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Stress in women can affect scientific and physical health

Tension in Women: महिलाओं में टेंशन उनके भावनात्मक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। आप क्रोध, चिड़चिड़ापन, क्रोध, अवसाद, चिंता, मनोबल में बदलाव और हताशा जैसे संकेतों को पहचानती होंगी। पर यह आपके इनर्जी लेवल, भूख, मेमोरी और एकाग्रता को भी प्रभावित कर सकता है। टेंशन से राहत पाने के लिए कई अलग-अलग उपाय उपलब्ध हैं।

क्या होता है महिलाओं में टेंशन?

तनाव जीवन का एक स्वाभाविक हिस्सा है लेकिन महिलाओं के लिए , जिन पर दूसरों की ज़रूरतों का ध्यान रखने का अधिक दबाव होता है, तनाव प्रेरक और साथ ही साथ अत्यधिक बोझिल भी हो सकता है। यह जागरूकता बढ़ा सकता है और ध्यान केंद्रित करने में मदद कर सकता है या फिर यह चिंता और थकावट का कारण बन सकता है। कई महिलाएं इतनी व्यस्त रहती हैं कि उन्हें यह पता भी नहीं हो पाता कि तनाव उन पर कितना हावी होता है।

जब तनाव लंबे समय तक चलने वाला प्रतीत होने लगता है, तो यह सामान्य लगने लगता है। समय के साथ, यह आपके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है।

घर पर तनाव को नियंत्रित करने के लिए आप कुछ कदम उठा सकते हैं। या फिर अधिक सहायता के लिए आप किसी स्वास्थ्य सेवा प्रदाता से संपर्क कर सकते हैं।

महिलाओं में तनाव पुरुषों में तनाव से किस तरह अगल होता है?

Stress in women can affect scientific and physical health

हालांकि हर कोई तनाव का अनुभव करता है, लेकिन यह महिलाओं और पुरुषों को अलग-अलग तरह से प्रभावित कर सकता है। जैसे कि, अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन के 2023 के ‘स्ट्रेस इन अमेरिका’ रिसर्च में निम्नलिखित निष्कर्ष निकले-

  1. महिलाओं ने पुरुषों की तुलना में तनाव का औसत स्तर अधिक बताया।
  2. पुरुषों की तुलना में महिलाओं के यह कहने की संभावना अधिक थी कि उन्हें अधिक भावनात्मक समर्थन की आवश्यकता हो सकती थी।
  3. पुरुषों की तुलना में महिलाएं वित्तीय चिंताओं से अधिक “परेशान” महसूस करती हैं।
  4. महिलाओं में पुरुषों की तुलना में पारिवारिक जिम्मेदारियों और रिश्तों को अपने जीवन में प्रमुख तनाव के कारकों के रूप में मानने की संभावना अधिक थी।
  5. शोधकर्ताओं का मानना ​​है कि जैविक कारक (जैसे हार्मोन ) इस बात को प्रभावित कर सकते हैं कि प्रत्येक लिंग तनाव का अनुभव अलग-अलग तरीके से कैसे करता है। सामाजिक प्रभाव (जैसे समर्थन या परित्याग) भी तनाव को प्रभावित कर सकते हैं।

महिलाओं में तनाव के लक्षण क्या हैं?

तनाव के कई लक्षण होते हैं। हर व्यक्ति तनाव पर अलग-अलग तरह से प्रतिक्रिया करता है। महिलाओं में तनाव के सामान्य लक्षणों में शामिल हैं:

शारीरिक लक्षण : सिरदर्द , नींद आने में कठिनाई , मांसपेशियों में तनाव, दर्द (अक्सर पीठ और गर्दन में), अधिक खाना/कम खाना, त्वचा संबंधी समस्याएं, नशीली दवाओं और शराब का दुरुपयोग , ऊर्जा की कमी, पेट या आंतों में गड़बड़ी, यौन संबंध या अन्य चीजों में रुचि कम होना जिनका आप पहले आनंद लेते थे।

