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Monthly Archives: January 2026

Why did Arijit Singh say goodbye to playback singing at the peak of his career

जब से मशहूर प्लेबैक सिंगर Arijit Singh ने फिल्मों में गायकी से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है, जिसके बाद ये खबर लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। इस ऐलान के बाद करोड़ों फैंस का दिल टूट गया है। संगीत और फिल्म जगत में तरह-तरह के अफवाह उड़ाए जा रहे हैं। हालांकि सोशल मीडिया के जरिए अरिजीत ने स्प्षट कर दिया कि वह संगीत नहीं छोड़ रहे हैं, बल्कि सिर्फ फिल्मों के लिए गाना बंद कर रहे हैं। पर इस फैसले के पीछे केवल थकान ही वजह नहीं मानी जारी है।

अरिजीत ने सलमान खान की फिल्म ‘बैटल ऑफ गलवान’ में भी गाना गाया है ‘मातृभूमि’, जिसे हाल ही रिलीज किया गया। वहीं, ‘बॉर्डर 2’ में ‘घर कब आओगे’ गाना गाया। जहां फैंस भावुक हो गए, वहीं हर कोई यह भी जानना चाहता है कि आखिर अरिजीत सिंह ने क्यों प्लेबैक सिंगिंग छोड़ने और इससे संन्यास लेने का फैसला किया? ऐसी क्या वजह रही कि उन्हें इतनी कम उम्र में ही सिंगिंग से संन्यास के बारे में सोचना पड़ा?

इस साल लाइन में कई बड़े प्रोजेक्ट्स हैं और यकीनन अरिजीत सिंह के पास भी कई प्रोजेक्ट और गाने होंगे, लेकिन सिंगर ने साफ-साफ कह दिया कि वह अब और कोई प्रोजेक्ट साइन नहीं करेंगे। उन्होंने अपना फैसला अपने X अकाउंट पर 27 जनवरी को सुनाया। बाद में इंस्टाग्राम पर एक स्टेटमेंट जारी किया। अरिजीत सिंह के फैसले से लोग काफी हैरान हैं और सिंगर से अपील कर रहे हैं कि वो प्लेबैक सिंगिंग से संन्यास के अपने फैसले पर दोबारा सोचें। पर साथ ही जानना चाह रहे हैं कि वो चीज क्या है, जिसके कारण अरिजीत ने ऐसा फैसला लिया?

अरिजीत सिंह ने खुद बताया क्यों लिया संन्यास

अरिजीत सिंह ने इसका जवाब अपने ट्वीट में ही दे दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि न तो यह फैसला जल्दबाजी में लिया है और ना ही यह किसी एक घटना की वजह लिया गया है। उन्होंने लिखा, ‘इसका सिर्फ एक कारण नहीं है, इसके कई पहलू हैं, और मैं काफी समय से इस पर विचार कर रहा था। आखिरकार, मैंने हिम्मत जुटा ली।’

‘मेरी दिलचस्पी जल्दी खत्म हो जाती है, मैं थक गया हूं’

अरिजीत सिंह ने आगे लिखा, ‘इसका एक कारण बहुत ही सीधा और सिंपल है, और वो ये कि मेरी दिलचस्पी जल्दी ही खत्म हो जाती है, इसीलिए मैं अकसर अपने गानों की धुन बदलता रहता हूं और उन्हें लाइव प्रेजेंट करता हूं। तो, सच्चाई यह है कि मैं थक गया हूं। मुझे आगे बढ़ने के लिए अलग-अलग तरह के म्यूजिक को आजमाना होगा।’

अरिजीत नए आर्टिस्टों को मौका देना चाहते हैं

 

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अरिजीत सिंह ने यह भी लिखा कि वह आगे आने वाले समय में नए आर्टिस्टों के लिए जगह बनाना चाहते हैं, और प्लेबैक सिंगिंग से संन्यास लेने का उनका एक कारण यह भी है। उन्होंने लिखा, ‘एक और कारण यह है कि मैं नए सिंगर्स को सुनने के लिए उत्सुक हूं जो मुझे वास्तव में इंस्पायर कर सकें।’

बताता चलूं कि बहुत कम लोगों को पता है कि अरिजीत सिंह की दिलचस्पी फिल्म निर्देशन में भी है।

अरिजीत ने आगे लिखा कि इतने सालों तक आपने मुझे जो प्यार और सम्मान दिया, उसका दिल से धन्यवाद। मुझे यह बताने में बहुत खुशी हो रही है कि मैं अब प्लेबैक सिंगर के तौर पर कोई नए असाइनमेंट्स नहीं लूंगा। मैं इस चैप्टर को यहीं खत्म कर रहा हूं। ये सफर शानदार रहा।’

