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Author Archives: Nafisa Khan

If there is pain in the breast just before periods

Health First: ज्यादातर महिलाएं बिजी दिनचर्या, केयर संबंधी जिम्मेदारियों या अन्य समस्याओं को मामूली समझकर शुरुआती लक्षणों को दरकिनार कर देती हैं। हालांकि महिलाओं में ये अनदेखे लक्षण कभी-कभी सीरियस बीमारियों के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। थकान और अनियमित मासिक धर्म से लेकर शरीर में होने वाले सूक्ष्म बदलावों तक, इन संकेतों को अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए। महिलाओं की आम स्वास्थ्य समस्याओें को समझना, शुरुआती संकेतों को पहचानना और मेडिकल मदद कब लेनी चाहिए, यह जानना जटिलताओं को रोकने और लंबे हेल्थ के एहसास को सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

महिलाएं अक्सर हेल्थ रिलेटेड लक्षणों तो क्यों करती हैं नजरअंदाज-

महिलाएं अक्सर अपने स्वास्थ्य की तुलना में परिवार और काम को प्राथमिकता देती हैं। इससे अक्सर निदान और उपचार में देरी होती है।

  1.  व्यस्त जीवनशैली और एक साथ कई जिम्मेदारियों को निभाना
  2.  असुविधा या दर्द को सामान्य मानने की प्रवृत्ति• लक्षणों के बारे में जागरूकता का अभाव
  3.  यह मान लेना कि लक्षण अस्थायी हैं या तनाव से संबंधित हैं
    स्वास्थ्य संबंधी वे प्रमुख मुद्दे जिन्हें महिलाएं अक्सर नजरअंदाज कर देती हैं।

लगातार थकान रहना

Stress in women can affect scientific and physical health

थकान महसूस होने को अक्सर तनाव या नींद की कमी बताकर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
• यह एनीमिया , थायरॉइड विकार या पोषण संबंधी कमियों का संकेत हो सकता है।
• लगातार थकान महिलाओं में थकान के सबसे आम कारणों में से एक है, जिसका मूल्यांकन उन्हें करवाना चाहिए।
अनियमित मासिक धर्म
मासिक धर्म की अनियमितताओं को अक्सर सामान्य माना जाता है।
• यह हार्मोनल असंतुलन का संकेत हो सकता है।
• यह पीसीओएस, थायराइड की समस्याओं या तनाव से संबंधित हो सकता है।
• अनियमित मासिक धर्म के कारणों में से एक महत्वपूर्ण कारण है।

बेवजह वजन परिवर्तन

जीवनशैली में बदलाव किए बिना अचानक वजन बढ़ना या घटना होना अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
• यह थायरॉइड संबंधी विकार या चयापचय संबंधी समस्याओं का संकेत हो सकता है।
• हार्मोनल असंतुलन के लक्षणों से जुड़ा हुआ
बार-बार सिरदर्द
सिरदर्द को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है या इसका इलाज खुद ही कर लिया जाता है।
• यह तनाव, माइग्रेन या किसी अन्य अंतर्निहित बीमारी के कारण हो सकता है।
• लगातार सिरदर्द होने पर डॉक्टर से परामर्श लेना आवश्यक है।

स्तन में परिवर्तन

Breast Cancer

स्तन स्वास्थ्य में होने वाले बदलावों को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

• गांठें, दर्द या स्राव
• बेहतर परिणामों के लिए शीघ्र निदान अत्यंत महत्वपूर्ण है।
श्रोणि में दर्द
अक्सर इसे मासिक धर्म की असुविधा मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
• यह एंडोमेट्रियोसिस, संक्रमण या अंडाशय संबंधी समस्याओं का संकेत हो सकता है।
• दीर्घकालिक दर्द के लिए मूल्यांकन आवश्यक है
पाचन संबंधी समस्याएं (पेट फूलना, एसिडिटी)
आमतौर पर इन्हें मामूली समस्याएं माना जाता है।
• इसका संबंध आंतों के स्वास्थ्य या हार्मोनल परिवर्तनों से हो सकता है।
• लगातार बने रहने वाले लक्षण गंभीर समस्याओं का संकेत हो सकते हैं।

नींद की समस्याएँ

Your sleeping position reveals your personality

नींद की कमी को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है या इसे सामान्य मान लिया जाता है।
• यह तनाव, हार्मोनल असंतुलन या मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से संबंधित हो सकता है।
• यह समग्र स्वास्थ्य और ऊर्जा स्तर को प्रभावित करता है।
मनोदशा में परिवर्तन और चिंता
भावनात्मक लक्षणों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
• यह हार्मोनल उतार-चढ़ाव से संबंधित हो सकता है।
• यह चिंता या अवसाद का संकेत हो सकता है।

मनोदशा में परिवर्तन और चिंता

भावनात्मक लक्षणों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।

  • यह हार्मोनल उतार-चढ़ाव से संबंधित हो सकता है।
  • यह चिंता या अवसाद का संकेत हो सकता है।

चेतावनी के संकेत जिन्हें कभी भी अनदेखा नहीं करना चाहिए

इन संकेतों पर जरूर दें ध्यान :

  • ऐसे लक्षण जो कुछ दिनों से अधिक समय तक बने रहते हैं
  • समय के साथ बिगड़ती जाने वाली स्थितियाँ
  • एक साथ कई लक्षण प्रकट होना
  • शरीर में अचानक या असामान्य परिवर्तन

इन लक्षणों को नज़रअंदाज़ करने से होने वाले स्वास्थ्य जोखिम

लक्षणों को नज़रअंदाज़ करने से निम्नलिखित समस्याएं हो सकती हैं:

  • गंभीर बीमारियों के निदान में देरी
  • रोग की प्रगति
  • जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है
  • जीवन की गुणवत्ता में कमी

महिलाओं को डॉक्टर से कब परामर्श लेना चाहिए?

