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इबादत, रहमत, मगफिरत और फजीलतों की रात है Shab-E-Barat, जानें इसकी अहमियत

Shab-e-Barat is the night of worship, mercy, forgiveness and virtues

इस्लाम में Shab-E-Barat त्योहार की इस्लाम में बहुत अहमियत है। इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक शाबान महीने की 15वीं तारीख की रात में शब-ए-बारात मनाई जाती है जो मंगलवार को देश भर में मनाई गई। शब-ए-बारात इबादत, रहमत, मगफिरत और फजीलतों की रात के तौर पर मानी जाती है। जिसे लेकर मुस्लिम समुदाय के सभी लोग पूरी रात अल्लाह से अपने किए गए गुनाहों की माफी मांगते हैं।

Shab-e-Barat is the night of worship, mercy, forgiveness and virtues

खुदा की इबादत का यह दिन बहुत ही खास और पवित्र तरीके से मनाते हैं। शब-ए-बारात के मौके पर मस्जिद और कब्रिस्तानों को खास तरीके के सजाया जाता है। कब्रिस्तान में चारों तरफ रोशनी की जाती है, साथ-साथ कब्रों पर चिराग जलाकर मगफिरत की दुआएं मांगी जाती है। लोग मस्जिदों और कब्रिस्तानों में जाकर अपने पूर्वजों के लिए अल्लाह की इबादत करते हैं। इसे चार मुकद्दस रातों में से एक मानते हैं जिसमें पहली आशूरा की रात, दूसरी शब-ए-मेराज, तीसरी शब-ए-बारात और चौथी शब-ए-कद्र की रात होती है।

Shab-e-Barat is the night of worship, mercy, forgiveness and virtues

मुस्लिम में शिया समुदाय शब-ए-बारात को इमाम-ए-जमाना हजरत मेहदी की पैदाइश की खुशी में मनाते हैं उनका मानना है कि अल्लाह इमाम-ए-जमाना के जन्मदिन की खुशी में अपनी रहमतें बरसाते हैं। इसलिए इस्लाम के सभी समुदाय के लोग रात भर जागकर नमाज़ और कुरान की तिलावत करते हैं। इमाम-ए-जमाना की पैदाइश के मौके पर शिया समुदाय जगह-जगह महफिलों भी करते हैं।

बता दें कि शब-ए-बारात पर घरों को विशेष रूप से सजाते हैं और लजीज पकवान जैसे- बिरयानी, हलवा और हलीम आदि बनाया जाता है और इबादत के बाद गरीबों में भी बांटा जाता है।

फोचो सौजन्य- गूगल

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