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Micro Walk: The risks of sitting in a chair and working all day at the office

Micro Walk:

हमारे साथ रहने वाले ऐसे कई लोग करीब 10 घंटे लगातार कंप्यूटर या लौपटॉप पर अपना कार्य करते हैं। ऐसे में जब एक्सरसाइज की बात आती है तो सबसे पहले जुबान पर एक ही पंक्ति आती है, समय नहीं है पर क्या आप जानते हैं कि 10 घंटे के बीच महज कुछ मिनटों के वॉक से आप खुद को फिट रख सकते हैं। ‘माइक्रो वॉक’ लगातार डेस्क पर काम करने वालों के लिए एक शानदार एक्सरसाइज हो सकती है। सिर्फ कुछ मिनटों की एक्सरसाइज आपको कमर और गर्दन में पेन से राहत दिलाने के साथ-साथ मोटापा, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट डिजीज जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी कम हो सकता है। आइये जानते हैं क्या मसले पर क्या है एक्सपर्ट की राय-

जानें क्या है माइक्रो वॉक-

माइक्रो वॉक यानी दिनभर में कई बार 01 से 10 मिनट तक छोटी-छोटी वॉक करना। यानी आपको जिम जाने या लंबा वर्कआउट करने की जरूरत नहीं है। हर 30 से 60 मिनट बाद अपनी कुर्सी से उठकर कुछ मिनट चलना भी माइक्रो वॉक कहलाता है।

एक्सपर्ट का कहना है कि लंबे समय तक लगातार बैठे रहने की आदत शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकती है। ऐसे में दिनभर के दौरान छोटी-छोटी वॉक करने से शरीर एक्टिव रहता है और कई स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा कम किया जा सकता है।

लंबे समय तक बैठे रहने के नुकसान

पूरे दिन बैठे रहने से शरीर की मांसपेशियां कम सक्रिय रहती हैं। इससे ब्लड सर्कुलेशन धीमा पड़ सकता है और शरीर की कैलोरी खर्च करने की क्षमता भी घट जाती है। इसके अलावा ब्लड शुगर कंट्रोल करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है और समय के साथ हृदय रोग का खतरा भी बढ़ सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी लंबे समय तक बैठे रहने को कई नॉन कम्युनीकेबल डिजीज का एक प्रमुख जोखिम कारक मानता है।

ऐसे मिलते हैं माइक्रो वॉक से फायदे-

Micro Walk: The risks of sitting in a chair and working all day at the office

विशेषज्ञ का कहना है कि हर 30 से 60 मिनट में सिर्फ 05 मिनट की वॉक भी शरीर पर पॉजिटिव असर डाल सकती है, जैसे-

1. ब्लड सर्कुलेशन होता है बेहतर

लगातार बैठे रहने से पैरों और शरीर के निचले हिस्से में ब्लड सर्कुलेशन धीमा हो सकता है। कुछ मिनट की वॉक करने से मांसपेशियां सक्रिय होती हैं और पूरे शरीर में रक्त संचार बेहतर होता है। इससे थकान भी कम महसूस होती है।

2. ब्लड शुगर कंट्रोल करने में मदद

खाना खाने के बाद थोड़ी देर टहलने से शरीर ग्लूकोज का बेहतर उपयोग कर पाता है। कई NCBI में छपी रिपोर्ट में पाया गया है कि नियमित माइक्रो वॉक ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखने में मदद कर सकती है।

3. ब्लड प्रेशर हो सकता है कंट्रोल

रिसर्च बताते हैं कि हर आधे घंटे बाद कुछ मिनट पैदल चलने से ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है। यह आदत हृदय स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक मानी जाती है।

4. मूड और फोकस हो सकता है बेहतर

लगातार स्क्रीन पर काम करने से मानसिक थकान बढ़ सकती है। कुछ मिनट की वॉक दिमाग को आराम देती है और काम पर दोबारा ध्यान लगाने में मदद करती है। इससे तनाव भी कम हो सकता है और उत्पादकता बढ़ सकती है।

ऑफिस में माइक्रो वॉक को कैसे बनाएं आदत?

माइक्रो वॉक को अपनी लाइफस्टाइल में शामिल करना मुश्किल नहीं है। इसके लिए आप कुछ आसान तरीके अपना सकते हैं।

  • हर 30 से 60 मिनट बाद अपनी सीट से उठें।
  • लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करें।
  • किसी सहकर्मी से बात करनी हो तो उसके डेस्क तक पैदल जाएं।
  • फोन पर बात करते समय चलते-चलते बातचीत करें।
  • पानी भरने या प्रिंटर तक जाने के लिए खुद पैदल जाएं।
  • मोबाइल या कंप्यूटर में हर घंटे का रिमाइंडर लगाएं।

एक आसान तरीका है माइक्रो वॉक 

एक्सपर्ट का कहना है कि माइक्रो वॉक लंबे समय तक बैठे रहने के नुकसान को कम करने का एक आसान तरीका है, लेकिन इसे नियमित व्यायाम का ऑप्शन नहीं माना जा सकता। बेहतर हेल्थ के लिए हफ्ते में कम से कम 150 मिनट की एक्सरसाइज आवश्यक है।

फोटो सौजन्य- गूगल

Foods For Pregnant Woman

Manson Infections: वैसे तो बारिश का मौसम का सभी को इंतजार होता है लेकिन ये मौसम अपने साथ कुछ संक्रमण भी लेकर आता है। बारिश आते ही गर्मी से निजात तो मिलती है पर यह मौसम हेल्थ पर बुरा असर भी डाल सकता है। खासकर प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए यही मौसम कुछ नई परिशानियों का सबब भी बन जाता है। आइये जानते हैं इस मौसम पर एक्सपर्ट की राय-

वह बताती हैं कि गर्भावस्था में शरीर की इ्मयूनिटी अपने आप कुछ हद तक कमजोर हो जाती है। ऐसा इसलिए होता है ताकि शरीर भ्रूण को बाहरी तत्व समझकर रिजेक्ट न कर दे। लेकिन इसी कारण से मानसून की नमी, जगह-जगह जमा पानी और बैक्टीरिया व फंगस के पनपने के लिए अनुकूल माहौल बनने पर प्रेग्नेंट महिलाएं जल्दी इंफेक्शन की चपेट में आ जाती है।

मानसून में बढ़ने लगते हैं UTI के मामले

If you are troubled by vomiting during pregnancy then don't panic

मानसून में गर्भवति महिलाओं में यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन के मामले अचानक बढ़ जाते हैं और डॉक्टर इसकी वजह भी साफ बताती हैं। नमी वाले मौसम में पसीना और गीलापन त्वचा पर काफी देर तक बना रहता है, जो बैक्टीरिया के पनपने के लिए एकदम सही जगह बन जाता है। इसके साथ ही हार्मोनल बदलाव के चलते वेजाइनल पीएच भी बदलता रहता है। इससे यीस्ट इंफेक्शन जैसी फंगल दिक्कतें भी परेशान करने लगती हैं।

मानसून के मौसम में बालों पर किन चीजों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए?