यदि निम्नलिखित स्थितियां हों तो चिकित्सीय सलाह लें:

  • लक्षण अपेक्षा से अधिक समय तक बने रहते हैं
  • अचानक या गंभीर असुविधा होती है
  • समस्याएँ बार-बार सामने आती रहती हैं।
  • ये लक्षण दैनिक जीवन में बाधा उत्पन्न करते हैं।

नियमित स्वास्थ्य जांच का महत्व

नियमित जांच रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

  • स्वास्थ्य समस्याओं का शीघ्र पता लगाना
  • मौजूदा स्थितियों की निगरानी
  • निवारक देखभाल और स्क्रीनिंग।
Consuming fenugreek in coconut oil will solve 5 hair problems

Hair Fall: बारिश के मौसम में कई लोग शिकायत करते हैं कि उनके बाल झड़ रहे हैं। अगर इस मौसम में आप भी बालों के झड़ने की समस्या से जूझ रहे हैं तो हम यहां आपको बताने जा रहे हैं कैसे इसे कंट्रोल किया जा सकता है।

बता दें कि बारिश का मौसम गर्मी से राहत तो देता है पर यह मौसम बालों के लिए कई मुश्किलों को लेकर आता है। मानसून आरंभ होते ही काफी लोग बाल झड़ने, चिपचिपे स्कैल्प, डैंड्रफ और बालों के बेजान होने की शिकायत करने लगते हैं। कई लोगों को लगता है कि बारिश का पानी सीधे तौर पर बाल झड़ने की वजह है। मानसून में क्या वास्तव में बाल तेजी से गिरने लगते हैं, अगर हां तो ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए? इस बारे में क्या है एक्सपर्ट की राय-

बारिश के मौसम में बाल झड़ने लगते हैं?

If you are troubled by white hair then do this special exercise daily

एक्सपर्ट के मुताबिक यह कहना गलत होगा सिर्फ मानसून या बारिश ही बालों के झड़ने का कारण है। दरअसल, इस मौसम में बढ़ी हुई नमी, पसीना, स्कैल्प पर गंदगी का जमना और सही देखभाल की कमी बालों की समस्याओं को बढ़ा जाती है। अगर मानसून के दौरान बालों की सही तरीके से देखभाल की जाए, तो हेयर फॉल को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

बारिश में बालों का झड़ना ऐसे करें कम?

मॉडल का हेयर स्टाइल

एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि बारिश के मौसम में जिन लोगों के बाल ज्यादा झड़ने लगते हैं उन्हें कुछ खास उपायों को अपनाना चाहिए। जैसे कि-

अगर आप बारिश में भीग गए हैं, तो घर पहुंचकर बालों को साफ पानी से धो लें। बारिश के पानी में धूल, प्रदूषण और कई तरह के केमिकल्स भी होते हैं जो स्कैल्प को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए बारिश में भीगने के बाद बालों को साफ पानी और शैंपू से धोने स्कैल्प की सही तरीके से सफाई हो जाती है जिससे बालों का झड़ना का कम होता है।

मानसून में हवा में ज्यादा नमी होने के कारण स्कैल्प जल्दी ऑयली हो जाता है। ऐसे में जरूरत के अनुसार सप्ताह में दो से तीन बार माइल्ड शैंपू से बालों को धोना चाहिए। शैंपू के बाद बालों पर कंडीशनर का इस्तेमाल करना जरूरी है।

गीले बाल सबसे ज्यादा कमजोर होते हैं। इस समय कंघी करने से बाल आसानी से टूट सकते हैं। इसलिए बालों के गीले होने पर उसे अच्छी तरह से सूखा लें। बालों के सूखने के बाद चौड़े दांत वाली कंघी से सुलझाने की कोशिश करें।

बालों का झड़ने और गिरने की समस्या न हो इसके लिए स्कैल्प का सही तरीके से साफ होना बहुत जरूरी है। अगर स्कैल्प पर तेल, पसीना और गंदगी जमा होगी, तो हेयर फॉल बढ़ सकता है। इसलिए स्कैल्प को समय- समय पर सही तरीके से साफ करना बहुत जरूरी है।

मानसून के दौरान हेयर ड्रायर, स्ट्रेटनर और कर्लिंग मशीन का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करने से बाल और कमजोर हो सकते हैं। ऐसे मौसम में बालों का झड़ना रोकने के लिए इस तरह की मशीन का इस्तेमाल जहां तक संभव हो कम से कम करें।

एक्सपर्ट कहते हैं कि मानसून में हेयर फॉल बढ़ना एक आम समस्या है, लेकिन सही तरह से केयर से इसे काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। स्कैल्प को साफ रखना, संतुलित आहार लेना, गीले बालों की सही देखभाल करना और जरूरत से ज्यादा केमिकल वाले प्रोडक्ट्स से बचना बालों को हेल्दी बनाता है।

फोटो सौजन्य- गूगल

Vaginal Infection: Do not ignore the problem of burning and itching in the vagina

Health Tips: एक कहावत है ‘हेल्थ ही असल पूंजी है’, लेकिन अक्सर देखा गया है कि हम महिलाएं अपनी सेहत को इग्नोर कर देती हैं। वक्त की कमी, ऑफिस या घर से संबंधित तनाव, जागरूकता की कमी यौन स्वास्थ्य के बारे में बात करने में झिझकना, सभी ऐसे कारक हैं जो इसमें योगदान करते हैं। लेकिन जनरल हेल्थ समस्याओं को भी आपको नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासतौर से जब वे बदलाव आपकी वजाइना या ब्रेस्ट में नजर आ रहे हों।

महिलाओं की आम शिकायतें होती हैं, जिन्हें ज्य़ादातर इग्नोर कर दिया जाता है। पर यह कुछ ज्यादा गंभीर होने का संकेत हो सकते हैं।

6 स्वास्थ्य समस्याएं जिन्हें महिलाओं को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए

1. सेक्स के दौरान दर्द होना

Do we have to face the risk of UTI after sex?

