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Category Archives: Lifestyle

पति और पत्नी के रिश्ते

यूं तो शादी जिंदगी का वह पड़ाव हैं जहां दो जिंदगियां ही नहीं, दो परिवारों का मिलन होता है लेकिन कई लोग शादी के बाद भी अकेलापन महसूस करते हैं। कई अध्ययनों से यह साफ हुआ है कि 45 साल से अधिक उम्र के तीन विवाहित लोगों में से एक व्यक्ति अकेलेपन का शिकार होता है। एएआरपी राष्ट्रीय सर्वेक्षण के मुताबिक शादी में अकेलापन महसूस कराना इस बात का संकेत है कि रिश्ते में या आपके निजी जीवन में किसी ना किसी को परेशानी जरूर है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस अकेलेपन को कैसे दूर किया जाए?

शादी के बाद अगर आपको अकेलापन का एहसास होता है तो यकीन मानें ये टिप्स आपके लिए काफी उपयोगी हो सकती है-

संवाद करें अपने जीवन साथी के साथ-

पति-पत्नी के बीच संवाद जरूरी

हर रिश्ते में कम्युनिकेशन का होना अहम है यानी हर रिश्ते में यह जरूरी है पार्टनर से बात की जाए और जहां कोई भी दिक्कत है उसे जल्द से जल्द हल किया जाए। एक बात समझना जरूरी है कि आपकी तरह आपके पार्टनर भी फील कर रहे हों ये जरूरी तो है नहीं, अब ऐसे में उन्हें आपकी भावनाओं का पता तभी चलेगा जब आप उनसेप अकेला फील कर रहे हैं तो इसका मतलब ये हो गया कि रिश्ते में कोई प्रॉब्लम है। इस वक्त को अपने दोस्तों से मिलने जुलने में लगाएं और चाहें तो कोई क्रिएटिव एक्टिविटी में भी अपना मन लगाएं। खुद के पॉजिटिविटी और क्रिएटिवली इंगेज रखने की हर संभव कोशिश करें।

जानें रिश्ते में बदलाव का कारण

रिश्ते में बदलाव की वजह

अगर आपके रिश्ते में अचानक आए किसी बदलाव से आप दोनों के बीच दूरियां आ सकती है और उसी की वजह से आप अकेला महसूस कर सकती हैं। आप ये समझने में असमर्थ हैं कि क्या बदलाव आया है या कहां एडजस्ट नहीं हो पा रहा है। ऐसी परिस्थिति में मैरिज काउंसलर से बात करें या कोई प्रोफेशनल हेल्प लें। इससे आपको अपने रिश्ते का एक क्लीयर पक्ष जानने और समझने का मौका मिलेगा और एक पॉजिटिव नजरिया भी।

एक-दूजे के प्यार को दें अहमियत

प्यार को समझें

जीवनसाथी से आपका इमोशनल अटैचमेंट जरूरी है। प्यार का एहसास सिर्फ फिजिकल टच, प्यार भरे शब्दों, गिफ्ट देने तक ही नहीं हैं। यह समझना जरूरी है कि आपके पार्टनर क्या चाहते हैं। हो सकता है कि प्यार के मायने उनके लिए दूसरों से थोड़ा हटके हो या फिर शायद उनके प्यार बयां करने का अंदाज औरों से जुदा हो। इमोशनली अटैच रहेंगी तो उन्हें भी समझ पाएंगे और उनके इस अंदाज को भी।

पॉजिटिविट टाइम निकालें

 

पति-पत्नी की आपसी समझ

यह समझना बहुत जरूरी है कि हमें हर चीज के लिए सिर्फ अपने पार्टनर पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। यह बिल्कुल भी ज़रूरी नहीं है कि अगर आप अकेला फील कर रही हैं तो इसका मतलब ये हो गया कि रिश्ते में कोई प्रॉब्लम है। इस वक्त को अपने दोस्तों से मिलने जुलने में लगाएं और चाहें तो कोई क्रिएटिव एक्टिविटी में भी अपना मन लगाएं। खुद के पॉजिटिविटी और क्रिएटिवली इंगेज रखने की हर जरूरी कोशिश करें।

सोशल मीडिया से जरा बचके

सोशल मीडिया से बचें

 

आजकल सोशल मीडिया हम सब की लाइफ में बहुत ज्यादा घुसपैठ करने लगा है। शादी की तैयारी से लेकर बेबी शावर तक लोग अपने पर्सनल मोमेंट सोशल मीडिया पर शेयर करते हैं। लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल भी नहीं है कि आप भी उन मोमेंट्स को देखकर ठीक वैसा ही अपनी लाइफ में भी एक्सपेक्ट करने लगें और वैसा ना होने पर अपने रिश्ते में खामियां निकालना शुरू कर दें।

रिश्ते को जीना सीखें

रिश्ते को जीना सीखें

पति-पत्नी को एक दूसरे को स्पेस देना और एक दूसरे के रिश्ते को इज्जत देना जरूरी होता है। अगर पति या पत्नी शादी से पहले रहे किसी दोस्त से मिलते हैं तो ना तो पत्नी को पति पर शक करना चाहिए और ना ही पति को अपने पत्नी के दोस्ती पर। शादी के बाद भी चाहे पति हो या पत्नी दोनों अपने पूराने दोस्त से मिलने का हक रखते हैं, ये समझना दोनों के लिए जरूरी है। जब हम एक दूसरे के रिश्ते को अहमियत देंगे तो खुद बा खुद रिश्तों में गरमाहट आ जाएगी और रिश्ते को जीना सीख जाएंगे।

फोटो साभार- गूगल

मां और बेटी

पिछले कुछ सालों से याद ही नहीं कि कब मैं सुकून के दो पल बैठकर महसूस कर पाई हूं। बस भागती जा रही हूं, ना तो ये पता है कि रास्ता सही है नहीं  और ना ये पता है कि और कितना बचा है।

ये भी नहीं पता कि खुद के लिए भाग रही हूं या जिंदगी मुझे भगा रही है।

जब स्कूल में थे तो दिल करता था कि जल्दी से जल्दी बड़े हो जाए। अपने फैसले खुद ले पाएं लेकिन जब से बड़े हुए है जिंदगी सिर्फ भगाए जा रही है।

दरअसल जिंदगी की इस जिद्दी दिल से ठनी हुई है, जिंदगी मुझे अपने हिसाब से चलाना चाहती है और दिल अपने हिसाब से।

सच में वो बचपन वाली जिंदगी बहुत हसीन हुआ करती थी जो दिल करता था वो किया करते थे। जब भी कोई दिक्कत परेशानी हुआ करती थी तो मां हुआ करती थी पास, बस एक बार प्यार से सिर पर हाथ रख देती थी तो लगता था कि पूरी दुनिया बस हमारे ही इर्द गिर्द घूम रही है। और कभी प्यार से गोदी में उठाकर माथा चूम लेती थी तो ये दिल 7वें आसमान पर होता था।

