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Monthly Archives: September 2026

Model with Coconut

Benefits of coconut water: गर्मी के दिनों में राहत पाने के लिए अगर आप दिन का आगाज किसी हाइड्रेटेड ड्रिंक जैसे नारियल पानी के साथ करते हैं तो ये सेहत के मद्देनजर काफी फायदेमंद सौदा साबित होता है। बता दें कि पोषक तत्वों से भरपूर ये ड्रिंक हेल्थ के लिए काफी फायदेमंद साबित होता है। इससे न सिर्फ एंटीऑक्सीडेंट हासिल होती है बल्कि स्किन का लचीलापन भी बना रहता है। साथ ही फाइबर से भरपूर होने के कारण वेटलॉस में भी मददगार साबित होता है। अगर आप डेली सुबह खाली पेट नारियल पानी का इस्तेमाल करती हैं, तो इससे शरीर स्वस्थ और फ्रेस बना रहता है। जानते हैं नारियल पानी को सुबह खाली पेट पीने के अहम फायदे-

नारियल पानी है शरीर के लिए फायदेमंद-

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार नारियल पानी में 94 फीसदी पानी होता है और लो फैट्स पाए जाते है। इसके अलावा कैल्शियम, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस और पोटैशियम की मात्रा पाई जाती है। इससे शरीर में बढ़ने वाले ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करके फ्री रेडिकल्स के प्रभाव से बचाया जा सकता है।

इस बारे में डायटीशियन डॉ अदिति शर्मा बताती हैं कि नारियल पानी एक बेहतरीन हाइड्रेटिंग पेय पदार्थ है। इसके सेवन से इलेक्ट्रोलाइट्स की भरपूर मात्रा पाई जाती है और दिनभर ऊर्जा का स्तर बना रहता है। इसके नियमित सेवन से शरीर को डिटॉक्स करने और त्वचा में नमी को रीस्टोर करने में भी मदद मिलती है।

नारियल पानी खाली पेट पीने के लाभ

1. वेटलॉस में अहम रोल

Benefits of coconut water

इस लो कैलोरी पेय पदार्थ की मदद से शरीर में जमा कैलोरी़ज़ को बर्न करने में मदद मिलती है। वे लोग जो दिन की शुरूआत चाय या कॉफी से करते हैं, तो वे इस हाइड्रेटिंग और कूलिंग ड्रिंक्स से दिन की शुरूआत कर सकते है। इससे शरीर में कैलेरी स्टोरेज को रोककर वेट लॉस जर्नी को हेल्दी बनाया जा सकता है।

2. स्किन सेल्स को करता है बूस्ट

सुबह खाली पेट नारियल पानी का सेवन करने से एंटीऑक्सीडेंट की प्राप्ति होती है। इससे शरीर को हाइड्रेटेड रखने में मदद मिलती है, जिससे त्वचा पर बढ़ने वाली महीन रेखाओं और झुर्रियों से राहत मिलती है। इससे स्किन इलास्टीसिटी बनी रहती है और त्वचा का ग्लो बढ़ने लगता है।

3. ओवरइटिंग को कहे ना

ज्यादातर लोगों को बार बार भूख लगने की समस्या का सामना करना पड़ता है। ऐसे में भूख को नियंत्रित करने के लिए नारियल पानी एक बेहतरीन विकल्प है। विटामिन और मिनरल से भरपूर इस पेय पदार्थ से शरीर को फाइबर की प्राप्ति होती है, जिससे भूख को नियंत्रित किया जा सकता है। साथ ही शरीर हेल्दी रहता है।

4. डाइजेशन को करे बूस्ट

पाचन संबधी समस्याओं को हल करने के लिए नारियल पानी की मदद ली जा सकती है। इससे ब्लोटिंग, अपच, सूजन और एसिडिटी जैसी समस्याओं से बचा जा सकता है। नियमित रूप से इसका सेवन इनडाइजेशन से राहत दिलाता है और शरीर को सक्रिय बनाए रखने में मदद करता है।

5. रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मददगार

नारियल पानी का सेवन करने से शरीर को विटामिन C की प्राप्ति होती है, जिससे शरीर को संक्रमण और कई तरह की बीमारियों से लड़ने में मदद मिलती है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और एंटी माइक्रोबियल गुण शरीर को स्वस्थ रखते हैं और पोषक तत्वों के अवशोषण को भी बढ़ाते हैं।

6. शरीर को रखे हाइड्रेट

डेली नारियल पानी का सेवन करने से से शरीर हाइड्रेट रहता है। इसमें मौजूद पोटेशियम, सोडियम और मैग्नीशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स शरीर को हाइड्रेट रखते हैं। इससे ओवरऑल हेल्थ को फायदा मिलता है और शरीर में निर्जलीकरण की समस्या हल हो जाती है।

7. ब्लड शुगर को करे कंट्रोल

नारियल का पानी ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है। इसमें पाए जाने वाले बायोएक्टिव एंजाइम रक्त शर्करा के स्तर को कम करने और इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार करने में मदद करते हैं। सुबह खाली पेट नारियल पानी का सेवन शुगर स्वाइक के खतरे को कम करता है।

फोटो सौजन्य- गूगल

Body Science: Which parts of the body do not heal once damaged

Body Science: क्या आपको मालूम है कि इंसान के बॉडी में कुछ ऐसे अहम अंग हैं जो एक बार डैमेज हो जाए तो दोबारा से नहीं बन सकते। काम चलाने के लिए कोई दूसरा रास्ता अपना सकते हैं पर ठीक वैसे ही अंग नहीं बन सकते। कभी कभी स्थिति बिगड़ने पर इंसान की मौत भी हो सकती है। ऐसे एक नहीं बल्कि कई अंग हैं, आइये इसके बारे में जानते हैं-

बॉडी में बाहर से त्वचा में किसी भी तरह की खरोंच लग जाए तो यह दोबारा से रिपेयर हो सकती है लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि शरीर में ऐसे कई अंग हैं जो एक बार डैमेज हो जाए तो यह कभी पूरी तरह से ठीक नहीं होंगे। चाहे इसके लिए आप कोई भी मेडिसीन क्यों न खा लें, हालांकि हमारे बॉडी में ऐसे भी अंग हैं जो कितनी भी ज्यादा खराब क्यों न हो जाए यह स्वयं को दोबारा से रिजैनरेट कर लेता है।

शरीर में खुद को ठीक करने और टिशूज को मरम्मत करने की क्षमता होती है। लिवर इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। लिवर अपने हिस्से का अगर 05 फीसदी भी बचा है तो खुद ही बन सकता है, कुछ अपवादों को छोड़कर लेकिन दिमाग की कोशिकाएं अगर एक बार मर जाए तो वहां उसकी जगह दूसरी कोशिकाएं नहीं बन सकती है। इस तरह इंसान कोमा में चला जाता है या ब्रेन डेड हो जाता है। हम यहां ऐसे ही कुछ अंगों के बारे में बताएंगे जो दोबारा से रीजैनरेट नहीं हो सकते, इसलिए ये आज भी विज्ञान के सामने चुनौती बने हुए हैं।

हार्ट की मांसपेशियां

Body Science: Which parts of the body do not heal once damaged
Body Science: Which parts of the body do not heal once damaged

हार्ट हमारे शरीर में एक ही है जो पूरे शरीर में खून को पंप करता है लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि हार्ट की मांसपेशीय कोशिकाएं जिसे कार्डियोमायोसाइट्स कहा जाता है, एक बार मर जाए तो यह दोबारा से रीजेनरेट नहीं हो सकता है। आप कहेंगे कि फिर इन्सान जिंदा कैसे रहता है। तो इसका जवाब है कि वह अंग जिंदगी भर के लिए कमजोर हो जाता है और उसकी जगह स्कार सेल्स यानी घाव के निशान वाली कोशिकाएं ले लेती है जो हमेशा दोयम दर्जे की ही होती है। इसकी वजह यह है कि जन्म के तुरंत बाद कार्डियोमायोसाइट्स अपनी वृद्धि बंद कर देती हैं और परमानेंट स्टेज में चली जाती हैं। सेल साइकिल स्थायी रूप से रुक जाता है जिससे नई कोशिकाएं नहीं बन पाती है।

