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Foods For Pregnant Woman

Manson Infections: वैसे तो बारिश का मौसम का सभी को इंतजार होता है लेकिन ये मौसम अपने साथ कुछ संक्रमण भी लेकर आता है। बारिश आते ही गर्मी से निजात तो मिलती है पर यह मौसम हेल्थ पर बुरा असर भी डाल सकता है। खासकर प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए यही मौसम कुछ नई परिशानियों का सबब भी बन जाता है। आइये जानते हैं इस मौसम पर एक्सपर्ट की राय-

वह बताती हैं कि गर्भावस्था में शरीर की इ्मयूनिटी अपने आप कुछ हद तक कमजोर हो जाती है। ऐसा इसलिए होता है ताकि शरीर भ्रूण को बाहरी तत्व समझकर रिजेक्ट न कर दे। लेकिन इसी कारण से मानसून की नमी, जगह-जगह जमा पानी और बैक्टीरिया व फंगस के पनपने के लिए अनुकूल माहौल बनने पर प्रेग्नेंट महिलाएं जल्दी इंफेक्शन की चपेट में आ जाती है।

मानसून में बढ़ने लगते हैं UTI के मामले

If you are troubled by vomiting during pregnancy then don't panic

मानसून में गर्भवति महिलाओं में यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन के मामले अचानक बढ़ जाते हैं और डॉक्टर इसकी वजह भी साफ बताती हैं। नमी वाले मौसम में पसीना और गीलापन त्वचा पर काफी देर तक बना रहता है, जो बैक्टीरिया के पनपने के लिए एकदम सही जगह बन जाता है। इसके साथ ही हार्मोनल बदलाव के चलते वेजाइनल पीएच भी बदलता रहता है। इससे यीस्ट इंफेक्शन जैसी फंगल दिक्कतें भी परेशान करने लगती हैं।

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एक्सपर्ट के मुताबिक यहां एक बात ध्यान रखने की जरूरत है कि अगर UTI का समय पर इलाज न हो, तो कुछ गंभीर मामलों में यह प्रीटर्म लेबर यानी समय से पहले डिलीवरी तक की वजह बन सकता है।

ये बीमारियां भी बढ़ा सकती हैं जोखिम

विशेषज्ञ के अनुसार सिर्फ यूटीआई ही नहीं, बल्कि मानसून पानी और मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों का भी सीजन होता है। डेंगू, मलेरिया और टाइफाइड इस मौसम में बड़ा खतरा बनकर सामने आते हैं। प्रेग्नेंसी के दौरान डेंगू होने पर प्लेटलेट्स तेजी से गिर सकते हैं और भी गंभीर रूप ले सकते हैं। वहीं दूषित पानी या खाने से टाइफाइड और पेट के इंफेक्शन होने का खतरा भी बना रहता है। इनका असर सिर्फ मां ही नहीं, बल्कि भ्रूण की सेहत पर भी पड़ सकता है।

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ऐसे करें बचाव?

विशेषज्ञ की सलाह बहुत सीधी है, सूती और ढीले कपड़े पहनें, इंटिमेट एरिया को सूखा-साफ रखें, और पानी खूब पिएं ताकि UTI से बचा जा सके। घर के आसपास पानी जमा न होने दें, मच्छरदानी या रिपेलेंट का इस्तेमाल करें और बाहर का या कटा हुआ खाना खाने से जितना बचा जाए उतना अच्छा। और सबसे जरूरी- बुखार, जलन, अजीब-सा डिस्चार्ज या पेट दर्द जैसी कोई भी बात नज़रअंदाज़ न करें, फौरन अपने डॉक्टर से मिलें।

ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें?

अगर मानसून में आपको ऐसा लगे कि बुखार, जननांगों में जलन, पेशाब करते समय जलन, भ्रूण की हलचल कम महसूस होना, तेज पेट दर्द, ब्लीडिंग आदि हो रहे हैं तो बिना देर किए डॉक्टर के पास जाएं। उन्हें अपनी समस्या बताएं।

फोटो सौजन्य- गूगल

Do we have to face the risk of UTI after sex?