मानसून में कौन से फल खाने चाहिए? ये 5 फल बढ़ा सकती है आपकी इम्यूनिटी आंखों का सफेद हिस्सा लाल क्यों हो जाता है? जानें इसके कारण और कब डॉक्टर से मिलना चाहिए।

एक्सपर्ट के मुताबिक यहां एक बात ध्यान रखने की जरूरत है कि अगर UTI का समय पर इलाज न हो, तो कुछ गंभीर मामलों में यह प्रीटर्म लेबर यानी समय से पहले डिलीवरी तक की वजह बन सकता है।

ये बीमारियां भी बढ़ा सकती हैं जोखिम

विशेषज्ञ के अनुसार सिर्फ यूटीआई ही नहीं, बल्कि मानसून पानी और मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों का भी सीजन होता है। डेंगू, मलेरिया और टाइफाइड इस मौसम में बड़ा खतरा बनकर सामने आते हैं। प्रेग्नेंसी के दौरान डेंगू होने पर प्लेटलेट्स तेजी से गिर सकते हैं और भी गंभीर रूप ले सकते हैं। वहीं दूषित पानी या खाने से टाइफाइड और पेट के इंफेक्शन होने का खतरा भी बना रहता है। इनका असर सिर्फ मां ही नहीं, बल्कि भ्रूण की सेहत पर भी पड़ सकता है।

इसे भी पढ़ें: बच्चों का Smartphone का ज्यादा इस्तेमाल करना न सिर्फ बच्चों की आंखों पर असर करता है बल्कि दिमाग को खोखला कर देता है! देखें रिसर्च

ऐसे करें बचाव?

विशेषज्ञ की सलाह बहुत सीधी है, सूती और ढीले कपड़े पहनें, इंटिमेट एरिया को सूखा-साफ रखें, और पानी खूब पिएं ताकि UTI से बचा जा सके। घर के आसपास पानी जमा न होने दें, मच्छरदानी या रिपेलेंट का इस्तेमाल करें और बाहर का या कटा हुआ खाना खाने से जितना बचा जाए उतना अच्छा। और सबसे जरूरी- बुखार, जलन, अजीब-सा डिस्चार्ज या पेट दर्द जैसी कोई भी बात नज़रअंदाज़ न करें, फौरन अपने डॉक्टर से मिलें।

ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें?

अगर मानसून में आपको ऐसा लगे कि बुखार, जननांगों में जलन, पेशाब करते समय जलन, भ्रूण की हलचल कम महसूस होना, तेज पेट दर्द, ब्लीडिंग आदि हो रहे हैं तो बिना देर किए डॉक्टर के पास जाएं। उन्हें अपनी समस्या बताएं।

फोटो सौजन्य- गूगल

If there is pain in the breast just before periods

Health First: ज्यादातर महिलाएं बिजी दिनचर्या, केयर संबंधी जिम्मेदारियों या अन्य समस्याओं को मामूली समझकर शुरुआती लक्षणों को दरकिनार कर देती हैं। हालांकि महिलाओं में ये अनदेखे लक्षण कभी-कभी सीरियस बीमारियों के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। थकान और अनियमित मासिक धर्म से लेकर शरीर में होने वाले सूक्ष्म बदलावों तक, इन संकेतों को अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए। महिलाओं की आम स्वास्थ्य समस्याओें को समझना, शुरुआती संकेतों को पहचानना और मेडिकल मदद कब लेनी चाहिए, यह जानना जटिलताओं को रोकने और लंबे हेल्थ के एहसास को सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

महिलाएं अक्सर हेल्थ रिलेटेड लक्षणों तो क्यों करती हैं नजरअंदाज-

महिलाएं अक्सर अपने स्वास्थ्य की तुलना में परिवार और काम को प्राथमिकता देती हैं। इससे अक्सर निदान और उपचार में देरी होती है।

  1.  व्यस्त जीवनशैली और एक साथ कई जिम्मेदारियों को निभाना
  2.  असुविधा या दर्द को सामान्य मानने की प्रवृत्ति• लक्षणों के बारे में जागरूकता का अभाव
  3.  यह मान लेना कि लक्षण अस्थायी हैं या तनाव से संबंधित हैं
    स्वास्थ्य संबंधी वे प्रमुख मुद्दे जिन्हें महिलाएं अक्सर नजरअंदाज कर देती हैं।

लगातार थकान रहना

Stress in women can affect scientific and physical health

थकान महसूस होने को अक्सर तनाव या नींद की कमी बताकर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
• यह एनीमिया , थायरॉइड विकार या पोषण संबंधी कमियों का संकेत हो सकता है।
• लगातार थकान महिलाओं में थकान के सबसे आम कारणों में से एक है, जिसका मूल्यांकन उन्हें करवाना चाहिए।
अनियमित मासिक धर्म
मासिक धर्म की अनियमितताओं को अक्सर सामान्य माना जाता है।
• यह हार्मोनल असंतुलन का संकेत हो सकता है।
• यह पीसीओएस, थायराइड की समस्याओं या तनाव से संबंधित हो सकता है।
• अनियमित मासिक धर्म के कारणों में से एक महत्वपूर्ण कारण है।

बेवजह वजन परिवर्तन

जीवनशैली में बदलाव किए बिना अचानक वजन बढ़ना या घटना होना अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
• यह थायरॉइड संबंधी विकार या चयापचय संबंधी समस्याओं का संकेत हो सकता है।
• हार्मोनल असंतुलन के लक्षणों से जुड़ा हुआ
बार-बार सिरदर्द
सिरदर्द को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है या इसका इलाज खुद ही कर लिया जाता है।
• यह तनाव, माइग्रेन या किसी अन्य अंतर्निहित बीमारी के कारण हो सकता है।
• लगातार सिरदर्द होने पर डॉक्टर से परामर्श लेना आवश्यक है।

स्तन में परिवर्तन

Breast Cancer

स्तन स्वास्थ्य में होने वाले बदलावों को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

• गांठें, दर्द या स्राव
• बेहतर परिणामों के लिए शीघ्र निदान अत्यंत महत्वपूर्ण है।
श्रोणि में दर्द
अक्सर इसे मासिक धर्म की असुविधा मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
• यह एंडोमेट्रियोसिस, संक्रमण या अंडाशय संबंधी समस्याओं का संकेत हो सकता है।
• दीर्घकालिक दर्द के लिए मूल्यांकन आवश्यक है
पाचन संबंधी समस्याएं (पेट फूलना, एसिडिटी)
आमतौर पर इन्हें मामूली समस्याएं माना जाता है।
• इसका संबंध आंतों के स्वास्थ्य या हार्मोनल परिवर्तनों से हो सकता है।
• लगातार बने रहने वाले लक्षण गंभीर समस्याओं का संकेत हो सकते हैं।