एक्सपर्ट कहते हैं कि एक बार जब हार्ट अटैक हो जाए तो यह कार्डियोमायोसाइट्स को जबर्दस्त नुकसान पहुंचाते हैं। इससे इसकी कई कोशिकाएं मर जाती है। इसकी जगह फाइब्रस स्कार टिशू भर जाते हैं लेकिन वे कभी भी हेल्दी टिशूज नहीं बनते इस कारण हार्ट को पंप करने की क्षमता में स्थायी नुकसान उठाना पड़ता है। इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि दिल पूरी तरह से ठीक नहीं हो सकता। सही इलाज, कार्डियक रिहैबिलिटेशन और दवाइयां बचे हुए हार्ट की मांसपेशियों की सुरक्षा करने में सक्षम है लेकिन पहले जैसा कभी नहीं हो सकता है। इसलिए हार्ट की मांसपेशियों के बड़े हिस्से को दोबारा बनाना आज भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

ब्रेन सेल्स रीढ़ की हड्डी का नर्व

unbearable pain in lower back during periods

ब्रेन सेल्स जिसे न्यूरॉन्स कहा जाता है और रीढ़ की हड्डी के नर्व्स भी अगर एक बार डैमेज हो जाए तो ये दोबारा नहीं बनते। हमारे शरीर के न्यूरॉन्स अत्यधिक विशिष्ट कोशिकाएं हैं। ये विकास के शुरुआती चरण के बाद कोशिका विभाजन की क्षमता पूरी तरह खो देती हैं। इसलिए जब एक बार डैमेज हो जाए तो नई कोशिकाएं नहीं बन पाती हैं। इसी तरह रीढ़ की हड्डी में नर्व्स कोशिकाएं होती हैं जो ब्रेन से संदेशों का आदान-प्रदान करती हैं। यह भी दोबारा नहीं बनती। चोट वाली जगह पर फाइब्रस स्कार टिश्यू बन जाता है, जो नए कनेक्शन बनने के रास्ता को ही रोक देता है। इसलिए ब्रेन और रीढ़ की हड्डी यानी स्पाइनल कॉर्ड को ठीक करना बेहद कठिन चुनौती है। इसे रेगुलर देखभाल और कई तरह के आधुनिक थेरेपी के माध्यम से थोड़ा बहुत मैनेज किया जा सकता है लेकिन पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सकता है।

एक्सपर्ट का कहना है कि न्यूरॉन्स में रीजनरेट होने की क्षमता बहुत सीमित होती है। यही वजह है कि एक बार जब उसमें चोट लग जाए तो उसमें स्थायी समस्याएं होने की आशंका रहती है। इसलिए मस्तिष्क या रीढ़ की हड्डी की चोट के बाद ठीक होने का मतलब यह नहीं होता कि टिश्यू दोबारा से बन जाए। इसे रिहैबिलिटेशन और आधुनिक थेरेपी के माध्यम से तंत्रिका तंत्र को ढलने और नए रास्ते बनाने में मदद मिल सकता है, भले ही मूल क्षतिग्रस्त रास्ते दोबारा न उग सकें।