उस समय समझ नहीं थी फिर भी सुकून था। आज इस समझदारी ने सारा चैन छीन लिया है।

मां और बेटी

बड़े हो गए,  शादी हो गई, सेटल हो गए लेकिन ये दिल आज भी उन पुराने दिनों में लौटना चाहता है, जहां मां और उसका ढेर सारा प्यार हुआ करता था।

काफी समय बीत गया उस घर से विदा हुए,

काफी समय बीत गया नई दुनिया बसाए हुए,

पर ना जाने क्यों शाम ढलते ही ये दिल उस घर पहुंच जाता है,

मां की आवाज़ सुनने को ये दिल यूंही मचल जाता है,

महक वो मां के खाने की महसूस करना चाहता है,

वो हर त्यौहार उनका बहुत चाव से मनाना,

काफी समय बीत गया उस घर से विदा हुए।

वो हर रोज सुबह जल्दी उठ जाना,

हम सब को खिलाकर फिर खुद खाना,

शाम को पापा के ऑफिस से आने का इंतजार करना,

हर जन्मदिन पर हमें नए कपड़े दिलाना,

और खुद कई त्यौहार उसी पुरानी लाल साड़ी में बिताना,

हमारे बीमार पड़ने पर उनका वो रात भर जागना,

हर बार पापा की डांट से हमें बचाना,

हमारी तकलीफ में खुद आंसू बहाना,

बहुत याद आता है वो घर जहां सिर्फ और सिर्फ अपनापन होता था,

काफी समय बीत गया उस घर से विदा हुए।।

बहुत मुश्किल से दिल को समझाती हूं कि वो दिन बीत गए,

अब उन दिनों को तुम सपने में जी लिया करो,

उन दिनों को याद कर मैं कुछ इस तरह जी पाती हूं,

आज भी मां से किए वो सारे वादे निभाती हूं,

सबको खुश रखने कि कोशिश में मैं खुद को भूल जाती हूं,

मैं भी अब मां की तरह सब को खिलाकर फिर खुद खाती हूं,

चाहे कितना ही लेट सोना हो फिर भी हर सुबह 5 बजे उठ जाती हूं,

अपने अरमानों को अब में दिल के किसी कोने में दफनाती हूं,

कभी-कभी मां की ही तरह मैं हालात से समझौते भी कर जाती हूं।

जानती हूं कि वो दिन अब लौट कर नहीं आयेंगे,

इसलिए मैं इस अड़ियल दिल को कई बार समझाती हूं,

जानती हूं कि वो सिर्फ मां नहीं भगवान है मेरी,

इसलिए अब भी तकलीफ होने पर सिर्फ उनको बताती हूं,

काफी समय बीत गया उस घर से विदा हुए।।

फोटो सौजन्य- गूगल

अमीरी का दिखावा

समाज में बहुत से लोग होते हैं जिनसे मिलकर आपको लगेगा कि वो बहुत ज्यादा जिद्दी है  या बहुत ज्यादा गुस्से वाले है… या कभी-कभी हम उन्हें घमंडी भी समझ लेते है लेकिन मुझे ऐसा लगता है कि हम कभी-कभी लोगों को बहुत ज्यादा जल्दी जज कर लेते हैं… और ये मान लेते है कि हमें उनसे कोई वास्ता नहीं रखना चाहिए।

लेकिन कई बार वो नहीं बल्कि उनके बारे में हम गलत होते है। दरअसल हमें सब को एक जैसा देखने की आदत हो गई है इसलिए हम उन अलग से लोगों को पचा नहीं पाते। क्योंकि वो लोग हमारी दिखावे की दुनिया का हिस्सा नहीं होते, झूठ से उन्हें नफरत होती है, धोखा से वो कोसों दूर होते है, और अपने फायदे के लिए उन्हें किसी को नीचा दिखाना नहीं आता… हां थोड़े सडू हो सकते है… गुस्सा भी नाक पर हो ये भी हो सकता है.. लेकिन दोस्तों मेरे हिसाब से ऐसे इंसान हमारे समाज के लिए ज्यादा अच्छे है…क्योंकि इन्हें अपने फायदे के लिए गिरगिट बनना नहीं आता…. लेकिन आज समाज में इस तरह के लोग बहुत ज्यादा अकेलापन और पिछड़ा हुआ महसूस करते हैं।

क्योंकि आज कल के दिखावे से ये लोग कोसो दूर होते हैं और समाज में आज वही अपना पैर जमा लेता है जो दिखावे से भरा हुआ है। आज कल लोगों को सच सुनने की आदत नहीं रही लेकिन ये लोग तो सिर्फ और सिर्फ सच बोलते है। आज कल लोगों को अपनी निंदा सुनने की आदत नहीं रही  लेकिन ये लोग तो जो बोलना होता है वो मुंह पर बोल देते है। आज कल लोगों को झूठी तारीफों से बड़ा मोह है, लेकिन ये लोग ऐसा कर पाने में असमर्थ होते हैं।

अमीरी का दिखावा

सबसे बड़ी परेशानी इनको यही होती है कि आजकल का समाज इनको स्वीकार नहीं पाता और न ये इस दिखावे वाले और दोगले समाज का हिस्सा बनना चाहते है। इसलिए कभी कभी ये लोग ऐसी स्थिति का सामना करते है जब ये अपने आपको दुनिया से बिल्कुल कटा हुआ महसूस करते है। बाकी आप इन पंक्तियों से भी समझ सकते है जो किसी ऐसे ही इंसान पर लिखी गई हैं-

भर जाती हूं आत्मग्लानि से,

जब कभी सोचती हूं कि मैं पिछड़ गई हूं,

हर उस इंसान से जो दिखावा करता है,

मन दुखी हो जाता है, जब कभी मैं उस दिखावे का हिस्सा नहीं बन पाती,

लोगों की तरह बाहर कुछ और अंदर कुछ नहीं हो पाती।

भर जाती हूं आत्मग्लानि से,

जब कभी ये पाती हूं कि अकेली रह गई हूं,

दूर हो गई हूं हर उस इंसान से जो धोखा करता है,

बहुत परेशान हो जाती हूं, जब किसी को धोखे मे नहीं रख पाती,

हां, जब लोगों की तरह किसी की पीठ में छुरा नहीं घोंप पाती।।

 

भर जाती हूं आत्मग्लानि से,

जब कभी सोचती हूं की मैं कितनी गरीब हो गई हूं,

लोगो को देखा है पैसे के लिए कुछ भी करते हुए,

मन उदास हो जाता है जब कभी मैं इस मुहिम का हिस्सा नहीं बन पाती,

हां, मैं पैसों के लिए किसी के तलवे नहीं चाट पाती।।

 

