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Vaginal Infection: Do not ignore the problem of burning and itching in the vagina

PCOS यानी पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (Polycystic ovary syndrome) महिलाओं को होने वाला एक एंडोक्राइन और मेटाबॉलिक डिसऑर्डर है। यह डिजीज महिलाओं को रजोनिवृत्ति से ठीक पहले के समय (प्रीमेनोपॉजल) होता है। पीसीओएस में महिलाओं के शरीर में असाधारण मात्रा में एंड्रोजन हार्मोन बनने लगता है। एंड्रोजन पुरुष हार्मोन होता है और बहुत ही कम मात्रा में महिलाओं के शरीर में पाया जाता है। पीसीओएस में एंड्रोजन बढ़ने के साथ-साथ मासिक धर्म अनियमित होना और अंडाशय पर छोटी-छोटी सिस्ट (अल्सर जैसी संरचनाएं) बनने लग जाती हैं। ओव्यूलेशन (डिंबोत्सर्जन) तब होता है, जब अंडाशय से अंडा इस प्रकार निकले की शुक्राणु उसे फर्टिलाइज कर ले। पीसीओएस से ग्रस्त महिलाओं ओव्यूलेशन के लिए जरूरी हार्मोन पर्याप्त मात्रा में नहीं बन पाता है। ऐसी स्थिति में जब ओव्यूलेशन हो नहीं पाता है, तो अंडाशय पर छोटी-छोटी सिस्ट बनने लगती हैं। ये सिस्ट ज्यादा मात्रा में एंड्रोजन बनाती हैं, जो महिलाओं को मासिक धर्म को अनियमित करने के साथ-साथ पीसीओएस से संबंधित कई लक्षण पैदा कर देता है।

पीसीओएस के प्रकार

रॉटरडैम क्राइटेरिया के अनुसार पीसीओएस के 4 अलग-अलग प्रकार हैं –

क्लासिक पॉलिसिस्टिक ओवरी पीसीओएस – इसमें लंबे समय तक ओव्यूलेशन नहीं होता है और ओवरी में सिस्ट बनने के साथ-साथ एंड्रोजन का स्तर भी बढ़ जाता है। जिन महिलाओं को पीसीओएस का यह प्रकार होता है उनमें मेटाबॉलिक व हृदय संबंधी बीमारियां होने का काफी खतरा रहता है।
क्लासिक नोन-पॉलिसिस्टिक ओवरी पीसीओएस – इसमें ओव्यूलेशन कम होता है और एंड्रोजन का स्तर बढ़ा हुआ होता है। हालांकि, इसमें ओवरी सामान्य रहती हैं।
नोन-क्लासिक ओव्यूलेटरी पीसीओएस – इसमें ओव्यूलेशन भी होता है और मासिक धर्म भी नियमित रहते हैं। लेकिन इस दौरान एंड्रोजन का स्तर बढ़ जाता है और ओवरी पर सिस्ट भी बन जाती हैं।
नोन-क्लासिक माइल्ड पीसीओएस – पीसीओएस के इस प्रकार के ओव्यूलेशन कम हो जाता है और ओवरी पर सिस्ट भी बन जाती हैं।

पीसीओएस के लक्षण

Vaginal Infection: Do not ignore the problem of burning and itching in the vagina

पीसीओएस ऐसा रोग है जिसके कारण कई अन्य रोग भी विकसित हो सकते हैं। पीसीओएस से प्रमुख रूप से तीन समस्याएं जुड़ी होती हैं और वे हैं मासिक धर्म में अनियमितता, एंड्रोजन का स्तर बढ़ना और अंडाशय में सिस्ट बनना। रॉटरडैम के क्राइटेरिया के अनुसार यदि किसी महिला को इन तीन लक्षणों में से कोई दो महसूस हो रहे हैं, तो वह पीसीओएस से ग्रस्त है। हालांकि, पीसीओएस से होने वाले संकेत व लक्षण ग्रसित महिला की स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। पीसीओएस से आमतौर पर देखे जाने वाले लक्षणों में निम्न को भी शामिल किया जा सकता है –

इनफर्टिलिटी (बांझपन)
मोटापा बढ़ना
चेहरे, छाती और पेट पर अधिक बाल उगना
ऑयली स्किन और मुंहासे होना

पीसीओएस के कारण

पीसीओएस के सटीक कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। हालांकि, यह अनुवांशिक, वातावरणीय और पारिवारिक स्थितियों से जुड़ा हो सकता है। निम्न स्थितियां पीसीओएस का कारण बन सकती हैं –

वातावरणीय कारक- इन स्थितियों में संतुलित आहार न ले पाने के कारण और पर्याप्त शारीरिक गतिविधियां न कर पाने के कारण मोटापा बढ़ने लगता है। शरीर का वजन बढ़ना पीसीओएस समस्या से जुड़ा होता है। हालांकि, सामान्य वजन वाली कुछ महिलाओं को भी पीसीओएस हो सकता है। अलावा इसके किसी संक्रामक या विषाक्त चीज के संपर्क में आना भी वातावरणीय कारक के रूप में पीसीओएस का कारण बन सकता है।

पारिवारिक समस्या – जिन महिलाओं के परिवार में पहले किसी को पीसीओएस या टाइप 02 डायबिटीज हो चुका है, तो ऐसे में उन्हें भी पीसीओएस होने का खतरा बढ़ जाता है। किसी महिला में पीसीओएस के लक्षण कितने गंभीर हो सकते हैं, यह भी उसकी फैमिली हिस्ट्री पर निर्भर कर सकता है।

इंसुलिन रेजिस्टेंस – जब शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन पर प्रतिक्रिया न दे पाएं, तो शरीर अधिक मात्रा में इंसुलिन बनने लगता है। इस प्रकार शरीर में इंसुलिन का स्तर सामान्य न होना, एंड्रोजन का स्तर बढ़ने का कारण बन सकता है। जीवनशैली से जुड़ी खराब आदतें जैसे पौष्टिक व संतुलित आहार न लेना और शारीरिक गतिविधियां न करना भी इंसुलिन रेजिस्टेंस का कारण बन सकता है। इस कारण से भी महिलाओं का वजन बढ़ने लगता है और पीसीओएस के लक्षण गंभीर हो जाते हैं।

जोखिम कारक

पीसीओएस सिर्फ प्रजनन प्रणाली को नहीं बल्कि शरीर के अन्य हिस्सों को भी प्रभावित करता है। यह महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए खतरा बढ़ा देता है, जिससे जीवन भर समस्याएं हो सकती हैं। पीसीओएस के प्रमुख जोखिम कारकों में निम्न शामिल हैं –

मां या बहन को पहले से ही पीसीओएस होना
इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या होना
गर्भाशय की मोटाई बढ़ने के कारण एंडोमेट्रियल कैंसर होने का खतरा बढ़ना
स्लीप एपनिया और डिप्रेशन जैसी समस्याएं होना।

पीसीओएस की रोकथाम

पीसीओएस आमतौर पर प्यूबर्टी के दौरान विकसित होता है, जिसके कारण वयस्क होने पर डायबिटीज और बांझपन की समस्याएं होने लगती हैं। ऐसी स्थितियों से बचने के लिए समय रहते ही पीसीओएस की रोकथाम करना बेहद जरूरी है।

जो महिलाएं मोटापे से ग्रस्त है उन्हें अपने वजन को कम करने के लिए उपयुक्त उपाय करने चाहिए, जिससे पीसीओएस की गंभीरता को कम करने में भी मदद मिलेगी।

इंसुलिन और एंड्रोजन लेवल के स्तर पर नजर रखना बहुत जरूरी है, क्योंकि ये पीसीओएस विकसित होने का कारण बन सकते हैं।

पीसीओएस का निदान

पीसीओएस में होने वाले लक्षण आमतौर पर अन्य कई स्वास्थ्य समस्याओं में भी हो सकते हैं। पीसीओएस की गंभीरता और उसके प्रकार का पता लगाने के लिए उचित निदान करना जरूरी होता है। पीसीओएस का निदान करने के लिए डॉक्टर मरीज की शारीरिक जांच करते हैं और साथ ही उनके स्वास्थ्य से जुड़ी पिछली जानकारियां (मेडिकल हिस्ट्री) भी लेते हैं। इसके बाद कुछ अन्य टेस्ट भी किए जाते हैं, जिनकी मदद से पीसीओएस की पुष्टि की जाती है, जैसे –