भावनात्मक : चिंता, अवसाद , क्रोध, उदासी, चिड़चिड़ापन, नियंत्रण से बाहर होने की भावना, मनोदशा में उतार-चढ़ाव , हताशा

मानसिक लक्षण : भूलने की बीमारी, चिंता, निर्णय लेने में असमर्थता, नकारात्मक सोच, ध्यान केंद्रित करने में कमी, ऊब, जिन चीजों में आमतौर पर आनंद आता है उनमें रुचि का अभाव, प्रेरणा की कमी, जीवन में अर्थ का अभाव, खालीपन, क्षमा न कर पाना, संदेह, अपराधबोध, निराशा

व्यावसायिक : काम का बोझ, तनाव , लंबे समय तक काम करना, तनावपूर्ण संबंध, एकाग्रता में कमी

सामाजिक : कम घनिष्ठता, अलगाव, पारिवारिक समस्याएं, अकेलापन

महिलाओं में तनाव के क्या कारण होते हैं?
तनाव के कुछ सबसे सामान्य कारण निम्नलिखित हैं:

  • फाइनेंस
  • हेल्थ
  • रिलेशन
  • स्कूल या काम

कई महिलाओं का कहना है कि बच्चों, माता-पिता और घर के कामों जैसी पारिवारिक जिम्मेदारियों से तनाव और अस्वस्थता बढ़ती है। अक्सर महिलाएं अपना ध्यान रखने की बजाय दूसरों की जरूरतों को पूरा करने में अधिक समय व्यतीत करती हैं। हर काम में अच्छा प्रदर्शन करने की चाह रखना स्वाभाविक है। और कभी-कभी, समय या ऊर्जा की कमी होने पर भी “ना” कहना मुश्किल हो जाता है। इससे तनाव के लक्षण भी उत्पन्न हो सकते हैं।

तनाव मेरे स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करता है?

Stress Effects

जब आप लंबे समय तक तनाव महसूस करते हैं, तो इसे दीर्घकालिक तनाव कहा जाता है। इससे कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं, जैसे:

गंभीर या बार-बार होने वाले सिरदर्द ( तनावग्रस्त सिरदर्द और माइग्रेन )
हृदय संबंधी समस्याएं ( उच्च रक्तचाप , हृदय रोग और दिल का दौरा )
चिड़चिड़ा आंत्र सिंड्रोम (आईबीएस)
मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं ( पैनिक डिसऑर्डर , सामान्यीकृत चिंता विकार , गंभीर अवसाद)
मांसपेशियों में तनाव और दर्द
मोटापा (तनाव के कारण वजन बढ़ना)
आघात
कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली (बीमारी के बाद ठीक होने में कठिनाई)
किसी स्वास्थ्य सेवा प्रदाता के मार्गदर्शन में, तनाव का प्रबंधन करने से आपको इन जटिलताओं को रोकने में मदद मिल सकती है।

महिलाएं तनाव को बेहतर तरीके से कैसे प्रबंधित कर सकती हैं?

महिलाएं स्वस्थ आत्म-देखभाल रणनीतियों को प्राथमिकता देकर और उनका अभ्यास करके तनाव को नियंत्रित कर सकती हैं। शुरुआत करने के लिए यहां कुछ सुझाव दिए गए हैं:

संज्ञानात्मक पुनर्परिभाषित करना (यह कहने के बजाय कि “मुझे यह करना है,” यह कहना कि “मुझे यह करने का अवसर मिल रहा है”)
संतुलित आहार लें (जैसे भूमध्यसागरीय आहार )।
प्रकृति का आनंद लें (टहलने जाएं और कुछ देर के लिए भाग-दौड़ भरी जिंदगी से दूर हो जाएं)।
व्यायाम करें या ऐसी शारीरिक गतिविधि में भाग लें जिससे आपका शरीर हिलता-डुलता रहे।
पर्याप्त नींद लें (प्रति रात सात से नौ घंटे)।
विश्राम की तकनीकों का अभ्यास करें (जैसे योग , ध्यान , गहरी सांस लेना)।
कृतज्ञता का अभ्यास करें
अपनी पसंद की गतिविधियों/शौकों के लिए समय निकालें।
दोस्तों और परिवार के साथ समय बिताएं और मेलजोल बढ़ाएं।
डायरी लिखना शुरू करें

इसके बाद, आप अपने मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित करने वाले कुछ सुझावों का पालन कर सकते हैं:

अपने तनाव के स्रोतों को पहचानें। दिन भर आप कैसा महसूस करते हैं और क्या करते हैं, उसे लिख लें। आप कार्यों को बाँटने या ज़रूरत पड़ने पर मदद मांगने के लिए कार्य योजनाएँ बना सकते हैं। विनम्रतापूर्वक लेकिन दृढ़ता से “ना” कहना और अपने लिए सीमाएँ निर्धारित करना महत्वपूर्ण है ।

10 तक गिनें- अगर आप किसी स्थिति से नाराज़ हैं, तो वहां से दूर जाकर 10 तक गिनने की कोशिश करें। तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय कुछ गहरी सांसें लें और रुकें।

जैसे आप दूसरों का ख्याल रखते हैं, वैसे ही खुद का भी ख्याल रखें । आप दूसरों के प्रति दयालु हैं, इसलिए खुद के प्रति भी दयालु रहें। याद रखें, किसी और की मदद करने से पहले आपको खुद को ऑक्सीजन देनी होगी।

सामाजिक सहयोग प्राप्त करें । जरूरत के समय मदद मांगना मुश्किल हो सकता है। कई महिलाओं को मुश्किल समय में किसी ऐसे व्यक्ति का साथ मददगार लगता है जिस पर वे भरोसा कर सकें।

डिजिटल/सोशल मीडिया से कुछ समय के लिए दूरी बनाएं । जब भी संभव हो, स्क्रीन से ब्रेक लें ।

मदद लें- जरूरत पड़ने पर किसी स्वास्थ्य सेवा प्रदाता से बात करना ठीक है। वे तनाव से निपटने में आपकी मदद करने के लिए थेरेपी जैसे विभिन्न संसाधनों की सलाह दे सकते हैं ।

फोटो सौजन्य- गूगल

These 6 habits can create tension in every relationship

Relations: हमारे जीवन की एक सच्चाई यह है कि उसे भी गुजर जाना है। लेकिन सबसे अधिक परेशानी लेकर आता है बुढ़ापा। ऐसा समय जब हम बीमारियों से भी घिरे रहते हैं और रिश्ते की डोर भी समय के साथ कमजोर होने लगती है। इसका बड़ा कारण कुछ आदतें होती हैं जो हमने अपने जीवन में वर्षों पहले से लगा रखी होती हैं। हम आपको कुछ ऐसी ही आदतों के बारे में बताने जा रहे हैं जो आप पहले से छोड़कर अपने उस समय के लिए अपने रिश्तों को और मजबूत कर लेंगे जब आपको उन रिश्तों की सबसे ज्यादा जरूरत होगी, यानी आप के बुढ़ापे में।

6 आदतें जिन्हें छोड़ना है रिश्ते की गारंटी

1. उम्मीद अधिक लगाना

पति-पत्नी के बीच संवाद जरूरी

साइकोलॉजिस्ट और रिलेशनशिप कंसल्टेंट के मुताबिक हम अक्सर रिश्तों में ज्यादा उम्मीदें रख लेते हैं, ये सोचकर कि अगर सामने वाला हमारी तरह नहीं सोचे या वही ना करे जो हम चाहते हैं, तो रिश्ता खराब हो जाएगा। लेकिन, ये आदत हमारे रिश्ते में बहुत तनाव पैदा कर सकती है। जब हम अपने साथी से ज्यादा उम्मीदें रखते हैं और उन्हें बदलने की कोशिश करते हैं, तो इसका उल्टा असर होता है। यह सिर्फ हमारे पार्टनर को असंतुष्ट करता है, बल्कि रिश्ते में भी दूरी आ सकती है।