कार्टिलेज का भी बनना मुश्किल

कार्टिलेज हमारे शरीर में मौजूद एक मजबूत लेकिन रबर जैसा लचीला कनेक्टिव टिश्यू है। कार्टिलेज हड्डियों से ज्यादा नरम लेकिन मांसपेशियों से ज्यादा सख्त होता है। यह जोड़ों यानी घुटने, कोहनी, कानों, नाक और रीढ़ की हड्डी में पाया जाता है। इसका काम दो हड्डियों के बीच कुशन यानी गद्दी की तरह सपोर्ट करने का है ताकि हड्डियां आपस में रगड़ नहीं खाए। यह चलने-फिरने, कूदने या झटके लगने पर हड्डियों को आपस में टकराने और घिसने से बचाता है। यह नाक और कान जैसे अंगों को एक निश्चित ढांचा और लचीलापन प्रदान करता है। अगर कार्टिलेज भी एक बार खत्म हो जाए तो यह भी दोबारा से नहीं बनते। इसका निर्माण प्रक्रिया बेहद अनोखा है। कार्टिलेज तक पोषक तत्वों को पहुंचाने के लिए डायरेक्ट ब्लड वैसल्स का नेटवर्क जुड़ा नहीं होत है। ऐसे में कार्टिलेज का पोषण डिफ्यूजन प्रोसेस से होता है यानी दूर से ब्लड वैसल्स प्रेशर के माध्यम से यहां पोषक तत्व भेजता है और वहां से इसी तरह आर्टरीज में अपशिष्ट पदार्थ बाहर होता है।

विशेषज्ञ का कहना है कि टिश्यू में पर्याप्त ब्लड सप्लाई न होने के कारण कुछ प्रकार के कार्टिलेज में ठीक होने की क्षमता बहुत कम होती है। इसलिए कार्टिलेज का नुकसान बहुत धीरे-धीरे ठीक होता है और कभी-कभी यह शरीर के संबंधित अंगों में लगातार बनी रहने वाली समस्याओं का कारण बन सकता है। यही एक कारण है कि ऑस्टियोआर्थराइटिस जैसी स्थितियों से जुड़ा कार्टिलेज का नुकसान स्थायी नुकसान बन जाता है।

कुछ और भी ऐसे अंग हैं जो दोबारा नहीं बनते

हार्ट की पेशीय कोशिका, कार्टिलेज, ब्रेन सेल्स, रीढ़ की हड्डी के नर्व्स के अलावा बहुत सारी हड्डियां, किडनी के नेफ्रॉन्स, फेफड़ों के एल्वियोली और आंखों की ऑप्टिक नर्व जैसे अंगों में टिशूज को दोबारा से रीजैनरेट नहीं किया जा सकता है। इन अंगों में एक बार स्थायी नुकसान होने के बाद केवल बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है। उस अंग को पुरानी स्थिति में वापस नहीं लाया जा सकता।

फोटो सौजन्य- गूगल

Breastfeeding plays a crucial role in a child's nutrition

Breast Feeding’s Importance: महिलाओं को कहा जाता है कि बच्चे को जन्म के 06 महीने तक मां का दूध पिलाना बहुत आवश्यक होता है। तो क्या उसके बाद बच्चे के लिए मां के दूध का महत्व नहीं रहता है? विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिस लगभग 06 महीने तक सिर्फ स्तनपान और उसके बाद पूरक आहार के साथ 02 साल या उससे ज्यादा वक्त तक स्तनपान कराने की सलाह देते हैं।

बच्चे की जिंदगी के शुरुआती 02 साल शारीरिक विकास, दिमाग के विकास और इम्यून सिस्टम के लिए बेहद अहम होते हैं। ऐसे में मां का दूध इस पूरे समय बच्चे के पोषण और संक्रमण से बचाव में योगदान देता रहता है। आइए हम डॉक्टर से जानते हैं कि ब्रेस्टफीटिंग कैसे बच्चे की सेहत को जिंदगी भर के लिए बेहतर बनाती है।

बच्चे के लिए ब्रेस्टफीडिंग कितना अहम

Breastfeeding plays a crucial role in a child's nutrition

डॉक्टर बताते हैं कि बच्चे की जिंदगी के शुरुआती 1000 दिन, यानी गर्भधारण से लेकर दो साल की उम्र तक का समय, उसके विकास और बढ़ने के लिए बहुत अहम होता है। इस दौरान दिमाग तेजी से विकसित होता है, शरीर के अंग मैच्योर होते हैं और इम्यून सिस्टम भी मजबूत होता है।

अच्छे पोषण का बच्चे की शारीरिक सेहत, सीखने की क्षमता और कुल मिलाकर उसकी भलाई पर बहुत बडा असर पड़ता है। ब्रेस्टफीडिंग से बच्चे को जरूरी पोषण मिलता है। मां का दूध बच्चों को संक्रमण से बचाता है और उनके हेल्दी डेवलपमेंट में मदद करता है।

क्या 6 महीने के बाद मां का दूध खराब हो जाता है?

