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Monthly Archives: September 2026

Breastfeeding plays a crucial role in a child's nutrition

Breast Feeding’s Importance: महिलाओं को कहा जाता है कि बच्चे को जन्म के 06 महीने तक मां का दूध पिलाना बहुत आवश्यक होता है। तो क्या उसके बाद बच्चे के लिए मां के दूध का महत्व नहीं रहता है? विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिस लगभग 06 महीने तक सिर्फ स्तनपान और उसके बाद पूरक आहार के साथ 02 साल या उससे ज्यादा वक्त तक स्तनपान कराने की सलाह देते हैं।

बच्चे की जिंदगी के शुरुआती 02 साल शारीरिक विकास, दिमाग के विकास और इम्यून सिस्टम के लिए बेहद अहम होते हैं। ऐसे में मां का दूध इस पूरे समय बच्चे के पोषण और संक्रमण से बचाव में योगदान देता रहता है। आइए हम डॉक्टर से जानते हैं कि ब्रेस्टफीटिंग कैसे बच्चे की सेहत को जिंदगी भर के लिए बेहतर बनाती है।

बच्चे के लिए ब्रेस्टफीडिंग कितना अहम

Breastfeeding plays a crucial role in a child's nutrition

डॉक्टर बताते हैं कि बच्चे की जिंदगी के शुरुआती 1000 दिन, यानी गर्भधारण से लेकर दो साल की उम्र तक का समय, उसके विकास और बढ़ने के लिए बहुत अहम होता है। इस दौरान दिमाग तेजी से विकसित होता है, शरीर के अंग मैच्योर होते हैं और इम्यून सिस्टम भी मजबूत होता है।

अच्छे पोषण का बच्चे की शारीरिक सेहत, सीखने की क्षमता और कुल मिलाकर उसकी भलाई पर बहुत बडा असर पड़ता है। ब्रेस्टफीडिंग से बच्चे को जरूरी पोषण मिलता है। मां का दूध बच्चों को संक्रमण से बचाता है और उनके हेल्दी डेवलपमेंट में मदद करता है।

क्या 6 महीने के बाद मां का दूध खराब हो जाता है?

डॉक्टर कहते हैं, “देखें, ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। 6 महीने पूरे होने के बाद बच्चे की पोषण संबंधी जरूरतें बढ़ने लगती हैं। इसलिए इस उम्र में सिर्फ स्तनपान से बच्चे का पेट नहीं भर पाता है। बच्चे को उम्र के अनुसार सुरक्षित व पौष्टिक आहार देना जरूरी हो जाता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मां के दूध की जरूरत खत्म हो गई।

WHO के अनुसार, 6 से 12 महीने के बीच मां का दूध बच्चे की ऊर्जा संबंधी जरूरतों का आधा या उससे अधिक हिस्सा पूरा कर सकता है। 12 से 24 महीने की उम्र में भी यह औसतन करीब एक-तिहाई ऊर्जा की जरूरत पूरी कर सकता है। यानी 6 महीने के बाद स्तनपान खाने का विकल्प नहीं, बल्कि पौष्टिक आहार के साथ एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

ब्रेस्टफीडिंग से बच्चे के शरीर को कैसे फायदा होता है?

Breast Feeding

डॉक्टर बताते हैं कि ब्रेस्टफीडिंग में प्रोटीन, हेल्दी फैट, विटामिन, मिनरल और एंटीबॉडी का सही संतुलन होता है, जिनकी बढ़ते बच्चे को जरूरत होती है। जो बच्चे ब्रेस्टफीडिंग करते हैं, उनमें डायरिया, कान के संक्रमण और सांस की बीमारियों का जोखिम कम हो सकता है। DHA और अन्य हेल्दी फैट जैसे जरूरी पोषक तत्व दिमाग और नर्वस सिस्टम के विकास में मदद करते हैं, जिससे आगे चलकर सीखने और सोचने-समझने की क्षमता बेहतर हो सकती है।

ब्रेस्टफीडिंग करवाने से कई बीमारियों से बचता है बच्चा

डॉक्टर बंसल बताते हैं कि ब्रेस्टफीडिंग बच्चों की सेहत के लिए जरूरी है और यह बच्चों के बड़े होने पर मोटापा, टाइप 2 डायबिटीज और कुछ तरह की एलर्जी के जोखिम को कम करने में भी मदद करती है। यह बचपन में वजन को सही ढंग से बढने में मदद करती है और खाने की अच्छी आदतें विकसित करने में मदद करती है।

ब्रेस्टफीडिंग कराने से माताओं को क्या फायदे होते हैं?