भर जाती हूं आत्मग्लानि से,

जब कभी सोचती हूं कि दुनिया से बहुत अलग रह गई हूं,

हर उस इंसान से अलग जो किसी को नीचा दिखाना चाहता है,

मन बैचेन हो जाता है, जब मैं किसी को नीचा नहीं दिखा पाती,

हां, दुनिया की इन उम्मीदों पर मैं खरा नहीं उतर पाती।।

 

हां बहुत जिद्दी हूं, हर किसी की हां में हां नहीं मिला पाती,

दिमाग़ है मेरे पास इसलिए किसी और के हिसाब से नहीं चल पाती,

मुझे गलत के लिए बोलना आता है,

इसलिए आखें बंद किए चैन से बैठ नहीं पाती।।

 

मेरे लिए वो हर इंसान गलत है जो गलत को बढ़ावा दे,

लेकिन मैं गलत के खिलाफ बोले बिना रह नहीं पाती,

इसलिए बहुत कम लोग है मेरी जिंदगी में जो पसंद करते है मुझे,

बाकियों के लिए तो बहुत बुरी हूं मैं क्योंकि झूठ, धोखा, दिखावा, फरेब मैं पचा नहीं पाती।

फोटो सौजन्य- गूगल

मां

“मां” हां ये वही है जिसको सुनते ही एक 60 साल का बुजुर्ग व्यक्ति भी अपने आप को छोटा बच्चा समझने लगता है। दरअसल ये शब्द ही इतना ज्यादा प्यारा है कि कभी हमें कुछ हो तो भी सबसे पहले मुंह से निकलने वाला शब्द मां ही होता है..और हम परेशान हो, दर्द में हो तब भी मां ही सबसे पहले याद आती हैं।

“वो किसी ने कहा है ना कि भगवान हर जगह नहीं हो सकते थे इसलिए उन्होंने मां को बनाया”

बिल्कुल सही कहा है, जिंदगी में सब कुछ हो और मां ना हो तो सब अधूरा सा हो जाता है। मां है तो दुनिया की सारी खुशियां हमारी हो जाती है।

आज भी हमारे बीच कुछ लोग है जो अपने मां-पापा को इज्जत नहीं देते..उन्हें वो मान-सम्मान नहीं देते जिनके वो हकदार हैं। बहुत ज्यादा गुस्सा, बुरा व्यवहार और अत्याचार करते हैं वो अपने मां-बाप पर… उनको लगता है कि उन्होंने उनके लिए कुछ नहीं किया और अगर किया भी है तो वो उनकी ड्यूटी थी। सच में कितने बेवकूफ़ हैं वो.. जिस चीज को वो ड्यूटी समझते है वो उनकी ममता होती है और रही बात ड्यूटी की तो …फिर कुछ ड्यूटी बच्चों की भी तो होती है… तो क्या वो उन्हें पूरा कर रहे हैं, अगर इसका जवाब मिल जाए तो खुद सोचना कि उन्होंने अपने मां-बाप के लिए क्या किया है?

मै ऐसे लोगों से सिर्फ़ इतना ही कहना चाहती हूं  कि जिनके साथ तुम रह रहे हो ना, जिन्होंने तुम्हें चलना-फिरना सिखाया है, कंधे पर बैठा कर दुनिया दिखाई है वो सिर्फ़ मां-बाप नहीं हैं .. वो भगवान है। तुम खुशनसीब हो जो यहीं उनके दर्शन हो गए। इसलिए उन्हें वो सब दो जिसके वो हकदार हैं। आज का ये लेख उन लोगों के लिए ख़ास तौर पर लिखा गया है जिनको अपने मां-बाप की कोई अहमियत समझ नहीं आती। हर पल उन्हें सिर्फ यही लगता है कि उनके मां-बाप उनके लिए जो कुछ भी कर रहे हैं वो कोई अहसान नहीं है बल्कि ये तो उनका फर्ज है जो हर मां- बाप करते हैं।

मां

बहुत नासमझ हैं वो लोग जिनको कभी समझ ही नहीं आता कि मां-बाप भगवान का दिया हुआ वो तोहफ़ा होते है, जो सब के नसीब में नहीं होते। इसलिए इनके लिए हम जितना करे उतना कम है।

ये मेरी एक कोशिश थी उन लोगो को समझने की जिनको मां बाप सिर्फ और सिर्फ अपने ऐशो आराम का साधन लगते है। अगर अभी भी कुछ लोगो को समझ नहीं आया तो मैं कुछ पंक्तियों के माध्यम से एक कोशिश और करना चाहूंगी। तो गौर फरमाएं शायद समझ आ जाए:-

एक छोटा सा घर है हमारा, मगर उसे बनाने में खूब पसीने बहाए है,

चूल्हे की आंच पर रोटियां पकाते हुए, कई बार मां ने अपने हाथ भी जलाए है,

ज़िम्मेदारी के बोझ ने कुछ ऐसे दिन भी दिखाए है कि वर्षों तक त्यौहार मां ने एक ही साड़ी में मनाए हैं।।

दो समय की रोटी के लिए, मां ने कई दिन सिर्फ पानी पीकर बिताए है,

बच्चे भूखे ना सो जाए इसलिए भारी-भारी बोझ भी उठाए है,

जी हां, ज़िम्मेदारी के बोझ ने कुछ ऐसे दिन भी दिखाए है कि वर्षों तक त्यौहार मां ने एक ही साड़ी में मनाए है।।

बहुत मुश्किल था वो दौर, उस दौर में शायद ही दो पैसों की बचत हो पाए लेकिन फिर भी जैसे तैसे करके मां ने वो बचाए है,

मेरे बच्चों का भविष्य बहुत सुनहरा हो, रातों को जाग कर मां ने ये सपने सजाए है,

जी हां, ज़िम्मेदारी के बोझ ने कुछ ऐसे दिन भी दिखाए है कि वर्षों तक त्यौहार मां ने एक ही साड़ी में मनाए है।।

एक बार यूहीं देखे मैंने उनके हाथ, उनके हाथों में बहुत सारी दरारें हैं,

हमारी परवरिश के लिए  बेशर्त उन्होंने अपने सुंदर हाथ भी बिगड़े है,

हमारे सारे सपने पूरे हो, इसलिए उसने अपने सारे सपने दांव पर लगाए है,

अपनी पसंद, अपने शौक सब छोड़ दिया उसने, कहती है कि मुझे मेरे बच्चे उन सब से प्यारे है,

जी हां, ज़िम्मेदारी के बोझ ने कुछ ऐसे दिन भी दिखाए है कि वर्षों तक त्यौहार मां ने एक ही साड़ी में मनाए है।।

जिंदगी की इस तपती राह पर हमारे लिए, उसने अपने पांव जलाए है,

पीठे की वो मिठाई जो उन्हें बहुत पसंद है, उसके लिए बचाए पैसे भी हमारे आने वाले कल के लिए बचाए है

