. सोचना व समझना (रीजनिंग)
  4. याददाश्त या याद रखने की क्षमता

हालांकि, एक्सपर्ट्स ने यह भी बताया कि बचपन में कोर्टिकल थाइनिंग ब्रेन डेवलपमेंट का एक सामान्य हिस्सा हो सकता है। क्योंकि इस दौरान ऐसे न्यूरल कनेक्शन को हटाता रहता है, जिनकी जरूरत नहीं होती है ताकि न्यूरल नेटवर्क बिना किसी उलझन के सामान्य रूप से काम करता रहे।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स

Excessive smartphone use by children

एक्सपर्ट के अनुसार अगर बच्चा लंबे समय तक स्मार्टफोन्स देखता या फिर उसका स्क्रीनटाइम ज्यादा है, तो उससे बच्चे की आंखों पर विपरीत असर तो पड़ता ही है, दिमाग की कार्यक्षमता और ब्रेन हेल्थ को भी काफी नुकसान पहुंचता है। रिसर्चों में भी साबित हो चुका है कि जिन बच्चों का स्क्रीनटाइम ज्यादा होता है, अन्य बच्चों की मुकाबले उनके दिमाग की क्षमता कम हो सकती है।

बच्चे की स्मार्टफोन की लत कैसे छुड़ाएं

इस समस्या को लेकर डॉक्टर ने बताया कि बच्चे का स्मार्टफोन एडिक्शन खत्म करने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है उसे टाइम देना और जितना हो सके उसे फिजिकल एक्टिविटी में शामिल करना। इसमें ध्यान रखना होगा कि बच्चे को डांटकर उसकी फोन की आदत नहीं छुड़ानी है, बल्कि उसके लिए नीचे लिखी बातों का ध्यान रखना है-

  • सबसे पहले बच्चे के आगे खुद फोन इस्तेमाल करना बंद कर दें।
  • जितना हो सके फोन्स को बच्चों की पहुंच से दूर रखें और ताकि उन्हें फोन की याद न आए।
  • बच्चे को खुद टाइम देना शुरू कीजिए उनसे बातें करें, कहानियां सुनाएं।
  • बच्चे को घर के छोटे-छोटे काम करना सिखाएं जैसे अपना बैग खुद पैक करना।
  • रोजाना बच्चे को आउटडोर एक्टिविटी कराएं, ऐसे स्पोर्ट्स में शामिल करें जिनमें उसकी ज्यादा रुचि हो आदि।