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Author Archives: Zahid Abbas

Remove dead skin cells with these 4 homemade face packs to brighten dull and lifeless skin

Homemade Face pack: गर्मी में आपके स्किन से ज्यादा पसीना आता है जिसके कारण से गंदगी, धूल स्किन पर लंबे वक्त तक चिपकी रहती हैं और त्वचा को खराब कर देती हैं। अलावा इसके सूरज की हानिकारक किरणों का प्रभाव त्वचा की ऊपरी हिस्से को जला देता है, जिसे सनबर्न भी कहा जाता है। इस हालत में स्किन पर बार-बार डेड स्किन सेल्स जम जाते हैं और आपकी स्किन बेहद डल और बेजान नजर आती है। अगर आपके साथ भी ऐसी कुछ हुआ है तो आज हम आपके लिए चार होममेड फेस मास्क लेकर आए हैं, जो आपकी स्किन पर जमे डेड स्किन सेल्स को रिमूव करने और आपकी त्वचा को नेचुरल ग्लो प्रदान करने में मदद करेंगे। आइये जानते हैं इन्हें कैसे इस्तेमाल करें-

जाने क्यों जरूरी है त्वचा से डेड स्किन सेल्स को हटाना

डेड स्किन सेल्स को हटाने की कई फायदे हैं। यह स्किन पोर्स को बंद होने से बचाता है। जब ज्यादा डेट स्किन सेल्स हो जाते हैं, तो वे त्वचा के पोर्स को बंद कर देते हैं, जिसकी वजह से एक्ने ब्रेकआउट की समस्या हो सकती है। अलावा इसके डेड स्किन सेल्स रिमूव होते हैं, तो नए सेल्स का निर्माण होता है, जिससे आपकी त्वचा ज्यादा फ्रेश और रेडिएंट नजर आती है।

गर्मी में जब त्वचा की ऊपरी परत जल जाती है, तो वे डेड स्किन सेल्स में परिवर्तित हो जाती है। जिसके कारण स्किन डल तथा बेजान नजर आती है। ऐसे में डेड स्किन सेल्स रिमूव करने से आपकी त्वचा के टेक्सचर और कांप्लेक्शन दोनों में सुधार होता है। साथ ही साथ जब डेड स्किन सेल्स हट जाते हैं, तो किसी भी स्किन केयर प्रोडक्ट को त्वचा आसानी से अवशोषित कर पाती है, जिससे उसका ज्यादा लाभ प्राप्त होता है।

4 होममेड फेस मास्क जो त्वचा को प्रदान करते हैं नेचुरल ग्लो

1. एवोकाडो फेस मास्क

Remove dead skin cells with these 4 homemade face packs to brighten dull and lifeless skin

इसे बनाने के लिए आपको चाहिए: आधा मैश किया हुआ एवोकाडो, 1 चम्मच शहद और 1 चम्मच ऑलिव ऑयल

इस तरह तैयार करें:

सबसे पहले एक बोल में मैश किया हुआ एवोकाडो, शहद और ऑलिव ऑयल डालकर सभी को आपस में अच्छी तरह मिक्स करें।
एक पेस्ट तैयार करें अब इस पेस्ट को अपनी त्वचा एवं गर्दन पर अप्लाई करें।
फिर इसे 15 से 20 मिनट तक लगा हुआ छोड़ दें।
समय पूरा हो जानें पर हाथों को गिला करें, जरूरत पड़ने पर चेहरे पर भी पानी लगा सकती हैं।
फिर हल्के हाथों से त्वचा को मसाज करें।
इस प्रकार डेड स्किन सेल्स बाहर निकल आएंगे और जरूरी पोषक तत्व त्वचा में अवशोषित हो जाएगा।
आखिर में सामान्य पानी से त्वचा को साफ कर लें और स्किन को ड्राई होने दें।

2. ओटमील योगर्ट फेस मास्क

इसे बनाने के लिए आपको चाहिए: 1 चम्मच ओटमील, 1 चम्मच योगर्ट और 1 चम्मच शहद

इस तरह तैयार करें:

सभी सामग्री को एक बोल में अच्छी तरह से मिक्स कर लें और एक स्मूद पेस्ट बना लें।
अब इस पेस्ट को अपने चेहरे की त्वचा एवं गर्दन पर अच्छी तरह अप्लाई करें।
फिर 15 से 20 मिनट तक लगा हुआ छोड़ दें, इसके बाद अपने हाथों को गिला करें और सर्कुलर मोशन में 2 मिनट तक चेहरे की मसाज करें।
इससे आपके डेड स्किन सेल्स बाहर निकल आएंगे।
आखिर में अपनी त्वचा को सामान्य पानी से साफ कर लें, और स्किन को सुखाकर इस पर मॉइश्चराइजर अप्लाई करें।

3. बेसन दही से बना फेस मास्क

Remove dead skin cells with these 4 homemade face packs to brighten dull and lifeless skin

इसे बनाने के लिए आपको चाहिए: एक चम्मच बेसन, दो चम्मच दही, आधा चम्मच नींबू का रस, आधा चम्मच शहद

इस तरह तैयार करें:

सबसे पहले एक बोल में बेसन, दही, शहद और नींबू सभी को आपस में मिक्स करें और एक पेस्ट तैयार करें।
अब इस पेस्ट को अपनी त्वचा पर अप्लाई करें और 15 से 20 मिनट तक लगा हुआ छोड़ दें।
जब यह ड्राई हो जाए तो अपने चेहरे को गिला करें और हल्के हाथों से सर्कुलर मोशन में त्वचा को मसाज दें।
इस प्रकार डेड स्किन सेल्स रिमूव हो जाएंगे और आपकी त्वचा में नेचुरल ग्लो जुड़ जाएगा।
आखिर में हल्के गुनगुने या सामान्य पानी से त्वचा को साफ कर लें।

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4. चावल के आटे का स्क्रब

इसे बनाने के लिए आपको चाहिए: 2 चम्मच चावल का आटा और 2 चम्मच ऐलोवेरा जेल

इस तरह तैयार करें:

चावल के आटे और एलोवेरा जेल को आपस में एक साथ अच्छी तरह मिक्स कर लें।
अब इसे अपनी त्वचा पर अप्लाई करें और 2 मिनट तक उंगलियों को सर्कुलर मोशन में घूमते हुए स्किन को मसाज दें।
मसाज देने के बाद इन्हें लगभग 05 मिनट से 10 मिनट तक त्वचा पर लगा हुआ छोड़ दें।
आखिर में सामान्य पानी से स्किन को साफ कर लें।