महिलाएं अक्सर संभोग के दौरान दर्द के बारे में बात करने से हिचकिचाती हैं। हालांकि, दर्दनाक सेक्स एंडोमेट्रियोसिस का लक्षण भी हो सकता है। एक ऐसी स्थिति जिसमें गर्भाशय की अंदरूनी परत गर्भाशय के बाहर जमा हो जाती है। यह पीआईडी ​​​​(पेल्विक सूजन की बीमारी) के कारण भी हो सकता है, जो अक्सर वेजाइनल डिस्चार्ज के साथ रिप्रोडक्टिव ऑर्गन का संक्रमण होता है। अपर्याप्त लुब्रिकेशन और ड्राई वेजाइना के कारण भी सेक्स दर्दनाक हो सकता है।

2. अनियमित या असामान्य माहवारी

मासिक धर्म हर 21-35 दिनों में नियमित रूप से होना चाहिए। भारी प्रवाह, मध्य-चक्र रक्तस्राव या स्पॉटिंग, लंबे समय तक पीरियड साइकिल, यह थायराइड, पीसीओडी या फाइब्रॉएड जैसे हार्मोनल रोगों के कारण हो सकता है, जो गर्भाशय के सौम्य ट्यूमर हैं। सेक्स के बाद रक्तस्राव या रजोनिवृत्ति के बाद रक्तस्राव को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। यह ओवेरियन कैंसर का संकेत हो सकता है और इसकी जांच की आवश्यकता है।

3. ब्रेस्ट में बदलाव

Breast Cancer

स्तनों में गांठ फाइब्रोएडीनोमा जैसी हानिरहित स्थितियों के कारण हो सकती है। हालांकि ब्रेस्ट में गांठ होना भी ब्रेस्ट कैंसर का संकेत हो सकता है। जागरूकता की कमी के कारण महिलाओं में स्तन कैंसर अक्सर उन्नत चरणों में पाया जाता है। स्तनों में गांठ जो स्तन के बाकी टिश्यू से सख्त और अलग लगती हैं या निप्पल से स्राव को चैक किया जाना चाहिए। महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर की जांच के लिए नियमित चेकअप करवाना चाहिए। स्तन में किसी भी परिवर्तन का शीघ्र पता लगाने के लिए ब्रेस्ट सेल्फ टेस्टिंग के तरीकों के बारे में भी पता होना चाहिए।

4. अचानक वजन घटना और बढ़ना

अचानक वजन कम होना खुशी की बात हो सकती है, लेकिन एकाएक वजन कम होना टीबी के साथ-साथ कैंसर या थायरॉयड विकारों का भी संकेत हो सकता है और इसका मूल्यांकन किया जाना चाहिए। अचानक वजन बढ़ना पीसीओडी या थायराइड की समस्या के कारण हो सकता है और अगर इसका पता चल जाए तो इसे बहुत अच्छी तरह से नियंत्रित किया जा सकता है।

5. थकान महसूस होना

बहुत सी महिलाएं हर समय थकान महसूस करती हैं। बार-बार थकान एनीमिया, थायराइड विकार, सूक्ष्म पोषक तत्वों और विटामिन डी की कमी के कारण हो सकती है और इसकी जांच होनी चाहिए। पूरी रात की नींद के बाद भी थकान महसूस होना भी तनाव, चिंता, डिप्रेशन या ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया का कारण हो सकता है। इसलिए इसे कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

6. ब्लोटिंग

बहुत सी महिलाएं विशेष रूप से मासिक धर्म से पहले फूला हुआ या गैसी महसूस करती हैं। यह अधिक सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। हालांकि, अगर ब्लोटिंग महसूस करना बहुत बार होता है, तो इसे चैक करवाना चाहिए। यह इरिटेबल बावल सिंड्रोम, एंडोमेट्रियोसिस या यहां तक ​​कि ओवरियन कैंसर का संकेत हो सकता है। जैसा कि मिशेल ओबामा ने कहा कि समुदाय और देश और अंततः दुनिया उतनी ही मजबूत है जितनी उनकी महिलाओं का स्वास्थ्य। इसलिए देश और दुनिया की बेहतरी के लिए हमें अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

फोटो सौजन्य- गूगल

Right time of walking, Avoid walking at the wrong time

Right time of walking for fitness: वेट लॉस करना हो या फिर फिटनेस लेवल बढ़ाना हो एक्सरसाइज का आगाज वॉकिंग के साथ ही होता है। सुबह या शाम के वक्त खुली हवा में टहलना आपकी हेल्थ के लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है। सिंपल तरीके से पैदल चलना या वॉकिंग और ब्रिस्क वॉक जैसी एक्सरसाइज न सिर्फ आसान होती है बल्कि यह महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए लाभदायक साबित हो सकती है।

सर्दी या गर्मी के मौसम में भी आप बस कुछ बातों का ख्याल रखकर टहल सकते हैं। जैसे दिन में किस वक्त और कितनी देर तक वॉक करनी चाहिए। क्योंकि, सही समय पर वॉक ना करने से आपकी हेल्थ को नुकसान हो सकता है। इसलिए वॉक करने से पहले इस बात की जानकारी आपको जरूर होनी चाहिए कि आपको कब वॉक करना चाहिए और कब नहीं।

गर्मियों के मौसम में वॉक करने का सही समय ?

Right time of walking, Avoid walking at the wrong time

इस समय करें मॉर्निंग वॉक

वॉक करने का सबसे ठीक समय है है सुबह सूरज उगने के आसपास का समय। सूरज उगने के साथ ही आप टहलने निकल जाएं और सुबह 8 बजे तक वॉक पूरी कर लें। दरअसल, सूरज निकलने से पहले का समय हवा में प्रदूषण का स्तर अधिक होता है। वहीं, सुबह की हल्की धूप में टहलने से आपको तकलीफ भी नहीं होती। इस तरह आप थोड़ी देर धूप में रहकर विटामिन डी भी प्राप्त कर सकते हैं और आपकी हड्डियों को इसका फायदा हो सकता है।

इवनिंग वॉक

जो लोग सुबह की बजाय शाम को वॉक करना पसंद करते हैं, उन्हें शाम के समय 4 के बाद और 6-8 बजे तक वॉक करने की सलाह दी जाती है। इस समय हवा में ठंडक भी बढ़ने लगती है और प्रदूषण का स्तर भी कम होता है। सबसे खास बात यह भी है कि शाम 4-7 बजे के दौरान शरीर की मांसपेशियां बहुत फ्लेक्सिबल होती हैं। ऐसे में आपके लिए वॉक करना आसान हो सकता है और इससे आपके स्वास्थ्य को वॉक करने के फायदे भी पहुंच सकते हैं।

सर्दियों में कब टहलना चाहिए

Right time of walking, Avoid walking at the wrong time

ठंड के दिनों में सवेरे वॉक करना फायदेमंद होता है लेकिन, सूरज उगने से पहले और कोहरे के माहौल में वॉक करने से हेल्थ पर खराब असर पड़ सकता है। सुबह के समय हवा में ठंड होती है और तापमान भी काफी कम होता है। ऐसे में वॉक करते समय आपको सांस लेने से जुड़ी हुई समस्याएं हो सकती है। इसलिए, सर्दियों में सूरज उगने के बाद ही वॉक करें।

ये भी पढ़े : बॉलीवुड की वो हीरोइन जिसे अपनी SKIN को हेल्दी रखने के लिए भगवान से अब कोई ‘तमन्ना’ नहीं!