ऐसे में उस वक्त के लिए अभी से तैयारी करें जब आप बैठकर केवल सोच सकेंगे कि क्या सोचा और क्या पाया। अगर आप अपनी उम्मीदों को थोड़ा कम करेंगे और अपने साथी की अच्छाइयों को मानेंगे, तो न सिर्फ रिश्ता मजबूत होगा, बल्कि आप दोनों के बीच प्यार और समझ भी बढ़ेगा और वो लंबे समय तक आपके साथ चलेगा।

2. छोटी छोटी बातों को नजरंदाज न करें

Study on Relationship

कभी-कभी हम रिश्तों में छोटी-छोटी बातों को नजरअंदाज कर देते हैं, जैसे एक हल्की मुस्कान, एक अच्छा शब्द या बस एक छोटा सा इशारा। ट्यूटर चेज नाम की एक संस्था की रिपोर्ट कहती है कि स्वस्थ रिश्ता रहने के लिए पार्टनर्स के बीच गेस्चर्स का आदान प्रदान जरूरी है। ये छोटी बातें रिश्ते में बहुत मायने रखती हैं और इनसे रिश्ते में खुशियां और मजबूती आती है। अगर हम इनका ध्यान नहीं देते, तो ये छोटे-छोटे इशारे रिश्ते में दूरियां बना सकते हैं। और ये आप अगर अभी से नहीं करेंगे तो उस उम्र में जब आप को रिश्तों की जरूरत होगी, इसकी शुरुआत तब नहीं हो सकेगी और तब शुरुआत करने पर भी गेस्चर्स अपना काम करें, मुश्किल है।

3. दूसरों की गलतियों को बार-बार याद करना

Study on Relationship

उम्र बढ़ने के साथ अक्सर लोगों में यह आदत होती है और आपको अगर बुजुर्ग होने पर ऐसा नहीं बनना तो उसकी शुरुआत आज से करें ताकि आपकी आदतों में ये शामिल हो सके। हैप्पी फेमिली नाम की एक संस्था के लिए डॉक्टर जस्टिन कॉल्सन ने लिखा है कि यह पैटर्न बहुत आम तौर पर पाया गया है कि ऐसे रिश्ते जो टूटे या फिर कमजोर हुए हैं, उसमें दोनों तरफ से एक दूसरे की ग़लतियों को दोहराने का पैटर्न था।

यहां यह समझना है कि हर इन्सान से गलतियां होती हैं, और रिश्तों में यह सामान्य बात है कि कभी न कभी कोई न कोई गलती करेगा। लेकिन अगर आप हमेशा उन गलतियों को याद करेंगे और पुराने बातों को ताज़ा करेंगे, तो यह रिश्ते में तनाव ही बढ़ाएगा। उस उम्र में जब आपको रिश्ते की जरूरत होगी तो आपके इर्द गिर्द लोग आने से परहेज कर सकते हैं।

4. सुनने की आदत न होना

Sleep Separation: Separation of bedroom for a long time causes distance in relationships

हममें से कई लोग अपनी बातों को ज्यादा अहमियत देते हैं और सामने वाले की बातों को नजरअंदाज कर देते हैं। यही आदत रिश्तों में खटास पैदा करती है। रिश्ते तभी अच्छे होते हैं जब दोनों एक-दूसरे को सुनते और समझते हैं। लाइफ काउंसिलिंग इंस्टीट्यूट की एक रिपोर्ट कहती है कि न सुनना, किसी भी रिश्ते के अंत की शुरुआत हो सकता है। तो अगर आप भी चाहते हैं कि आपका रिश्ता मजबूत हो, तो अब से पहले सामने वाले की बात पूरी तरह से सुनें।