फोटो सौजन्य- गूगल

World No-Tabacco Day: This year, WHO has focused on helping youth and children

World No-Tabacco Day: हर फिल्म से पहले सिनेमा हॉल और टीवी पर एक विज्ञापन चलता है धूम्रपान स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, कृपया इससे दूरी बनाएं। बड़े स्तर पर जागरूकता चलाए जाने के बावजूद भारत के लोग एक बड़ी संख्या में सिगरेट, ई- वेपिंग, बीड़ी और तंबाकू का सेवन करते हैं। तंबाकू सेहत के लिए कितना हानिकारक है, इसके बारे में वैश्विक स्तर पर लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाया जाता है। इस साल विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने युवाओं और बच्चों को तंबाकू और निकोटीन की लत से बचाने पर खास जोर दिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने विशेषकर भारत में युवाओं के बीच तंबाकू के मद्देनजर एक बड़ी चेतावनी दी है।

बड़ी संख्या में तंबाकू का हो रहा है सेवन

आंकड़ों के अनुसार, तंबाकू की वजह से भारत में हर वर्ष करीब 13 लाख लोगों की मौत होती है। सिगरेट और बीड़ी के अलावा गुटखा, खैनी, जर्दा और अन्य तंबाकू उत्पाद भी लोगों की सेहत को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं। भारत में तंबाकू का इस्तेमाल करने वालों की संख्या बहुत ज्यादा है।

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क्या कहना है विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का ?

World No-Tabacco Day: This year, WHO has focused on helping youth and children

विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि तंबाकू कंपनियां नए-नए तरीकों से युवाओं को अपने प्रोडक्ट्स की ओर आकर्षित करने की हर कोशिश कर रही है और युवा इसके झांसे में आ भी रहे हैं। रंग-बिरंगी पैकेजिंग, फ्लेवर वाले प्रोडक्ट और सोशल मीडिया के जरिए प्रचार से बच्चे और युवाओं के दिमाग को तेजी से प्रभावित कर रहे हैं। इस दौरान WHO ने भारत से तंबाकू और निकोटीन उत्पादों के प्रचार पर सख्ती बढ़ाने की अपील की है।

तंबाकू से होती है घातक बीमारियां ?

तंबाकू शरीर के लगभग हर हिस्से को नुकसान पहुंचाता है। इससे कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसमें मुख्य रूप से शामिल हैः

  • फेफड़ों का कैंसर
  • मुंह और गले का कैंसर
  • दिल की बीमारी
  • हार्ट स्ट्रोक
  • सांस की गंभीर बीमारियां
  • हाई ब्लड प्रेशर
  • प्रेग्नेंसी से जुड़ी परेशानियां

इतना ही नहीं, जो लोग खुद तंबाकू नहीं लेते लेकिन धुएं के संपर्क में रहते हैं, उनकी सेहत पर भी बुरा असर पड़ सकता है।

तंबाकू युवाओं के लिए क्यों है बड़ा खतरा?

हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि ई-सिगरेट और निकोटीन वाले नए उत्पाद युवाओं को तेजी से अपनी गिरफ्त में ले रहे हैं। कई बार बच्चे इन्हें कम नुकसानदायक समझ लेते हैं, लेकिन इनमें मौजूद निकोटीन लत पैदा कर सकता है और दिमाग के विकास को प्रभावित कर सकता है।

तंबाकू छोड़ने के फायदे?

  1. तंबाकू छोड़ने के बाद शरीर खुद को ठीक करना शुरू कर देता है।
  2. 20 मिनट के भीतर दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर सामान्य होने लगते हैं।
  3. 24 घंटे के भीतर दिल के दौरे का खतरा कम होने लगता है।
  4. कुछ हफ्तों में सांस लेने में सुधार महसूस हो सकता है।
  5. लंबे समय में कैंसर और दिल की बीमारी का खतरा काफी कम हो जाता है।
  6. तंबाकू एक ऐसी आदत है जो धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाती है।

भारत में हर साल 13 लाख लोगों की मौत इस वजह से होती है। World No-Tobacco Day हमें याद दिलाता है कि तंबाकू से दूरी बनाकर हम खुद और अपने परिवार को कई गंभीर बीमारियों से बचा सकते हैं।

फोटो सौजन्य- गूगल

Why is Eid-ul-Azha celebrated and what is its importance?

Eid Ul Adha: इस बार 28 मई को ईद-उल-अजहा यानी बकरीद का त्योहार पूरे देश और दुनिया में मुस्लिम मना रहे हैं। बकरीद इस्लाम धर्म का प्रमुख त्योहार है जिसमें अल्लाह के प्रति अटूट विश्वास और आत्मत्याग के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। बकरीद के दिन सुबह मुस्लिम समुदाय के लोग नए कपड़े पहनकर मस्जिद या ईदगाह में विशेष नमाज़ अदा करते हैं। इसके बाद एक-दूसरे के गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी जाती है। नमाज़ के बाद जो आर्थिक रूप से सक्षम हैं, वे बकरे की कुर्बानी देते हैं और इसके गोश्त को गरीबों और रिश्तोदारों में बांटते हैं। सिर्फ तीसरा हिस्सा खुद के लिए रखते हैं। इस तरह समाज का हर तबका त्योहार की खुशियों और दावतों में शामिल होता है। आपको जानकर हैरानी होगी बकरीद की शुरुआत इस्लाम के आने के बहुत पहले से ही अरब जगत में मनाया जाता था। आइए इसके पूरे इतिहास और इससे जुड़ी कहानियों के बारे में जानते हैं।