जी हां,  ज़िम्मेदारी के बोझ ने कुछ ऐसे दिन भी दिखाए है कि सालों तक त्यौहार मां ने एक ही साड़ी में मनाए है।।

जब जब मैंने खुद को मुश्किलों से घेरा है, तब तब मैंने अपनी मां को मेरे साथ खड़ा हुआ पाया है,

भगवान को देखा नहीं कभी मैंने लेकिन, वो मेरी मां ही है जिसने उनके होने का अहसास कराया है,

बहुत किया है उन्होंने मेरे लिए, लेकिन अब मुझे उनके लिए कुछ करके दिखाना है,

जो कुछ भी छोड़ा उन्होंने मेरे लिए वो उन्हें वापिस भी तो दिलाना है…

इन्हीं जिम्मदारियों के कारण ऐसा होता आया है कि सालों तक हर त्यौहार मां ने एक ही साड़ी में मनाया है।।

फोटो सौजन्य- गूगल

डिप्रेशन

दोस्तों कई बार हमारे जीवन में कुछ ऐसे क्षण भी आ जाते है, जब हम बहुत बुरा महसूस कर रहे होते है। इस बैड फिलिंग की वजह चाहे जो हो लेकिन कई बार किसी बात का इतना बुरा लगता है कि हम बहुत कोशिश करते है इस बैड फिलिंग से बाहर निकलने की लेकिन हम ये करने में सक्षम नहीं हो पाते।
तो दोस्तों, सबसे पहले तो हमें ये जान लेना जरूरी है कि ये बैंड वाली फिलिंग हमें होती क्यों है:

  • क्या इसका कारण हम खुद है या कोई दूसरा व्यक्ति इसका कारण है?
  • क्या ये हमारी गलतियों के कारण है या किसी और की गलती की सजा हमें मिल रही होती है?

दोस्तों, हम सब इंसान है और हमारे दिलों में भावनाएं होना स्वाभाविक है और इन्ही भावनाओं को जब कोई चोट पहुंचाता है तो हमें बुरा लगना भी स्वाभाविक है।
लेकिन आपको अपने आप को ज्यादा परेशान करने की जरूरत नहीं है, आपने आप को बुरा महसूस न होने दें।

इसके लिए आज मैं आपके लिए कुछ ऐसे सुझाव लेकर आई हूं जिससे आप अपनी इस बैंड वाली फिलिंग से चुटकियों में छुटकारा पा सकते है।

तो चलिए सबसे पहले हम जान लें कि हमें बुरा क्यों लगता है:

1. दुखी होने के कारण: कभी कभी हम किसी बात को लेकर बहुत दुखी होते है। वजह चाहे जो भी हो लेकिन हमें इस परिस्थिति में बहुत बुरा महसूस हो रहा होता है ।

2. हानि होने के कारण: कई बार हमारा कोई नुकसान होने पर हम बहुत परेशान हो जाते हैं। दुखी हो जाते हैं। मन ही मन खुद को और दूसरों को कोस रहे होते है। चाहे कैसा भी इंसान हो वह किसी भी तरह की हानि को आसानी से पचाने में असमर्थ होता है। यही कारण है कि उस हालत में भी हम बैड फिलिंग का शिकार हो रहे होते हैं।

3. डिप्रेशन होने के कारण: कई बार बहुत बुरा महसूस होने का एक मुख्य कारण होता है डिप्रेशन। इसकी वजह से इंसान खुद को अकेला और पिछड़ा हुआ महसूस करने लगता है। जिससे बैड फिलिंग होना स्वाभाविक हो जाता है।

4. SAD(सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर) के कारण: जी हां, ये एक प्रकार का डिसऑर्डर है जो मौसम के परिवर्तन के कारण हो सकता है। इसकी वजह से हम चिड़चिड़े हो जाते है। हर बात पर गुस्सा आने लगता है। किसी से बात करने का मन नहीं करता। इस कारण हम खुद को दूसरों से अलग कर लेते है, जिस कारण हम बुरा महसूस करने लगते है।

अब हम जानते है कि अगर बुरा महसूस हो तो हम कैसे इससे छुटकारा पा सकते है:

1. संगीत सुनें- जी हां, संगीत बहुत से मनोरोगों का एक मात्र घरेलू उपचार है। संगीत सुनने से हम अच्छा महसूस करने लगते है। तथा मन और दिमाग का तनाव भी दूर होता है। जब कभी आपको बुरा महसूस हो तो आप अपनी पसंद का संगीत सुने, और फिर देखे कैसे ये आपको अच्छा महसूस करवाता है।

संगीत सुनती लड़की

2. कुछ देर रोएं- अगर कभी आपको बुरा महसूस हो रहा है और आपको रोने का मन है तो कुछ देर रोएं। इससे आपके अंदर का अवसाद बाहर आ जायेगा और आप अच्छा महसूस करेंगे और इसके ठीक विपरीत अगर आप अपने आप को रोने से रोकेंगे तो तनाव कम होने की बजाय बढ़ जायेगा।

3. अपने विचार और भावनाएं सांझा करे- जी हां, आप अगर किसी भी वजह से बुरा महसूस करते है तो आपने किसी करीबी के साथ अपनी भावनाओं की साझा करे, उन्हें अपनी भावनाएं बताए, उन्हें बताएं कि इस वक्त आप कैसा महसूस कर रहे है। आप पाएंगे कि आपका मन हल्का हो गया है और आप पहले से बेहतर महसूस कर रहे है।

4. बाहर घूमने जाएं- अगर आपको बुरा महसूस हो रहा है तो अपने आपको थोड़ा समय दे, अच्छा महसूस करने के लिए आप बाहर घूमने जा सकते है।

5. पार्टी या कोई फंक्शन अटेंड करें- जी हां, कई बार हम जब भी बुरा महसूस करते है तो अपने आप को दुनिया से कट लेते है लेकिन ऐसा नहीं करना चाहिए, क्योंकि जितना आप लोगों से मिलेंगे उतनी जल्दी आप उन बातों को भूलेंगे जो आपको परेशान कर रही है। इसके लिए आप पार्टी या फंक्शन अटेंड करें।

6. साकारात्मक रहें- सबसे ज़रूरी बात जो आपको कभी भी किसी भी अवसाद या डिप्रेशन से बचाएगी वो है आपका साकारात्मक रहना। हमेशा पॉजिटिव रहे और और अपने आप को नकारात्मक विचारों से दूर रखें। हर चीज को सकारात्मक नजरिया से देखें। और फिर देखिए कैसे ये दुनिया आप के इशारों पर गोल गोल घूमेगी।

आज के लिए इतना ही, फ़िर मिलते है एक नए विषय के साथ। अपना तथा अपनों का ख्याल रखें।

“अकाल मृत्यु वो मरे जो काम करे चंडाल का,

काल भी उसका क्या बिगड़े जो भक्त हो महाकाल का।”

“जिस समस्या का न कोई उपाय,

उसका हल सिर्फ ॐ नमः शिवाय!!