डॉक्टर कहते हैं, “देखें, ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। 6 महीने पूरे होने के बाद बच्चे की पोषण संबंधी जरूरतें बढ़ने लगती हैं। इसलिए इस उम्र में सिर्फ स्तनपान से बच्चे का पेट नहीं भर पाता है। बच्चे को उम्र के अनुसार सुरक्षित व पौष्टिक आहार देना जरूरी हो जाता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मां के दूध की जरूरत खत्म हो गई।

WHO के अनुसार, 6 से 12 महीने के बीच मां का दूध बच्चे की ऊर्जा संबंधी जरूरतों का आधा या उससे अधिक हिस्सा पूरा कर सकता है। 12 से 24 महीने की उम्र में भी यह औसतन करीब एक-तिहाई ऊर्जा की जरूरत पूरी कर सकता है। यानी 6 महीने के बाद स्तनपान खाने का विकल्प नहीं, बल्कि पौष्टिक आहार के साथ एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

ब्रेस्टफीडिंग से बच्चे के शरीर को कैसे फायदा होता है?

Breast Feeding

डॉक्टर बताते हैं कि ब्रेस्टफीडिंग में प्रोटीन, हेल्दी फैट, विटामिन, मिनरल और एंटीबॉडी का सही संतुलन होता है, जिनकी बढ़ते बच्चे को जरूरत होती है। जो बच्चे ब्रेस्टफीडिंग करते हैं, उनमें डायरिया, कान के संक्रमण और सांस की बीमारियों का जोखिम कम हो सकता है। DHA और अन्य हेल्दी फैट जैसे जरूरी पोषक तत्व दिमाग और नर्वस सिस्टम के विकास में मदद करते हैं, जिससे आगे चलकर सीखने और सोचने-समझने की क्षमता बेहतर हो सकती है।

ब्रेस्टफीडिंग करवाने से कई बीमारियों से बचता है बच्चा

डॉक्टर बंसल बताते हैं कि ब्रेस्टफीडिंग बच्चों की सेहत के लिए जरूरी है और यह बच्चों के बड़े होने पर मोटापा, टाइप 2 डायबिटीज और कुछ तरह की एलर्जी के जोखिम को कम करने में भी मदद करती है। यह बचपन में वजन को सही ढंग से बढने में मदद करती है और खाने की अच्छी आदतें विकसित करने में मदद करती है।

ब्रेस्टफीडिंग कराने से माताओं को क्या फायदे होते हैं?

ब्रेस्टफीडिंग माताओं के लिए भी फायदेमंद है। यह बच्चे के जन्म के बाद गर्भाशय को उसके सामान्य आकार में वापस लाने में मदद करती है, डिलीवरी के बाद ब्लीडिंग कम करती है और ब्रेस्ट व ओवेरियन कैंसर के जोखिम को कम कर सकती है। ब्रेस्टफीडिंग त्वचा से त्वचा के करीबी संपर्क के जरिए बच्चे के साथ एक मजबूत भावनात्मक जुड़ाव बनाती है।

सफल ब्रेस्टफीडिंग के लिए खास टिप्स

जब भी संभव हो, जन्म के पहले घंटे के भीतर ब्रेस्टफीडिंग शुरू करें और डॉक्टर की सलाह के बिना इसे बंद न करें। शुरुआती छह महीनों तक सिर्फ स्तनपान कराएं और डॉक्टर की सलाह के बिना पानी या कोई और खाना न दें। पर्याप्त मात्रा में दूध बनने में मदद के लिए संतुलित आहार लें।