ऐसे हुई बकरीद की शुरुआत

बकरीद या ईद-उल-अजहा की शुरुआत पैगंबर हजरत इब्राहिम (अ.स) के दौर में आज से करीब 4,000 वर्ष पहले हुई थी। यह त्योहार मुख्य रूप से अल्लाह के प्रति पूर्ण समर्पण, अटूट विश्वास और त्याग का ऐतिहासिक प्रतीक है। इस त्योहार के पीछे हजरत इब्राहिम के जीवन से जुड़ी एक ऐतिहासिक घटना जुड़ी हुई है। इस्लामिक मान्यताओं के मुताबिक अल्लाह ने हजरत इब्राहिम के सपने में आकर उनकी सबसे प्यारी चीज की कुर्बानी मांगी। इब्राहिम को अपनी ढलती उम्र में मिले इकलौते बेटे, हजरत इस्माइल सबसे ज्यादा प्रिय थे। लेकिन अल्लाह का हुक्म मानकर हजरत इब्राहिम ने अपने बेटे की कुर्बानी देने के लिए तैयार हो गए। जब उन्होंने बेटे को इसके बारे में बताया, तो बेटे इस्माइल ने भी अल्लाह की राह में समर्पित होने की रज़ामंदी दे दी  इब्राहिम अपने बेटे को लेकर मक्का के पास मीना के मैदान की ओर बढ़े। रास्ते में शैतान ने उन्हें इस परीक्षा से डिगाने और भटकाने का प्रयास किया पर उन्होंने उसे कंकड़ मारकर दूर भगा दिया। इसी याद में हज के दौरान आज भी शैतान को कंकड़ मारे जाते हैं। हलांकि, यह अलग कहानी है। बहरहाल, मीना पहुंचकर जब इब्राहिम ने अपनी आंखों पर पट्टी बांधी और बेटे की गर्दन पर छुरी चलाई, तो अल्लाह ने उनके इस सर्वोच्च समर्पण और नीयत को स्वीकार कर लिया और ठीक उसी वक्त अल्लाह ने अपने फरिश्ते जिब्राइल के जरिए जन्नत से एक दुम्बा (भेड़) वहां भेज दिया गया और इस्माइल की जगह उस दुम्बे की कुर्बानी हो गई। इसी ऐतिहासिक घटना की याद में हर वर्ष इस्लामी महीने जुल-हिज्जा की 10 तारीख को दुनिया भर के मुस्लिम सक्षम लोग पशु (बकरा, भेड़, या ऊंट) की कुर्बानी देते हैं। इस पर्व का मूल उद्देश्य सिर्फ खून बहाना नहीं, बल्कि इंसान के भीतर मौजूद अहंकार, स्वार्थ और बुराई को अल्लाह की राह में कुर्बान करना है। इसके गोश्त को तीन बराबर हिस्सों में बांटकर गरीबों, रिश्तेदारों और खुद के लिए रखने का सामाजिक नियम है।

सबसे पहले बकरीद की शुरुआत कैसे हुई

ईद-उल-अजहा का इतिहास करीब 4,000 साल पुराना माना जाता है। इस घटना का जिक्र सबसे पहले हिब्रु बाइबिल में लिखा गया है। इसमें हजरत इब्राहिम को अब्राह्म के नाम से जाना जाता है जबकि अब्राह्म के बेटे को इसहाक नाम से जाना जाता है। वहीं, फरिश्ता को एंजिल कहकर पुकारा जाता है। ऐतिहासिक और सामाजिक मान्यताओं के मुताबिक यह घटना मक्का की है लेकिन एक सालाना इस्लामी त्योहार के रूप में ईद-उल-अज़हा को आधिकारिक तौर पर सबसे पहले मदीना में मनाया गया था। दरअसल, 622 ईस्वी में जब पैगंबर मोहम्मद साहब ने मक्का से मदीना हिजरत की, तब उन्होंने देखा कि मदीना के लोग पहले से चले आ रहे कुछ पारंपरिक फारसी त्योहार जैसे नौरोज़ और मेहरजान को मनाते थे। पैगंबर साहब ने उन त्योहारों की जगह इस्लामी सिद्धांतों पर आधारित सिर्फ दो पवित्र दिन तय किए: ईद-उल-फितर यानी मीठी ईद और ईद-उल-अज़हा यानी बकरीद। इस तरह मदीना वह पहला स्थान बना जहां व्यवस्थित रूप से इस त्योहार की और सामूहिक नमाज़ की शुरुआत हुई।

Eid Ul Adha का सांस्कृतिक महत्व

बकरीद का पर्व अहंकार और स्वार्थ का त्याग करने के लिए मनाया जाता है। इसका मूल संदेश सिर्फ जानवर की कुर्बानी देना नहीं है बल्कि इंसान के भीतर छिपे स्वार्थ, लालच और अहंकार की कुर्बानी देना है. इससे समानता और सामाजिक सद्भाव की भावना भी प्रकट होती है। इसमें कुर्बानी के मांस को तीन बराबर हिस्सों में बांटा जाता है। एक हिस्सा परिवार के लिए, दूसरा हिस्सा रिश्तेदारों व दोस्तों के लिए और तीसरा हिस्सा गरीबों व जरूरतमंदों के लिए है। यह व्यवस्था समाज में आर्थिक असमानता को भुलाकर हर तबके को खुशी में शामिल करने का संदेश देती है।

बकरीद के दिन की शुरुआत 

Bakreed

बकरीद के दिन मुसलमान सुबह में जल्दी उठ जाते हैं। सबसे पहले फज्र की नमाज अता करते हैं। इसके बाद घर की साफ-सफाई और स्नान किया जाता है, फिर नए या सबसे साफ कपड़े पहने जाते हैं।

इस दिन आमतौर पर सुबह 8 से 10 बजे के बीच ईद-उल-अजहा की दो रकात विशेष नमाज़ और खुतबा (धार्मिक उपदेश) होता है. नमाज़ खत्म होते ही लोग आपस में गले मिलकर एक-दूसरे को ईद मुबारक कहते हैं। दुश्मनी भूलकर गले मिलने का यह सबसे भावुक पल होता है। मीठी ईद के उलट बकरीद की सुबह नमाज़ बिना कुछ खाए पढ़ी जाती है। नमाज़ के बाद ही लोग पहला निवाला लेते हैं। ईदगाह से लौटने के बाद ही कुर्बानी का सिलसिला शुरू होता है। नमाज़ से पहले दी गई कुर्बानी मान्य नहीं होती। धार्मिक नियमों के तहत बकरे, भेड़ या अन्य स्वीकृत पशु की कुर्बानी दी जाती है। फिर रसोई में गोश्त पकाया जाता है फिर पारंपरिक पकवानों के साथ एक साथ बैठकर परिवार के सदस्य भोजन करते हैं। शाम के वक्त बड़े-बुजुर्ग बच्चों को प्यार से ईदी देते हैं। नए कपड़े पहने बच्चे घर-घर जाकर अपनी ईदी जमा करते हैं। शाम के समय लोग अपने रिश्तेदारों, दोस्तों और हिंदू-मुस्लिम भाइयों के घर ईद मिलने जाते हैं। घरों में मेहमानों को  शीर-खुरमा और मटन के पकवान परोसे जाते हैं। इस दिन का समापन इस संतोष के साथ होता है कि समाज का कोई भी गरीब परिवार आज के दिन भूखा नहीं सोय। आज के दिन लोग रात में शांति व बरकत की दुआ के साथ दिन का समापन करते हैं।