अल्ट्रासाउंड या पेल्विक एग्जाम
ब्लड टेस्ट
पीसीओएस का इलाज
पीसीओएस से होने वाली समस्याओं को ठीक करने के कई इलाज उपलब्ध हैं। पीसीओएस का इलाज आमतौर पर हर महिला को महसूस हो रहे लक्षणों, स्वास्थ्य स्थिति और वह गर्भधारण करना चाहती है या नहीं आदि के आधार पर किया जाता है।

महिला अगर गर्भधारण करना चाहती है –

जीवनशैली में बदलाव – महिला की डाइट में विशेष बदलाव किए जाते हैं और साथ ही उसे व्यायाम आदि भी करने को कहा जाता है, ताकि उसके शारीरिक वजन को नियंत्रित किया जा सके।
फर्टिलिटी की दवाएं – इस दौरान कुछ इंजेक्शन व खाने की दवाएं दी जाती हैं, जो ओवरी को अंडे निकालने में मदद करती हैं। हालांकि, इन दवाओं के कुछ साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं जैसे जुड़ा बच्चे होना या फिर पेल्विक में दर्द होना आदि।

यदि महिला गर्भधारण नहीं करना चाहती है –

गर्भ निरोधक गोलियां – ये दवाएं गर्भधारण रोकने के साथ-साथ मासिक धर्म को नियंत्रित करने, एंड्रोजन लेवल को कम करने, मुंहासे दूर करने और बालों के उगने की समस्या को नियंत्रित करने में भी मदद करती हैं।

डायबिटीज की दवाएं – यदि महिला को डायबिटीज है, तो उसके लिए इन दवाओं को का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, यदि महिला को डायबिटीज नहीं है, तो भी इंसुलिन के स्तर को नियंत्रित करने के लिए इन दवाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है। डायबिटीज की दवाएं आमतौर पर मोटापे से ग्रस्त महिलाओं को भी दी जा सकती हैं, जो शरीर का वजन कम करने और असामान्य रूप से उग रहे बालों को नियंत्रित करने में भी मदद करती है।

सप्लीमेंट्री दवाएं – इन दवाओं की मदद से भी पीसीओएस से ग्रसित महिलाओं में मोटापा, बालों का असामान्य रूप से उगना और अन्य समस्याओं को नियंत्रित किया जा सकता है।

अलावा इसके अगर दवाओं व अन्य इलाज विकल्पों से स्थिति को नियंत्रित नहीं किया जा रहा है, तो सर्जरी भी की जा सकती है। हालांकि, अगर सर्जरी से भी इलाज संभव नहीं है तो असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) जिसकी मदद से फर्टिलिटी का इलाज किया जाता है। इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) सबसे आम प्रकार की एआरटी थेरेपी है।

फोटो सौजन्य- गूगल

Pre-Wedding Skincare

Glowing Skin Tips:  हम सब चाहते हैं कि हमारी स्किन ग्लो करे और सच मानिये यह कोई मुश्किल काम भी नहीं है। इसके लिए ज़रूरी है कि हम कुछ बातों का खास ध्यान रखें। ग्लोइंग स्किन पाने के लिए कुछ अलग से करने की ज़रूरत नहीं है, बस अपने रोजमर्रा की जिंदगी में कुछ ब्यूटी टिप्स को अपनाना होगा।

यूं तो बाज़ार में कई तरह के ट्रीटमेंट मौजूद हैं पर वे सबकी स्किन को सूट नहीं करते। इसलिए चमकदार त्वचा पाने के लिए हम घरेलू नुस्खे आजमा सकते हैं। आइए जानते हैं कि ग्लोइंग फ़ेस के लिए हम क्या करें ताकि हमारी स्किन देखकर सब कह उठें “वाह क्या हसीन चेहरा है”!

ग्लोइंग स्किन पाने के लिए उपाय

Bring glow to your face in Korean way and say goodbye to wrinkles

चेहरा चमके और खूबसूरती निखरे, यह ख्वाहिश आज हर लड़की की है, फिर चाहे उसकी उम्र कुछ भी हो। अपने चेहरे पर चमक लाने के उपाय के लिए घर और किचन में कई ऐसी चीजें मौजूद हैं, जिनकी मदद से हम अपने चेहरे को चमका सकते हैं। कुछ अच्छी आदतें भी ग्लोइंग स्किन पाने में आपकी सहायक बन सकती हैं।

1. अच्छी नींद लें –

दिन भर काम करना, रात को देर तक जागना और 8 घंटे की पूरी नींद न लेना आपकी स्किन के लिए अच्छा नहीं है। यह आपके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी विपरीत असर डालता है। भरपूर नींद न लेने से आपकी आंखें सुबह सूजी लगेंगी। यह दौर कई दिनों तक चलता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब आपकी आंखों के नीचे डार्क सर्कल्स आ जाएंगे। आप थका हुआ महसूस करेंगे और आपकी स्किन डल दिखेगी।

जब आप सो रहे होते हैं तो उसी समय आपके स्किन सेल्स बूस्ट हो रहे होते हैं। जब आप भरपूर नींद नहीं लेंगे तो आपकी स्किन द्वारा रात में इस बूस्टिंग में कमी आएगी और चेहरा थका एवं अस्वस्थ लगेगा।

2. पानी खूब पीएं–

भरपूर पानी हमारी स्किन को ग्लो करने में मदद करता है। हमारे शरीर के अंदर की गंदगी को बाहर निकालता है और नए बॉडी सेल्स बनाता है। आप चाहें तो अपने पानी में हेल्दी चीजें मिलाकर भी पी सकती हैं, इस तरह से पानी के फ़ायदे भी बढ़ जाएंगे।

सुबह- सुबह आप उबलते पानी में एक चुटकी दालचीनी मिलाकर पी सकती हैं। इससे वजन कम होने में मदद तो मिलेगी ही, ग्लोइंग स्किन भी आपको मिलेगी। इसके अलावा, आप चाहें तो पानी में स्ट्रॉबेरी जूस भी मिलाकर पी सकती हैं। इसके नियमित सेवन से चेहरे के दाग- धब्बे गायब हो जाते हैं और चेहरे पर ग्लो आता है।

3. व्यायाम करें –

व्यायाम का तात्पर्य सिर्फ़ वजन कम करना नहीं, बल्कि बॉडी को शेप में लाना और चेहरे पर चमक लाना है। व्यायाम से चेहरे पर चमक बढ़ती है और मन भी खुश रहता है। व्यायाम करने के दौरान शरीर से पसीना निकलता है और स्किन की गंदगी बाहर निकल जाती है। यही नहीं, मूड भी अच्छा होता है, शरीर थकता है और नींद भी गहरी आती है जो चेहरे की त्वचा के लिए बहुत ज़रूरी है। चेहरा खूबसूरत दिखने लगता है।

सूर्य नमस्कार , वॉकिंग, साइकलिंग, जॉगिंग, स्किपिंग, डांसिंग जैसे एक्सरसाइज़, स्किन को ग्लो कराने के लिए बेहतरीन हैं। कुछ नहीं तो कम से कम रोजाना तेज कदमों से चलना ज़रूर करें। साथ ही अगर आप फेशियल एक्सरसाइज़ को रोजाना सिर्फ़ 5 मिनट के लिए करेंगे तो, एक महीने बाद आप खुद ही अपने चेहरे को बदला हुआ पाएंगे। यह घरेलू नुस्खा ऐसा है जिसके लिए आपको किसी भी चीज़ की ज़रूरत नहीं। आपकी झुर्रियां भी दूर होंगी और चेहरे पर निखार आ जाएगा।

4. योग का अभ्यास –

Yoga for women

आपकी स्किन ग्लो करे, इसके लिए योग महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। योग आपकी त्वचा की मांसपेशियों में कसाव लाकर उसे निखारता है। शारीरिक व्यायाम के साथ ही मानसिक तौर पर आपको शांत करता है। जब तक आप अंदर से हेल्दी नहीं रहेंगे, तब तक वह संतुष्टि और शांति बाहर भी नहीं दिखेगी।

चेहरे पर चमक लाने वाले योग में मुख्य हैं- चक्रासन, सर्वांगासन, हलासान, शीर्षासन और प्राणायाम। इन आसनों से शरीर में ऑक्सीजन और खून का बहाव बढ़ जाता है, जो चेहरे पर चमक लाते हैं। ये योग चेहरे पर आने वाली झुर्रियों को कम करते हैं,त्वचा का ढीलापन कम करते हैं और ग्लोइंग स्किन पाने के लिए ज़रूरी हैं।