नींद की समस्याएँ

Your sleeping position reveals your personality

नींद की कमी को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है या इसे सामान्य मान लिया जाता है।
• यह तनाव, हार्मोनल असंतुलन या मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से संबंधित हो सकता है।
• यह समग्र स्वास्थ्य और ऊर्जा स्तर को प्रभावित करता है।
मनोदशा में परिवर्तन और चिंता
भावनात्मक लक्षणों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
• यह हार्मोनल उतार-चढ़ाव से संबंधित हो सकता है।
• यह चिंता या अवसाद का संकेत हो सकता है।

मनोदशा में परिवर्तन और चिंता

भावनात्मक लक्षणों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।

  • यह हार्मोनल उतार-चढ़ाव से संबंधित हो सकता है।
  • यह चिंता या अवसाद का संकेत हो सकता है।

चेतावनी के संकेत जिन्हें कभी भी अनदेखा नहीं करना चाहिए

इन संकेतों पर जरूर दें ध्यान :

  • ऐसे लक्षण जो कुछ दिनों से अधिक समय तक बने रहते हैं
  • समय के साथ बिगड़ती जाने वाली स्थितियाँ
  • एक साथ कई लक्षण प्रकट होना
  • शरीर में अचानक या असामान्य परिवर्तन

इन लक्षणों को नज़रअंदाज़ करने से होने वाले स्वास्थ्य जोखिम

लक्षणों को नज़रअंदाज़ करने से निम्नलिखित समस्याएं हो सकती हैं:

  • गंभीर बीमारियों के निदान में देरी
  • रोग की प्रगति
  • जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है
  • जीवन की गुणवत्ता में कमी

महिलाओं को डॉक्टर से कब परामर्श लेना चाहिए?

यदि निम्नलिखित स्थितियां हों तो चिकित्सीय सलाह लें:

  • लक्षण अपेक्षा से अधिक समय तक बने रहते हैं
  • अचानक या गंभीर असुविधा होती है
  • समस्याएँ बार-बार सामने आती रहती हैं।
  • ये लक्षण दैनिक जीवन में बाधा उत्पन्न करते हैं।

नियमित स्वास्थ्य जांच का महत्व

नियमित जांच रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

  • स्वास्थ्य समस्याओं का शीघ्र पता लगाना
  • मौजूदा स्थितियों की निगरानी
  • निवारक देखभाल और स्क्रीनिंग।
Excessive smartphone use by children

बच्चों के लिए Smartphone का लत लगना नशा की तरह दिमाग पर हावी हो जाता है जिसे लेकर दुनियाभर के पेरेंट्स परेशान रहते हैं। बता दें कि जहां बच्चे दिनभर खेल-कूदते नजर आते थे और शरारतें करतें थे, अब वे चुपचाप एक कमरे के किसी कोने में घंटों वीडियो और शॉर्ट्स स्क्रॉल करने में व्यस्त दिखाई देते हैं। पेरेंट्स को अच्छे से मालूम होता है कि बच्चे अगर अधिक फोन का इस्तेमाल करेंगे तो उनकी आंखें खराब हो सकती हैं, लेकिन यहां बात आंखें खराब होने तक सीमित नहीं है बल्कि ज्यादा स्क्रीन देखने का प्रभाव बच्चों के दिमाग प  र भी बहुत ज्यादा पड़ रहा है जिसे न तो अभी बच्चे नोटिस कर पा रहें हैं और ना ही पेरेंट्स। इस टॉपिक पर दुनियाभर में कई रिसर्च हो चुकी हैं और ज्यादातर में यह मिला है कि स्मार्टफोन या कोई भी डिजिटल स्क्रीन को लंबे समय तक देखना बच्चे की सिर्फ आंखों पर ही नहीं बल्कि दिमाग पर भी असर डालता है। बच्चों के दिमाग पर स्क्रीन से पड़ रहे कुप्रभाव के बारे में ये रही जानकारियां-

क्या स्मार्टफोन्स के इस्तेमाल से खोखल हो रहा बच्चों का दिमाग?

Excessive smartphone use by children

‘साइंस डायरेक्ट’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक Adolescent Brain Cognitive Development Study (ABCD) की एक रिसर्च में 10 से 13 साल के कई हजारों बच्चों पर अध्यन की गई। जिसमें बच्चों के सोशलमीडिया और स्मार्टफोन्स के इस्तेमाल को एनालाइज किया गया और साथ ही में इमेजिंग स्कैन्स की मदद से उनके ब्रेन की संरचना का निरीक्षण किया गया। जिसमें कुछ क्षेत्रों में पाया गया कि जो बच्चे ज्यादा स्क्रीनटाइम दे रहे हैं या समार्टफोन्स का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, उनकी ब्रेन की कोर्टिकल मोटाई थोड़ी कम मिली और साथ ही ब्रेन वॉल्यूम भी अन्य बच्चों से थोड़ी कम मिली। साइंसडायरेक्ट के एक्सपर्ट्स के ब्रेन की ये दोनों चीजें दिमाग के कई जरूरी कार्यों को करने में मदद करती हैं जैसे –

  1. ध्यान देना या फोकस करना
  2. निर्णय लेना (डिसीजन मेकिंग)
  3. सोचना व समझना (रीजनिंग)
  4. याददाश्त या याद रखने की क्षमता

हालांकि, एक्सपर्ट्स ने यह भी बताया कि बचपन में कोर्टिकल थाइनिंग ब्रेन डेवलपमेंट का एक सामान्य हिस्सा हो सकता है। क्योंकि इस दौरान ऐसे न्यूरल कनेक्शन को हटाता रहता है, जिनकी जरूरत नहीं होती है ताकि न्यूरल नेटवर्क बिना किसी उलझन के सामान्य रूप से काम करता रहे।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स

Excessive smartphone use by children

एक्सपर्ट के अनुसार अगर बच्चा लंबे समय तक स्मार्टफोन्स देखता या फिर उसका स्क्रीनटाइम ज्यादा है, तो उससे बच्चे की आंखों पर विपरीत असर तो पड़ता ही है, दिमाग की कार्यक्षमता और ब्रेन हेल्थ को भी काफी नुकसान पहुंचता है। रिसर्चों में भी साबित हो चुका है कि जिन बच्चों का स्क्रीनटाइम ज्यादा होता है, अन्य बच्चों की मुकाबले उनके दिमाग की क्षमता कम हो सकती है।