जी हां, दोस्तों ये जुमले आपने बहुत बार सुने होंगे  लेकिन सावन के महीने में यह बच्चों से लेकर बड़ों तक सब की जुबान पर होते है।

दोस्तों, महादेव का प्रताप ही ऐसा है कोई भी उनकी स्तुति करने से खुद को रोक ही नहीं पाता। शिव की भक्ति और उनकी साधना से जो मन को शांति और सुकून मिलता है वो कहीं और है ही नहीं।

यूं तो हम साल के 365 दिन भगवान शिव की आराधना करते है, लेकिन सावन के महीने में शिव की पूजा अर्चना का ख़ास महत्व होता है। इस महीने भक्तजन भगवान शिव के सोमवार व्रत रखते है और कुछ लोग कावड़ भी लाते है। इस पूरे महीने भोले के भक्त उन्हें प्रसन्न करने के अनेकों पर्यत्न करते है। धार्मिक दृष्टि से सावन का महीना बहुत शुभ माना जाता है।

इस महीने कुछ कार्यों को विशेष रूप से करने की सलाह दी जाती है तो कुछ कार्यों को करना वर्जित माना जाता है। इस महीने में लोग सावन के व्रत करने का संकल्प भी लेते है तो ऐसे में ये जानना और भी जरूरी हो जाता है कि हमें सावन के महीने में क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए।

तो चलिए जानते है की भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए हमें क्या करना चाहिए:

बोल बम

  1. सावन के महीने में हमें ध्यान रखना चाहिए कि हमारी पूजा अर्चना भगवान शिव पर ही केंद्रित हो। क्योंकि सावन का महीना भगवान शिव को ही समर्पित है।
  2. सावन के महीने में हमें शिव को प्रसन्न करने के लिए हर दिन शिवलिंग पर जल अर्पित करना चाहिए।
  3. अक्सर कहा जाता है कि सावन के महीने में हमारा पाचन तंत्र धीमी गति से कार्य करता है। ऐसे में बहुत जरूरी हो जाता है कि हम हल्का और सुपाच्य भोजन करे जो जल्दी पच जाए।
  4. सावन के महीने में शिव की आराधना का विशेष महत्व है तो कोशिश करे कि दिन में एक बार ॐ नमः शिवाय का जाप ज़रूर करे।
  5. अगर किसी इंसान को किसी बीमारी ने घेरा है तो तो लंबी बीमारी से छुटकारा पाने के लिए दिन में एक बार महामृत्युंजय का पाठ करे ।
  6. भोलेनाथ की आरती का विशेष ध्यान रखें और हर दिन आरती करे।
  7. बड़े बुजुर्गों को प्रसन्न रखे। जी हां ध्यान रखे कि घर में जो बुजुर्ग है उनका किसी भी वजह से दिल न दुखे जितना हो सके कोशिश करे कि वो खुश रहे।

तो चलिए दोस्तों अब हम उन कामों के बारे में जान ले जो हमें नहीं करने चाहिए:

  1. मांस मदिरा का सेवन करने से बचें: ध्यान रखें ये पूर्ण रूप से भक्ति को समर्पित महीना है इस महीने में हमें मांस-मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। ये आपकी सेहत के लिहाज से भी ठीक नहीं है। इस महीने में इन सब चीज़ों को पचाने में दिक्कत होती है।
  2. झूठ न बोले : भोलेनाथ बहुत थोड़े में ही खुश हो जाते है और आपकी मनोकामना पूरी कर देते है, लेकिन वो कभी भी झूठ का साथ नहीं देते। तो इसलिए किसी भी बात के लिए झूठ मत बोलिए।
  3. बड़े बुजुर्गों के अपमान से बचे: बड़े बुजर्गों को कोशिश करे कि खुश रखें उनका कभी भी किसी भी बात के लिए अनादर न करे।
  4. व्रत को अधूरा ना छोड़ें: किसी भी स्थिति में व्रत को अधूरा ना छोड़े। कुछ लोग जोश जोश में व्रत शुरू कर देते है लेकिन फिर बीच में ही छोड़ देते है। अगर आप सक्षम नहीं है तो व्रत का संकल्प ना लें।
  5. अपना आचरण पवित्र रखे: जी हां, सावन के महीने में भगवान शिव की भक्ति में डूब जाए। तथा अपना आचरण भी पवित्र रखें।

आशा करती हूं दोस्तों, आप भगवान शिव को प्रसन्न करने में सफल होंगे, फिर मिलेंगे नए विषय के साथ।

तब तक ॐ नमः शिवाय जपते रहिए, अपनी हर बाधा से मुक्ति पाइए।

शाहरुख और माधुरी

‘बरसो रे मेघा, मेघा,

बरसो रे मेघा बरसो..,

जी हां, यूं तो बारिश और बॉलीवुड का पुराना नाता है, बॉलीवुड की फिल्में बिना बारिश के अधूरी है।

बॉलीवुड में फिल्मों के लिए ढेरों गाने बनते है लेकिन बारिश के ऊपर फिल्माए गानों की बात ही कुछ और होती है। ये मौसम है ही इतना ख़ास की कोई अपने आप को झूमने से कोई रोक ही नहीं सकता।

चिलचिलाती गर्मी के बाद मानसून का आगमन बिल्कुल ऐसा होता है जैसे कड़ी धूप में आपको नीम की छांव मिल गई हो। मानसून का आगमन अपने साथ नई उमंग नई तरंग लेकर आता है। बच्चे हो या बड़े बारिश का नाम सुनकर ही दिल भींगने को मचल जाता है।

बाहर टिप टिप करती बूंदें, हल्की हल्की हवा के झोंके, उन झोंको के साथ उड़ती फुहारें और इस बारिश में गरमागरम पकौड़े… तो बताएं किसे पसंद नहीं होगा कुदरत का खूबसूरत नजारा!