5. साबुन के इस्तेमाल को करें बंद–

बिना साबुन का इस्तेमाल किए, आपको अपनी त्वचा साफ़ नहीं लगती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि साबुन का ज़्यादा इस्तेमाल आपके चेहरे की त्वचा के लिए सही नहीं है ? साबुन में कुछ ऐसे केमिकल्स होते हैं जो स्किन को बेजान बना देते हैं। यही नहीं, आपकी स्किन को ड्राई बनाकर स्किन से प्राकृतिक तेल और सीबम को निकालकर मॉइश्चर छीन लेते हैं। स्किन का पीएच स्तर असंतुलित हो जाता है और त्वचा को नुकसान होने लगता है।

आप चाहें तो साबुन की जगह घरेलू चीज़ों का इस्तेमाल करके अपने चेहरे की त्वचा को स्वस्थ बनाए रख सकते हैं। बाज़ार में कुछ प्राकृतिक फ़ेसवॉश भी उपलब्ध हैं, जो आपकी स्किन को ड्राई और बेजान नहीं करते हैं। आप जो भी फेस प्रोडक्ट इस्तेमाल करें, ध्यान रक्खें की वह आपकी स्किन टाइप के अनुकूल हो।

6. तनाव में न रहें –

तनाव एक ऐसी बीमारी है, जो ऊपर से दिखती नहीं देती ,लेकिन अंदर ही अंदर आपको खाए जाती है। आपको मानसिक स्तर पर परेशान करने के साथ ही आपके स्वास्थ्य पर भी हमला करती है l तनाव से हमारा शरीर कोर्टिसोल नामक एक हार्मोन छोड़ता है, जिससे त्वचा ज़्यादा मात्रा में सीबम छोड़ती है, जिससे पोर्स बंद हो जाते हैं l चेहरे पर मुंहासे होने का एक कारण आपका लगातार तनाव में रहना भी है।

टेंशन की स्थिति में अपने शरीर को शांत करने के लिए आपको ठंडे पानी से नहाना चाहिए। आप चाहें तो नहाते समय किसी फ्रेगरेंस वाले प्रोडक्ट का इस्तेमाल करें, यह आपके तनाव भरे मस्तिष्क को शांति पहुंचाएगा। शरीर के साथ चेहरे की मालिश भी आपके तनाव को काफ़ी हद तक दूर करने में कारगर है। अपने चेहरे की त्वचा के नसों को रिलैक्स महसूस कराने के लिए आप चेहरे पर बर्फ़ रगड़ सकती हैं।

7. चेहरा साफ़ करके सोयें –

चेहरे पर लगा मेकअप, बाहर का प्रदूषण, धूल- कण आपके चेहरे पर रोमछिद्रों के जरिए अंदर तक पहुंच जाता है। क्या आपने कभी सोचा है कि यह गंदगी आपकी स्किन को कितना नुकसान पहुंचा सकती है? आपकी स्किन रात में ही मरम्मत अवस्था में जाती है। इसलिए, यह ज़रूरी है कि आप रात को सोते समय अपनी स्किन को अच्छी तरह से साफ़ करके सोयें।

सबसे पहले तो घर आते ही चेहरे से मेकअप हटा लें। इसके लिए आप क्लींजिंग मिल्क या मेकअप रिमूवर का इस्तेमाल कर सकते हैं। साथ ही, रात को सोते समय कोई अच्छी नाइट क्रीम के इस्तेमाल से आपको चेहरे पर ग्लो मिल जायेगी।

8. अपने मन को शांत रखें –

निराशा और क्रोध कुछ ऐसे कारण हैं, जिससे आपके चेहरे की चमक खो जाती है। इसलिए यह ज़रूरी है कि चाहे जैसी भी परिस्थिति आए, आप अपने मन को शांत रखने की कोशिश करें। अपने मन को ऐसी अवस्था में ले जाएं कि आपको आसानी से कोई दुःख और परेशानी न हिला सके। इस स्थिति को पाने के लिए आप ध्यान कर सकते हैं। यह काफ़ी हद तक आपके मन को शांत रखने में मदद करता है और आपकी स्किन कभी भी ग्लो करना नहीं बंद करेगी। चेहरे पर लगा मेकअप, बाहर का प्रदूषण, धूल- कण आपके चेहरे पर रोमछिद्रों के जरिए अंदर तक पहुंच जाता है। क्या आपने कभी सोचा है कि यह गंदगी आपकी स्किन को कितना नुकसान पहुंचा सकती है? आपकी स्किन रात में ही मरम्मत अवस्था में जाती है। इसलिए, यह ज़रूरी है कि आप रात को सोते समय अपनी स्किन को अच्छी तरह से साफ़ करके सोयें।

सबसे पहले तो घर आते ही चेहरे से मेकअप हटा लें। इसके लिए आप क्लींजिंग मिल्क या मेकअप रिमूवर का इस्तेमाल कर सकते हैं। साथ ही, रात को सोते समय कोई अच्छी नाइट क्रीम के इस्तेमाल से आपको चेहरे पर ग्लो मिल जायेगी।

8. अपने मन को सुरक्षित रखें –

निराशा और क्रोध कुछ ऐसे कारण हैं, जिससे आपके चेहरे की चमक खो जाती है। इसलिए यह ज़रूरी है कि चाहे जैसी भी परिस्थिति आए, आप अपने मन को शांत रखने की कोशिश करें। अपने मन को ऐसी अवस्था में ले जाएं कि आपको आसानी से कोई दुःख और परेशानी न हिला सके। इस स्थिति को पाने के लिए आप ध्यान कर सकते हैं। यह काफ़ी हद तक आपके मन को शांत रखने में मदद करता है और आपकी स्किन कभी भी ग्लो करना नहीं बंद करेगी।

9. प्राकृतिक भोजनशैली अपनाएं –

हम सब जानते हैं कि हम जैसा खाएंगे, वैसा ही हमारा शरीर दिखेगा। इसलिए हमें अपनी डाइट में ताजे फल और हरी सब्जियों को शामिल करना चाहिए। यह हमारी स्किन पर जादुई तरीके से काम करता है और इनमें निहित प्रोटीन, विटामिन, मिनरल्स आदि हमें लाभ पहुंचाते हैं। जो मौसम चल रहा हो, उस मौसम में मिलने वाली सब्जियां और फल तो ज़रूर खानी चाहिए। जैसे सर्दियों के मौसम में संतरे जैसे फल और पालक, मेथी जैसी हरी सब्जियां।

ग्लोइंग स्किन के लिए घरेलू उपाय –

चेहरे पर चमक लाना बहुत आसान नहीं तो बहुत मुश्किल भी नहीं है। इसके लिए बस हमें अपने किचन और घर में झांकने की ज़रूरत है। हमारे किचन पर यूं ही हमारी दादी- नानी इठलाती नहीं थीं। उन्हें यह बखूबी पता था कि यह किचन न सिर्फ़ हमारे पेट की भूख को शांत करता है, बल्कि हमें खूबसूरत भी बनाता है।

1. एलोवेरा

अपनी स्किन को चमकदार बनाए रखने का एलोवेरा एक करिश्माई तरीका है। यह हमारी स्किन में नमी को बनाए रखता है l इसमें एंटी-एजिंग गुण भी होते हैं जो हमारी स्किन की इलास्टिसिटी को खोने नहीं देते और झुर्रियों को कम करते हैं। इसमें व्याप्त मॉइस्चराइजिंग गुण स्किन में नमी को बरकरार कर ड्राइनेस को पास नहीं आने देते। इसका एंटी- एक्ने गुण मुंहासों को घटाता है और जलन को भी कम करता है।

इस्तेमाल करने का आसान तरीका

  1. आप एलोवेरा जेल को अपनी स्किन पर कभी भी लगा सकती हैं।
  2. अगर आपकी नॉर्मल स्किन है तो आप इसे मॉइस्चराइजर की जगह भी इस्तेमाल में ला सकती हैं।
  3. वरना आप रात को सोने से पहले इससे अपनी स्किन की मसाज करके सोयें।
  4. अगर आपके घर में एलोवेरा का पौधा है तो आप उसकी एक डंडी तोडें और उससे जेल को निकालकर चेहरे पर लगा लें।