जल्दी से प्रतिक्रिया देने के बजाय, उनकी बातों को समझने की कोशिश करें। जब आप अपने साथी की बातों को अहमियत देंगे, तो वह भी आपके विचारों की कद्र करेगा। इससे न सिर्फ आपका रिश्ता मजबूत होगा, बल्कि आप दोनों के बीच समझ और नज़दीकी भी बढ़ेगी। यह नजदीकी उस वक्त आपके ज्यादा काम की होगी जब आपको अपने साथी या किसी रिश्ते की जरूरत होगी और आपको प्यार चाहिए होगा।

5. वक्त नहीं है, मत बोलिए

Sleep Separation: Separation of bedroom for a long time causes distance in relationships

हम अक्सर यह बहाना बनाते हैं कि समय की कमी है, खासकर जब हम काम में व्यस्त होते हैं या और कोई जिम्मेदारियां होती हैं। लेकिन अगर हम यही सोचने लगें कि हमारे पास समय नहीं है, तो इससे रिश्तों में दूरी आ सकती है और फिर आप अकेलेपन का शिकार होने लगेंगे।

आप यह सोचिए कि उस वक्त जब आप अपनी उम्र के ऐसे पड़ाव पर हों जहां आप शारीरिक तौर पर भी कुछ कमजोर हों और आपको मानसिक मजबूती के लिए भी रिश्ते चाहिए हों। लेकिन न सुनने की आदत की वजह से आपने तो रिश्ते गंवा दिए हैं। फिर उस उम्र में आप मुश्किल में होंगे। इसलिए सबसे पहले वक्त की कमी का बहाना बना कर रिश्तों को टालना छोड़ दें।

6. नकारात्मक सोच रखना

Relation

एक रिपोर्ट कहती है कि अगर आप हमेशा हर चीज़ को नकारात्मक तरीके से देखते हैं, तो यह आपके रिश्तों में तनाव पैदा कर सकता है। जब हम हर बात में परेशानी ढूंढ़ते रहते हैं, तो रिश्ते में प्यार और समझ की कमी होने लगती है। एक्सपर्ट के मुताबिक उम्र के उस पड़ाव पर जब हम सीख लेते हैं कि हमें क्या नहीं करना, जहां हमारे पास रिश्तों में खुद को बदलने का वक्त होता है तो यह हमारे लिए लाइफटाइम का वरदान बन जाता है। पॉजिटिव सोच की उम्र के उस पड़ाव पर सबसे ज्यादा जरूरत होती है जब हम उम्र के उस पड़ाव पर हों जहां हमें शारीरिक तौर पर दिक्कत हो सकती है। और अगर ऐसे में हम नकारात्मक रहे तो रिश्ते भी प्रभावित होंगे और हम खुद किसी भी बीमारी या समस्या से लड़ नहीं सकते।

फोटो सौजन्य- गुगल

Fertility Rate: If you want to plan a baby

Egg Quality: क्या आप कंसीव करने का सोच रही हैं? फिर जरूरी है कि पहले इसके लिए अपनी बॉडी को पूरी तरह तैयार करें। आजकल इनफर्टिलिटी के केस काफी ज्यादा सुनने को मिलते हैं। बहुत सी महिलाएं हैं, जो कंसीव करना चाहती हैं लेकिन इस दौरान प्रेगनेंसी फेलियर के बाद उन्हें पता चलता है कि वे कंसीव करने में समर्थ नहीं हैं। इस तरह के दिक्कतों से बचने के लिए शुरुआत से ही अपनी फर्टिलिटी पर ध्यान दें। जिस तरह आप अपनी स्किन एवं हेयर का केयर करती हैं, उसी तरह अपनी एग क्वालिटी का भी ख्याल रखें।