अभिनेत्री एश्वर्या रॉय

जून माह की गर्मी के बाद ये प्यारी सी बारिश जब मन और तन दोनों को भींगो देती है तो मानो आत्मा तृप्त हो जाती है। ख़ासकर बच्चो को तो भीगना बहुत पसंद होता है।

लेकिन थोड़ा संभल कर, यही मॉनसून अपने साथ ढेरों बीमारियां भी लेकर आता है। इस मौसम में आप वायरल फीवर, फूड प्वाइजिंग, खुजली और एलर्जी जैसी बीमारियों से जूझ सकते है। इसलिए ये ज़रूरी है कि मानसून की मस्ती में भी आप सावधानी बरतें और सावधानी के साथ इन फुहारों का मज़ा लें।

आईए जानते है कि आप कैसे स्वस्थ रखकर मानसून का मज़ा ले सकते है:

  1. इस मौसम में आपको पानी फिल्टर्ड ही पीना चाहिए। पानी के लिए हमेशा साफ बर्तन का इस्तेमाल करें। आप पानी को साफ और सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त मात्रा में क्लोरीन का इस्तेमाल करें।
  2. खाने से पहले और खाने के बाद हाथों को अच्छे से धोएं। कभी भी गंदे हाथों से किसी भी खाने पीने की चीज़ को न छुएं।
  3. कई लोग इस मौसम में हरी सब्जियों का इस्तेमाल बंद कर देते है। लेकिन हमें ध्यान रखना चाहिए की हरी सब्जियां हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही लामभदाय है। हम इसे अच्छे से धोकर इस्तेमाल कर सकते है।
  4. इस मौसम में हमें ठीक तरह से पका हुआ खाना ही खाना चाहिए। कच्चा या अधपका खाना हमारी सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है।
  5. इस मौसम में जितना हो सके कोशिश कीजिए की नॉन वेज कम से कम खाए। और अगर खाना पढ़ भी जाए तो ठीक से पका हुआ है ये सुनिश्चित कर लें।
  6. गरिष्ठ भोजन इस मौसम में नहीं खाना चाहिए।

जी हां,  इस मौसम में हमारे इम्यूनिटी सिस्टम को दोगुना काम करना पड़ता है, इसलिए हमें कोशिश करनी चाहिए की गरिष्ठ भोजन ना करके हम हल्का और हेल्दी भोजन ही करें।

  1. इस मौसम में ध्यान रखें कि बासी भोजन करने से बचें।
  2. मानसून में हमें स्ट्रीट फूड को दूर से ही ना कह देना चाहिए। स्ट्रीट फूड सेहत के लिहाज से अच्छा नहीं है। इससे फूड पॉइजनिंग भी हो सकती है जो कभी कभी जानलेवा भी हो सकती है।
  3. बारिश के मौसम में बहुत सारे कीट पतंगे पनप जाते है। इनसे बचाव के लिए समय समय पर अपने घर में व घर के भीतर नालियों में कीटनाशक का प्रयोग करे।
  4. इस मौसम में ज्यादा समय तक बारिश में न भींगे इससे आपकी तबीयत बिगड़ सकती है।
  5. इस मौसम में आप कहीं काम के लिए गए और आप भींग गए तो घर आकर तुरंत ही साफ पानी से नहाएं, साफ सूखे कपड़े पहनें तथा अपने हाथ व पैरों की उंगलियों के बीच पाउडर लगाएं इससे आपको एलर्जी या खुजली की समस्या नहीं होगी।

तो इन आसान टिप्स के साथ अपने बारिश वाले मौसम को और ज्यादा हसीन बनाएं और ऐसी ही उपयोगी जानकारी के लिए हमारे साथ जुड़े रहें।

लुबना

आज आपके लिए हम लेकर आए है सब्र की वो परिभाषा जो बचपन से सिखाई गई परिभाषा से बिल्कुल अलग है, बहुत कोशिश की जाती है बचपन से ही की हम थोड़े में जीना सीख जाए, अपने आपको को परिस्थितियों के हवाले कर दे, ये सिख जाए कि जितनी चादर हो उतने ही पर फैलाने चाहिए। लेकिन बचपन का भी एक उसूल होता है कि उस समय हमें जिस भी चीज के लिए मना किया जाए हमें वही करने में मज़ा आता है। अगर ये कहा गया है कि थोड़े में सब्र करो तो फिर हमें ज्यादा ही चाहिए होता है।

लेकिन जैसे जैसे हम बड़े होते जाते है जिंदगी कुछ और ही तय कर लेती है हमारे लिए वरना…

“जिस नज़ाकत से लहरें पैरों को छूती है

यकीन नहीं होता इन्होंने कश्तियां डूबाई होंगी।”

जी हां,  ज़िन्दगी में कुछ वाकया ऐसे ही होते है जिनपर यकीन करना बहुत मुश्किल होता है। कभी कभी ज़िन्दगी के हिस्से में आए बुरे दौर हमें अंदर तक झकझोर देते है जितना कभी हमारी मां-बाप के थपड़ों ने नहीं किया होता।

फिक्र में डूबी महिला

कुछ चीजें चाहे ना चाहे ऐसी हो जाती है जिससे हम बदलने लगते है। हालांकि शुरुआत में इस बदलाव का हमें अहसास तक नहीं होता और फिर धीरे धीरे हम उन रास्तों को भी पार कर जाते है जो हमारी हदों में नहीं होते। इसी बीच कभी गलती से महसूस हो जाता है कि दिल बार बार समझाने कि कोशिश करता है लेकिन दिमाग़ उसकी एक नहीं सुनता और फिर जब दिल थक हार कर घुटने टेक देता है तब शुरू होता है एक ऐसा सफ़र जिसपर मिलता तो बहुत कम है लेकिन छूट बहुत कुछ जाता है, हमारी आदतें, मुस्कुराहटें, ज़िंदादिली, चीज़ो को देखने का सकारात्मक नजरिया, भावनाएं, सब कुछ धीरे धीरे पीछे छूट जाता है और मिलता क्या है- नकारात्मकता और सब्र का पाठ।

ना ना आप इस सब्र को समझने में गलती कर रहे है… ये वो सब्र नहीं जो हम खुद कर लेते है, “ये तो वो सब्र है जो हमें अपने आप आ जाता है।”

वो कहते है ना कि सब्र करने में और सब्र आ जाने में बहुत फ़र्क होता है।

इस परिस्थिति को समझाने के लिए एक छोटी सी कोशिश-

आज कल रात भर इन पलकों पर नींद लिए जगने लगी हूं मैं,

सपनों को रख कर सिरहाने अब करवटें बदलने लगी हूं मैं,

हां ,जो कभी ना करना था मुझे …ना जाने क्यों अब करने लगी हूं मैं ।।

आज कल अपने आप को छुपा कर रखने लगी हूं मैं,

कोई पढ़ ना ले इन आंखो को मेरी, अब डरने लगी हूं मैं,

ख्वाहिशों को करके बेसहारा अब अकेले ही जीने लगी हूं मैं,

हां ,जो कभी ना करना था मुझे….ना जाने क्यों अब करने लगी हूं मैं।।

खामोशियों की कड़ी अब जोड़ने लगी हूं मैं,

बनाकर सुंदर महल रेत पर, अब खुद ही मिटाने लगी हूं मैं,

कभी फरियाद होती की कोई टूटे तारा तो कुछ मांग लूं ,

लेकिन अब टूटे तारे से मुंह मोड़ने लगी हूं मैं,

हां , जो कभी ना करना था मुझे…ना जाने क्यों अब करने लगी हूं मैं।।

बीच समुंदर फंसी कश्तियां किनारे ना ही आए तो बेहतर है,

क्योंकि अब किनारों पर भी डूबने लगी हूं मैं,

ये सर्द हवाएं ले ना आए कुछ पुरानी यादें , तो खिड़कियों के परदे ठीक करने लगी हूं मैं,