फोटो सौजन्य- गूगल

A Strong relationship needs regular sex

Regular Sex: शरीर को स्वास्थ्य और एक्टिव बनाए रखने के लिए लोग अक्सर जिम और तरह-तरह के डाइट का सहारा लेते हैं, लेकिन रिश्ते में सेक्सुअल इंटिमेसी दिनों दिन बढ़ते तनाव के अलावा कई समस्याओं को दूर करने का बेहतरीन विकल्प है। दिनभर के कामकाज के बाद नियमित रूप से टेंशन का सामना करना पड़ता है, जो मूड स्विंग की वजह साबित होता है। ऐसे में सेफ सेक्स को रूटीन के तौर पर शामिल करना शारीरिक, इमोशनल और मानसिक स्वास्थ्य के लिहाज से काफी कारगर साबित होता है। वे महिलाएं जो अक्सर सेक्स को एंजॉय करती हैं वे अपने साथी के साथ जुड़ाव वाली फिलिंग महसूस करती हैं। जिससे रिश्ता खुशहाल बन जाता है और कुल मिलाकर उनका जीवन ज्यादा बैलेंस भरा होता है। आइये जानें रेगुलर सेक्स से होने वाले फायदे-

डॉक्टर के मुताबिक नियमित सेक्स कई तरह से आपकी मदद कर सकता है। हांलाकि सेक्स के विषय पर अभी भी लोग खुलकर बात करना पसंद नहीं करते हैं। यौन संबध से मेंटल हेल्थ और शरीर को सक्रिय रखने में मदद मिलती है। खासकर उम्र बढ़ने के साथ नियमित सेक्सुअल एक्टीविटीज़ में शामिल होने से शारीरिक और भावनात्मक स्वास्थ्य दोनों पर सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलता है।

SEX सेहत को प्रभावित करता है?

When do women experience more sexual desire?

अमेरिकन सेक्सुअल हेल्थ एसोसिएशन के अनुसार नियमित सेक्स शरीर को फायदा पहुंचाता है। ये पुरुषों और महिलाओं के लिए कार्डियोवैस्कुलर एक्सरसाइज़ के रूप में फायदा पहुंचाता है। इसके अलावा इम्यून सिस्टम को बूस्ट करने, हृदय रोगों से राहत, कैलोरीज़ स्टोरेज की रोकथाम और मसल्स की मज़बूती को बढ़ाने में मदद करता है।

नियमित सेक्स करने से आपको मिलते हैं ये 8 फायदे

1. इमोशनल बॉडिंग मजबूत होती है

अक्सर उम्र के साथ पति पत्नी के रिश्ते में खिंचाव बढ़ने लगता है। ऐसे में नियमित सेक्स इमोशनल इंटिमेसी और कपल्स के बीच गहरे संबंध को बढ़ाता है। ऑक्सीटोसिन को लव हार्मोन कहा जाता है, जो सेक्स और शारीरिक स्पर्श के दौरान रिलीज़ होता है। ये हार्मोन भावनात्मक बंधन को मजबूत करने में मदद करता है और भागीदारों के बीच विश्वास और स्नेह बढ़ाता है। इससे अधिक संतोषजनक और स्थिर संबंध बनते हैं। जर्नल सेज चॉइस की रिपोर्ट के अनुसार रेगुलर सेक्सुअल एक्टीविटी फिज़िकल और इमोशनल हेल्थ को प्रभावित करती है।

2. अच्छी आती है नींद

इससे शरीर में ऑक्सीटोसिन यानि लव हार्मोन की मात्रा बढ़ने लगती है और सेक्स के दौरान एंडोर्फिन रिलीज होता है। इन दोनों हार्मोन के मिलने से नींद की गुणवत्ता में सुधार आने लगता है। इससे शरीर को ज्यादा आराम महसूस होता है और ऊर्जा का स्तर भी बढ़ने लगता है।

3. इम्यून सिस्टम बेहतर होता है

एक रिपोर्ट के मुताबिक वे लोग जो फ्रीक्वेंट सेक्स करते थे यानि सप्ताह में एक से दो बार या उससे अधिक बार, उनके स्लाइवा में अधिक इम्युनोग्लोबुलिन ए आईजीए पाया जाता है। आईजीए एक प्रकार की एंटीबॉडी है जो बीमारियों को रोकने में महत्वपूर्ण साबित होती है और हयूमन पेपिलोमावायरस या एचपीवी के खिलाफ रक्षा कवच के रूप में कार्य करता है। इससे महिलाएँ बीमारियों और संक्रमणों से लड़ने के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो जाती हैं। रिपोर्ट के अनुसार जैसे जैसे यौन गतिविधि बढ़ती है, वैसे ही रोग प्रतिरोधक क्षमता संक्रमण से निपटने में अधिक सक्षम हो जाती है।

4. हृदय संबधी समस्याएं कम होती हैं

नियमित यौन संबध बनाने से हृदय गति, ब्लड सर्कुलेशन और ऑक्सीजन का प्रवाह बढ़ने लगता है, जो समग्र हृदय स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद करता है। नियमित सेक्स महिलाओं में हृदय रोग और स्ट्रोक के जोखिम को कम करने में भी कारगर है। एक रिपोर्ट के अनुसार नियमित यौन गतिविधि हृदय रोग वाले पुरुषों और महिलाओं के लिए रोगी के साथ साथ साथी के जीवन की गुणवत्ता को भी बढ़ाता है।

5. तनाव में कमी आती है

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इससे लाइफ में दिनों दिन बढ़ने वाले तनाव को कम किया जा सकता है और सकारात्मक मनोदशा को बढ़ावा देने की क्षमता में सुधार आने लगता है। दरअसल, सेक्स के दौरान शरीर एंडोर्फिन जारी करता है, जिससे व्यक्ति खुशी का अनुभव करता है। ये रसायन तनाव और चिंता से निपटने में मदद करते हैं जिससे महिलाएं ज्यादा आराम और संतुष्ट महसूस करती हैं। नियमित सेक्स करने से भावनात्मक कल्याण और समग्र खुशी का एक चक्र बन सकता है। जर्नल ऑफ़ फ़ैमिली साइकोलॉजी के शोध में पाया गया कि दैनिक जीवन में जिन प्रतिभागियों ने यौन गतिविधि कम होने की बात कही, उनमें सेक्स की कमी पाई गई।