अरिजीत सिंह का करियर और स्टारडम

अरिजीत सिंह के करियर की बात करें, तो वह साल 1987 में पश्चिम बंगाल के जीयागंज में पैदा हुए थे। उनकी मां क्लासिकल सिंगर थीं और मौसी तबला वादक, तो इस नाते उन्हें म्यूजिक विरासत में मिला। बाद में अरिजीत ने क्लासिकल म्यूजिक की ट्रेनिंग लेनी शुरू कर दी। फिर साल 2005 में उन्होंने रियलिटी शो ‘फेम गुरुकुल’ में हिस्सा लिया। अरिजीत सिंह यह शो नहीं जीत पाए, पर जजों और लोगों का दिल जरूर जीत लिया। फिर अरिजीत सिंह ने ’10 के 10 ले गए दिल’ जीता। अरिजीत सिंह के बॉलीवुड करियर में सबसे बड़ा ट्विस्ट ‘आशिकी 2’ के गाने ‘तुम ही हो’ के बाद आया, जिसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

फोटो सौजन्य- गूगल

Say goodbye to unwanted grey hair

Natural Hair Dye: बचपन में जब हम बालों को लहराते घूमा करते थे और हमें अपने बालों की कोई फिक्र नहीं रहती थी। ऐसा लगता था मानों सबसे खूबसूरत बाल हमारे ही हैं। और आज याद करते हैं कि काश वो बेफिक्री, वो चमक वो खुशी, वो एहसास काश कोई लौटा दे, क्योंकि आजकल कम उम्र में सफेद होते बाल और उनका रुखापन, बेजान होकर झड़ना एक आम बात बन चुकी है। सफेद बालों को तो केमिकल हेयर डाई बालों को तुरंत रंग तो देती है पर लंबे वक्त तक इसका इस्तेमाल करने से नुकसान भी पहुंचाती है। ऐसे में केमिकल हेयर डाई की जगह क्यों ना दादी-नानी के नुस्खे को आजमाया जाए, जो कि भरोसेमंद भी है। वर्षों से अपनाए जाने वाला आंवला नुस्खा जो एक अच्छा प्राकृतिक उपाय है, जो बालों को गहरा रंग देने के साथ-साथ उन्हें मजबूत और चमकदार भी बनाता है। बता दें कि सही तरीके से प्रयोग करने पर यह बालों को नेचुरल ब्लैक टोन देने में मदद भी करता है।

ये है बालों के लिए आंवला के फायदे

Say goodbye to unwanted grey hair

कई शोध इस बात को साबित करते हैं कि आंवला विटामिन- C, एंटीऑक्सीडेंट और मिनरल्स से भरपूर होता है। साथ ही बालों में इसका इस्तेमाल करने से बालों की जड़ों को जबरदस्त मजबूती मिलती है, हेयर फॉल कम करता है और समय से पहले बालों के सफेद होने वाली समस्या कम हो जाती है। साथ ही इसके नियमित उपयोग से बालों में प्राकृतिक चमक आती है और स्कैल्प हेल्दी रहने लगते हैं। यही वजह है कि आंवला को नेचुरल हेयर डाई के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है।

नेचुरल आंवला डाई बनाने का आसान तरीका

आमला से नेचुरल हेयर डाई बनाने के लिए सबसे पहले आपको कुछ नेचुरल चीजों की जरूरत होगी जैसे 4,5 चम्मच आंवला पाउडर, 2 चम्मच मेहंगी, 1 चम्मच कॉफी पाउडर और जरूरत के अनुसार पानी। जब आप इन सभी चीजों को सही मात्रा में तैयार कर लेते हैं, तो उसके बाद आपको ये सभी चीजें एक कटोरे में डालनी हैं और एक गाढ़ा पेस्ट तैयार कर लेना है। अब आप इसको 30 मिनट के लिए ढककर रख दें, ताकि सारे तत्व अच्छी तरह एक्टिव हो जाएं और बालों को सही पोषण प्रदान कर सके।

सही तरह से लगाएं नेचुरल डाई

Consuming fenugreek in coconut oil will solve 5 hair problems

इस नेचुरल डाई को लगाने के लिए पहले बालों को हल्का गीला कर लें। अब तैयार पेस्ट को ब्रश या हाथों से बालों की जड़ों तक लगाएं। कोशिश करें कि आपके पूरे बाल कवर हो जाएं। अब कुछ देर के लिए शॉवर कैप पहन लें। इसे करीब एक घंटे तक सिर पर लगाएं। अब आप इसे सादे पानी से धो लें। हां, शैंपू न करें, वरना सारे जरूरी पोषक तत्व खत्म हो जाएंगे।