UTI मतलब यूरिनरी ट्रैक इन्फेक्शन एक काफी आम समस्या है जिसका सामना महिलाएं अपने लाइफ में एक बार जरूर करती हैं। यूरिनरी ट्रैक में होने वाले इस संक्रमण के पीछे हानिकारक बैक्टीरिया जिम्मेदार होते हैं, जो कई कारणों से आपके यूरिनरी ट्रैक में प्रवेश करते हैं। इन्हीं में से एक कारण है ‘SEX’। महिलाएं अक्सर ये सवाल पूछा करती हैं कि आखिर सेक्स के वक्त UTI होने का क्या कारण ? आज हेल्थ शॉट्स आपके इसी प्रश्न का जवाब लेकर आएं हैं। जानेंगे SEX और UTI के बीच क्या संबंध है।

एक्सपर्ट के मुताबिक सेक्स से होने वाले UTI के कुछ सामान्य कारण बताएं हैं। साथ ही उन्होंने कुछ बचाव के नुक्से भी बताएं हैं, जिन्हें याद रख सेक्स के बाद होने वाले UTI के खतरे को कम कर सकती हैं।

समझें सेक्स से यूटीआई होने की वजह

Do we have to face the risk of UTI after sex?

UTI पैदा करने वाले बैक्टीरिया एनस के आस-पास के क्षेत्र में रहते हैं। इंटरकोर्स ही नहीं बल्कि कोई भी अन्य सेक्सुअल एक्टिविटी बैक्टीरिया को यूरिनरी ट्रैक के करीब और ऊपर धकेल सकती है और यूटीआई का कारण बन सकती है। पुरुष और महिला दोनों को सेक्स से यूटीआई हो सकता है, महिलाओं में पोस्ट-कोइटल यूटीआई विकसित होने की संभावना अधिक होती है। डेटा की मानें तो यूटीआई के लक्षण अक्सर सेक्स करने के लगभग 02 दिनों के बाद शुरू होते हैं।

ज्यादातर यूटीआई गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल (GI) ट्रैक से बैक्टीरिया के कारण होते हैं। 80 फीसदी से ज़्यादा यूटीआई एस्चेरिचिया कोली (ई कोलाई) बैक्टीरिया के कारण होते हैं। ये कीटाणु आंतों के अंदर सामान्य और आम होते हैं, जहां वे आपको बीमार किए बिना पाचन में मदद करते हैं।

1. सेक्सुअल इंटरकोर्स:

सेक्सुअल इंटरकोर्स का मोशन एनस के आस-पास रहने वाले बैक्टीरिया को मूत्रमार्ग की ओर धकेल सकती है। इससे बैक्टीरिया के शरीर में प्रवेश करने और संक्रमण पैदा करने का जोखिम बढ़ जाता है। सेक्स से इंटिमेट एरिया में जलन हो सकता है। यह जलन संक्रमण के जोखिम को बढ़ा देती है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि पेनेट्रेटिव सेक्स यूटीआई का एकमात्र कारण नहीं है। ओरल और मैनुअल सेक्स भी वेजाइनल ओपनिंग में हानिकारक बैक्टीरिया के प्रवेश का कारण बन सकता है, जिससे संक्रमण हो सकता है।

2. अनसेफ सेक्स:

कई बार लोग बिना प्रोटेक्शन के नियमित सेक्स करते हैं, जिसकी वजह से भी UTI का खतरा बढ़ जाता है। अगर आप बिना प्रोटेक्शन के सेक्स कर रही हैं, तो हाइजीन के प्रति बरती गई छोटी सी भी लापरवाही आपको UTI का शिकार बना सकती है। इंटरकोर्स के दौरान एक दूसरे के इंटिमेट एरिया पर मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया एक्सचेंज हो सकते हैं, जिसकी वजह से UTI हो जता है।