6. पेल्विक मसल्स मज़बूत होती हैं

इंटिमेसी जहां सेक्सुअल हेल्थ के लिए फायदेमंद है, तो इससे पेल्विक फ्लोर मसल्स की भी मज़बूती बढ़ जाती है। इससे यूटर्स और ब्लैण्डर को भी हेल्दी रखा जा सकता है। सेक्सुअल एंक्टीविटी से जहां आपसी प्यार और अंडरस्टैडिंग बढ़ने लगती है, तो वहीं लोअर बॉडी के मसल्स को मज़बूती मिलती है और स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम कम हो जाता है। इससे वेजाइना से संबधी बीमारियों का जोखिम कम होने लगता है।

7. कम होती है पेट की चर्बी

प्लोस वन के रिसर्च के अनुसार पुरुष सेक्स के दौरान प्रति मिनट लगभग 4.2 कैलोरी जलाते हैं, जबकि महिलाएं प्रति मिनट 3.1 कैलोरी बर्न करती हैं। सेक्स से शरीर में कैलोरी स्टोरेज से बचा जा सकता है और शरीर स्वस्थ रहता है। कैलोरी बर्न होना सेक्स सेशन की स्पीड, समय और पोज़िशन पर निर्भर करता है।

8. नेचुरल पेन किलर है

सेक्स के दौरान एंडोर्फिन का स्राव न केवल तनाव को कम करने में मदद करता है बल्कि यह एक प्राकृतिक दर्द निवारक के रूप में भी काम कर सकता है। एक्सपर्ट के मुताबिक कुछ महिलाओं को यौन गतिविधि में शामिल होने के बाद सिरदर्द, ऐंठन और शरीर के अन्य दर्द से अस्थायी राहत फील होता है।

फोटो सौजन्य- गूगल

How beneficial is onion consumption in case of heat stroke

Onion for Heat Stroke: क्या गर्मी में आपको भी सिरदर्द, सिर घूमना या जी मिचलाने जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है? अगर आपका जवाब हां है तो ये लू लगने के लक्षण हो सकते हैं। गर्मी के दिन आते ही लू का खतरा काफी बढ़ जाता है। गर्म हवाएं, तेज धूप और शरीर में पानी की कमी से हेल्थ को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। बता दें कि हीट स्ट्रोक तब लगती है, जब शरीर का तापमान बहुत अधिक बढ़ जाता है और शरीर खुद को ठंडा नहीं कर पाता है। ऐसे हालत में तेज बुखार, चक्कर आना, सिर दर्द, जी मिचलाना और कमजोरी जैसे सिंपटम महसूस हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में फौरन इलाज की जरूरत पड़ती है। ऐसे में अक्सर घरों में एक पुराना नुस्खा अपनाया जाता है- प्याज का सेवन। पर, क्या वाकई प्याज खाने से हीट स्ट्रोक से राहत मिल सकती है? आइये जानते हैं प्याज खाने से लू से कितना संभव है बचाव?

लू लगने पर प्याज खाना कितना असरदार?

How beneficial is onion consumption in case of heat stroke

गर्मी में प्याज खाने की सलाह दी जाती है। कहा जाता है कि प्याज खाने से लू से बचाव होता है और गर्मी कम लगती है। दरअसल, प्याज में एंटीऑक्सीडेंट्स, सल्फर कंपाउंड्स और हल्का कूलिंग इफेक्ट होता है, जिससे लू से बचा जा सकता है।

लू से बचाव के लिए कच्चा प्याज खाना फायदेमंद होता है।
प्याज का रस पीने से भी लू से बचाव संभव है।
कई लोग तलवों और माथे पर प्याज का रस लगाने की सलाह देते हैं।

इन बातों का रखें ध्यान

  • प्याज खाने से शरीर को ठंडक मिलती है। इसलिए आपको समर डाइट में प्याज जरूर शामिल करें।
  • प्याज खाने से तेज बुखार या हीट स्ट्रोक के लक्षणों को कम नहीं किया जा सकता है।
  • गर्मी की वजह से होने वाली बेहोशी को प्याज खाकर ठीक नहीं किया जा सकता है।
  • प्याज लू का इलाज नहीं है। बल्कि, प्याज खाने से लू से काफी हद तक बचा जा सकता है।

लू लगने पर क्या करना चाहिए?

  1. अगर आपको लू के लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो कुछ बातों का ध्यान रखें।
  2. ठंडी जगह पर बैठें और आराम करें।
  3. शरीर को ठंडा करें। आप नहा सकते हैं या शरीर को गीले कपड़े से पोंछ सकते हैं।
  4. ओआरएस का पानी पिएं। आप नारियल पानी और नींबू पानी भी पी सकते हैं।

वैसे तो लू को इन टिप्स से ही ठीक किया जा सकता है। लेकिन कुछ गंभीर मामलों में लू लगने पर अस्पताल में भर्ती की जरूरत पड़ सकती है।

हीट स्ट्रोक से बचने के लिए क्या करें?

  • लू से बचने के लिए दिन में 12 से 4 बजे के बीच में बाहर जाने से बचें।
  • दिनभर खूब सारा पानी पिएं। लिक्विड डाइट पर फोकस करें।
  • हल्के और ढीले कपड़े पहनें।
  • छाता या टोपी का इस्तेमाल करें।
  • डाइट में प्याज, दही, छाछ, तरबूज आदि शामिल करें।

अगर आपको भी गर्मी में अक्सर ही लू से जुड़ी समस्या रहती है, तो प्याज का सेवन करना फायदेमंद हो सकता है। प्याज का सेवन करने से शरीर को ठंडक मिलती है और लू से बचाव होता है।

फोटो सौजन्य- गूगल

Birth Control Pill: Scientists have created a male contraceptive pill that puts a temporary brake on sperm production

Birth Control Pill: दशकों से गर्भनिरोधक की जिम्मेदारी ज्यादातर महिलाओं पर ही रही है, जबकि पुरुषों के पास सीमित विकल्प कंडोम या नसबंदी के रूप में उपलब्ध है। लेकिन अब साइंस की नई खोज इस सोच को बदलने जा रही है। हाल ही में पब्लिश एक स्टडी में विज्ञानिक ने पुरुषों के लिए ऐसी गर्भनिरोधक दवा की दिशा में बड़ी कामयाबी हासिल की है, जो बिना हार्मोन असर के काम कर सकती है और जिसका प्रभाव अस्थायी हो सकता है।

जाने क्या है ये नई खोज ?