बच्चे की स्मार्टफोन की लत कैसे छुड़ाएं

इस समस्या को लेकर डॉक्टर ने बताया कि बच्चे का स्मार्टफोन एडिक्शन खत्म करने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है उसे टाइम देना और जितना हो सके उसे फिजिकल एक्टिविटी में शामिल करना। इसमें ध्यान रखना होगा कि बच्चे को डांटकर उसकी फोन की आदत नहीं छुड़ानी है, बल्कि उसके लिए नीचे लिखी बातों का ध्यान रखना है-

  • सबसे पहले बच्चे के आगे खुद फोन इस्तेमाल करना बंद कर दें।
  • जितना हो सके फोन्स को बच्चों की पहुंच से दूर रखें और ताकि उन्हें फोन की याद न आए।
  • बच्चे को खुद टाइम देना शुरू कीजिए उनसे बातें करें, कहानियां सुनाएं।
  • बच्चे को घर के छोटे-छोटे काम करना सिखाएं जैसे अपना बैग खुद पैक करना।
  • रोजाना बच्चे को आउटडोर एक्टिविटी कराएं, ऐसे स्पोर्ट्स में शामिल करें जिनमें उसकी ज्यादा रुचि हो आदि।
Consuming fenugreek in coconut oil will solve 5 hair problems

Hair Fall: बारिश के मौसम में कई लोग शिकायत करते हैं कि उनके बाल झड़ रहे हैं। अगर इस मौसम में आप भी बालों के झड़ने की समस्या से जूझ रहे हैं तो हम यहां आपको बताने जा रहे हैं कैसे इसे कंट्रोल किया जा सकता है।

बता दें कि बारिश का मौसम गर्मी से राहत तो देता है पर यह मौसम बालों के लिए कई मुश्किलों को लेकर आता है। मानसून आरंभ होते ही काफी लोग बाल झड़ने, चिपचिपे स्कैल्प, डैंड्रफ और बालों के बेजान होने की शिकायत करने लगते हैं। कई लोगों को लगता है कि बारिश का पानी सीधे तौर पर बाल झड़ने की वजह है। मानसून में क्या वास्तव में बाल तेजी से गिरने लगते हैं, अगर हां तो ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए? इस बारे में क्या है एक्सपर्ट की राय-

बारिश के मौसम में बाल झड़ने लगते हैं?

If you are troubled by white hair then do this special exercise daily

एक्सपर्ट के मुताबिक यह कहना गलत होगा सिर्फ मानसून या बारिश ही बालों के झड़ने का कारण है। दरअसल, इस मौसम में बढ़ी हुई नमी, पसीना, स्कैल्प पर गंदगी का जमना और सही देखभाल की कमी बालों की समस्याओं को बढ़ा जाती है। अगर मानसून के दौरान बालों की सही तरीके से देखभाल की जाए, तो हेयर फॉल को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

बारिश में बालों का झड़ना ऐसे करें कम?

मॉडल का हेयर स्टाइल

एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि बारिश के मौसम में जिन लोगों के बाल ज्यादा झड़ने लगते हैं उन्हें कुछ खास उपायों को अपनाना चाहिए। जैसे कि-

अगर आप बारिश में भीग गए हैं, तो घर पहुंचकर बालों को साफ पानी से धो लें। बारिश के पानी में धूल, प्रदूषण और कई तरह के केमिकल्स भी होते हैं जो स्कैल्प को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए बारिश में भीगने के बाद बालों को साफ पानी और शैंपू से धोने स्कैल्प की सही तरीके से सफाई हो जाती है जिससे बालों का झड़ना का कम होता है।

मानसून में हवा में ज्यादा नमी होने के कारण स्कैल्प जल्दी ऑयली हो जाता है। ऐसे में जरूरत के अनुसार सप्ताह में दो से तीन बार माइल्ड शैंपू से बालों को धोना चाहिए। शैंपू के बाद बालों पर कंडीशनर का इस्तेमाल करना जरूरी है।

गीले बाल सबसे ज्यादा कमजोर होते हैं। इस समय कंघी करने से बाल आसानी से टूट सकते हैं। इसलिए बालों के गीले होने पर उसे अच्छी तरह से सूखा लें। बालों के सूखने के बाद चौड़े दांत वाली कंघी से सुलझाने की कोशिश करें।

बालों का झड़ने और गिरने की समस्या न हो इसके लिए स्कैल्प का सही तरीके से साफ होना बहुत जरूरी है। अगर स्कैल्प पर तेल, पसीना और गंदगी जमा होगी, तो हेयर फॉल बढ़ सकता है। इसलिए स्कैल्प को समय- समय पर सही तरीके से साफ करना बहुत जरूरी है।

मानसून के दौरान हेयर ड्रायर, स्ट्रेटनर और कर्लिंग मशीन का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करने से बाल और कमजोर हो सकते हैं। ऐसे मौसम में बालों का झड़ना रोकने के लिए इस तरह की मशीन का इस्तेमाल जहां तक संभव हो कम से कम करें।

एक्सपर्ट कहते हैं कि मानसून में हेयर फॉल बढ़ना एक आम समस्या है, लेकिन सही तरह से केयर से इसे काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। स्कैल्प को साफ रखना, संतुलित आहार लेना, गीले बालों की सही देखभाल करना और जरूरत से ज्यादा केमिकल वाले प्रोडक्ट्स से बचना बालों को हेल्दी बनाता है।

फोटो सौजन्य- गूगल

High blood pressure and diabetes cause severe damage to the kidneys

Blood Pressure-Diabetes: भागदौड़ भरी जिंदगी में ब्लड प्रेशर और डायबिटीज की परेशानी काफी ज्यादा हो चुकी है। यह दोनों ही, सबसे तेजी से बढ़ने वाली लाइफस्टाइल डिजीज हैं। इन दोनों बीमारियों को नियंत्रित किया जा सकता है पर जब ये लंबे वक्त तक कंट्रोल में नहीं रहते, तो सबसे अधिक असर किडनी पर पड़ता है। एक डॉक्टर का कहना है कि क्रॉनिक किडनी डिजीज के प्रमुख वजहों में डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर सबसे आगे है। आइये जाने किडनी पर दोनों बीमारियों का क्या असर पड़ता है-

किडनी पर डायबिटीज का क्या है असर

डायबिटीज का असर आपकी किडनी पर पड़ सकता है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डायबिटीज एंड डायजेस्टिव एंड किडनी डिजीज के मुताबिक, डायबिटीज होने पर हमारे शरीर का ब्लड शुगर लेवल लगातार बढ़ा हुआ रहता है। यह हाई शुगर धीरे-धीरे किडनी के छोटे-छोटे ब्लड वेसेल्स को नुकसान पहुंचाने लगता है। किडनी का मुख्य काम ब्लड को फिल्टर करना है। लेकिन जब ब्लड शुगर ज्यादा रहता है, तो यह फिल्टरिंग सिस्टम खराब होने लगता है और प्रोटीन जैसे जरूरी तत्व पेशाब के जरिए बाहर निकलने लगते हैं। इस स्थिति को डायबिटिक नेफ्रोपैथी कहा जाता है।