2. ग्रीन टी

ग्रीम टी सिर्फ़ पीने के लिए ही नहीं, स्किन पर लगाने के भी काम आता है l ग्रीन टी सूरज की रौशनी से आपके चेहरे को बचाता है और स्किन कैंसर जैसी समस्या से सुरक्षा करता है। यह चेहरे पर निकलने वाले मुंहासों से भी रक्षा करता है और समय से पहले चेहरे पर दिखने वाले उम्र के निशानों को भी कंट्रोल करता है।

उपयोग का तरीका

ग्रीन टी को लगभग आधे कप पानी में उबालें।
इसके बाद इसमें ब्राउन शुगर और मलाई मिलाकर इससे चेहरे की मालिश करें। यह आपकी स्किन को ग्लोइंग बनाता है।

3. नारियल तेल

दक्षिण भारत के लोग नारियल तेल का उपयोग बहुत अधिक करते हैं l यह न सिर्फ एक बढ़िया तरीके से नमी प्रदान करता है, बल्कि हमारी स्किन को ठंडा भी रखता है l सूर्य की तेज रोशनी से हमारी त्वचा को बचाता भी है और बेहतरीन एंटी- एजिंग के तौर पर त्वचा पर दिखने वाले उम्र के असर को रोकता भी है l

पयोग का तरीका

जिस तरह हम क्रीम का उपयोग करते हैं, ठीक वैसे ही हमें नारियल तेल का उपयोग करना चाहिए।
इसे अपनी त्वचा पर लगाना चाहिए।
आप इसे शरीर के हर हिस्से पर लगा सकते हैं।
इससे हमारी त्वचा में कसावट और चमक भी आती है।

4. रोजाना कितना नारियल पानी पीएं

प्रेगनेंसी में महिलाओं को नारियल पानी पीने की सलाह दी जाती है लेकिन आम दिनों में भी इसे कोई भी पी सकता है। इसके रोजाना सेवन करने से कुछ दिनों में ही चेहरे और शरीर के अन्य हिस्सों पर फर्क नजर आने लगेगा।

5. हल्दी

हल्दी को मसलों की रानी कहा गया हैl हल्दी त्वचा की परेशानियों को दूर करने में भी कारगर भूमिका निभाता है। ग्लोइंग फ़ेस के लिए घरेलू नुस्खों में हल्दी फोटोएजिंग व सोराइसिस से हमारी रक्षा करता है। इसमें एंटी- ऑक्सीडेंट गुण होता है, जो बेसन के साथ मिलकर स्किन को एक्सफोलिएट करता है और स्किन में जान ले आता है।

हल्दी के साथ बेसन और पानी मिलाकर इसका स्क्रब बना लें।
फिर इसे चेहरे पर लगाएं और १०-१५ मिनट के बाद जब यह सूख जाए तो हौले से रगड़ते हुए धो लें।
यह उबटन आपकी स्किन पर इतना ग्लो ला सकता है, जितना कोई महंगी क्रीम न कर सके।

6. दूध

दूध त्वचा के लिए भी बहुत पौष्टिक तरीके से काम करता है। यदि आपकी स्किन ड्राई है तो दूध से बेहतरीन कोई और मॉइस्चराइजर नहीं हो सकता। दूध में निहित विटामिन-A आपकी स्किन की चमक बरकरार रखता है।

इस्तेमाल का तरीका

  • कच्चे दूध, बेसन और शहद को मिलाकर एक पैक तैयार कर लें, अब इसे चेहरे पर लगा लें।
  • करीब १५ मिनट बाद इसे धो लें, चेहरा निखर उठेगा।
  • इस पैक को आप हफ़्ते में एक या दो बार भी लगा सकती हैं, यह स्किन से नमी को जाने नहीं देता।
Dark Underarms: If you hesitate to wear the clothes you like due to dark underarms

Underarms Darkness: गर्मियों का सीजन हो या पार्टी का सीजन, स्लीवलेस ड्रेस पहनना हर किसी को भाता है। लेकिन कई लोग अंडरआर्म्स के काले दाग के कारण अपनी पसंद के कपड़े पहनने से हिचकिचाती हैं। डार्क अंडरआर्म्स कोई गंभीर बीमारी नहीं है पर यह आत्मविश्वास को जरूर प्रभावित कर सकता है।

बता दूं कि इसका कारण कई हो सकती है, जैसे बार-बार शेविंग करना, त्वचा पर डेड स्किन का जमा होना, तेज केमिकल वाले डिओडोरेंट का प्रयोग, हार्मोनल बदलाव या कुछ हेल्थ संबंधी हालात। यहां खास बात यह कि सही स्किन केयर रूटीन और कुछ आसान आदतों में बदलाव करके कई मामलों में अंडरआर्म्स का कालापन कम किया जा सकता है। हालांकि, सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले हर घरेलू नुस्खे को आंख बंद करके अपनाना सही नहीं है। अक्सर महिलाएं नींबू, बेकिंग सोडा या अन्य केमिकल प्रोडक्ट्स स्किन पर लगाने से जलन और पिगमेंटेशन बढ़ने का खतरा भी हो सकता है। इसलिए सुरक्षित तरीका अपनाना बेहद जरूरी और कारगर साबित होता है। यहां हम जानेंगे कालेपन को कम करने के उपाय, किन चीजों से बचना जरूरी है और कब डॉक्टर की सलाह लेना है।

अंडरआर्म्स का कालापन कई कारणों से हो सकता है। बार-बार शेविंग करने से त्वचा पर हल्की जलन और पिगमेंटेशन बढ़ सकता है। इसके अलावा,

  • डेड स्किन जमा होना,
  • टाइट कपड़े पहनना,
  • लगातार रगड़,
  • हार्मोनल बदलाव,
  • मोटापा
    कुछ लोगों में इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसी स्वास्थ्य स्थितियां भी इसकी वजह बन सकती हैं। इसलिए सिर्फ रंग हल्का करने पर नहीं, बल्कि कारण को समझकर समाधान अपनाना ज्यादा प्रभावी रहता है।

नियमित एक्सफोलिएशन और मॉइस्चराइजिंग करें

Dark Underarms: If you hesitate to wear the clothes you like due to dark underarms

* अंडरआर्म्स की त्वचा को सप्ताह में 1-2 बार हल्के एक्सफोलिएंट से साफ करने से डेड स्किन हटाने में मदद मिल सकती है।
* इसके बाद खुशबू रहित मॉइस्चराइज़र लगाएं ताकि स्किन सॉफ्ट रहे।
* जरूरत से ज्यादा स्क्रब करने से त्वचा में जलन हो सकती है, इसलिए हल्के हाथों से देखभाल करना बेहतर है।* बार-बार शेविंग करने से त्वचा पर रगड़ बढ़ सकती है।
* बालों की जड़ें दिखाई देने के कारण अंडरआर्म्स ज्यादा काले लग सकते हैं।
* नियमित देखभाल से त्वचा की बनावट और रंगत में धीरे-धीरे सुधार दिख सकता है।
शेविंग की जगह सही हेयर रिमूवल तरीका चुनें
* यदि आपकी त्वचा के लिए उपयुक्त हो तो ट्रिमिंग, वैक्सिंग या अन्य सुरक्षित हेयर रिमूवल विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।
* साथ ही, अल्कोहल या तेज़ खुशबू वाले डिओडोरेंट की बजाय संवेदनशील स्किन के लिए बने उत्पाद चुनना भी फायदेमंद हो सकता है।

Micro Walk: The risks of sitting in a chair and working all day at the office

Micro Walk:

हमारे साथ रहने वाले ऐसे कई लोग करीब 10 घंटे लगातार कंप्यूटर या लौपटॉप पर अपना कार्य करते हैं। ऐसे में जब एक्सरसाइज की बात आती है तो सबसे पहले जुबान पर एक ही पंक्ति आती है, समय नहीं है पर क्या आप जानते हैं कि 10 घंटे के बीच महज कुछ मिनटों के वॉक से आप खुद को फिट रख सकते हैं। ‘माइक्रो वॉक’ लगातार डेस्क पर काम करने वालों के लिए एक शानदार एक्सरसाइज हो सकती है। सिर्फ कुछ मिनटों की एक्सरसाइज आपको कमर और गर्दन में पेन से राहत दिलाने के साथ-साथ मोटापा, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट डिजीज जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी कम हो सकता है। आइये जानते हैं क्या मसले पर क्या है एक्सपर्ट की राय-