Birth Control Pill: Scientists have created a male contraceptive pill that puts a temporary brake on sperm production

अमेरिका की कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने अपनी रिसर्च में बताया कि शरीर में एक खास प्रक्रिया को रोककर स्पर्म बनने की प्रक्रिया को अस्थायी रूप से बंद किया जा सकता है। सबसे खास बात यह है कि इससे शरीर को कोई स्थायी नुकसान नहीं होता और दवा बंद करने पर फिर से सामान्य स्थिति लौट सकती है।

इस रिसर्च में साइंटिस्ट ने मियोसिस नाम की एक अहम जैविक प्रक्रिया पर ध्यान दिया, जो स्पर्म बनने के लिए जरूरी होती है। इस्तेमाल के दौरान एक खास कंपाउंड का प्रयोग कर इस प्रक्रिया को चूहों में अस्थायी रूप से रोक दिया गया। इसका नतीजा यह हुआ कि स्पर्म बनना बंद हो गया, पर जब दवा बंद की गई, तो उनकी प्रजनन क्षमता वापस लौट आई और वे स्वस्थ संतानों को जन्म देने में सक्षम रहे।

यह खोज क्यों अहम है?

यह खोज इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि अब तक पुरुष गर्भनिरोधक तरीकों में कई दिक्कतें सामने आती रही हैं। हार्मोन आधारित तरीकों से मूड में बदलाव और यौन इच्छा में कमी जैसी समस्याएं होती हैं, जबकि नसबंदी स्थायी समाधान है और इसे आसानी से वापस नहीं किया जा सकता है। ऐसे में बिना हार्मोन वाला और अस्थायी तरीका उम्मीद की किरण के तौर पर देखा जा रहा है।

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यह तकनीक ऐसे काम करती है ?

यह नई तकनीक स्पर्म के विकास के एक खास फेज को रोककर काम करती है। जब यह प्रक्रिया बाधित होती है, तो स्पर्म सही तरीके से विकसित नहीं हो पाते और प्रजनन क्षमता कुछ समय के लिए ठहर जाती है। हालांकि, जैसे ही दवा का असर खत्म होता है, शरीर दोबारा सामान्य रूप से काम करने लगता है। जबकि साइंटिस्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि अभी प्रयोग किया गया कंपाउंड इंसानों के लिए पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा सकता। इसमें कुछ संभावित दुष्प्रभाव हो सकते हैं, इसलिए फिलहाल इसे एक शुरुआती कदम के तौर पर देखा जा रहा है। इसका मकसद ऐसे सुरक्षित विकल्प विकसित करना है, जो इसी प्रक्रिया को निशाना बनाकर काम कर सकें।

फोटो सौजन्य- गूगल

India's first National Astrology Mahakumbh was organized in Delhi

New Delhi: “ज्योतिष विद्या हमारी प्राचीन सांस्कृतिक विरासत में गहराई से जुड़ी हुई है, लेकिन आज की आधुनिक युग में आगे बढ़ने के लिए परंपरा और विज्ञान, दोनों को संतुलित रूप से अपनाने की ज़रूरत है,” ये विचार व्यक्त किए केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने। वे शनिवार को नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित ‘एस्ट्रो-कल्चरल महोत्सव कॉन्क्लेव’ को संबोधित करते हुए अपना दृष्टिकोण सामने रख रहे थे।

India's first National Astrology Mahakumbh was organized in Delhi

केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि जब इस प्राचीन विद्या का उपयोग सकारात्मक सोच को प्रेरित करने और सही मार्गदर्शन देने के लिए किया जाता है, तो यह समाज के लिए अत्यंत लाभकारी हो सकती है। इसी तरह के विचार व्यक्त करते हुए, दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने 21वीं सदी में ज्योतिष की निरंतर प्रासंगिकता को रेखांकित किया, और इसे उस गहन आस्था का प्रतिबिंब बताया जो मानव जीवन को ब्रह्मांड से जोड़ती है। तीव्र संचार के इस युग में, विजेंद्र गुप्ता ने एस्ट्रो कल्चरल महोत्सव की तारीफ करते हुए कहा कि पारंपरिक ज्ञान को बढ़ावा देने वाले मंच सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने और सामुदायिक ज़िम्मेदारी को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

India's first National Astrology Mahakumbh was organized in Delhi

पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्वनी चौबे ने कहा की ज्योतिष शास्त्र हमारी प्राचीन भारतीय संस्कृति और वेदों से जुड़ी एक महत्वपूर्ण विद्या है, जिसने सदियों से मानव जीवन का मार्गदर्शन किया है। इसका उपयोग सकारात्मक सोच और समाज के कल्याण के लिए होना चाहिए।

भव्य एवं ऐतिहासिक “राष्ट्रीय ज्योतिष महाकुंभ-एस्ट्रो कल्चरल  महोत्सव” में देश भर के जाने-माने ज्योतिषी एक मंच पर एकत्र हुए। इस अवसर पर लाइफ डिज़ाइनर एवं वास्तु केंद्र–ज्योतिष एंड रिसर्च सेंटर के संस्थापक कुणाल कुमार ने कहा कि ज्योतिष शास्त्र जीवन की समस्याओं और संभावनाओं को समझने का एक वैज्ञानिक आधारित दृष्टिकोण प्रदान करता है, न कि सिर्फ भविष्य कहने वाला एक साधन।

रियल एस्टेट की दुनिया में एक अलग पहचान बना चुके राम रतन ग्रुप के चेयरमैन विजय राम रतन ने भी ज्योतिष कॉन्क्लेव में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। उन्होंने इस कॉन्क्लेव में रियल एस्टेट में ज्योतिष के महत्व पर चर्चा की।

ज्वेलरी की वैज्ञानिक रूप से पहचान, परीक्षण और प्रमाण पत्र देने वाली संस्था Gem Lab के डायरेक्टर दविंदर सिंह को एस्ट्रो महाकुम्भ में सम्मानित किया गया। उन्होंने बताया कि Gem Lab का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई रत्न क्यों, कैसे और कितना वास्तविक है — ताकि खरीदार धोखे से बच सके और उसकी कीमत सही मिले।