3. एनल सेक्स:

एनल सेक्स के दौरान एनस में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया आपके जेनिटल में पास हो सकते हैं, जिसकी वजह से यूरिनरी ट्रैक्ट इनफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। यदि कोई आदमी एनल सेक्स कर रहा है, तो उनमें इसका खतरा अधिक होता है।

4. बर्थ कंट्रोल:

कुछ गर्भनिरोधक, जैसे कि डायाफ्राम और स्पर्मिसाइड लुब्रिकेंट्स, यूटीआई के जोखिम को बढ़ा देते हैं। डायाफ्राम यूरिनरी ट्रैक्ट की ओर पुश होता है, जिससे इसके ब्लैडर में फंसने की संभावना अधिक होती है। जब ऐसा होता है, तो बैक्टीरिया बढ़ सकते हैं, जिससे संक्रमण हो सकता है। शुक्राणुनाशक (अक्सर लुब्रिकेंट और कंडोम में पाए जाते हैं) इंटिमेट एरिया के बैक्टिरियल बैलेंस को बदल सकते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

सेक्स के बाद UTI के खतरे को कम करने के कुछ प्रभावी तरीके

Do we have to face the risk of UTI after sex?

सेक्स के पहले और सेक्स के बाद यूरिन पास करना बहुत जरूरी है। इससे बैक्टीरिया यूरिनरी ट्रैक्ट से बाहर निकल आता है और उन्हें संक्रमण फैलने का समय नहीं मिलता।

सेक्सुअल इंटरकोर्स के दौरान प्रोटेक्शन यानी कि मेल और फीमेल कंडोम का इस्तेमाल करें। ताकि एक दूसरे के स्किन पर मौजूद बैक्टीरिया जेनिटल में ट्रांसफर हो कर आपको संक्रमंत न कर सके।

सेक्स से पहले और बाद में हाइजीन का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। अपने इंटिमेट एरिया को आगे से पीछे की ओर अच्छी तरह से क्लीन करें।

अपने जन्म नियंत्रण पर ध्यान से विचार करें। यदि आप डायाफ्राम या शुक्राणुनाशक का उपयोग करती हैं, तो ये स्वस्थ बैक्टीरिया को मार सकते हैं, जो कीटाणुओं को नियंत्रित रखते हैं। इसलिए इनके इस्तेमाल से बचें।

लुब्रिकेंट का उपयोग करें, सेक्सुअल इंटरकोर्स के दौरान लगातार फ्रिक्शन होने की वजह से इंटिमेट एरिया के आसपास जलन हो सकती है। वहीं कई बार कट लगने की वजह से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है, लुब्रिकेंट आपके इंटरकोर्स को बेहद स्मूद बना देता है।

UTI के रिस्क को अवॉइड करने के लिए इन बातों का भी रखें ख्याल

इंटिमेट एरिया पर डौश, पाउडर या स्प्रे का उपयोग न करें। इससे हेल्दी बैक्टीरिया का प्रभाव कम हो जाता है जिससे की हानिकारक बैक्टीरिया हावी हो कर संक्रमण का कारण बन सकते हैं।

स्टॉल पास करने के बाद अपने एनस को अच्छी तरह से साफ करें, क्योंकि सबसे ज्यादा हानिकारक बैक्टीरिया इसी एरिया में होते हैं, जिनकी वजह से इंटरकोर्स के दौरान संक्रमण के ट्रांसफर होने का खतरा बढ़ जाता है।

नियमित रूप से प्रोबायोटिक जैसे की दही, कंबूजा, अचार आदि का सेवन करें। इससे UTI का खतरा कम होता है, अलावा इसके क्रैनबेरी जूस भी बचाव में आपकी मदद कर सकती है।