कई ऐसी नियमित हैबिट और स्थितियां हैं जो आपकी एग क्वालिटी को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में सचेत रहना जरूरी होता है। विशेषज्ञ के मुताबिक एग क्वालिटी बेहतर बनाने के लिए कुछ खास सुझाव के बारे में विस्तार से जानते हैं-

अच्छी एग क्वालिटी के लिए अनिवार्य चीजें-

हॉर्मोन्स का संतुलित स्तर

नियमित पीरियड साइकिल

पीरियड के दौरान शरीर के बेसलाइन टर्म्प्रेचर

और सर्वाइकल फ्लूइड में भिन्नता।

एक स्वस्थ अंडे या ओवम में प्रॉपर जेनेटिक वाले 23 क्रोमोज़ोम होते हैं। क्रोमोज़ोम संबंधी असामान्यता वाले अंडे में 23 से कम या अधिक क्रोमोज़ोम होते हैं। इसके परिणामस्वरूप अंडे की गुणवत्ता कम होती है और आपको परेशानी हो सकती है।

खराब गुणवत्ता वाले एग के संकेतों में शामिल हैं-

Foods For Pregnant Woman

हार्मोनल असंतुलन अनियमित पीरियड्स का कारण हो सकते हैं, जिसका अंडों की गुणवत्ता पर प्रभाव पड़ सकता है।
खराब गुणवत्ता वाले अंडों का संकेत में क्रोमोज़ोम की असंतुलित संख्या भी शामिल है। असामान्य या कम गुणवत्ता वाले अंडों में सामान्य से कम या अधिक क्रोमोज़ोम होते हैं।

क्रोमोज़ोम सबंधी समस्या के कारण एबॉर्शन हो सकता है, यह अंडों की खराब गुणवत्ता का संकेत हो सालता है। फॉलिकल-स्टिम्युलेटिंग हॉरमोन (FSH) का कम स्तर अंडे की गुणवत्ता में गिरावट का संकेत हो सकता है। FSH एक हॉरमोन है जो पिट्यूटरी ग्लैंड द्वारा रिलीज किया जाता है। एस्ट्रोजन के स्तर में गिरावट, अंडे की गुणवत्ता को प्रभावित करती हैं।

जानें एग क्वालिटी बढ़ने के टिप्स

1. ब्लड फ्लो इम्प्रूव करें

हेल्दी एग प्रोडक्शन ओवरी में ऑक्सीजन युक्त ब्लड फ्लो पर निर्भर करता है। इन अंगों में ऑक्सीजन युक्त ब्लड फ्लो को बढ़ावा देने के लिए उचित हाइड्रेशन मेंटेन करना महत्वपूर्ण है। हर दिन कम से कम 6 से 8 गिलास पानी या अन्य हाइड्रेटिंग ड्रिंक पिएं। इसके अलावा नियमित रूप से एक्सरसाइज करें, क्योंकि यह पूरे शरीर में ब्लड सर्कुलेशन में सुधार करता है और हृदय में रक्त प्रवाह को बढ़ाता है। इसके अलावा, मसाज चिकित्सा और योग ब्लड फ्लो को बेहतर बनाने में मदद करते हैं।

2. हेल्दी वेट मैनेजमेंट पर ध्यान दें

keep obesity and stress away from yourself

आईवीएफ और प्रेगनेंसी के दौरान एग क्वालिटी में सुधार के लिए हेल्दी वेट मेंटेन करना महत्वपूर्ण है। अधिक वजन या कम वजन होने से हार्मोन का स्तर प्रभावित हो सकता है और मेंस्ट्रुअल साइकिल प्रभावित हो सकती है, जिससे कंसीव करना मुश्किल हो जाता है। एक हेल्दी वेट मैनेजमेंट के साथ आपके हेल्दी एग प्रोडक्शन की संभावना भी बढ़ जाती है, जो एक हेल्दी और कम्प्लीकेशन फ्री प्रेगनेंसी के लिए महत्वपूर्ण है।