ब्रेस्टफीडिंग माताओं के लिए भी फायदेमंद है। यह बच्चे के जन्म के बाद गर्भाशय को उसके सामान्य आकार में वापस लाने में मदद करती है, डिलीवरी के बाद ब्लीडिंग कम करती है और ब्रेस्ट व ओवेरियन कैंसर के जोखिम को कम कर सकती है। ब्रेस्टफीडिंग त्वचा से त्वचा के करीबी संपर्क के जरिए बच्चे के साथ एक मजबूत भावनात्मक जुड़ाव बनाती है।

सफल ब्रेस्टफीडिंग के लिए खास टिप्स

जब भी संभव हो, जन्म के पहले घंटे के भीतर ब्रेस्टफीडिंग शुरू करें और डॉक्टर की सलाह के बिना इसे बंद न करें। शुरुआती छह महीनों तक सिर्फ स्तनपान कराएं और डॉक्टर की सलाह के बिना पानी या कोई और खाना न दें। पर्याप्त मात्रा में दूध बनने में मदद के लिए संतुलित आहार लें।

किसी सख्त रूटीन का पालन करने के बजाय, जब भी बच्चा भूख के संकेत दे, उसे जरूर खिलाएं। दूध बनने में मदद के लिए संतुलित आहार लें, पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ पिएं और भरपूर आराम करें। अगर स्तनपान में कोई परेशानी आए, तो डॉक्टर या लैक्टेशन कंसल्टेंट से मदद लें। इसलिए, इन सुझावों का पालन करें और बच्चे को सही तरीके से स्तनपान कराना सुनिश्चित करें।

Daily Skincare Routine

Daily Skin Care: रोजाना स्किन की देखभाल करना अच्छी आदतों में से एक हैं। अगर आपकी स्किन भी डल है तो इसके पीछे बहुत सी वजह हो सकते हैं। जिनमें से आपका खराब लाइफस्टाइल, उल्टा सीधा खाना व खराब स्किन केयर रूटीन शामिल है। हमारे शरीर की तरह ही हमारी स्किन को भी केयर की जरूरत होती है। बता दें कि इसके लिए आपको रोजाना स्किन केयर रूटीन का पालन करना होगा। आप नीचे दिए गए टिप्स को फॉलो करके अपनी डल और डैमेज स्किन को निखरी हुई त्वचा में बदल सकते हैं।

एक अच्छा क्लींजर होना जरूरी

आपकी स्किन से हर तरह की गंदगी को निकालने के लिए एक अच्छे से फेसवॉश की जरूरत होती है। इसके लिए आप अपनी स्किन टाइप के हिसाब से अच्छी गुणवत्ता वाला फेसवॉश खरीद लें।

अपने साथ रखें बेस्ट मॉइश्चराइजर

अगर आपकी स्किन ऑयली है और आप सोचती हैं कि आपको किसी मॉइश्चराइजर की आवश्यकता नहीं है तो यहां आप गलत हैं। हर किसी की स्किन को मॉइश्चराइजर की जरूरत होती है। अगर आप की ऑयली स्किन है तो आपको कोई ऑयल फ्री मॉश्चराइजर इस्तेमाल करना चाहिए और अगर ड्राई स्किन है तो किसी साधारण से मॉइश्चराइजर का इस्तेमाल करें।

सनस्क्रीन का इस्तेमाल जरूर करें

Excessive use of sunscreen is harmful, do not forget to do it before sleeping at night

अगर आप कहीं बाहर निकल रही हैं तो सनस्क्रीन का प्रयोग करना आवश्यक है। यह आपकी स्किन को सूर्य की हानिकारक किरणों से बचाता है और यदि आप घर से बाहर नहीं भी निकल रही हैं तो भी आपको कम से कम एसपीएफ 30 या उससे कम का सनस्क्रीन अवश्य लगाना चाहिए। आपको इसका प्रयोग हर 4 घंटों के अंतराल पर री-अप्लाई करते रहना चाहिए। यदि आप इसका प्रयोग नहीं करती हैं तो आपकी स्किन बहुत डेमेज हो सकती है।

नाईट क्रीम का भी कर सकती है इस्तेमाल

Daily Skincare Routine

वैसे तो नाईट क्रीम का प्रयोग आपको करते ही रहना चाहिए लेकिन आपकी स्किन ज्यादा सेंसिटिव है तो आपको एक बार अपने डर्मटॉलजिस्ट की सलाह अवश्य लेनी चाहिए। कई बार कुछ नाईट क्रीम ज्यादा थिक होती हैं और उससे आपकी स्किन में एक्ने व पिंपल्स हो सकती हैं। इसलिए अपने डॉक्टर से अवश्य सलाह लें।

वैसे तो यह ऊपर दी गई सारी जानकारी बहुत सिंपल हैं अगर आप इन्हें गम्भीरता से लेती हैं तो यह आपकी स्किन में बहुत ज्यादा फर्क दिखा सकती है और अगर आप इन्हीं छोटी-छोटी बातों को इग्नोर कर देती हैं तो आपकी स्किन धीरे-धीरे डल व डैमेज होनी शुरू हो जाती है।

फोटो सौजन्य- गूगल