जानें क्या है माइक्रो वॉक-

माइक्रो वॉक यानी दिनभर में कई बार 01 से 10 मिनट तक छोटी-छोटी वॉक करना। यानी आपको जिम जाने या लंबा वर्कआउट करने की जरूरत नहीं है। हर 30 से 60 मिनट बाद अपनी कुर्सी से उठकर कुछ मिनट चलना भी माइक्रो वॉक कहलाता है।

एक्सपर्ट का कहना है कि लंबे समय तक लगातार बैठे रहने की आदत शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकती है। ऐसे में दिनभर के दौरान छोटी-छोटी वॉक करने से शरीर एक्टिव रहता है और कई स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा कम किया जा सकता है।

लंबे समय तक बैठे रहने के नुकसान

पूरे दिन बैठे रहने से शरीर की मांसपेशियां कम सक्रिय रहती हैं। इससे ब्लड सर्कुलेशन धीमा पड़ सकता है और शरीर की कैलोरी खर्च करने की क्षमता भी घट जाती है। इसके अलावा ब्लड शुगर कंट्रोल करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है और समय के साथ हृदय रोग का खतरा भी बढ़ सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी लंबे समय तक बैठे रहने को कई नॉन कम्युनीकेबल डिजीज का एक प्रमुख जोखिम कारक मानता है।

ऐसे मिलते हैं माइक्रो वॉक से फायदे-

Micro Walk: The risks of sitting in a chair and working all day at the office

विशेषज्ञ का कहना है कि हर 30 से 60 मिनट में सिर्फ 05 मिनट की वॉक भी शरीर पर पॉजिटिव असर डाल सकती है, जैसे-

1. ब्लड सर्कुलेशन होता है बेहतर

लगातार बैठे रहने से पैरों और शरीर के निचले हिस्से में ब्लड सर्कुलेशन धीमा हो सकता है। कुछ मिनट की वॉक करने से मांसपेशियां सक्रिय होती हैं और पूरे शरीर में रक्त संचार बेहतर होता है। इससे थकान भी कम महसूस होती है।

2. ब्लड शुगर कंट्रोल करने में मदद

खाना खाने के बाद थोड़ी देर टहलने से शरीर ग्लूकोज का बेहतर उपयोग कर पाता है। कई NCBI में छपी रिपोर्ट में पाया गया है कि नियमित माइक्रो वॉक ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखने में मदद कर सकती है।

3. ब्लड प्रेशर हो सकता है कंट्रोल

रिसर्च बताते हैं कि हर आधे घंटे बाद कुछ मिनट पैदल चलने से ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है। यह आदत हृदय स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक मानी जाती है।

4. मूड और फोकस हो सकता है बेहतर

लगातार स्क्रीन पर काम करने से मानसिक थकान बढ़ सकती है। कुछ मिनट की वॉक दिमाग को आराम देती है और काम पर दोबारा ध्यान लगाने में मदद करती है। इससे तनाव भी कम हो सकता है और उत्पादकता बढ़ सकती है।

ऑफिस में माइक्रो वॉक को कैसे बनाएं आदत?

माइक्रो वॉक को अपनी लाइफस्टाइल में शामिल करना मुश्किल नहीं है। इसके लिए आप कुछ आसान तरीके अपना सकते हैं।

  • हर 30 से 60 मिनट बाद अपनी सीट से उठें।
  • लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करें।
  • किसी सहकर्मी से बात करनी हो तो उसके डेस्क तक पैदल जाएं।
  • फोन पर बात करते समय चलते-चलते बातचीत करें।
  • पानी भरने या प्रिंटर तक जाने के लिए खुद पैदल जाएं।
  • मोबाइल या कंप्यूटर में हर घंटे का रिमाइंडर लगाएं।

एक आसान तरीका है माइक्रो वॉक 

एक्सपर्ट का कहना है कि माइक्रो वॉक लंबे समय तक बैठे रहने के नुकसान को कम करने का एक आसान तरीका है, लेकिन इसे नियमित व्यायाम का ऑप्शन नहीं माना जा सकता। बेहतर हेल्थ के लिए हफ्ते में कम से कम 150 मिनट की एक्सरसाइज आवश्यक है।

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Foods For Pregnant Woman

Manson Infections: वैसे तो बारिश का मौसम का सभी को इंतजार होता है लेकिन ये मौसम अपने साथ कुछ संक्रमण भी लेकर आता है। बारिश आते ही गर्मी से निजात तो मिलती है पर यह मौसम हेल्थ पर बुरा असर भी डाल सकता है। खासकर प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए यही मौसम कुछ नई परिशानियों का सबब भी बन जाता है। आइये जानते हैं इस मौसम पर एक्सपर्ट की राय-

वह बताती हैं कि गर्भावस्था में शरीर की इ्मयूनिटी अपने आप कुछ हद तक कमजोर हो जाती है। ऐसा इसलिए होता है ताकि शरीर भ्रूण को बाहरी तत्व समझकर रिजेक्ट न कर दे। लेकिन इसी कारण से मानसून की नमी, जगह-जगह जमा पानी और बैक्टीरिया व फंगस के पनपने के लिए अनुकूल माहौल बनने पर प्रेग्नेंट महिलाएं जल्दी इंफेक्शन की चपेट में आ जाती है।

मानसून में बढ़ने लगते हैं UTI के मामले

If you are troubled by vomiting during pregnancy then don't panic

मानसून में गर्भवति महिलाओं में यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन के मामले अचानक बढ़ जाते हैं और डॉक्टर इसकी वजह भी साफ बताती हैं। नमी वाले मौसम में पसीना और गीलापन त्वचा पर काफी देर तक बना रहता है, जो बैक्टीरिया के पनपने के लिए एकदम सही जगह बन जाता है। इसके साथ ही हार्मोनल बदलाव के चलते वेजाइनल पीएच भी बदलता रहता है। इससे यीस्ट इंफेक्शन जैसी फंगल दिक्कतें भी परेशान करने लगती हैं।

मानसून के मौसम में बालों पर किन चीजों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए?

मानसून में कौन से फल खाने चाहिए? ये 5 फल बढ़ा सकती है आपकी इम्यूनिटी आंखों का सफेद हिस्सा लाल क्यों हो जाता है? जानें इसके कारण और कब डॉक्टर से मिलना चाहिए।

एक्सपर्ट के मुताबिक यहां एक बात ध्यान रखने की जरूरत है कि अगर UTI का समय पर इलाज न हो, तो कुछ गंभीर मामलों में यह प्रीटर्म लेबर यानी समय से पहले डिलीवरी तक की वजह बन सकता है।

ये बीमारियां भी बढ़ा सकती हैं जोखिम

विशेषज्ञ के अनुसार सिर्फ यूटीआई ही नहीं, बल्कि मानसून पानी और मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों का भी सीजन होता है। डेंगू, मलेरिया और टाइफाइड इस मौसम में बड़ा खतरा बनकर सामने आते हैं। प्रेग्नेंसी के दौरान डेंगू होने पर प्लेटलेट्स तेजी से गिर सकते हैं और भी गंभीर रूप ले सकते हैं। वहीं दूषित पानी या खाने से टाइफाइड और पेट के इंफेक्शन होने का खतरा भी बना रहता है। इनका असर सिर्फ मां ही नहीं, बल्कि भ्रूण की सेहत पर भी पड़ सकता है।

इसे भी पढ़ें: बच्चों का Smartphone का ज्यादा इस्तेमाल करना न सिर्फ बच्चों की आंखों पर असर करता है बल्कि दिमाग को खोखला कर देता है! देखें रिसर्च

ऐसे करें बचाव?

विशेषज्ञ की सलाह बहुत सीधी है, सूती और ढीले कपड़े पहनें, इंटिमेट एरिया को सूखा-साफ रखें, और पानी खूब पिएं ताकि UTI से बचा जा सके। घर के आसपास पानी जमा न होने दें, मच्छरदानी या रिपेलेंट का इस्तेमाल करें और बाहर का या कटा हुआ खाना खाने से जितना बचा जाए उतना अच्छा। और सबसे जरूरी- बुखार, जलन, अजीब-सा डिस्चार्ज या पेट दर्द जैसी कोई भी बात नज़रअंदाज़ न करें, फौरन अपने डॉक्टर से मिलें।

ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें?