संतुलित वजन बनाए रखना समग्र स्वास्थ्य को भी बढ़ावा देता है, जिससे प्रेगनेंसी और डिलीवरी के दौरान कम्प्लीकेशन का जोखिम कम हो जाता है। पौष्टिक आहार और नियमित शारीरिक गतिविधियां स्वस्थ वजन प्राप्त करने में आपकी मदद कर सकती हैं।

3. आज ही छोड़े स्मोकिंग

स्मोकिंग परमानेंट बेसिस पर ओवरी में अंडे के नुकसान पहुंचा सकता है। सिगरेट में मौजूद केमिकल एग के सेल्स में डीएनए को बदल देती हैं, जिससे कुछ अंडे इनफर्टाइल हो जाते हैं। महिलाओं में उम्र के साथ अंडों की संख्या कम होती जाती है, इसलिए अंडों को स्वस्थ और अनावश्यक रसायनों से मुक्त रखना बेहद जरुरी है।

4. स्ट्रेस मैनेजमेंट पर ध्यान दें

Sometimes even a small difference between husband and wife is important

तनाव कोर्टिसोल और प्रोलैक्टिन जैसे हार्मोन उत्पन्न कर सकता है, जो ओव्यूलेशन में बाधा डाल सकते हैं या उसे रोक सकते हैं। योग, ध्यान, व्यायाम या हॉट शॉवर जैसी तनाव कम करने वाली गतिविधियों में भाग लें। यदि आप अत्यधिक तनाव में रहती हैं तो कंसीव करने से पहले अपनी मानसिक स्थिति में सुधर करें।

5. अच्छी नींद लें

good sleep

जब आप अच्छी नींद लेती हैं, तो आपका शरीर ऐसे हार्मोन बनाता है जो ओव्यूलेशन को नियंत्रित करते हैं और हेल्दी एग ग्रोथ का समर्थन करते हैं। अच्छी नींद तनाव को कम कर सकती है, इसका फर्टिलिटी पर सकारात्मक असर होता है। पर्याप्त आराम करें यह आपकी इम्युनिटी को बढ़ावा देता है। एक मजबूत इम्युनिटी हेल्दी प्रेगनेंसी को बढ़ावा देती है। इसके अतिरिक्त, नींद स्वस्थ वजन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जो फर्टिलिटी के लिए महत्वपूर्ण है।

6. स्वस्थ आहार लें

अध्ययनों से पता चलता है कि फल, सब्जियां और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर डाइट फर्टिलिटी को बढ़ावा देती है। प्रोसेस्ड, शुगर और हाई सैचुरेटेड फैट वाले खाद्य पदार्थों से दूर रहें। पौष्टिक आहार लेने के अलावा, अंडे के उत्पादन में सहायता करने वाले विटामिन का उपयोग करने की सलाह दी जाती है। इसके अतिरिक्त, मछली का तेल, विटामिन ए और ई, और मेलाटोनिन अंडे की गुणवत्ता में सुधार करते हैं।

फोटो सौजन्य- गूगल

Stress Effects

Stress Effects: ये हम सभी जानते हैं कि सभी लोगों को कुछ ना कुछ टेंशन अवश्य होता है। लेकिन हमें हमेशा सतर्क रहना चाहिए। तनाव से होने वाले खतरे से बचने के लिए हमें अलर्ट भी रहना जरूरी है। बहुत ज्यादा तनाव हमें बीमार बना सकता है। रिसर्च बताते हैं कि तनाव की वजह से कुछ बीमारियां भी हो सकती है। टेंशन कुछ गंभीर बीमारियों को दावत भी देता है। लगातार तनाव में रहने पर शारीरिक लक्षण, जैसे कि हेडेक, पेट की समस्या, हाई ब्लड प्रेशर, सीने में दर्द हो सकता है। टेंशन के कारण सेक्स और नींद में समस्याएं भी हो सकती हैं।