Help U Educational and Charitable Trust के संस्थापक और प्रबंध ट्रस्टी डॉ. हर्षवर्धन अग्रवाल ने एस्ट्रो कल्चरल महोत्सव पर सम्मानित किया गया। उन्होंने कहा कि सारे अच्छे काम नीति निर्माण और बेहतर प्रशासन से ही संभव हो सकते हैं। कोटा स्थित ALLEN Career Institute के सह-संस्थापक और निदेशक ब्रजेश महेश्वरी भी इस मौके पर सम्मानित किये गए।

India's first National Astrology Mahakumbh was organized in Delhi

डी एच डिस्कवरी इलेक्ट्रॉनिक्स के डायरेक्टर तलविंदर सिंह लाली ने एस्ट्रो कल्चरल महोत्सव कॉन्क्लेव में विशेष सहयोग दिया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि सनातन से जुड़े हर आयोजन को वे अपने स्पीकर्स के जरिए नई पहचान देंगे। उनका उद्देश्य है- हर आध्यात्मिक आवाज को दूर-दूर तक पहुंचाना और उसे सशक्त बनाना।

एस्ट्रोलोजर एआई के जरिये ज्योतिष का ज्ञान दे रहे एस्ट्रोज एआई के सीईओ प्रतीक पाण्डेय ने एस्ट्रो की दुनिया के कई रहस्यों से पर्दा उठाया। स्प्रिचुअल एडवाइजर और क्रिएटिव Entrepreneur/Strategist केवल कपूर को इस कार्यक्रम में विशेष रूप से सम्मानित किया गया।

महोत्सव को सेलेब्रिटी एस्ट्रोलॉजर डॉ वाई राखी, जी डी वशिष्ठ, अजय भाम्बी, कुनाल वास्तु केंद्र के संस्थापक कुनाल कुमार, फादर ऑफ़ एस्ट्रोलोजी के नाम से मशहूर विवेक त्रिपाठी, अनिल वत्स, डॉ. नीति शर्मा और सारथी त्रिशला चतुर्वेदी, एस्ट्रो अंकित, आचार्य शुभेश शर्मन, कॉर्पोरेट वास्तु एक्सपर्ट मनोज जैन, रीतू सिंह, आचार्य विक्रमादित्य, प्रोफेसर (डॉक्टर) ज्योतिषाचार्य सुजाता शर्मा, ज्योतिष रतन के डॉक्टर अरविन्द कुमार, ज्योतिषाचार्य सतेंदर प्रकाश, अंक ज्योतिष के जानकार राही रामेश यादव, वास्तु एक्सपर्ट पवन भाटिया, एस्ट्रोलॉजर डॉक्टर श्वेता शर्मा ने भी संबोधित किया। कथा वाचक वर्धा नारायण, अंक ज्योतिषी अनुराग पुरी, रिद्धि सिद्धि एडवरटाइजिंग एजेंसी के सीईओ विनय धींगरा एवं संदीप कुमार के आलावा म्यूजिक वैली के डायरेक्टर योगेश शर्मा, समाजसेवक राशिद इस्माईल, सुधाकर गैसोलिन से आशी जैन, मेघदूत ग्रामो उद्योग सेवा संस्थान के डायरेक्टर विवेक शुक्ला, संअनुभूति संस्था के प्रेसिडेंट संजय गौतम मौजूद रहे।

एस्ट्रो कल्चरल महोत्सव में नेशनल यूनियन ऑफ़ जर्नलिस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार रास बिहारी, वरिष्ठ पत्रकार अशोक किंकर, दधिबल यादव, राकेश थपलियाल, खरी कसौटी नेशनल न्यूज़ पेपर के प्रधान संपादक के सी विश्नोई व वरिष्ठ पत्रकार संजय पोद्दार, वरिष्ठ पत्रकार एवं टीवी एंकर डॉ श्रीवर्धन त्रिवेदी, अनुराग मुस्कान, विकास कौशिक, प्रवीण तिवारी, हिमांशी सिंह आदि मौजूद रहे।

आखिर में कार्यक्रम के आयोजक प्रदीप श्रीवास्तव एवं फजले गुफरान ने एस्ट्रो कल्चरल महोत्सव के सफल आयोजन पर सभी अतिथियों और सहयोगियों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि अगर सरकार और एस्ट्रोलॉजी से जुड़े लोगों का सहयोग और समर्थन मिलता रहा तो एस्ट्रो महाकुंभ देश के अलग-अलग शहरों में आयोजित किया जाएगा।

Dhurandhar 2 becomes the first film to cross the Rs 1,000 crore mark at the domestic box office

Dhurandhar-2 रिलीज के बाद से ही हर दिन नए रिकॉर्ड बना रही है। ये फिल्म पहले भारत में सबसे अधिक कमाई करने वाली फिल्म साबित हुई है। इसके बाद इस फिल्म ने 1,000 करोड़ रुपये की कमाई करने का रिकॉर्ड बनाया है। आइये जानते हैं इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर कितने रुपये बटोरे हैं।

‘धुरंधर 2’ की अब तक की कमाई

Dhurandhar 2 becomes the first film to cross the Rs 1,000 crore mark at the domestic box office

दूसरे हफ्ते के आखिर में ‘धुरंधर 2’ की कमाई घट गई थी। तीसरे वीकेंड पर फिल्म की कमाई में दोबारा इजाफा हुआ। रविवार को फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर 28.75 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया। पहले दिन इसने 102.55 करोड़ रुपये कमाए थे। एक वीक में फिल्म का कारोबार 674.17 करोड़ रुपये रहा था। दूसरे हफ्ते में इस फिल्म ने 263.65 करोड़ रुपये कमाए। इस तरह से 18 दिनों में इसने 1013.77 करोड़ रुपये का टोटल कलेक्शन किया है। घरेलू बॉक्स ऑफिस पर 1,000 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार करने वाली यह पहली फिल्म बन गई है।

‘धुरंधर 2’ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन

Dhurandhar 2 becomes the first film to cross the Rs 1,000 crore mark at the domestic box office

‘धुरंधर 2’ जहां भारत में बेहतरीन कलेक्शन कर रही है, वहीं दुनियाभर के बॉक्स ऑफिस पर भी छाई हुई है। 18 दिनों में फिल्म ने वर्ल्डवाइड 1,605.74 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्शन किया है। नॉर्थ अमेरिका में इस फिल्म ने 25 मिलियन डॉलर की कमाई की है। यहां यह फिल्म सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बन गई है।