गलत समय पर वॉक करना है नुकसानदायक

तड़के सुबह यानी अंधेरे में वॉक करना हेल्थ के लिए हानिकारक साबित हो सकता है क्योंकि, ऐसे में हवा में प्रदूषण का स्तर अधिक होता है। जिससे अस्थमा, खांसी और जुकाम जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। ठंडियों में बहुत सुबह वॉक करने से मसल्स में खिंचाव और जॉइंट पेन की समस्या बढ़ सकती है। सुबह की ठंडी हवा और प्रदूषण के कारण फेफड़ों पर भी खराब असर पड़ता है जिससे छाती में भारीपन और दर्द जैसी शिकायतें हो सकती हैं।

फोटो सौजन्य- गूगल

The Bollywood heroine who no longer has any 'wish' from God to keep her skin healthy

नेचुरल इंग्रीडिएंट के इस्तेमाल में हैं असल ग्लो

साउथ फिल्म इंडस्ट्री में मिल्की ब्यूटी से फेमस तमन्ना भाटिया की सॉफ्ट और ग्लोइंग Skin का राज। तमन्ना की स्किन और हेल्दी ग्लो करने के मामले में बेमिसाल है। उन्हें अपनी स्किन को हेल्दी रखने के लिए अब भगवान से कोई ‘तमन्ना’ नहीं। बस उन्हें अपनी स्किन को हेल्दी रखने के लिए अपने स्किन केयर रूटीन का काफी ध्यान देती हैं। तमन्ना केमिकल वाले प्रॉडक्ट्स और ट्रीटमेंट की जगह नेचुरल इंग्रीडिएंट का इस्तेमाल करती हैं।

नेचुरल इंग्रीडिएंट की बात ही अलग है

The Bollywood heroine who no longer has any 'wish' from God to keep her skin healthy

तमन्ना घर में मिलने वाली साधारण चीजों की मदद से फेस पैक बनाती हैं और अपनी स्किन पर उन्हें अप्लाई करती हैं। सबसे खास बात ये है ये नेचुरल इंग्रीडिएंट्स कई पीढ़ियों से भारतीय महिलाओं के फेवरेट रहे हैं और उन्हें इन इंग्रीडिएंट्स पर बहुत ज्यादा भरोसा रहा है। आइए जानते हैं तमन्ना अपनी स्किन पर कौन-सी चीजें लगाती हैं।

बेसन का फेस पैक

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दो चम्मच बेसन, दो चम्मच गुलाब जल और एक चम्मच दही मिलाएं। सभी चीजों को मिक्स करके फेस पैक बना लें। फिर इस पैक को अपनी गर्दन और चेहरे पर लगाएं। जब फेस पैक सूख जाता है तो अपना चेहरा ठंडे पानी से धो लें।

कॉफी-चंदन का जबरदस्त फेस पैक

If you look old then drink coffee every day

इस फेस पैक को बनाने के लिए 02 चम्मच चंदन पाउडर, 02 चम्मच कॉफी पाउडर और 02 चम्मच शहद की जरूरत पड़ती है। इन सभी चीजों को मिक्स करके फेस पैक बनाएं। इस फेस पैक को आप अपने चेहरे और गर्दन पर लगाएं। 20-25 मिनट के बाद आप इसे चेहरे से साफ कर दें।

हेल्दी डाइट पर जोर

The Bollywood heroine who no longer has any 'wish' from God to keep her skin healthy

स्किन को सॉफ्ट और ग्लोइंग रखने के लिए तमन्ना अपनी डाइट पर खास ध्यान देती हैं। वे ब्रोकोली का सलाद खाती हैं और एवोकाडो भी उनकी डाइट में अक्सर रहता ही है। इन सबके साथ तमन्ना को डेली 08-10 गिलास पानी पीने की आदत है।

Gas After Eating

Gas after Eating: आजकल लोगों का खानपान काफी खराब होता जा रहा है, जिसका सीधा असर आपके हेल्थ पर पड़ रहा है। देखा जा रहा है कि लोगों को अक्सर खाना खाने के बाद गैस बनना, पेट में दर्द और सूजन जैसी समस्याओं से जूझना पड़ता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स भी मानते हैं कि अगर आपका खानपान सही नहीं है, तो इसके पीछे का सबसे बड़ा कारण अनियमित खानपान, जंक फूड का अधिक सेवन, देर रात तक जागना और मानसिक तनाव इसके प्रमुख कारणों में से एक हैं।

यह समस्या न आज केवल शारीरिक असहजता पैदा कर रही है, बल्कि डेली रूटीन को भी प्रभावित कर रही है। आप में से कई लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं, और फिर तब ध्यान देते हैं, जब समस्या काफी भयानक रूप ले लेता है। लेकिन समय रहते समस्या पर ध्यान देना जरूरी है। सही आहार, नियमित दिनचर्या और कुछ आसान उपायों से इस समस्या से राहत पाई जा सकती है। पर कुछ आसान और घरेलू ड्रिंक्स आपकी इस परेशानी को कम कर सकते हैं, जिनके बारे में हम आपको कुछ खास होममेड ड्रिंक्स के खास फायदों के बारे में बताने वाले हैं।