अगर मानसून में आपको ऐसा लगे कि बुखार, जननांगों में जलन, पेशाब करते समय जलन, भ्रूण की हलचल कम महसूस होना, तेज पेट दर्द, ब्लीडिंग आदि हो रहे हैं तो बिना देर किए डॉक्टर के पास जाएं। उन्हें अपनी समस्या बताएं।

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If there is pain in the breast just before periods

Health First: ज्यादातर महिलाएं बिजी दिनचर्या, केयर संबंधी जिम्मेदारियों या अन्य समस्याओं को मामूली समझकर शुरुआती लक्षणों को दरकिनार कर देती हैं। हालांकि महिलाओं में ये अनदेखे लक्षण कभी-कभी सीरियस बीमारियों के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। थकान और अनियमित मासिक धर्म से लेकर शरीर में होने वाले सूक्ष्म बदलावों तक, इन संकेतों को अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए। महिलाओं की आम स्वास्थ्य समस्याओें को समझना, शुरुआती संकेतों को पहचानना और मेडिकल मदद कब लेनी चाहिए, यह जानना जटिलताओं को रोकने और लंबे हेल्थ के एहसास को सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

महिलाएं अक्सर हेल्थ रिलेटेड लक्षणों तो क्यों करती हैं नजरअंदाज-

महिलाएं अक्सर अपने स्वास्थ्य की तुलना में परिवार और काम को प्राथमिकता देती हैं। इससे अक्सर निदान और उपचार में देरी होती है।

  1.  व्यस्त जीवनशैली और एक साथ कई जिम्मेदारियों को निभाना
  2.  असुविधा या दर्द को सामान्य मानने की प्रवृत्ति• लक्षणों के बारे में जागरूकता का अभाव
  3.  यह मान लेना कि लक्षण अस्थायी हैं या तनाव से संबंधित हैं
    स्वास्थ्य संबंधी वे प्रमुख मुद्दे जिन्हें महिलाएं अक्सर नजरअंदाज कर देती हैं।

लगातार थकान रहना

Stress in women can affect scientific and physical health

थकान महसूस होने को अक्सर तनाव या नींद की कमी बताकर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
• यह एनीमिया , थायरॉइड विकार या पोषण संबंधी कमियों का संकेत हो सकता है।
• लगातार थकान महिलाओं में थकान के सबसे आम कारणों में से एक है, जिसका मूल्यांकन उन्हें करवाना चाहिए।
अनियमित मासिक धर्म
मासिक धर्म की अनियमितताओं को अक्सर सामान्य माना जाता है।
• यह हार्मोनल असंतुलन का संकेत हो सकता है।
• यह पीसीओएस, थायराइड की समस्याओं या तनाव से संबंधित हो सकता है।
• अनियमित मासिक धर्म के कारणों में से एक महत्वपूर्ण कारण है।

बेवजह वजन परिवर्तन

जीवनशैली में बदलाव किए बिना अचानक वजन बढ़ना या घटना होना अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
• यह थायरॉइड संबंधी विकार या चयापचय संबंधी समस्याओं का संकेत हो सकता है।
• हार्मोनल असंतुलन के लक्षणों से जुड़ा हुआ
बार-बार सिरदर्द
सिरदर्द को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है या इसका इलाज खुद ही कर लिया जाता है।
• यह तनाव, माइग्रेन या किसी अन्य अंतर्निहित बीमारी के कारण हो सकता है।
• लगातार सिरदर्द होने पर डॉक्टर से परामर्श लेना आवश्यक है।

स्तन में परिवर्तन

Breast Cancer

स्तन स्वास्थ्य में होने वाले बदलावों को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

• गांठें, दर्द या स्राव
• बेहतर परिणामों के लिए शीघ्र निदान अत्यंत महत्वपूर्ण है।
श्रोणि में दर्द
अक्सर इसे मासिक धर्म की असुविधा मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
• यह एंडोमेट्रियोसिस, संक्रमण या अंडाशय संबंधी समस्याओं का संकेत हो सकता है।
• दीर्घकालिक दर्द के लिए मूल्यांकन आवश्यक है
पाचन संबंधी समस्याएं (पेट फूलना, एसिडिटी)
आमतौर पर इन्हें मामूली समस्याएं माना जाता है।
• इसका संबंध आंतों के स्वास्थ्य या हार्मोनल परिवर्तनों से हो सकता है।
• लगातार बने रहने वाले लक्षण गंभीर समस्याओं का संकेत हो सकते हैं।

नींद की समस्याएँ

Your sleeping position reveals your personality

नींद की कमी को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है या इसे सामान्य मान लिया जाता है।
• यह तनाव, हार्मोनल असंतुलन या मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से संबंधित हो सकता है।
• यह समग्र स्वास्थ्य और ऊर्जा स्तर को प्रभावित करता है।
मनोदशा में परिवर्तन और चिंता
भावनात्मक लक्षणों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
• यह हार्मोनल उतार-चढ़ाव से संबंधित हो सकता है।
• यह चिंता या अवसाद का संकेत हो सकता है।

मनोदशा में परिवर्तन और चिंता

भावनात्मक लक्षणों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।

  • यह हार्मोनल उतार-चढ़ाव से संबंधित हो सकता है।
  • यह चिंता या अवसाद का संकेत हो सकता है।

चेतावनी के संकेत जिन्हें कभी भी अनदेखा नहीं करना चाहिए

इन संकेतों पर जरूर दें ध्यान :

  • ऐसे लक्षण जो कुछ दिनों से अधिक समय तक बने रहते हैं
  • समय के साथ बिगड़ती जाने वाली स्थितियाँ
  • एक साथ कई लक्षण प्रकट होना
  • शरीर में अचानक या असामान्य परिवर्तन

इन लक्षणों को नज़रअंदाज़ करने से होने वाले स्वास्थ्य जोखिम

लक्षणों को नज़रअंदाज़ करने से निम्नलिखित समस्याएं हो सकती हैं:

  • गंभीर बीमारियों के निदान में देरी
  • रोग की प्रगति
  • जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है
  • जीवन की गुणवत्ता में कमी

महिलाओं को डॉक्टर से कब परामर्श लेना चाहिए?

यदि निम्नलिखित स्थितियां हों तो चिकित्सीय सलाह लें:

  • लक्षण अपेक्षा से अधिक समय तक बने रहते हैं
  • अचानक या गंभीर असुविधा होती है
  • समस्याएँ बार-बार सामने आती रहती हैं।
  • ये लक्षण दैनिक जीवन में बाधा उत्पन्न करते हैं।

नियमित स्वास्थ्य जांच का महत्व

नियमित जांच रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

  • स्वास्थ्य समस्याओं का शीघ्र पता लगाना
  • मौजूदा स्थितियों की निगरानी
  • निवारक देखभाल और स्क्रीनिंग।
Excessive smartphone use by children

बच्चों के लिए Smartphone का लत लगना नशा की तरह दिमाग पर हावी हो जाता है जिसे लेकर दुनियाभर के पेरेंट्स परेशान रहते हैं। बता दें कि जहां बच्चे दिनभर खेल-कूदते नजर आते थे और शरारतें करतें थे, अब वे चुपचाप एक कमरे के किसी कोने में घंटों वीडियो और शॉर्ट्स स्क्रॉल करने में व्यस्त दिखाई देते हैं। पेरेंट्स को अच्छे से मालूम होता है कि बच्चे अगर अधिक फोन का इस्तेमाल करेंगे तो उनकी आंखें खराब हो सकती हैं, लेकिन यहां बात आंखें खराब होने तक सीमित नहीं है बल्कि ज्यादा स्क्रीन देखने का प्रभाव बच्चों के दिमाग प  र भी बहुत ज्यादा पड़ रहा है जिसे न तो अभी बच्चे नोटिस कर पा रहें हैं और ना ही पेरेंट्स। इस टॉपिक पर दुनियाभर में कई रिसर्च हो चुकी हैं और ज्यादातर में यह मिला है कि स्मार्टफोन या कोई भी डिजिटल स्क्रीन को लंबे समय तक देखना बच्चे की सिर्फ आंखों पर ही नहीं बल्कि दिमाग पर भी असर डालता है। बच्चों के दिमाग पर स्क्रीन से पड़ रहे कुप्रभाव के बारे में ये रही जानकारियां-

क्या स्मार्टफोन्स के इस्तेमाल से खोखल हो रहा बच्चों का दिमाग?