जाने किन फिल्मों से अब भी है पीछे

‘धुरंधर 2’ ने भारतीय बॉक्स ऑफिस पर जहां सभी फिल्मों को पीछे छोड़ दिया है, वहीं वर्ल्डवाइड कलेक्शन के मामले में यह फिल्म अब भी ‘पुष्पा 2’, ‘बाहुबली 2’ और ‘दंगल’ से पीछे है। ‘पुष्पा 2’ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन लगभग 1,742 करोड़ रुपये है। ‘बाहुबली 2’ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन लगभग 1,788 करोड़ रुपये है। इसी तरह ‘दंगल’ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन लगभग 2,070 करोड़ रुपये है।

फोटो सौजन्य- गूगल

Eid-ul-Fitra is a symbol of mutual brotherhood, love and unity

Eid-Ul-Fitra: रमजान के 30 रोजे रखने के बाद अब ईद की खुशियों का खास पल आया है। सऊदी अरब, यूएई और अन्य खाड़ी देशों में ईद-उल-फितर मनाई जा रही है, जबकि भारत में 21 मार्च को ईद-उल-फितर मनाई जाएगी। इस मौके को लेकर मुस्लिमों में हर्षोल्लास का माहौल है। हर कोई ईद की तैयारियों में जुटा हुआ है। रोजेदार पूरे महीने रोजा रखने के बाद इस खास दिन का बेसब्री से इंतजार करते हैं। 21 मार्च को ईद-उल-फितर के दिन लोग सुबह ईदगाह या मस्जिदों में जाकर नमाज अदा करते हैं और अल्लाह का शुक्रिया अदा करते हैं।

Eid-ul-Fitra is a symbol of mutual brotherhood, love and unity

नमाज के बाद मुबारकबाद देने का सिलसिला शुरू हो जाता है। लोग अपने घर-परिवार, रिश्तेदारों और पड़ोसियों के साथ मिलकर इस त्योहार को खुशी-खुशी मनाते हैं। ईद-उल-फितर को ‘मीठी ईद’ भी कहा जाता है, क्योंकि इस दिन घरों में खीर, सेवइयां और कई तरह के मीठे पकवान बनाए जाते हैं। लोग एक-दूसरे के गले मिलकर ईद की बधाई देते हैं। इस्लामिक मान्यताओं के मुताबिक रमजान इस्लामी कैलेंडर का 9वां महीना है।

इसी महीने में कुरान शरीफ का नाजिल (अवतरण) हुआ था, जिसे लैलतुल कद्र की पवित्र रात से जोड़ा जाता है। इसी वजह से मुस्लिम समुदाय के लोग पूरे रमजान के महीने में अल्लाह की इबादत करते हैं और रोजे रखते हैं। ईद का यह मुबारक दिन आपसी भाईचारे, मोहब्बत और एकता का प्रतीक है। इस दिन लोग गिले-शिकवे भुलाकर अपने दोस्तों, परिवार और करीबियों को ईद की मुबारकबाद देते हैं।

फोटो सौजन्य- गूगल

If you urinate shortly after drinking water, it could be a sign of illness

Health Care: दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से शरीर में पानी की कमी नहीं होती है और किडनी सही तरीके से वर्क करती है, लेकिन कई लोगों को यह समस्या होती है कि पानी पीने के कुछ ही समय बाद उन्हें बार-बार पेशाब करने की समस्या से जुझना पड़ता है।

पानी पीने के तुरंत बाद पेशाब आने की वजह

डॉक्टर का कहना है कि हम सबको सबसे पहले यह समझना आवश्यक है कि पानी के बाद पेशाब आना शरीर की सामान्य प्रक्रिया है। जब आप ज्यादा मात्रा में पानी या कोई भी अन्य पेय पदार्थ लेते हैं, तो इससे किडनी का काम फिल्टर करके पेशाब के जरिए बाहर निकाल देता है। अगर आप कम वक्त में बहुत ज्यादा पानी का सेवन करते हैं तो स्वाभाविक रूप से बार-बार पेशाब आ सकता है। अलावा इसके ठंड का मौसम, कैफीन का सेवन या कुछ दवाइयां भी पेशाब की मात्रा में इजाफा कर सकती है।

ओवरएक्टिव ब्लैडर- किसी कारण से अगर आपको बिना ज्यादा पानी पिए भी बार-बार पेशाब आने की परेशानी हो रही है, तो यह ओवरएक्टिव ब्लैडर का संकेत हो सकता है। इसमें मूत्राशय की कोशिकाएं अधिक एक्टिव हो जाती हैं। इससे बार-बार पेशाब आता है।

डायबिटीज– बार-बार पेशाब आना डायबिटीज का भी एक शुरुआती लक्षण हो सकता है। पानी पीने के बाद पेशाब आ रहा है और प्यास भी लग रही है तो एक बार डॉक्टर की सलाह पर डायबिटीज टेस्ट जरूर करवाएं।

यूरिन इन्फेक्शन- अगर बार-बार पेशाब आने के साथ जलन, दर्द या पेशाब में गंध की समस्या हो रही है, तो यह यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI) का संकेत हो सकता है।

किडनी से जुड़ी समस्या- कुछ मामलों में किडनी से जुड़ी समस्याओं के कारण भी बार-बार पेशाब आ सकता है। किडनी शरीर में तरल पदार्थ और इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखती है।

ज्यादा पेशाब आने पर डॉक्टर से कब मिलना चाहिए?

If you urinate shortly after drinking water, it could be a sign of illness

डॉक्टर का कहना है कि पानी पीने के बाद कुछ समय बाद ही आपको कुछ लक्षण खुद में नजर आते हैं, तो इस स्थिति में तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए।

  1. हर 10- 15 मिनट में पेशाब आना
  2. पेशाब करते समय जलन या दर्द
  3. पेशाब में यूरिन के साथ खून आना
  4. पेशाब करते समय पीठ में दर्द रहना
  5. बार-बार प्यास लगना
  6. रात में कई बार पेशाब के लिए उठना

कैसे बचें बार-बार पेशाब आने की समस्या से ?

  • बार-बार पेशाब की समस्या से बचने के लिए कुछ आसान उपाय अपनाए जा सकते हैं:
  • पानी एक साथ ज्यादा मात्रा में न पिएं, बल्कि थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पिएं
  • चाय और कॉफी जैसे ड्रिंक जिसमें कैफीन होता है, उसका सेवन सीमित मात्रा में करें।
  • रात को सोने से पहले ज्यादा मात्रा में पानी पीने से बचें।
  • खाने में तरल पदार्थों का सेवन सीमित मात्रा में करने की कोशिश करें।

फोटो सौजन्य- गूगल