बेहतर रिजल्ट के लिए जरूरी टिप्स

आप हफ्ते में सिर्फ एक बार इसका इस्तेमाल करें, ज्यादा इस्तेमाल बालों को नुकसान पहुंचा सकता है लेकिन आप पहले पैच टेस्ट जरूर करें, ताकि बालों को किसी भी तरह के नुकसान से बचाया जा सके। साथ ही डाई लगाने के बाद 24 घंटे तक शैंपू न करें, इससे बालों को पोषक तत्वों के अवशोषण का समय मिल जाएगा। वही जब आप इसका नियमित उपयोग करेंगे तो रंग और असर दोनों बेहतरीन हो जाएंगे।

फोटो सौजन्य- गूगल

The festival of Makar Sankranti is associated with faith, tradition, social unity and health

Makar Sankranti:

मकर संक्रांति के अवसर पर पूरे देश में तिल-गुड़ और खिचड़ी खाने और खिलाने का रिवाज है। लेकिन हमारे देश में एक हिस्सा ऐसा भी है जहां पर मकर संक्रांति के दिन दही-चुड़ा खाया जाता है।

मकर संक्रांति पर क्यों खाया जाता है?

भारत के हर हिस्से में मकर संक्रांति का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस साल मकर संक्रांति का त्योहार 14 और 15 जनवरी को मनाया जा रहा है। मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे उत्तरायण कहा जाता है।मकर संक्रांति के खास दिन तिल और गुड़ के लड्डू, खिचड़ी, पूरन पोली, गजक और उंधियू जैसे पकवान बहुत ही चाव से खाए जाते हैं। मकर संक्रांति के दिन तिल-गुड़ तो हर हिस्से में खाया जाता है। लेकिन भारत का एक हिस्सा ऐसा भी है जहां पर मकर संक्रांति के दिन दही-चूड़ा खाया जाता है।

मिथिला में मकर संक्रांति के दिन खाया जाता है दही और चूड़ा

The festival of Makar Sankranti is associated with faith, tradition, social unity and health

मिथिला में मकर संक्रांति केवल एक त्योहार नहीं बल्कि आस्था, परंपरा, सामाजिक एकता और स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ उत्सव है। इस दिन सबसे विशेष रूप से दही-चूड़ा खाया ही जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दही को हिंदू धर्म में शुद्ध और सात्विक माना गया है। वहीं, चावल को अन्न का राजा कहा जाता है। मकर संक्रांति पर सात्विक भोजन करने का विधान है। इसलिए मिथिला में मकर संक्रांति के दिन दही-चूड़ा खाया जाता है।

दही -चूड़ा खाने के फायदे

आयुर्वेद के मुताबिक चूड़ा कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होता है और दही शरीर में गर्मी को बनाए रखता है। मकर संक्रांति का त्योहार सर्दियों में मनाया जाता है। दही- चूड़ा को एक साथ खाने से सर्दियों में शरीर को अंदर से गर्म बनाए रखने में मदद मिलती है। ये कॉम्बो शरीर को बीमारियों से लड़ने की ताकत अंदर से देता है।

पाचन तंत्र को करता है मजबूत

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन पर प्रकाशित रिसर्च के अनुसार दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स होते हैं। दही खाने से पेट में गुड़ बैक्टीरिया बढ़ते हैं। इससे कब्ज, गैस और अपच की परेशानी दूर होती है। वहीं, चूड़ा पचाने में आसान होता है। जब आप दही और चूड़ा को एक साथ खाते हैं तो इससे मल नरम होता है। इससे सुबह पेट अच्छे से साफ होता है और पाचन तंत्र को मजबूत बनती है।

इम्यूनिटी स्ट्रांग करता है दही-चूड़ा

दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। मकर संक्रांति के खास मौके पर दही- चूड़ा खाने से शरीर की सर्दी में कम होने वाली इम्यूनिटी बढ़ती है। इससे सर्दी, खांसी और जुकाम की समस्या घटती है। जिन लोगों की इम्यूनिटी काफी कमजोर हैं, उन्हें मकर संक्रांति के दिन दोपहर के खाने में दही- चूड़ा जरूर खाना चाहिए।

हड्डियों और दांतों के लिए फायदेमंद

बता दें कि दही में कैल्शियम और फॉस्फोरस होता है। जबकि चूड़ा आयरन, फाइबर व प्रोटीन का अच्छा सोर्स है। जब आप दही- चूड़ा को एक साथ खाते हैं तो ये शरीर की हड्डियों और दांतों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। दही-चूड़ा खाने से शरीर को कैल्शियम मिलता है। इससे हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद मिलती है।