हाई ब्लड प्रेशर किडनी को कैसे नुकसान पहुंचाता है

ब्लड प्रेशर बढ़ने की स्थिति में किडनी को नुकसान हो सकता है। नेशनल किडनी फाउंडेशन के मुताबिक, हाई ब्लड प्रेशर किडनी की ब्लड वेसल्स पर अतिरिक्त दबाव डालता है। लंबे समय तक यह दबाव किडनी की फिल्टरिंग क्षमता को कमजोर कर देता है। ऐसे में धीरे-धीरे किडनी ठीक से ब्लड को फिल्टर नहीं कर पाती, जिससे शरीर में टॉक्सिस पदार्थ जमा होने लगते हैं। इसे हाइपरटेंसिव किडनी डिजीज कहा जाता है।

जब ब्लड प्रेशर और डायबिटीज साथ में हो, तो किडनी पर क्या पड़ता है असर

High blood pressure and diabetes cause severe damage to the kidneys

अगर किसी व्यक्ति को डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर दोनों होते हैं, तो किडनी पर डबल स्ट्रेस पड़ता है। यह स्थिति सबसे ज्यादा खतरनाक मानी जाती है, क्योंकि किडनी फंक्शन तेजी से गिरता है।इस स्थिति में प्रोटीन यूरिन में बढ़ जाता है और किडनी फेलियर का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे में कई बार डायलिसिस की भी जरूरत पड़ सकती है

किडनी डैमेज होने के शुरुआती लक्षण-

किडनी डैमेज धीरे-धीरे बढ़ता है, इसलिए शुरुआत में लक्षण हल्के हो सकते हैं। इसके कुछ शुरुआती लक्षण निम्न हैं-

  1. शरीर में बार-बार थकान महसूस होना
  2. पैरों और चेहरे पर सूजन
  3. पेशाब में झाग आना
  4. भूख कम लगना
  5. ब्लड प्रेशर का लगातार बढ़ा रहना
  6. किडनी को ऐसे हालात में कैसे रखें सुरक्षित

डॉक्टर कै कहना कि सही समय पर कंट्रोल करके किडनी को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। बस इसके लिए आपको कुछ बातों पर ध्यान देने की जरूरत होती है, जैसे-

  • ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखें।
  • ब्लड प्रेशर को 120/80 के आसपास रखने की कोशिश करें।
  • नमक और प्रोसेस्ड फूड कम खाएं।
  • नियमित रूप से एक्सरसाइज करें।
  • समय-समय पर किडनी टेस्ट कराएं।
  • डॉक्टर की दवा नियमित रूप लें।
FIFA World Cup 2026: How do legendary footballers like Messi and Ronaldo stay so fit?

FIFA World Cup 2026: वर्ल्ड कप में खेल रहे फुटबॉल खिलाड़ियों की बात ही अलग होती है, 90 मिनट तक दौड़ना, शरीर को फुर्तीला और लचीला बनाए रखने के साथ-साथ फोकस्ड रहना पड़ता है, जो उनकी फुल फिटनेस को दर्शाता है। क्रिस्टियानो रोनाल्डो और लियोनेल मेसी जैसे फुटबॉल खिलाड़ी को जब हम मैदान में देखते हैं तो अक्सर सोचते हैं कि ये लोग खुद को इतने चुस्त-दुरुस्त कैसे बनाए रखते हैं और कोई भला इतना फुर्तीला कैसे हो सकता है। हालांकि, हमें यह भी पता है कि उनकी फुर्ती और फिटनेस का राज कहीं न कहीं उनकी जीवनशैली और खानपान में ही छिपा है। आगे हम जानेंगे कि आखिर रोनाल्डो और मेसी जैसे स्टार फुटबॉल प्लेयर अपनी फिटनेस को कायम रखने के लिए कैसी जीवनशैली बना के चलते हैं और उनके डाइट में क्या-क्या शामिल होता है।

रोनाल्डो और मेसी का लाइफस्टाइल

FIFA World Cup 2026: How do legendary footballers like Messi and Ronaldo stay so fit?

क्रिस्टियानो रोनाल्डो और लियोनल मेसी का नाम दुनिया के सबसे बड़े फुटबॉल प्लेयर्स में आता है और इनका खास लाइफस्टाइल इन्हें एक फुर्तीला और फिट प्लेयर बनाता है। कुछ वेबसाइट्स रिपोर्ट्स के मुताबिक जानते हैं इन दोनों दिग्गज प्लेयर्स की डाइट और लाइफस्टाइल कैसी है।

रोनाल्डो की डाइट और लाइफस्टाइल

क्रिस्टियानो रोनाल्डो हमेशा अपनी डाइट का खास ध्यान रखते हैं और दिन में तीन बार हेवी डाइट लेने की बजाय थोड़ा-थोड़ा करके दिन में 06 बार खाते हैं। उनकी डाइट में आमतौर पर हाई प्रोटीन फूड्स जैसे अंडे, चिकन और फिश जैसी चीजों को शामिल करते हैं। अलावा इसके फाइबर के लिए सलाद को अपनी डाइट में शामिल करना नहीं भूलते हैं।

इसके अलावा रोनाल्डो अपनी नींद का खास ध्यान रखते हैं, रिपोट्स के अनुसार रोनाल्डो लंबी नींद नहीं लेते हैं बल्कि छोटे-छोटे स्लीप साइकिल्स की मदद से अपनी नींद पूरी करते हैं। डिसिप्लिन्ड न्यूट्रिशन प्लान के अनुसार, अल्कोहल व स्मोकिंग से भी दूर हैं।

लियोनल मेसी की डाइट और लाइफस्टाइल

FIFA World Cup 2026: How do legendary footballers like Messi and Ronaldo stay so fit?

ऑकोडायरियो की मेटाबॉलिक पर दी गई जानकारी के मुताबिक मेसी नेचुरल फूड्स पर ज्यादा ध्यान देते हैं और सा ही हाइड्रेशन का भी खास ध्यान रखते हैं। इसके साथ-साथ मेसी को उनकी कंसिस्टेंसी यानी लगातार ट्रेनिंग करते रहने और एक डिसिप्लिन्ड लाइफस्टाइल जीने की आदत के लिए जाना जाता है।

ऐसे बनाएं स्वयं को फुर्तीला और फिट

अगर आप भी फुटबॉल प्लेयर्स की तरह खुद को फुर्तीला और फिट बनाए रखना चाहते हैं, तो आपको भी अपनी डाइट और लाइफस्टाइल से जुड़ी कुछ खास बातों का ध्यान रखना होगा। एक रिपोर्ट के मुताबिक शरीर को फुर्तीला बनाने के अच्छे लाइफस्टाइल से जुड़ी कुछ आदतों में सुधार करना जरूरी है और सामान्य आदतें क्या होती हैं?