हां ,जो कभी ना करना था मुझे…. ना जाने क्यों अब करने लगी हूं मैं।।

फोटो सौजन्य- गूगल

पति-पत्नी के बीच मधुर रिश्ता

जब आप जीवन-साथी से उम्र भर का साथ निभाने के वादा करते हैं तो आपके रिश्तों में उम्मीदें परवान चढ़ती है और रिश्ते को बल मिलता है जन्म-जन्मांतर का साथ निभाने का। ..लेकिन बताते चले कि समय के साथ रिश्तों के मायने भी चेंज हो रहे हैं।

किसी भी रिश्ते को बनने में सालों साल लग जाते हैं पर आपसी मनमुटाव और जल्दबाजी में अलग होने का फैसला रिश्ते को उजाड़ देता है। पति-पत्नी के रिश्ते में सबसे ज्यादा जरूरत आपसी समझ और मैच्योरिटी की होती है। कपल्स अगर ये बात समय रहते समझ लें तो आगे कभी किसी भी तरह के परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा। आइये देखते हैं किन वजहों से रिश्ते में दूरी और मनमुटाव पैदा हो जाती है-

पार्टनर जैसे हो वैसा ही एक्सेप्ट करना

पति-पत्नी के बीच मधुर रिश्ता

रिश्ते के शुरुआती दिनों में तो सब ठीक रहता है लेकिन धीरे-धीरे मनमुटाव के हालात तब पनपने लगते है जब एक दूसरे में कई कमियां नजर आती हैं। एक परफेक्ट पार्टनर की आपकी कल्पना में जब आपका पार्टनर खरा नहीं उतरता है तो यहां से शुरू होता है असल टकराव। रिश्ता वही सक्सेसफुल रहता है जहां आप अपने पार्टनर को बदलने के बजाय उन्हें वैसे ही एक्सेप्ट करें जैसे कि उसे आपने पाया है।

फैसलों में ना हो फासला

पति-पत्नी में तकरार

जब इन्सान एकसाथ रहता है तो रिश्ते में कभी कभी तकरार तो लाजमी है लेकिन कुछ मुद्दे ऐसे हैं जिन्हें समय में सुलझाना बहुत अहम है। शादी के बाद दोनों को कहां रहना है, बच्चे कब और कितना खर्च करना है, यह सब ऐसे इश्यू हैं जिन पर अगर सहमति ना बने तो दूरियां आ जाती है। रिलेशन में बातें साफ-साफ ना हो तो समस्याएं आना लाजमी है। कहीं फासला ना बढ़े इसके मद्देनजर वक्त रहते सही और मिल-बैठकर फैसले लीजिए।

मिस कम्यूनिकेशन पर नजर रखना

मिसिंग कम्यूनिकेशन

एक घर में रह कर भी कई बार एक दूसरे को क्यों नहीं समझ पाते ? इस सवाल का जवाब है मिस कम्यूनिकेशन यानी कि बातचीत की कभी। आप दोनों पूरा दिन अपने ऑफिस में बिजी रहते हैं… शाम की चाय से लेकर सोने तक या तो दोनों मोबाइल पर बिजी रहते हैं या टेलिविजन पर। डिनर पर बाहर जाने का प्लान भी बनता है तो वहां भी मोबाइल है कि पीछा ही नहीं छोड़ता। जब एक दूसरे के लिए आप वक्त ही नहीं निकालेंगे तो आपको पता ही नहीं चलेगा और रिश्तों में आए मनमुटाव में बदल जाएंगे।

दूसरों के रिश्ते से अपने रिश्ते का कम्पेयर करना

पति-पत्नी का प्यार

सोशल मीडिया के इस जमाने में आपको भले ही अपने पार्टनर की हॉबी के बारे में पता हो या नहीं पर अपने दोस्त के पार्टनर का पसंद-नापसंद का जरूर पता होता है। दूसरा कपल छुट्टियों में कहां गया, सालगिरह में आपकी दोस्त के पति ने उसे क्या गिफ्ट दिया या बेबी शॉवर में आपकी दोस्त ने जैसी फोटो खिंचवाई, वैसा शूट आपने क्यों नहीं कराया, बस इन्हीं टॉपिक्स को मुद्दा बनाकर अगर आप अपने पार्टनर से लड़ने लगेंगी तो रिश्तों में तो खटास आएगी ही।

सुलह करने की आदत नहीं

सुलह की आदत

अगर आप चाहते है कि आपका रिश्ता कामयाब रहे तो कॉम्प्रोमाइज तो आपको करना ही पड़ेगा। इसका यह मतलब जरा भी नहीं है कि आप अपने पार्टनर की ज्यादतियों को सहें या बुरा बर्ताव चुपचाप सहते रहें। इस मतलब है कि कई बार दूसरे की खुशियों को अपनी खुशियों से ज्यादा अहमियत देना, अपने ईगो को रिश्ते में ना आने देना और छोटे-छोटे एडजस्टमेंट करना। सिर्फ थोड़े से बदलाव और रिलेशन में बदलाव खुद महसूस करने लगेंगे।

रिश्ते में विश्वास बनाए रखना 

पति-पत्नी की आपसी समझ

काम के सिलसिले में पति-पत्नी दोनों ही घर से बाहर रहते हैं। जाहिर है कि उनका सोशल सर्किल भी होगा। दोस्तों के साथ हंसी-मजाक भी होगा। अब अगर यह बात आपके पार्टनर को पसंद नहीं है तो समय रहते उन्हें यह समझना होगा कि यह नॉर्मल है। रिश्ते भरोसा पर टिके होते हैं। यहां एक तरफ जरूरी है कि आप अपने पार्टनर को समझाएं कि आप उनका विश्वास नहीं तोड़ेंगे वहीं इस कमिटमेंट को आप ईमानदारी से निभाएं।

एक-दूसरे की इज्जत करना 

पति की बातों को ध्यान से सुनना

जब रिश्ते में एक दूसरे के लिए इज्जत ही नहीं है तो बातें समझना-समझाना तो बहुत दूर की बाच हो जाती है। एग्रसिव बिहेवियर, गुस्सा और बात बात पर ओवर रिएक्ट करना ये कुछ ऐसी आदतें हैं जो किसी भी हरे-भरे रिश्ते में दरार ला सकती हैं।

