बच्चों के लिए Smartphone का लत लगना नशा की तरह दिमाग पर हावी हो जाता है जिसे लेकर दुनियाभर के पेरेंट्स परेशान रहते हैं। बता दें कि जहां बच्चे दिनभर खेल-कूदते नजर आते थे और शरारतें करतें थे, अब वे चुपचाप एक कमरे के किसी कोने में घंटों वीडियो और शॉर्ट्स स्क्रॉल करने में व्यस्त दिखाई देते हैं। पेरेंट्स को अच्छे से मालूम होता है कि बच्चे अगर अधिक फोन का इस्तेमाल करेंगे तो उनकी आंखें खराब हो सकती हैं, लेकिन यहां बात आंखें खराब होने तक सीमित नहीं है बल्कि ज्यादा स्क्रीन देखने का प्रभाव बच्चों के दिमाग प र भी बहुत ज्यादा पड़ रहा है जिसे न तो अभी बच्चे नोटिस कर पा रहें हैं और ना ही पेरेंट्स। इस टॉपिक पर दुनियाभर में कई रिसर्च हो चुकी हैं और ज्यादातर में यह मिला है कि स्मार्टफोन या कोई भी डिजिटल स्क्रीन को लंबे समय तक देखना बच्चे की सिर्फ आंखों पर ही नहीं बल्कि दिमाग पर भी असर डालता है। बच्चों के दिमाग पर स्क्रीन से पड़ रहे कुप्रभाव के बारे में ये रही जानकारियां-
क्या स्मार्टफोन्स के इस्तेमाल से खोखल हो रहा बच्चों का दिमाग?

‘साइंस डायरेक्ट’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक Adolescent Brain Cognitive Development Study (ABCD) की एक रिसर्च में 10 से 13 साल के कई हजारों बच्चों पर अध्यन की गई। जिसमें बच्चों के सोशलमीडिया और स्मार्टफोन्स के इस्तेमाल को एनालाइज किया गया और साथ ही में इमेजिंग स्कैन्स की मदद से उनके ब्रेन की संरचना का निरीक्षण किया गया। जिसमें कुछ क्षेत्रों में पाया गया कि जो बच्चे ज्यादा स्क्रीनटाइम दे रहे हैं या समार्टफोन्स का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, उनकी ब्रेन की कोर्टिकल मोटाई थोड़ी कम मिली और साथ ही ब्रेन वॉल्यूम भी अन्य बच्चों से थोड़ी कम मिली। साइंसडायरेक्ट के एक्सपर्ट्स के ब्रेन की ये दोनों चीजें दिमाग के कई जरूरी कार्यों को करने में मदद करती हैं जैसे –
- ध्यान देना या फोकस करना
- निर्णय लेना (डिसीजन मेकिंग)
- सोचना व समझना (रीजनिंग)
- याददाश्त या याद रखने की क्षमता
हालांकि, एक्सपर्ट्स ने यह भी बताया कि बचपन में कोर्टिकल थाइनिंग ब्रेन डेवलपमेंट का एक सामान्य हिस्सा हो सकता है। क्योंकि इस दौरान ऐसे न्यूरल कनेक्शन को हटाता रहता है, जिनकी जरूरत नहीं होती है ताकि न्यूरल नेटवर्क बिना किसी उलझन के सामान्य रूप से काम करता रहे।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स

एक्सपर्ट के अनुसार अगर बच्चा लंबे समय तक स्मार्टफोन्स देखता या फिर उसका स्क्रीनटाइम ज्यादा है, तो उससे बच्चे की आंखों पर विपरीत असर तो पड़ता ही है, दिमाग की कार्यक्षमता और ब्रेन हेल्थ को भी काफी नुकसान पहुंचता है। रिसर्चों में भी साबित हो चुका है कि जिन बच्चों का स्क्रीनटाइम ज्यादा होता है, अन्य बच्चों की मुकाबले उनके दिमाग की क्षमता कम हो सकती है।
बच्चे की स्मार्टफोन की लत कैसे छुड़ाएं
इस समस्या को लेकर डॉक्टर ने बताया कि बच्चे का स्मार्टफोन एडिक्शन खत्म करने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है उसे टाइम देना और जितना हो सके उसे फिजिकल एक्टिविटी में शामिल करना। इसमें ध्यान रखना होगा कि बच्चे को डांटकर उसकी फोन की आदत नहीं छुड़ानी है, बल्कि उसके लिए नीचे लिखी बातों का ध्यान रखना है-
- सबसे पहले बच्चे के आगे खुद फोन इस्तेमाल करना बंद कर दें।
- जितना हो सके फोन्स को बच्चों की पहुंच से दूर रखें और ताकि उन्हें फोन की याद न आए।
- बच्चे को खुद टाइम देना शुरू कीजिए उनसे बातें करें, कहानियां सुनाएं।
- बच्चे को घर के छोटे-छोटे काम करना सिखाएं जैसे अपना बैग खुद पैक करना।
- रोजाना बच्चे को आउटडोर एक्टिविटी कराएं, ऐसे स्पोर्ट्स में शामिल करें जिनमें उसकी ज्यादा रुचि हो आदि।