  • रोजाना हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करें
  • डेली पर्याप्त पानी पिएं
  • साइकिलिंग, जॉगिंग और स्विमिंग जैसी एक्टिविटी करें
  • ताजे व पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लें
  • रोजाना पर्याप्त नींद लें, सही समय पर सोएं और सही समय पर उठें
  • मानसिक तनाव को कम करने के लिए मेडिटेशन आदि करें
Remove dead skin cells with these 4 homemade face packs to brighten dull and lifeless skin

Homemade Face pack: गर्मी में आपके स्किन से ज्यादा पसीना आता है जिसके कारण से गंदगी, धूल स्किन पर लंबे वक्त तक चिपकी रहती हैं और त्वचा को खराब कर देती हैं। अलावा इसके सूरज की हानिकारक किरणों का प्रभाव त्वचा की ऊपरी हिस्से को जला देता है, जिसे सनबर्न भी कहा जाता है। इस हालत में स्किन पर बार-बार डेड स्किन सेल्स जम जाते हैं और आपकी स्किन बेहद डल और बेजान नजर आती है। अगर आपके साथ भी ऐसी कुछ हुआ है तो आज हम आपके लिए चार होममेड फेस मास्क लेकर आए हैं, जो आपकी स्किन पर जमे डेड स्किन सेल्स को रिमूव करने और आपकी त्वचा को नेचुरल ग्लो प्रदान करने में मदद करेंगे। आइये जानते हैं इन्हें कैसे इस्तेमाल करें-

जाने क्यों जरूरी है त्वचा से डेड स्किन सेल्स को हटाना

डेड स्किन सेल्स को हटाने की कई फायदे हैं। यह स्किन पोर्स को बंद होने से बचाता है। जब ज्यादा डेट स्किन सेल्स हो जाते हैं, तो वे त्वचा के पोर्स को बंद कर देते हैं, जिसकी वजह से एक्ने ब्रेकआउट की समस्या हो सकती है। अलावा इसके डेड स्किन सेल्स रिमूव होते हैं, तो नए सेल्स का निर्माण होता है, जिससे आपकी त्वचा ज्यादा फ्रेश और रेडिएंट नजर आती है।

गर्मी में जब त्वचा की ऊपरी परत जल जाती है, तो वे डेड स्किन सेल्स में परिवर्तित हो जाती है। जिसके कारण स्किन डल तथा बेजान नजर आती है। ऐसे में डेड स्किन सेल्स रिमूव करने से आपकी त्वचा के टेक्सचर और कांप्लेक्शन दोनों में सुधार होता है। साथ ही साथ जब डेड स्किन सेल्स हट जाते हैं, तो किसी भी स्किन केयर प्रोडक्ट को त्वचा आसानी से अवशोषित कर पाती है, जिससे उसका ज्यादा लाभ प्राप्त होता है।

4 होममेड फेस मास्क जो त्वचा को प्रदान करते हैं नेचुरल ग्लो

1. एवोकाडो फेस मास्क

Remove dead skin cells with these 4 homemade face packs to brighten dull and lifeless skin

इसे बनाने के लिए आपको चाहिए: आधा मैश किया हुआ एवोकाडो, 1 चम्मच शहद और 1 चम्मच ऑलिव ऑयल

इस तरह तैयार करें:

सबसे पहले एक बोल में मैश किया हुआ एवोकाडो, शहद और ऑलिव ऑयल डालकर सभी को आपस में अच्छी तरह मिक्स करें।
एक पेस्ट तैयार करें अब इस पेस्ट को अपनी त्वचा एवं गर्दन पर अप्लाई करें।
फिर इसे 15 से 20 मिनट तक लगा हुआ छोड़ दें।
समय पूरा हो जानें पर हाथों को गिला करें, जरूरत पड़ने पर चेहरे पर भी पानी लगा सकती हैं।
फिर हल्के हाथों से त्वचा को मसाज करें।
इस प्रकार डेड स्किन सेल्स बाहर निकल आएंगे और जरूरी पोषक तत्व त्वचा में अवशोषित हो जाएगा।
आखिर में सामान्य पानी से त्वचा को साफ कर लें और स्किन को ड्राई होने दें।

2. ओटमील योगर्ट फेस मास्क

इसे बनाने के लिए आपको चाहिए: 1 चम्मच ओटमील, 1 चम्मच योगर्ट और 1 चम्मच शहद

इस तरह तैयार करें:

सभी सामग्री को एक बोल में अच्छी तरह से मिक्स कर लें और एक स्मूद पेस्ट बना लें।
अब इस पेस्ट को अपने चेहरे की त्वचा एवं गर्दन पर अच्छी तरह अप्लाई करें।
फिर 15 से 20 मिनट तक लगा हुआ छोड़ दें, इसके बाद अपने हाथों को गिला करें और सर्कुलर मोशन में 2 मिनट तक चेहरे की मसाज करें।
इससे आपके डेड स्किन सेल्स बाहर निकल आएंगे।
आखिर में अपनी त्वचा को सामान्य पानी से साफ कर लें, और स्किन को सुखाकर इस पर मॉइश्चराइजर अप्लाई करें।

3. बेसन दही से बना फेस मास्क

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इसे बनाने के लिए आपको चाहिए: एक चम्मच बेसन, दो चम्मच दही, आधा चम्मच नींबू का रस, आधा चम्मच शहद

इस तरह तैयार करें:

सबसे पहले एक बोल में बेसन, दही, शहद और नींबू सभी को आपस में मिक्स करें और एक पेस्ट तैयार करें।
अब इस पेस्ट को अपनी त्वचा पर अप्लाई करें और 15 से 20 मिनट तक लगा हुआ छोड़ दें।
जब यह ड्राई हो जाए तो अपने चेहरे को गिला करें और हल्के हाथों से सर्कुलर मोशन में त्वचा को मसाज दें।
इस प्रकार डेड स्किन सेल्स रिमूव हो जाएंगे और आपकी त्वचा में नेचुरल ग्लो जुड़ जाएगा।
आखिर में हल्के गुनगुने या सामान्य पानी से त्वचा को साफ कर लें।

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4. चावल के आटे का स्क्रब

इसे बनाने के लिए आपको चाहिए: 2 चम्मच चावल का आटा और 2 चम्मच ऐलोवेरा जेल

इस तरह तैयार करें:

चावल के आटे और एलोवेरा जेल को आपस में एक साथ अच्छी तरह मिक्स कर लें।
अब इसे अपनी त्वचा पर अप्लाई करें और 2 मिनट तक उंगलियों को सर्कुलर मोशन में घूमते हुए स्किन को मसाज दें।
मसाज देने के बाद इन्हें लगभग 05 मिनट से 10 मिनट तक त्वचा पर लगा हुआ छोड़ दें।
आखिर में सामान्य पानी से स्किन को साफ कर लें।