गुनगुना नींबू पानी

अगर आप सुबह हल्का गुनगुना पानी नहीं पीते हैं तो आज से ही पीना शुरू कर दीजिए। नींबू पानी पीने के फायदे आमतौर पर पाचन क्रिया को अच्छा बनाने के लिए सबसे ज्यादा होते हैं। क्योंकि हल्का गुनगुना और नींबू वाला पानी पाचन तंत्र को सक्रिय करने में बेहद असरदार होता है। इसमें मौजूद विटामिन-C शरीर को डिटॉक्स करते हैं और गैस व एसिडिटी को कम कर देते हैं। सुबह खाली पेट इसका सेवन करने से पेट हल्का रहता है और सूजन में कमी आती है।

अदरक का पानी

अदरक में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं। यह दोनों की तत्व पेट की सूजन और गैस को कम करने में सहायता प्रदान करते हैं। एक्सपर्ट बताते हैं कि अदरक का पानी पीने से पाचन बेहतर होता है और भोजन भी आसानी से पच जाता है। यह मतली और भारीपन की समस्या को भी दूर करने में मददगार साबित होता है।

जीरा वॉटर

Water of celery and cumin seeds makes the fat stored in the body disappear

जीरा पाचन के लिए बहुत फायदेमंद है। ऐसे में जीरा वॉटर पेट में गैस बनने की समस्या को कम कर सकता है और मेटाबॉलिज्म को तेज करता है। शोध बताते हैं कि इसमें मौजूद तत्व पाचन एंजाइम्स को सक्रिय करते हैं, जिससे पेट की सूजन और अपच में राहत मिलती है। अगर आप चाहें तो सुबह भी जीरे का पानी पी सकते हैं क्योंकि खाली पेट जीरे का पानी पीने के कई अलग-अलग फायदे भी हो सकते हैं।

अजवाइन का पानी

अजवाइन का पानी भी गैस और सूजन से राहत दिलाता है। इसमें थाइमोल नामक तत्व होता है, जो पाचन क्रिया को मजबूत करता है। अजवाइन का पानी गैस, पेट दर्द और ब्लोटिंग से फौरन राहत दिलाता है। अगर आप हैवी डाइट लेते हैं को उसके बाद इसे पीना बहुत लाभकारी साबित होता है।

शहद व पुदीने वाला पानी

Gas After Eating

शहद और पुदीने का पानी स्वादिष्ट होने के साथ ही पेट के लिए बेहद फायदेमंद होता है। पुदीना पेट को ठंडक देता है और पेट की जलन व सूजन को कम करने का काम करता है, जबकि शहद पाचन को सुधारता है। इन दोनों का मिश्रण गैस और ब्लोटिंग से राहत दिलाने का काम करता है। साथ ही शरीर को ताजगी भी देता है।

फोटो सौजन्य- गूगल

Unhealthy Partnership: 4 ways to tell if someone is hiding something from you

Unhealthy Partnership: जिंदगी में रिश्ता कोई भी हो उसे निभाने के लिए केवल आपसी प्यार से भी ज्यादा दोनों के बीच में ट्रस्ट और एक दूसरे का सम्मान होना जरूरी है। जब कभी रिश्तों के बीच में इन तीनों चीजों में से कोई भी कम होता है, तो वह रिश्ता धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगता है। धीरे-धीरे कमजोर पड़ रहे रिश्तों को जब संभाला ना जाए तो वे टूट जाते हैं। पर कुछ लोग यह अनुमान नहीं लगा पाते हैं कि रिश्ते कमजोर पड़ रहे हैं और उन्हें तब ही पता चलता है जब रिश्ता टूटने के कगार पर आ जाता है। एक दूसरे को पर्याप्त समय न दे पाने के कारण से आजकल पति-पत्नी के रिश्ते के बीच खटपट शुरू होने का खतरा बढ़ जाता है।

यह खटपट आहिस्ता आहिस्ता बढ़ने लगता है और एक दूसरे से बातें छुपाई जाने लगती हैं। ऐसा इसलिए किया जाता है, क्योंकि उन्हें लगने लगता है कि उनका जीवन साथी उसकी बातों को समझ ही नहीं पाएगा। अगर आपको लगता है कि आपका लाइफ पार्टनर आपके बातें छिपाने लगा है, तो ऐसा आप उनके बात करने के अंदाज से भी पता लगा सकते हैं। जानें बात करने के वे चार अंदाज जो बताते हैं कि आपका लाइफ पार्टनर आपके बातें छुपाने लगा है।

1. जीवन साथी के बातों को हल्के में लेना

अगर आपका लाइफ पार्टनर पहले आपकी सारी बातों को सुनता था लेकिन अब उसने धीरे-धीरे आपकी बातों को इग्नोर करना शुरू कर दिया है, तो यह एक अच्छा संकेत नहीं है। अगर आपके कुछ पूछने पर भी बातों को इग्नोर किया जा रहा है, तो हो सकता है कि आपका लाइफ पार्टनर आपके कुछ छिपाने की कोशिश कर रहा हो। अगर आपके कुछ पूछने पर किसी और ही बात का जवाब दिया जा रहा है, तो आपको खुलकर बात करने की जरूरत है।

2. किसी भी बात का जवाब हंसकर देना

Unhealthy Partnership: 4 ways to tell if someone is hiding something from you

हर बात को हंसी मजाक में टालना या फिर किसी सीरियस बात का जवाब भी हंसकर देना भी एक हेल्दी रिलेशनशिप का संकेत नहीं है। ऐसा आमतौर पर तब होता है, जब आपका पार्टनर आपको कोई खास बात भुलाने की कोशिश कर रहा है, हालांकि आपको लगता है कि आप किसी भी प्रकार के डॉक्टर के संपर्क

3. जीवन साथी के लिए समय की किल्लत होना

वैसे तो आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में किसी के पास भी टाइम नहीं होता है, लेकिन फिर भी अपने पार्टनर के लिए समय निकालना बहुत जरूरी है। अगर आपका लाइफ पार्टनर आपके लिए समय नहीं निकाल पा रहा है, तो यह भी एक हेल्दी रिलेशनशिप का अच्छा संकेत नहीं है। ऐसा करना कई परेशानियां पैदा कर सकता है, जिसका खास ध्यान रखना जरूरी है।