तनाव आपके शरीर को कैसे करता है प्रभावित

Stress Effects

जब तनाव होता है, तो शरीर में केमिकल रिएक्शन होता है। यह तनाव के कारण होने वाले शारीरिक परिवर्तन को रोकने की कोशिश करता है। यह प्रतिक्रिया फाइट या फ्लाइट तनाव प्रतिक्रिया के रूप में जाना जाता है। स्ट्रेस से होने वाले रिएक्शन के दौरान व्यक्ति की हृदय गति बढ़ जाती है। सांस लेने की गति तेज हो जाती है। मांसपेशियां सख्त हो जाती हैं। ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। यदि हार्ट बीट में लगातार और निरंतर वृद्धि होती है। स्ट्रेस हार्मोन और ब्लड प्रेशर का हाई लेवल रहता है, तो यह शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। लंबे समय तक चलने वाला यह तनाव हाई ब्लडप्रेशर, दिल का दौरा या स्ट्रोक के खतरे को भी बढ़ा सकता है।

इमोशनल हेल्थ पर बुरा प्रभाव

लगातार तनाव रहने से एंग्जायटी, चिड़चिड़ापन, सेक्सुअल डीजायर में बढ़ोत्तरी, मेमोरी लॉस, गुस्सा करना आदि जैसे लक्षण भी दिखने लगते हैं। इसके कारण मूड में बदलाव भी होने लगता है। बहुत अधिक तनाव में रहने पर उदासी और शारीरिक दर्द के साथ-साथ मानसिक या भावनात्मक आंसू भी आने लगते हैं। तनाव एंडोक्राइन ग्लैंड को आई रीजन में हार्मोन जारी करने के लिए प्रेरित करता है, जिससे आंसू बनते हैं।

यहां हैं तनाव को मैनेज करने के 4 Methods-

  • सूर्य की किरण है सबसे जरूरी

अब तो ठण्ड का मौसम आ गया है। इसलिए सूर्य की रोशनी में बैठना तनाव दूर भगाने के साथ-साथ शरीर के लिए भी बढ़िया है। विटामिन डी की कमी से भी स्ट्रेस और एंजायटी के लक्षण दिखाई दे सकते हैं। अगर आप तनाव में हैं, तो सुबह कुछ देर धूप में बैठने की कोशिश करें। धूप आपको रिफ्रेश कर देगा।

  • एक्सरसाइज से दूर होता है टेंशन

मेंटल हेल्थ जर्नल में प्रकाशित शोध बताते हैं कि गुस्से या तनाव में रहने पर बैठने की जगह से 20 कदम चलना भी तनाव भगाने (stress affect health) के लिए काफी है। वॉकिंग से तनाव दूर भाग जाता है। एंडोर्फिन हार्मोन पैदा होने से व्यक्ति तनाव मुक्त हो जाता है ।

  • Epsom Salt के साथ स्नान

एप्सम साल्ट या मैग्नीशियम सल्फ़ेट के सेवन से तनाव से राहत मिल सकती है। गनगुने पानी से नहाने पर भी तनाव दूर होता है। तनाव में होने पर एप्सम सॉल्ट हॉट बाथ लिया जा सकता है।

  • Omega-3 फैटी एसिड शामिल करें

ओमेगा- 3 फैटी एसिड में पॉली अनसेचुरेटेड फैट होते हैं। ये रिलैक्स करते हैं। इसके लिए टूना, सैल्मन आदि सी-फ़ूड लिया जा सकता है। प्लांट बेस्ड फ़ूड में चिया सीड्स, मूंगफली और अलसी ओमेगा-3 फैटी एसिड के बेहतरीन स्रोत हैं। टेंशन भगाने के लिए सुबह या दो बजे तक एक बड़ा चम्मच अलसी लिया जा सकता है।