फोटो सौजन्य- गूगल

World No-Tabacco Day: This year, WHO has focused on helping youth and children

World No-Tabacco Day: हर फिल्म से पहले सिनेमा हॉल और टीवी पर एक विज्ञापन चलता है धूम्रपान स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, कृपया इससे दूरी बनाएं। बड़े स्तर पर जागरूकता चलाए जाने के बावजूद भारत के लोग एक बड़ी संख्या में सिगरेट, ई- वेपिंग, बीड़ी और तंबाकू का सेवन करते हैं। तंबाकू सेहत के लिए कितना हानिकारक है, इसके बारे में वैश्विक स्तर पर लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाया जाता है। इस साल विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने युवाओं और बच्चों को तंबाकू और निकोटीन की लत से बचाने पर खास जोर दिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने विशेषकर भारत में युवाओं के बीच तंबाकू के मद्देनजर एक बड़ी चेतावनी दी है।

बड़ी संख्या में तंबाकू का हो रहा है सेवन

आंकड़ों के अनुसार, तंबाकू की वजह से भारत में हर वर्ष करीब 13 लाख लोगों की मौत होती है। सिगरेट और बीड़ी के अलावा गुटखा, खैनी, जर्दा और अन्य तंबाकू उत्पाद भी लोगों की सेहत को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं। भारत में तंबाकू का इस्तेमाल करने वालों की संख्या बहुत ज्यादा है।

सिर्फ मुंह ही नहीं, तंबाकू के सेवन से डैमेज हो सकते हैं शरीर के ये 5 अंग, जानें तंबाकू छोड़ने के आसान उपाय-

पान मसाला और गुटका के विज्ञापनों के लिए फिल्मी सितारे हुए ट्रोल,एक्सपर्ट ने बताया क्यों स्वास्थ्य के लिए ‘खराब’ है तम्बाकू उत्पाद

क्या कहना है विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का ?

World No-Tabacco Day: This year, WHO has focused on helping youth and children

विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि तंबाकू कंपनियां नए-नए तरीकों से युवाओं को अपने प्रोडक्ट्स की ओर आकर्षित करने की हर कोशिश कर रही है और युवा इसके झांसे में आ भी रहे हैं। रंग-बिरंगी पैकेजिंग, फ्लेवर वाले प्रोडक्ट और सोशल मीडिया के जरिए प्रचार से बच्चे और युवाओं के दिमाग को तेजी से प्रभावित कर रहे हैं। इस दौरान WHO ने भारत से तंबाकू और निकोटीन उत्पादों के प्रचार पर सख्ती बढ़ाने की अपील की है।

तंबाकू से होती है घातक बीमारियां ?

तंबाकू शरीर के लगभग हर हिस्से को नुकसान पहुंचाता है। इससे कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसमें मुख्य रूप से शामिल हैः

  • फेफड़ों का कैंसर
  • मुंह और गले का कैंसर
  • दिल की बीमारी
  • हार्ट स्ट्रोक
  • सांस की गंभीर बीमारियां
  • हाई ब्लड प्रेशर
  • प्रेग्नेंसी से जुड़ी परेशानियां

इतना ही नहीं, जो लोग खुद तंबाकू नहीं लेते लेकिन धुएं के संपर्क में रहते हैं, उनकी सेहत पर भी बुरा असर पड़ सकता है।

तंबाकू युवाओं के लिए क्यों है बड़ा खतरा?

हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि ई-सिगरेट और निकोटीन वाले नए उत्पाद युवाओं को तेजी से अपनी गिरफ्त में ले रहे हैं। कई बार बच्चे इन्हें कम नुकसानदायक समझ लेते हैं, लेकिन इनमें मौजूद निकोटीन लत पैदा कर सकता है और दिमाग के विकास को प्रभावित कर सकता है।

तंबाकू छोड़ने के फायदे?

  1. तंबाकू छोड़ने के बाद शरीर खुद को ठीक करना शुरू कर देता है।
  2. 20 मिनट के भीतर दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर सामान्य होने लगते हैं।
  3. 24 घंटे के भीतर दिल के दौरे का खतरा कम होने लगता है।
  4. कुछ हफ्तों में सांस लेने में सुधार महसूस हो सकता है।
  5. लंबे समय में कैंसर और दिल की बीमारी का खतरा काफी कम हो जाता है।
  6. तंबाकू एक ऐसी आदत है जो धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाती है।

भारत में हर साल 13 लाख लोगों की मौत इस वजह से होती है। World No-Tobacco Day हमें याद दिलाता है कि तंबाकू से दूरी बनाकर हम खुद और अपने परिवार को कई गंभीर बीमारियों से बचा सकते हैं।

फोटो सौजन्य- गूगल

Why is Eid-ul-Azha celebrated and what is its importance?

Eid Ul Adha: इस बार 28 मई को ईद-उल-अजहा यानी बकरीद का त्योहार पूरे देश और दुनिया में मुस्लिम मना रहे हैं। बकरीद इस्लाम धर्म का प्रमुख त्योहार है जिसमें अल्लाह के प्रति अटूट विश्वास और आत्मत्याग के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। बकरीद के दिन सुबह मुस्लिम समुदाय के लोग नए कपड़े पहनकर मस्जिद या ईदगाह में विशेष नमाज़ अदा करते हैं। इसके बाद एक-दूसरे के गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी जाती है। नमाज़ के बाद जो आर्थिक रूप से सक्षम हैं, वे बकरे की कुर्बानी देते हैं और इसके गोश्त को गरीबों और रिश्तोदारों में बांटते हैं। सिर्फ तीसरा हिस्सा खुद के लिए रखते हैं। इस तरह समाज का हर तबका त्योहार की खुशियों और दावतों में शामिल होता है। आपको जानकर हैरानी होगी बकरीद की शुरुआत इस्लाम के आने के बहुत पहले से ही अरब जगत में मनाया जाता था। आइए इसके पूरे इतिहास और इससे जुड़ी कहानियों के बारे में जानते हैं।