Excessive smartphone use by children

‘साइंस डायरेक्ट’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक Adolescent Brain Cognitive Development Study (ABCD) की एक रिसर्च में 10 से 13 साल के कई हजारों बच्चों पर अध्यन की गई। जिसमें बच्चों के सोशलमीडिया और स्मार्टफोन्स के इस्तेमाल को एनालाइज किया गया और साथ ही में इमेजिंग स्कैन्स की मदद से उनके ब्रेन की संरचना का निरीक्षण किया गया। जिसमें कुछ क्षेत्रों में पाया गया कि जो बच्चे ज्यादा स्क्रीनटाइम दे रहे हैं या समार्टफोन्स का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, उनकी ब्रेन की कोर्टिकल मोटाई थोड़ी कम मिली और साथ ही ब्रेन वॉल्यूम भी अन्य बच्चों से थोड़ी कम मिली। साइंसडायरेक्ट के एक्सपर्ट्स के ब्रेन की ये दोनों चीजें दिमाग के कई जरूरी कार्यों को करने में मदद करती हैं जैसे –

  1. ध्यान देना या फोकस करना
  2. निर्णय लेना (डिसीजन मेकिंग)
  3. सोचना व समझना (रीजनिंग)
  4. याददाश्त या याद रखने की क्षमता

हालांकि, एक्सपर्ट्स ने यह भी बताया कि बचपन में कोर्टिकल थाइनिंग ब्रेन डेवलपमेंट का एक सामान्य हिस्सा हो सकता है। क्योंकि इस दौरान ऐसे न्यूरल कनेक्शन को हटाता रहता है, जिनकी जरूरत नहीं होती है ताकि न्यूरल नेटवर्क बिना किसी उलझन के सामान्य रूप से काम करता रहे।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स

Excessive smartphone use by children

एक्सपर्ट के अनुसार अगर बच्चा लंबे समय तक स्मार्टफोन्स देखता या फिर उसका स्क्रीनटाइम ज्यादा है, तो उससे बच्चे की आंखों पर विपरीत असर तो पड़ता ही है, दिमाग की कार्यक्षमता और ब्रेन हेल्थ को भी काफी नुकसान पहुंचता है। रिसर्चों में भी साबित हो चुका है कि जिन बच्चों का स्क्रीनटाइम ज्यादा होता है, अन्य बच्चों की मुकाबले उनके दिमाग की क्षमता कम हो सकती है।

बच्चे की स्मार्टफोन की लत कैसे छुड़ाएं

इस समस्या को लेकर डॉक्टर ने बताया कि बच्चे का स्मार्टफोन एडिक्शन खत्म करने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है उसे टाइम देना और जितना हो सके उसे फिजिकल एक्टिविटी में शामिल करना। इसमें ध्यान रखना होगा कि बच्चे को डांटकर उसकी फोन की आदत नहीं छुड़ानी है, बल्कि उसके लिए नीचे लिखी बातों का ध्यान रखना है-

  • सबसे पहले बच्चे के आगे खुद फोन इस्तेमाल करना बंद कर दें।
  • जितना हो सके फोन्स को बच्चों की पहुंच से दूर रखें और ताकि उन्हें फोन की याद न आए।
  • बच्चे को खुद टाइम देना शुरू कीजिए उनसे बातें करें, कहानियां सुनाएं।
  • बच्चे को घर के छोटे-छोटे काम करना सिखाएं जैसे अपना बैग खुद पैक करना।
  • रोजाना बच्चे को आउटडोर एक्टिविटी कराएं, ऐसे स्पोर्ट्स में शामिल करें जिनमें उसकी ज्यादा रुचि हो आदि।
Consuming fenugreek in coconut oil will solve 5 hair problems

Hair Fall: बारिश के मौसम में कई लोग शिकायत करते हैं कि उनके बाल झड़ रहे हैं। अगर इस मौसम में आप भी बालों के झड़ने की समस्या से जूझ रहे हैं तो हम यहां आपको बताने जा रहे हैं कैसे इसे कंट्रोल किया जा सकता है।

बता दें कि बारिश का मौसम गर्मी से राहत तो देता है पर यह मौसम बालों के लिए कई मुश्किलों को लेकर आता है। मानसून आरंभ होते ही काफी लोग बाल झड़ने, चिपचिपे स्कैल्प, डैंड्रफ और बालों के बेजान होने की शिकायत करने लगते हैं। कई लोगों को लगता है कि बारिश का पानी सीधे तौर पर बाल झड़ने की वजह है। मानसून में क्या वास्तव में बाल तेजी से गिरने लगते हैं, अगर हां तो ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए? इस बारे में क्या है एक्सपर्ट की राय-

बारिश के मौसम में बाल झड़ने लगते हैं?

If you are troubled by white hair then do this special exercise daily

एक्सपर्ट के मुताबिक यह कहना गलत होगा सिर्फ मानसून या बारिश ही बालों के झड़ने का कारण है। दरअसल, इस मौसम में बढ़ी हुई नमी, पसीना, स्कैल्प पर गंदगी का जमना और सही देखभाल की कमी बालों की समस्याओं को बढ़ा जाती है। अगर मानसून के दौरान बालों की सही तरीके से देखभाल की जाए, तो हेयर फॉल को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

बारिश में बालों का झड़ना ऐसे करें कम?

मॉडल का हेयर स्टाइल

एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि बारिश के मौसम में जिन लोगों के बाल ज्यादा झड़ने लगते हैं उन्हें कुछ खास उपायों को अपनाना चाहिए। जैसे कि-

अगर आप बारिश में भीग गए हैं, तो घर पहुंचकर बालों को साफ पानी से धो लें। बारिश के पानी में धूल, प्रदूषण और कई तरह के केमिकल्स भी होते हैं जो स्कैल्प को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए बारिश में भीगने के बाद बालों को साफ पानी और शैंपू से धोने स्कैल्प की सही तरीके से सफाई हो जाती है जिससे बालों का झड़ना का कम होता है।

मानसून में हवा में ज्यादा नमी होने के कारण स्कैल्प जल्दी ऑयली हो जाता है। ऐसे में जरूरत के अनुसार सप्ताह में दो से तीन बार माइल्ड शैंपू से बालों को धोना चाहिए। शैंपू के बाद बालों पर कंडीशनर का इस्तेमाल करना जरूरी है।

गीले बाल सबसे ज्यादा कमजोर होते हैं। इस समय कंघी करने से बाल आसानी से टूट सकते हैं। इसलिए बालों के गीले होने पर उसे अच्छी तरह से सूखा लें। बालों के सूखने के बाद चौड़े दांत वाली कंघी से सुलझाने की कोशिश करें।

बालों का झड़ने और गिरने की समस्या न हो इसके लिए स्कैल्प का सही तरीके से साफ होना बहुत जरूरी है। अगर स्कैल्प पर तेल, पसीना और गंदगी जमा होगी, तो हेयर फॉल बढ़ सकता है। इसलिए स्कैल्प को समय- समय पर सही तरीके से साफ करना बहुत जरूरी है।

मानसून के दौरान हेयर ड्रायर, स्ट्रेटनर और कर्लिंग मशीन का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करने से बाल और कमजोर हो सकते हैं। ऐसे मौसम में बालों का झड़ना रोकने के लिए इस तरह की मशीन का इस्तेमाल जहां तक संभव हो कम से कम करें।

एक्सपर्ट कहते हैं कि मानसून में हेयर फॉल बढ़ना एक आम समस्या है, लेकिन सही तरह से केयर से इसे काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। स्कैल्प को साफ रखना, संतुलित आहार लेना, गीले बालों की सही देखभाल करना और जरूरत से ज्यादा केमिकल वाले प्रोडक्ट्स से बचना बालों को हेल्दी बनाता है।

फोटो सौजन्य- गूगल

FIFA World Cup 2026: How do legendary footballers like Messi and Ronaldo stay so fit?

FIFA World Cup 2026: वर्ल्ड कप में खेल रहे फुटबॉल खिलाड़ियों की बात ही अलग होती है, 90 मिनट तक दौड़ना, शरीर को फुर्तीला और लचीला बनाए रखने के साथ-साथ फोकस्ड रहना पड़ता है, जो उनकी फुल फिटनेस को दर्शाता है। क्रिस्टियानो रोनाल्डो और लियोनेल मेसी जैसे फुटबॉल खिलाड़ी को जब हम मैदान में देखते हैं तो अक्सर सोचते हैं कि ये लोग खुद को इतने चुस्त-दुरुस्त कैसे बनाए रखते हैं और कोई भला इतना फुर्तीला कैसे हो सकता है। हालांकि, हमें यह भी पता है कि उनकी फुर्ती और फिटनेस का राज कहीं न कहीं उनकी जीवनशैली और खानपान में ही छिपा है। आगे हम जानेंगे कि आखिर रोनाल्डो और मेसी जैसे स्टार फुटबॉल प्लेयर अपनी फिटनेस को कायम रखने के लिए कैसी जीवनशैली बना के चलते हैं और उनके डाइट में क्या-क्या शामिल होता है।

रोनाल्डो और मेसी का लाइफस्टाइल

FIFA World Cup 2026: How do legendary footballers like Messi and Ronaldo stay so fit?