शरीर को देता है ऊर्जा

मकर संक्रांति के दिन अक्सर लोग सुबह जल्दी स्नान आदि करके पूजा, पाठ और दान करते हैं। इस प्रक्रिया को अपनाने के बाद शरीर को एनर्जी की जरूरत होती है। दही- चूड़ा खाने से शरीर को तुरंत एनर्जी मिलती है। खाने के बाद दही- चूड़ा तुरंत ग्लूकोज में बदल जाता है। इससे शरीर को ताजगी व एनर्जी मिलती है।

मकर संक्रांति के दिन कब खाएं दही-चूड़ा

परंपरा के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन दही -चूड़ा नाश्ते में तिलकुट, गुड़, सब्जी, अचार और चटनी के साथ खाया जाता है। कुछ लोग दोपहर के खाने में भी दही चूड़ा खाते हैं। आप अपनी हिसाब से मकर संक्रांति के दिन दही-चूड़ा खाने का मजा सकते हैं। ध्यान रहे कि किसी भी परिस्थिति में दही-चूड़ा रात को ना खाएं।

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First Time Sex

Thyroid Affects:आजकल के गलत खानपान और खराब लाइफस्टाइल की वजह से थायराइड प्रॉब्लम लोगों में आम बात हो गई है। बता दें कि थायराइड एक तितली के साइज की ग्रंथि होती है, जो गर्दन के भीतर मौजूद होती है। यह ग्लैंड थायरोक्सिन हार्मोन का उत्पादन करती है, जो शरीर के मेटाबॉलिक रेट और एनर्जी लेवल को नियंत्रित करता है। जब थायराइड ग्लैंड अपना काम ठीक से करना बंद कर देती है, हाइपोथायरायडिज्म और हाइपरथायराइडिज्म की समस्या होती है। थायराइड की बीमारी होने पर कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसकी वजह से तेजी से वजन में बदलाव, कमजोरी, चिड़चिड़ापन, मूड स्विंग्स, मसल्स में दर्द, कब्ज, स्किन ड्राई होना और बाल गिरने जैसी समस्याएं हो सकती है। अलावा इसके थायराइड की समस्या का असर सेक्स लाइफ पर भी पड़ता सकता है। आइए जानते हैं थायराइड के कारण सेक्स लाइफ कैसे प्रभावित होती है-

कैसे प्रभावित करता है महिलाओं की सेक्स लाइफ को थायराइड-

A Strong relationship needs regular sex

हाइपोथायरायडिज्म या कम सक्रिय थायरॉयड के कारण अक्सर थकान, अवसाद और कमजोरी जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं। अत्यधिक थकान या कमजोरी के कारण महिला की सेक्स ड्राइव प्रभावित हो सकती है। इससे यौन इच्छा में बदलाव हो सकता है और यौन क्रिया में कमी भी आ सकती है। अलावा इसके, हाइपोथायरायडिज्म के कारण योनि में सूखापन हो सकता है। दरअसल, थायराइड की समस्या की वजह से वजाइनल ल्युब्रीकेंट कम हो जाता है। यह यौन गतिविधि को असुविधाजनक या यहां तक ​​कि दर्दनाक बना सकता है।

वहीं दूसरी तरफ, हाइपरथायरायडिज्म या अतिसक्रिय थायराइड के कारण चिंता, बेचैनी, एंग्जायटी और सोने में कठिनाई जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इन सभी समस्याओं का सेक्स लाइफ पर बुरा असर पड़ता है। इसके कारण यौन इच्छा में कमी आ सकती है और इंटिमेसी भी प्रभावित होती है। जब आप थायरॉयड विकार से पीड़ित होते हैं, तो आपके टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम हो सकता है। यह आपकी कामेच्छा को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है।

क्या है इलाज?

अगर कोई लेडी इन समस्याओं का सामना कर रही है, तो उसे डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है। दवाओं और उचित उपचार से थायरॉयड के लक्षणों को कम करने में मदद मिल सकती है। संतुलित आहार और नियमित व्यायाम से हार्मोनल संतुलन बनाए रखा जा सकता है और ऊर्जा के स्तर में सुधार किया जा सकता है। इसके अलावा, अपनी भावनाओं और समस्याओं के बारे में अपने साथी के साथ खुलकर बात करें। इससे आपका रिश्ता मजबूत होगा और आपका पार्टनर उपचार प्रक्रिया के दौरान आपको भावनात्मक समर्थन प्रदान कर सकता है। ध्यान रखें कि थायराइड का समय पर इलाज किया जाए और इसे दवाओं से कंट्रोल में रखा जाए, तो लगभग सभी सेक्स प्रॉब्लम आसानी से दूर हो सकती हैं।

फोटो सौजन्य- गूगल