ऐसे हुई बकरीद की शुरुआत

बकरीद या ईद-उल-अजहा की शुरुआत पैगंबर हजरत इब्राहिम (अ.स) के दौर में आज से करीब 4,000 वर्ष पहले हुई थी। यह त्योहार मुख्य रूप से अल्लाह के प्रति पूर्ण समर्पण, अटूट विश्वास और त्याग का ऐतिहासिक प्रतीक है। इस त्योहार के पीछे हजरत इब्राहिम के जीवन से जुड़ी एक ऐतिहासिक घटना जुड़ी हुई है। इस्लामिक मान्यताओं के मुताबिक अल्लाह ने हजरत इब्राहिम के सपने में आकर उनकी सबसे प्यारी चीज की कुर्बानी मांगी। इब्राहिम को अपनी ढलती उम्र में मिले इकलौते बेटे, हजरत इस्माइल सबसे ज्यादा प्रिय थे। लेकिन अल्लाह का हुक्म मानकर हजरत इब्राहिम ने अपने बेटे की कुर्बानी देने के लिए तैयार हो गए। जब उन्होंने बेटे को इसके बारे में बताया, तो बेटे इस्माइल ने भी अल्लाह की राह में समर्पित होने की रज़ामंदी दे दी  इब्राहिम अपने बेटे को लेकर मक्का के पास मीना के मैदान की ओर बढ़े। रास्ते में शैतान ने उन्हें इस परीक्षा से डिगाने और भटकाने का प्रयास किया पर उन्होंने उसे कंकड़ मारकर दूर भगा दिया। इसी याद में हज के दौरान आज भी शैतान को कंकड़ मारे जाते हैं। हलांकि, यह अलग कहानी है। बहरहाल, मीना पहुंचकर जब इब्राहिम ने अपनी आंखों पर पट्टी बांधी और बेटे की गर्दन पर छुरी चलाई, तो अल्लाह ने उनके इस सर्वोच्च समर्पण और नीयत को स्वीकार कर लिया और ठीक उसी वक्त अल्लाह ने अपने फरिश्ते जिब्राइल के जरिए जन्नत से एक दुम्बा (भेड़) वहां भेज दिया गया और इस्माइल की जगह उस दुम्बे की कुर्बानी हो गई। इसी ऐतिहासिक घटना की याद में हर वर्ष इस्लामी महीने जुल-हिज्जा की 10 तारीख को दुनिया भर के मुस्लिम सक्षम लोग पशु (बकरा, भेड़, या ऊंट) की कुर्बानी देते हैं। इस पर्व का मूल उद्देश्य सिर्फ खून बहाना नहीं, बल्कि इंसान के भीतर मौजूद अहंकार, स्वार्थ और बुराई को अल्लाह की राह में कुर्बान करना है। इसके गोश्त को तीन बराबर हिस्सों में बांटकर गरीबों, रिश्तेदारों और खुद के लिए रखने का सामाजिक नियम है।

सबसे पहले बकरीद की शुरुआत कैसे हुई

ईद-उल-अजहा का इतिहास करीब 4,000 साल पुराना माना जाता है। इस घटना का जिक्र सबसे पहले हिब्रु बाइबिल में लिखा गया है। इसमें हजरत इब्राहिम को अब्राह्म के नाम से जाना जाता है जबकि अब्राह्म के बेटे को इसहाक नाम से जाना जाता है। वहीं, फरिश्ता को एंजिल कहकर पुकारा जाता है। ऐतिहासिक और सामाजिक मान्यताओं के मुताबिक यह घटना मक्का की है लेकिन एक सालाना इस्लामी त्योहार के रूप में ईद-उल-अज़हा को आधिकारिक तौर पर सबसे पहले मदीना में मनाया गया था। दरअसल, 622 ईस्वी में जब पैगंबर मोहम्मद साहब ने मक्का से मदीना हिजरत की, तब उन्होंने देखा कि मदीना के लोग पहले से चले आ रहे कुछ पारंपरिक फारसी त्योहार जैसे नौरोज़ और मेहरजान को मनाते थे। पैगंबर साहब ने उन त्योहारों की जगह इस्लामी सिद्धांतों पर आधारित सिर्फ दो पवित्र दिन तय किए: ईद-उल-फितर यानी मीठी ईद और ईद-उल-अज़हा यानी बकरीद। इस तरह मदीना वह पहला स्थान बना जहां व्यवस्थित रूप से इस त्योहार की और सामूहिक नमाज़ की शुरुआत हुई।

Eid Ul Adha का सांस्कृतिक महत्व

बकरीद का पर्व अहंकार और स्वार्थ का त्याग करने के लिए मनाया जाता है। इसका मूल संदेश सिर्फ जानवर की कुर्बानी देना नहीं है बल्कि इंसान के भीतर छिपे स्वार्थ, लालच और अहंकार की कुर्बानी देना है. इससे समानता और सामाजिक सद्भाव की भावना भी प्रकट होती है। इसमें कुर्बानी के मांस को तीन बराबर हिस्सों में बांटा जाता है। एक हिस्सा परिवार के लिए, दूसरा हिस्सा रिश्तेदारों व दोस्तों के लिए और तीसरा हिस्सा गरीबों व जरूरतमंदों के लिए है। यह व्यवस्था समाज में आर्थिक असमानता को भुलाकर हर तबके को खुशी में शामिल करने का संदेश देती है।

बकरीद के दिन की शुरुआत 

Bakreed

बकरीद के दिन मुसलमान सुबह में जल्दी उठ जाते हैं। सबसे पहले फज्र की नमाज अता करते हैं। इसके बाद घर की साफ-सफाई और स्नान किया जाता है, फिर नए या सबसे साफ कपड़े पहने जाते हैं।

इस दिन आमतौर पर सुबह 8 से 10 बजे के बीच ईद-उल-अजहा की दो रकात विशेष नमाज़ और खुतबा (धार्मिक उपदेश) होता है. नमाज़ खत्म होते ही लोग आपस में गले मिलकर एक-दूसरे को ईद मुबारक कहते हैं। दुश्मनी भूलकर गले मिलने का यह सबसे भावुक पल होता है। मीठी ईद के उलट बकरीद की सुबह नमाज़ बिना कुछ खाए पढ़ी जाती है। नमाज़ के बाद ही लोग पहला निवाला लेते हैं। ईदगाह से लौटने के बाद ही कुर्बानी का सिलसिला शुरू होता है। नमाज़ से पहले दी गई कुर्बानी मान्य नहीं होती। धार्मिक नियमों के तहत बकरे, भेड़ या अन्य स्वीकृत पशु की कुर्बानी दी जाती है। फिर रसोई में गोश्त पकाया जाता है फिर पारंपरिक पकवानों के साथ एक साथ बैठकर परिवार के सदस्य भोजन करते हैं। शाम के वक्त बड़े-बुजुर्ग बच्चों को प्यार से ईदी देते हैं। नए कपड़े पहने बच्चे घर-घर जाकर अपनी ईदी जमा करते हैं। शाम के समय लोग अपने रिश्तेदारों, दोस्तों और हिंदू-मुस्लिम भाइयों के घर ईद मिलने जाते हैं। घरों में मेहमानों को  शीर-खुरमा और मटन के पकवान परोसे जाते हैं। इस दिन का समापन इस संतोष के साथ होता है कि समाज का कोई भी गरीब परिवार आज के दिन भूखा नहीं सोय। आज के दिन लोग रात में शांति व बरकत की दुआ के साथ दिन का समापन करते हैं।

फोटो सौजन्य- गूगल