4. आपको इग्नोर कर प्लान बनाना

अगर आपका जीवन साथी अब आपके बिना ही बाहर घूमने फिरने या फिर पार्टी वगैरह के प्लान बनाने लगा है, तो यह भी एक संकेत हो सकता है। अगर आपके पूछने पर भी वह टालने का प्रयास कर रहा है तो उसके बात करने का यहा तरीका बताता है कि वह आपको इग्नोर करने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में अपने जीवन साथी से खुलकर इस बारे में बात करनी चाहिए, ताकि आपसी बातचीत से किसी भी तरह की उलझन को दूर किया जा सके।

फोटो सौजन्य- गूगल

Do these 4 exercises to get pregnant quickly

Pregnant: मां होने की फीलिंग्स हर महिला का सपना होता है। पर क्या को मालूम है कि मां बनने की प्लानिंग के बारे में सोचना जितना आसान होता है उतना मां बनने में नहीं। प्रेगनेंसी के समय हर महिलाओं को कई वजहों से जूझना पड़ता है। लेकिन इन सबके बीच आप शरीरिक रूप से फिट या फिर मजबूत नहीं हैं तो आपको प्रेगनेंसी के दौरान पीठ दर्द, पैर दर्द और अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में आपको शरीरिक रूप से खुद को फिट और मजबूत बनाना चाहिए। प्रेगनेंसी के दौरान खुद को फिट रखने के लिए आपको कुछ व्यायाम को अपने वर्कआउट में शामिल करना चाहिए, जो आपकी प्रेगनेंसी के सफर को सफल बना सके और आप एक स्वस्थ्य बच्चे को जन्म देने में हर तरह की चुनौतियां का सामना आसानी से कर सके। आइये जानते है उन एक्ससरसाइज के बारे में , जो आपकी प्रेगनेंसी की प्लानिंग को सफल बना सकते हैं।

कार्डियो एक्सरसाइज करें

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अगर आप प्रेगनेंसी की प्लानिंग बना रही हैं तो आपके लिए कार्डियो एक्सरसाइज आपके लिए अत्छा विकल्प साबित हो सकता है। अक्सर प्रेगनेंसी के दौरान ब्लड सर्कुलेशन में खून का तेजी से सर्कुलेट होना, अचानक ह्रदय गति का बढ़ जाना आदि समस्याएं उत्पन्न होने लगती हैं जो कि गर्भापात का कारण भी बन सकती हैं। ऐसे में अगर आप नियमित तौर पर इस एक्सरसाइज को करती हैं तो आप इन सभी बीमारियों से छुटकारा पा सकती हैं। अलावा इसके यह तनाव, डिप्रेशन आदि समस्याओं से भी राहत पहुंचा सकता है।

एरोबिक एक्सरसाइज करें

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अगर आप नियमित तौर पर थोड़ा वक्त एरोबिक एक्सरसाइज में निकालती हैं, तो आप प्रेगनन्सी के समय आने वाली सभी तरह की समस्याओं को कम कर सकती हैं। जी हां एरोबिक एक्सरसाइज जिनमें पैदल चलना, साइकलकिंग करना अदि शामिल होते हैं इन्हें करने से बच्चे को जन्म देते वक्त होने वाले दर्द से राहत मिल सकती है।

पेल्विक फ्लोर को करें ऐसे मजबूत

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प्रेग्नेंसी जैसे-जैसे में पेल्विक हिस्से पर ज्यादा तनाव महसूस होता है। इसलिए इस हिस्से का मजबूत होना बेहद जरूरी होता है, नहीं तो इससे कई तरह की असुविधाओं का सामान करना पड़ सकता है। इसके लिए आप क्विक फ्लिक केगल्स, हील स्लाइड, हैप्पी बेबी पोज़, लंग्स और स्क्वैट्स जैसी एक्सरसाइज कर सकती हैं।

कोर की मासंपेशियों के लिए करें पिलाटे एक्सरसाइजप्रेगनेंसी के स्टेज आगे बढ़ते हैं, तो उस दौरान गर्भाशय और पेट के निचले हिस्से में तेजी से विकास होने लगता है। ऐसे में कोर की मांसपेशियों का हेल्दी होना बहुत जरूरी होता है। क्योंकि यह आपके बढ़े हुए पेट को लचीला बनाने में मदद करती हैं। कोर की मासंपेशियों को मजबूत करने के लिए आप पिलाटे एक्सरसाइज का सहारा ले सकती हैं।

फोटो सौजन्य-  गूगल

Stress in women can affect scientific and physical health

Tension in Women: महिलाओं में टेंशन उनके भावनात्मक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। आप क्रोध, चिड़चिड़ापन, क्रोध, अवसाद, चिंता, मनोबल में बदलाव और हताशा जैसे संकेतों को पहचानती होंगी। पर यह आपके इनर्जी लेवल, भूख, मेमोरी और एकाग्रता को भी प्रभावित कर सकता है। टेंशन से राहत पाने के लिए कई अलग-अलग उपाय उपलब्ध हैं।

क्या होता है महिलाओं में टेंशन?

तनाव जीवन का एक स्वाभाविक हिस्सा है लेकिन महिलाओं के लिए , जिन पर दूसरों की ज़रूरतों का ध्यान रखने का अधिक दबाव होता है, तनाव प्रेरक और साथ ही साथ अत्यधिक बोझिल भी हो सकता है। यह जागरूकता बढ़ा सकता है और ध्यान केंद्रित करने में मदद कर सकता है या फिर यह चिंता और थकावट का कारण बन सकता है। कई महिलाएं इतनी व्यस्त रहती हैं कि उन्हें यह पता भी नहीं हो पाता कि तनाव उन पर कितना हावी होता है।

जब तनाव लंबे समय तक चलने वाला प्रतीत होने लगता है, तो यह सामान्य लगने लगता है। समय के साथ, यह आपके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है।

घर पर तनाव को नियंत्रित करने के लिए आप कुछ कदम उठा सकते हैं। या फिर अधिक सहायता के लिए आप किसी स्वास्थ्य सेवा प्रदाता से संपर्क कर सकते हैं।

महिलाओं में तनाव पुरुषों में तनाव से किस तरह अगल होता है?