रिश्ते के बीच फाइनेंश का ध्यान

परफेक्ट मॉम

फाइनेंस को लेकर कपल्स में तनातनी आम तो है लेकिन बेहतर यही है कि समय रहते आप ये बातें अपने पार्टनर से क्लियर कर लें। घर के खर्चों में किसकी कितनी भागीदारी होगी, लोन किस के नाम पर होगा, बच्चों का खर्च कौन उठाएगा, इन बातों पर अगर आप दोनों मिल कर साफ बात कर लेंगे तो आने वाले समय में इन्हें लेकर होने वाले मामले से आप बच सकते हैं।

नशे से नुकसान

शराब का आदि पति

कोई भी सेंसिबल पार्टनर अपने साथी की किसी भी गलत लत को बढ़ावा तो नहीं देगा। चाहे वो अल्कोहल की तल हो या फिर सट्टेबाजी की आदत। रिलेशनशिप में सेंसबली और रिस्पांसिबल के तहत अगर आप व्यवहार नहीं करेंगे तो रोज की तकरार कब रिश्ते को खत्म कर देगी पता भी नहीं चलेगा और तब तक बहुत देर हो चुकी होगी।

अपने पार्टनर की दूसरों से तुलना करना

गुस्से में पत्नी

खुद को वो कितनी अच्छी तरह से लेकर आगे चलती है, उसका पति कितना फिट है इस तरह की तुलना आपके रिश्ते के लिए हेल्दी नहीं हैं। अगर किसी की तारीफ भी करनी है तो लहजे का जरूर ख्याल रखें ताकि आपके पार्टनर की फीलिंग हर्ट ना हों।

फोटो सौजन्य- गूगल

छोटी बच्ची

आज यही पड़ोस के घर में रोने की तेज आवाजों ने मेरी नींद को तोड़ने में एक क्षण भी नहीं लगाया। लगातार बस यही सुनने को मिल रहा था, कि लड़की हुई है, इससे अच्छा तो होती ही ना।

लड़की को पैदा करने के जुर्म में उसकी मां को भी लगातार गालियां सुनने को मिल रही थी, बार बार उसको ये अहसास दिलाया जा रहा था कि उसने कितना भयानक जुर्म किया है। बार बार उसे ताने देकर बताया जा रहा था कि अगर वो लड़की की जगह लड़का पैदा करती तो आज मातम की जगह खुशियां मनाई जाती। उसे पड़ोस वाली औरतें भी ये बता रही थी कि उसमें लड़का पैदा करने कि क्षमता नहीं है, इसलिए लड़की पैदा करने के बाद वो किसी से भी ये उम्मीद न रखे कि सब लोग उसे इज्ज़त बक्शेंगें।

लेकिन इन सब के बीच वो नन्हीं सी परी अपनी मोटी-मोटी आंखो को खोले बहुत आस से एक एक करके सबको देख रही थी कि गलती से कोई मुस्करा कर उसे गोदी में उठा ले। लेकिन बच्ची है, नादान है, जानती ही नहीं कि ये सारे बेशर्म लोग उसके आने से खुश नहीं बल्कि उनपर तो जैसे दुखों का पहाड़ टूट पड़ा हो। कोई उसे गोदी लेना तो दूर उसको देखना तक नहीं चाहता।

वाकई ये सच कितना कड़वा है ना कि बहु सब को सर्वगुण संपन्न चाहिए लेकिन आज भी समाज में ऐसे लोग है जो बेटी को पैदा करना ही नहीं चाहते, उसे आज भी बोझ मानते है, आज भी नानी दादी सिर्फ पोते की चाह रखती है। आज भी लड़की होने पर कभी उसे कचरे के डिब्बे में फेंक दिया जाता है या मार दिया जाता है।

ये समाज आज भी पहले की तरह ही अनपढ़ रवैया वाला समाज है, जो लड़कों के लिए अलग है और लड़कियों के लिए अलग।

आज की चर्चा उन लड़कियों के लिए है जिनके लिए आगे बढ़ना तो दूर…आगे बढ़ने के सपने देखना भी गुनाह है ।

बहुत दुख हो रहा है ये कहते हुए भी की आज भी लोग लड़को और लड़कियों में भेद करते है…

लाख बंदिश है जो उन्हें ये समझने ही नहीं देती कि उन्हें भी हक है अपनी ज़िन्दगी अपने तरीके से जीने का..बिल्कुल वैसे ही जैसे उनके भाई जीते है।

पता नहीं लोग क्यों ये नहीं समझना चाहते कि जब भगवान ने कोई फ़र्क नहीं किया तो वो क्यों इस पाप के भागीदार बन रहे है…जीने दो इन परियों को भी अपने तरीके से…. उड़ान भरने दो इन्हे भी अपनी गति से…।

और यकीन मनिए….एक दिन वो भी आएगा जब आपको इनपर नाज़ होगा … क्योंकि ये उस मुकाम पर होंगी जहां आपने कभी ख्वाहिश भी नहीं की होगी…

गौरतलब है कि उस वक़्त आपको यकीन नहीं होगा कि ये आपकी वहीं परियां है…. जिनके हंसने पर भी आपने पाबंदियां लगाई थी।।

चलिए जिसे समझना होगा वो इतने में समझ जाएगा… बाकी जिसको ये समझ नहीं आया उनके लिए कुछ और है मेरे पास….

मैं क्या जानू आज़ादी को, कैसे खुद को लड़का मानू,

मिले ही नहीं जो पंख मुझे, कैसे फिर मैं उड़ना जानूं ।

कैसे भुला दू इस हकीकत को, कैसे सच को सपना मानू,

जब आए अपने आंसू देने को, कैसे फ़िर मैं रिश्ते जानूं ।

सुकून दिया जिन फूलों में मुझे, कैसे उनको काटें मानू

हर पल जब खाई ठोकरें मैंने,कैसे फिर मैं उठना जानूं ।

दिखाए मैंने जो सपने दिल को, कैसे उनको टूटा मानू,

मिला ही नहीं कभी दरिया मुझे, कैसे फिर मैं प्यास को जानूं ।

भिगोया ही नहीं जिसने मुझे, कैसे उसको रिमझिम मानू,

जब मिली ही नहीं मूर्त मुझे, कैसे फिर मैं पूजा जानूं।

हर पल रुलाया जिसने मुझे, कैसे उसको अपना मानू

मिली ही नहीं कभी खुशी इस दिल को, कैसे फिर मैं हंसना जानूं ।

पाया है हर पल चार दीवारों मैं खुद को, कैसे इसको दुनिया मानू

मिला ही नहीं कभी जीवन मुझे तो, कैसे फिर मैं मौत को जानूं ।

मैं क्या जानूं आज़ादी को, कैसे खुद को लड़का मानू,

मिले ही नहीं कभी पंख मुझे तो कैसे फिर मैं उड़ना जानूं।।

 

फाइल फोटो- गूगल