क्रिस्टियानो रोनाल्डो और लियोनल मेसी का नाम दुनिया के सबसे बड़े फुटबॉल प्लेयर्स में आता है और इनका खास लाइफस्टाइल इन्हें एक फुर्तीला और फिट प्लेयर बनाता है। कुछ वेबसाइट्स रिपोर्ट्स के मुताबिक जानते हैं इन दोनों दिग्गज प्लेयर्स की डाइट और लाइफस्टाइल कैसी है।

रोनाल्डो की डाइट और लाइफस्टाइल

क्रिस्टियानो रोनाल्डो हमेशा अपनी डाइट का खास ध्यान रखते हैं और दिन में तीन बार हेवी डाइट लेने की बजाय थोड़ा-थोड़ा करके दिन में 06 बार खाते हैं। उनकी डाइट में आमतौर पर हाई प्रोटीन फूड्स जैसे अंडे, चिकन और फिश जैसी चीजों को शामिल करते हैं। अलावा इसके फाइबर के लिए सलाद को अपनी डाइट में शामिल करना नहीं भूलते हैं।

इसके अलावा रोनाल्डो अपनी नींद का खास ध्यान रखते हैं, रिपोट्स के अनुसार रोनाल्डो लंबी नींद नहीं लेते हैं बल्कि छोटे-छोटे स्लीप साइकिल्स की मदद से अपनी नींद पूरी करते हैं। डिसिप्लिन्ड न्यूट्रिशन प्लान के अनुसार, अल्कोहल व स्मोकिंग से भी दूर हैं।

लियोनल मेसी की डाइट और लाइफस्टाइल

FIFA World Cup 2026: How do legendary footballers like Messi and Ronaldo stay so fit?

ऑकोडायरियो की मेटाबॉलिक पर दी गई जानकारी के मुताबिक मेसी नेचुरल फूड्स पर ज्यादा ध्यान देते हैं और सा ही हाइड्रेशन का भी खास ध्यान रखते हैं। इसके साथ-साथ मेसी को उनकी कंसिस्टेंसी यानी लगातार ट्रेनिंग करते रहने और एक डिसिप्लिन्ड लाइफस्टाइल जीने की आदत के लिए जाना जाता है।

ऐसे बनाएं स्वयं को फुर्तीला और फिट

अगर आप भी फुटबॉल प्लेयर्स की तरह खुद को फुर्तीला और फिट बनाए रखना चाहते हैं, तो आपको भी अपनी डाइट और लाइफस्टाइल से जुड़ी कुछ खास बातों का ध्यान रखना होगा। एक रिपोर्ट के मुताबिक शरीर को फुर्तीला बनाने के अच्छे लाइफस्टाइल से जुड़ी कुछ आदतों में सुधार करना जरूरी है और सामान्य आदतें क्या होती हैं?

  • रोजाना हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करें
  • डेली पर्याप्त पानी पिएं
  • साइकिलिंग, जॉगिंग और स्विमिंग जैसी एक्टिविटी करें
  • ताजे व पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लें
  • रोजाना पर्याप्त नींद लें, सही समय पर सोएं और सही समय पर उठें
  • मानसिक तनाव को कम करने के लिए मेडिटेशन आदि करें
World No-Tabacco Day: This year, WHO has focused on helping youth and children

World No-Tabacco Day: हर फिल्म से पहले सिनेमा हॉल और टीवी पर एक विज्ञापन चलता है धूम्रपान स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, कृपया इससे दूरी बनाएं। बड़े स्तर पर जागरूकता चलाए जाने के बावजूद भारत के लोग एक बड़ी संख्या में सिगरेट, ई- वेपिंग, बीड़ी और तंबाकू का सेवन करते हैं। तंबाकू सेहत के लिए कितना हानिकारक है, इसके बारे में वैश्विक स्तर पर लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाया जाता है। इस साल विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने युवाओं और बच्चों को तंबाकू और निकोटीन की लत से बचाने पर खास जोर दिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने विशेषकर भारत में युवाओं के बीच तंबाकू के मद्देनजर एक बड़ी चेतावनी दी है।

बड़ी संख्या में तंबाकू का हो रहा है सेवन

आंकड़ों के अनुसार, तंबाकू की वजह से भारत में हर वर्ष करीब 13 लाख लोगों की मौत होती है। सिगरेट और बीड़ी के अलावा गुटखा, खैनी, जर्दा और अन्य तंबाकू उत्पाद भी लोगों की सेहत को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं। भारत में तंबाकू का इस्तेमाल करने वालों की संख्या बहुत ज्यादा है।

सिर्फ मुंह ही नहीं, तंबाकू के सेवन से डैमेज हो सकते हैं शरीर के ये 5 अंग, जानें तंबाकू छोड़ने के आसान उपाय-

पान मसाला और गुटका के विज्ञापनों के लिए फिल्मी सितारे हुए ट्रोल,एक्सपर्ट ने बताया क्यों स्वास्थ्य के लिए ‘खराब’ है तम्बाकू उत्पाद

क्या कहना है विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का ?

World No-Tabacco Day: This year, WHO has focused on helping youth and children

विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि तंबाकू कंपनियां नए-नए तरीकों से युवाओं को अपने प्रोडक्ट्स की ओर आकर्षित करने की हर कोशिश कर रही है और युवा इसके झांसे में आ भी रहे हैं। रंग-बिरंगी पैकेजिंग, फ्लेवर वाले प्रोडक्ट और सोशल मीडिया के जरिए प्रचार से बच्चे और युवाओं के दिमाग को तेजी से प्रभावित कर रहे हैं। इस दौरान WHO ने भारत से तंबाकू और निकोटीन उत्पादों के प्रचार पर सख्ती बढ़ाने की अपील की है।

तंबाकू से होती है घातक बीमारियां ?

तंबाकू शरीर के लगभग हर हिस्से को नुकसान पहुंचाता है। इससे कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसमें मुख्य रूप से शामिल हैः

  • फेफड़ों का कैंसर
  • मुंह और गले का कैंसर
  • दिल की बीमारी
  • हार्ट स्ट्रोक
  • सांस की गंभीर बीमारियां
  • हाई ब्लड प्रेशर
  • प्रेग्नेंसी से जुड़ी परेशानियां

इतना ही नहीं, जो लोग खुद तंबाकू नहीं लेते लेकिन धुएं के संपर्क में रहते हैं, उनकी सेहत पर भी बुरा असर पड़ सकता है।

तंबाकू युवाओं के लिए क्यों है बड़ा खतरा?

हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि ई-सिगरेट और निकोटीन वाले नए उत्पाद युवाओं को तेजी से अपनी गिरफ्त में ले रहे हैं। कई बार बच्चे इन्हें कम नुकसानदायक समझ लेते हैं, लेकिन इनमें मौजूद निकोटीन लत पैदा कर सकता है और दिमाग के विकास को प्रभावित कर सकता है।

तंबाकू छोड़ने के फायदे?

  1. तंबाकू छोड़ने के बाद शरीर खुद को ठीक करना शुरू कर देता है।
  2. 20 मिनट के भीतर दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर सामान्य होने लगते हैं।
  3. 24 घंटे के भीतर दिल के दौरे का खतरा कम होने लगता है।
  4. कुछ हफ्तों में सांस लेने में सुधार महसूस हो सकता है।
  5. लंबे समय में कैंसर और दिल की बीमारी का खतरा काफी कम हो जाता है।
  6. तंबाकू एक ऐसी आदत है जो धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाती है।

भारत में हर साल 13 लाख लोगों की मौत इस वजह से होती है। World No-Tobacco Day हमें याद दिलाता है कि तंबाकू से दूरी बनाकर हम खुद और अपने परिवार को कई गंभीर बीमारियों से बचा सकते हैं।

फोटो सौजन्य- गूगल