Stress in women can affect scientific and physical health

हालांकि हर कोई तनाव का अनुभव करता है, लेकिन यह महिलाओं और पुरुषों को अलग-अलग तरह से प्रभावित कर सकता है। जैसे कि, अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन के 2023 के ‘स्ट्रेस इन अमेरिका’ रिसर्च में निम्नलिखित निष्कर्ष निकले-

  1. महिलाओं ने पुरुषों की तुलना में तनाव का औसत स्तर अधिक बताया।
  2. पुरुषों की तुलना में महिलाओं के यह कहने की संभावना अधिक थी कि उन्हें अधिक भावनात्मक समर्थन की आवश्यकता हो सकती थी।
  3. पुरुषों की तुलना में महिलाएं वित्तीय चिंताओं से अधिक “परेशान” महसूस करती हैं।
  4. महिलाओं में पुरुषों की तुलना में पारिवारिक जिम्मेदारियों और रिश्तों को अपने जीवन में प्रमुख तनाव के कारकों के रूप में मानने की संभावना अधिक थी।
  5. शोधकर्ताओं का मानना ​​है कि जैविक कारक (जैसे हार्मोन ) इस बात को प्रभावित कर सकते हैं कि प्रत्येक लिंग तनाव का अनुभव अलग-अलग तरीके से कैसे करता है। सामाजिक प्रभाव (जैसे समर्थन या परित्याग) भी तनाव को प्रभावित कर सकते हैं।

महिलाओं में तनाव के लक्षण क्या हैं?

तनाव के कई लक्षण होते हैं। हर व्यक्ति तनाव पर अलग-अलग तरह से प्रतिक्रिया करता है। महिलाओं में तनाव के सामान्य लक्षणों में शामिल हैं:

शारीरिक लक्षण : सिरदर्द , नींद आने में कठिनाई , मांसपेशियों में तनाव, दर्द (अक्सर पीठ और गर्दन में), अधिक खाना/कम खाना, त्वचा संबंधी समस्याएं, नशीली दवाओं और शराब का दुरुपयोग , ऊर्जा की कमी, पेट या आंतों में गड़बड़ी, यौन संबंध या अन्य चीजों में रुचि कम होना जिनका आप पहले आनंद लेते थे।

भावनात्मक : चिंता, अवसाद , क्रोध, उदासी, चिड़चिड़ापन, नियंत्रण से बाहर होने की भावना, मनोदशा में उतार-चढ़ाव , हताशा

मानसिक लक्षण : भूलने की बीमारी, चिंता, निर्णय लेने में असमर्थता, नकारात्मक सोच, ध्यान केंद्रित करने में कमी, ऊब, जिन चीजों में आमतौर पर आनंद आता है उनमें रुचि का अभाव, प्रेरणा की कमी, जीवन में अर्थ का अभाव, खालीपन, क्षमा न कर पाना, संदेह, अपराधबोध, निराशा

व्यावसायिक : काम का बोझ, तनाव , लंबे समय तक काम करना, तनावपूर्ण संबंध, एकाग्रता में कमी

सामाजिक : कम घनिष्ठता, अलगाव, पारिवारिक समस्याएं, अकेलापन

महिलाओं में तनाव के क्या कारण होते हैं?
तनाव के कुछ सबसे सामान्य कारण निम्नलिखित हैं:

  • फाइनेंस
  • हेल्थ
  • रिलेशन
  • स्कूल या काम

कई महिलाओं का कहना है कि बच्चों, माता-पिता और घर के कामों जैसी पारिवारिक जिम्मेदारियों से तनाव और अस्वस्थता बढ़ती है। अक्सर महिलाएं अपना ध्यान रखने की बजाय दूसरों की जरूरतों को पूरा करने में अधिक समय व्यतीत करती हैं। हर काम में अच्छा प्रदर्शन करने की चाह रखना स्वाभाविक है। और कभी-कभी, समय या ऊर्जा की कमी होने पर भी “ना” कहना मुश्किल हो जाता है। इससे तनाव के लक्षण भी उत्पन्न हो सकते हैं।

तनाव मेरे स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करता है?

Stress Effects

जब आप लंबे समय तक तनाव महसूस करते हैं, तो इसे दीर्घकालिक तनाव कहा जाता है। इससे कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं, जैसे:

गंभीर या बार-बार होने वाले सिरदर्द ( तनावग्रस्त सिरदर्द और माइग्रेन )
हृदय संबंधी समस्याएं ( उच्च रक्तचाप , हृदय रोग और दिल का दौरा )
चिड़चिड़ा आंत्र सिंड्रोम (आईबीएस)
मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं ( पैनिक डिसऑर्डर , सामान्यीकृत चिंता विकार , गंभीर अवसाद)
मांसपेशियों में तनाव और दर्द
मोटापा (तनाव के कारण वजन बढ़ना)
आघात
कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली (बीमारी के बाद ठीक होने में कठिनाई)
किसी स्वास्थ्य सेवा प्रदाता के मार्गदर्शन में, तनाव का प्रबंधन करने से आपको इन जटिलताओं को रोकने में मदद मिल सकती है।

महिलाएं तनाव को बेहतर तरीके से कैसे प्रबंधित कर सकती हैं?

महिलाएं स्वस्थ आत्म-देखभाल रणनीतियों को प्राथमिकता देकर और उनका अभ्यास करके तनाव को नियंत्रित कर सकती हैं। शुरुआत करने के लिए यहां कुछ सुझाव दिए गए हैं:

संज्ञानात्मक पुनर्परिभाषित करना (यह कहने के बजाय कि “मुझे यह करना है,” यह कहना कि “मुझे यह करने का अवसर मिल रहा है”)
संतुलित आहार लें (जैसे भूमध्यसागरीय आहार )।
प्रकृति का आनंद लें (टहलने जाएं और कुछ देर के लिए भाग-दौड़ भरी जिंदगी से दूर हो जाएं)।
व्यायाम करें या ऐसी शारीरिक गतिविधि में भाग लें जिससे आपका शरीर हिलता-डुलता रहे।
पर्याप्त नींद लें (प्रति रात सात से नौ घंटे)।
विश्राम की तकनीकों का अभ्यास करें (जैसे योग , ध्यान , गहरी सांस लेना)।
कृतज्ञता का अभ्यास करें
अपनी पसंद की गतिविधियों/शौकों के लिए समय निकालें।
दोस्तों और परिवार के साथ समय बिताएं और मेलजोल बढ़ाएं।
डायरी लिखना शुरू करें