किसी सख्त रूटीन का पालन करने के बजाय, जब भी बच्चा भूख के संकेत दे, उसे जरूर खिलाएं। दूध बनने में मदद के लिए संतुलित आहार लें, पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ पिएं और भरपूर आराम करें। अगर स्तनपान में कोई परेशानी आए, तो डॉक्टर या लैक्टेशन कंसल्टेंट से मदद लें। इसलिए, इन सुझावों का पालन करें और बच्चे को सही तरीके से स्तनपान कराना सुनिश्चित करें।

Daily Skincare Routine

Daily Skin Care: रोजाना स्किन की देखभाल करना अच्छी आदतों में से एक हैं। अगर आपकी स्किन भी डल है तो इसके पीछे बहुत सी वजह हो सकते हैं। जिनमें से आपका खराब लाइफस्टाइल, उल्टा सीधा खाना व खराब स्किन केयर रूटीन शामिल है। हमारे शरीर की तरह ही हमारी स्किन को भी केयर की जरूरत होती है। बता दें कि इसके लिए आपको रोजाना स्किन केयर रूटीन का पालन करना होगा। आप नीचे दिए गए टिप्स को फॉलो करके अपनी डल और डैमेज स्किन को निखरी हुई त्वचा में बदल सकते हैं।

एक अच्छा क्लींजर होना जरूरी

आपकी स्किन से हर तरह की गंदगी को निकालने के लिए एक अच्छे से फेसवॉश की जरूरत होती है। इसके लिए आप अपनी स्किन टाइप के हिसाब से अच्छी गुणवत्ता वाला फेसवॉश खरीद लें।

अपने साथ रखें बेस्ट मॉइश्चराइजर

अगर आपकी स्किन ऑयली है और आप सोचती हैं कि आपको किसी मॉइश्चराइजर की आवश्यकता नहीं है तो यहां आप गलत हैं। हर किसी की स्किन को मॉइश्चराइजर की जरूरत होती है। अगर आप की ऑयली स्किन है तो आपको कोई ऑयल फ्री मॉश्चराइजर इस्तेमाल करना चाहिए और अगर ड्राई स्किन है तो किसी साधारण से मॉइश्चराइजर का इस्तेमाल करें।

सनस्क्रीन का इस्तेमाल जरूर करें

Excessive use of sunscreen is harmful, do not forget to do it before sleeping at night

अगर आप कहीं बाहर निकल रही हैं तो सनस्क्रीन का प्रयोग करना आवश्यक है। यह आपकी स्किन को सूर्य की हानिकारक किरणों से बचाता है और यदि आप घर से बाहर नहीं भी निकल रही हैं तो भी आपको कम से कम एसपीएफ 30 या उससे कम का सनस्क्रीन अवश्य लगाना चाहिए। आपको इसका प्रयोग हर 4 घंटों के अंतराल पर री-अप्लाई करते रहना चाहिए। यदि आप इसका प्रयोग नहीं करती हैं तो आपकी स्किन बहुत डेमेज हो सकती है।

नाईट क्रीम का भी कर सकती है इस्तेमाल

Daily Skincare Routine

वैसे तो नाईट क्रीम का प्रयोग आपको करते ही रहना चाहिए लेकिन आपकी स्किन ज्यादा सेंसिटिव है तो आपको एक बार अपने डर्मटॉलजिस्ट की सलाह अवश्य लेनी चाहिए। कई बार कुछ नाईट क्रीम ज्यादा थिक होती हैं और उससे आपकी स्किन में एक्ने व पिंपल्स हो सकती हैं। इसलिए अपने डॉक्टर से अवश्य सलाह लें।

वैसे तो यह ऊपर दी गई सारी जानकारी बहुत सिंपल हैं अगर आप इन्हें गम्भीरता से लेती हैं तो यह आपकी स्किन में बहुत ज्यादा फर्क दिखा सकती है और अगर आप इन्हीं छोटी-छोटी बातों को इग्नोर कर देती हैं तो आपकी स्किन धीरे-धीरे डल व डैमेज होनी शुरू हो जाती है।

फोटो सौजन्य- गूगल