इसके बाद, आप अपने मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित करने वाले कुछ सुझावों का पालन कर सकते हैं:

अपने तनाव के स्रोतों को पहचानें। दिन भर आप कैसा महसूस करते हैं और क्या करते हैं, उसे लिख लें। आप कार्यों को बाँटने या ज़रूरत पड़ने पर मदद मांगने के लिए कार्य योजनाएँ बना सकते हैं। विनम्रतापूर्वक लेकिन दृढ़ता से “ना” कहना और अपने लिए सीमाएँ निर्धारित करना महत्वपूर्ण है ।

10 तक गिनें- अगर आप किसी स्थिति से नाराज़ हैं, तो वहां से दूर जाकर 10 तक गिनने की कोशिश करें। तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय कुछ गहरी सांसें लें और रुकें।

जैसे आप दूसरों का ख्याल रखते हैं, वैसे ही खुद का भी ख्याल रखें । आप दूसरों के प्रति दयालु हैं, इसलिए खुद के प्रति भी दयालु रहें। याद रखें, किसी और की मदद करने से पहले आपको खुद को ऑक्सीजन देनी होगी।

सामाजिक सहयोग प्राप्त करें । जरूरत के समय मदद मांगना मुश्किल हो सकता है। कई महिलाओं को मुश्किल समय में किसी ऐसे व्यक्ति का साथ मददगार लगता है जिस पर वे भरोसा कर सकें।

डिजिटल/सोशल मीडिया से कुछ समय के लिए दूरी बनाएं । जब भी संभव हो, स्क्रीन से ब्रेक लें ।

मदद लें- जरूरत पड़ने पर किसी स्वास्थ्य सेवा प्रदाता से बात करना ठीक है। वे तनाव से निपटने में आपकी मदद करने के लिए थेरेपी जैसे विभिन्न संसाधनों की सलाह दे सकते हैं ।

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Say goodbye to unwanted grey hair

Natural Hair Dye: बचपन में जब हम बालों को लहराते घूमा करते थे और हमें अपने बालों की कोई फिक्र नहीं रहती थी। ऐसा लगता था मानों सबसे खूबसूरत बाल हमारे ही हैं। और आज याद करते हैं कि काश वो बेफिक्री, वो चमक वो खुशी, वो एहसास काश कोई लौटा दे, क्योंकि आजकल कम उम्र में सफेद होते बाल और उनका रुखापन, बेजान होकर झड़ना एक आम बात बन चुकी है। सफेद बालों को तो केमिकल हेयर डाई बालों को तुरंत रंग तो देती है पर लंबे वक्त तक इसका इस्तेमाल करने से नुकसान भी पहुंचाती है। ऐसे में केमिकल हेयर डाई की जगह क्यों ना दादी-नानी के नुस्खे को आजमाया जाए, जो कि भरोसेमंद भी है। वर्षों से अपनाए जाने वाला आंवला नुस्खा जो एक अच्छा प्राकृतिक उपाय है, जो बालों को गहरा रंग देने के साथ-साथ उन्हें मजबूत और चमकदार भी बनाता है। बता दें कि सही तरीके से प्रयोग करने पर यह बालों को नेचुरल ब्लैक टोन देने में मदद भी करता है।

ये है बालों के लिए आंवला के फायदे

Say goodbye to unwanted grey hair

कई शोध इस बात को साबित करते हैं कि आंवला विटामिन- C, एंटीऑक्सीडेंट और मिनरल्स से भरपूर होता है। साथ ही बालों में इसका इस्तेमाल करने से बालों की जड़ों को जबरदस्त मजबूती मिलती है, हेयर फॉल कम करता है और समय से पहले बालों के सफेद होने वाली समस्या कम हो जाती है। साथ ही इसके नियमित उपयोग से बालों में प्राकृतिक चमक आती है और स्कैल्प हेल्दी रहने लगते हैं। यही वजह है कि आंवला को नेचुरल हेयर डाई के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है।

नेचुरल आंवला डाई बनाने का आसान तरीका

आमला से नेचुरल हेयर डाई बनाने के लिए सबसे पहले आपको कुछ नेचुरल चीजों की जरूरत होगी जैसे 4,5 चम्मच आंवला पाउडर, 2 चम्मच मेहंगी, 1 चम्मच कॉफी पाउडर और जरूरत के अनुसार पानी। जब आप इन सभी चीजों को सही मात्रा में तैयार कर लेते हैं, तो उसके बाद आपको ये सभी चीजें एक कटोरे में डालनी हैं और एक गाढ़ा पेस्ट तैयार कर लेना है। अब आप इसको 30 मिनट के लिए ढककर रख दें, ताकि सारे तत्व अच्छी तरह एक्टिव हो जाएं और बालों को सही पोषण प्रदान कर सके।

सही तरह से लगाएं नेचुरल डाई

Consuming fenugreek in coconut oil will solve 5 hair problems

इस नेचुरल डाई को लगाने के लिए पहले बालों को हल्का गीला कर लें। अब तैयार पेस्ट को ब्रश या हाथों से बालों की जड़ों तक लगाएं। कोशिश करें कि आपके पूरे बाल कवर हो जाएं। अब कुछ देर के लिए शॉवर कैप पहन लें। इसे करीब एक घंटे तक सिर पर लगाएं। अब आप इसे सादे पानी से धो लें। हां, शैंपू न करें, वरना सारे जरूरी पोषक तत्व खत्म हो जाएंगे।

बेहतर रिजल्ट के लिए जरूरी टिप्स

आप हफ्ते में सिर्फ एक बार इसका इस्तेमाल करें, ज्यादा इस्तेमाल बालों को नुकसान पहुंचा सकता है लेकिन आप पहले पैच टेस्ट जरूर करें, ताकि बालों को किसी भी तरह के नुकसान से बचाया जा सके। साथ ही डाई लगाने के बाद 24 घंटे तक शैंपू न करें, इससे बालों को पोषक तत्वों के अवशोषण का समय मिल जाएगा। वही जब आप इसका नियमित उपयोग करेंगे तो रंग और असर दोनों बेहतरीन हो जाएंगे।

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