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These 5 easy ways can help bridge the growing gap in your relationship

Relation:

एक बेहतर और सामाजिक जिंदगी जीने के लिए सभी रिश्तों का साथ मिलना जरूरी है और हर रिश्ते का अपना अलग रोल होता है। बड़े-बुजुर्ग भी कहते हैं कि खुशहाल जीवन जीने के लिए रिश्तों का होना मायने रखता है। पर रिश्तों को बनाकर रखने के लिए भी बहुत सी चीजों का ध्यान रखना पड़ता है। रिश्तों को निभाने के लिए अगर सबसे पहले कुछ चाहिए तो वह समय है और आजकल लोगों के पास समय की किल्लत रहती है। इस भागदौड़ भरे जीवन में हर कोई अपने काम को लेकर इतना बिजी है कि वह अपने रिश्तों को वक्त नहीं दे पाता है। यही वजह है कि आजकल रिश्तों में दूरी बढ़ती जा रही है, जिसके बाद में गंभीर रिजल्ट भुगतने पड़ सकते हैं। अगर लगता है कि आपके रिश्तों की दूरी बढ़ती जा रही है, तो हम आपको कुछ खास तरीके बताएंगे जिनकी सहायता से आप अपने रिश्तों में बढ़ रही खाई को पाट सकते हैं।

वक्त देना शुरू करें

एक अच्छा रिश्ता निभाने के लिए अगर कोई चीज चाहिए होती है, तो वह समय ही है। समय रिश्ते को निभाने के लिए बहुत जरूरी है। इसलिए अपना काम भी करें लेकिन काम के बीच से ही कुछ समय निकाल कर अपने रिश्तों को दें। काम के बीच कुछ दिन की छुट्टी लेकर घर पर रहें या बाहर कहीं घूमने जाएं।

भावनाओं को समझना जरूरी

These 5 easy ways can help bridge the growing gap in your relationship

रिश्तों दूरी पैदा करने वाले सबसे बड़े कारणों में एक है एक दूसरे की भावनाओं को न समझना। आपके लिए भी जरूरी है कि अपने रिश्तों में एक दूसरे की भावनाओं को आप समझें। ऐसा करने से रिश्तों में आपसी जुड़ाव बढ़ता है और धीरे-धीरे दूरी खत्म हो जाती है।

एक दूसरे को कराए स्पेशल फील

रिश्तों के बीच दूरी किसी भी कारण से आई हो, उसे खत्म करने का सबसे अच्छा तरीका है एक दूसरे को स्पेशल फील कराना। ऐसा करके आप रिश्तों मे आए आपसी मनमुटाव कम कर सकते हैं। आप अपने अपनों के लिए पसंदीदा गिफ्ट दें या फिर कोई सरप्राइज घूमने-फिरने का प्लान रखें।

आपसी विश्वास को कायम रखें

अगर रिश्तों के बीच विश्वात मजबूत है, तो दूरी बनना इतना आसान नहीं है। इसलिए अगर आपको डर है कि कहीं आपके रिश्तों के बीच दूरी आ जाए तो अच्छा विकल्प है कि आप एक अपने रिश्तों के की बीच विश्वास को मजबूत करें। खुलकर अपनों से बात करें अपने दिल की सारी बात बताने व सुनने से धीरे-धीरे विश्वास मजबूत होने लगता है।

पर्सनल स्पेस रिश्तों के बीच मजबूती प्रदान करता है

आपसी रिश्तों के बीच पर्सनल स्पेस का होना भी जरूरी है और इसकी रिस्पेक्ट भी करनी चाहिए। इसलिए जब हम रिश्तों के बीच पर्सनल स्पेस में घुसने की कोशिश करते हैं, तभी रिश्तों में दूरी बढ़ने लगती है। लाइफ पार्टनर हो या कोई कितना भी करीबी रिश्ता हो हर किसी के पर्सनल स्पेस की रिस्पेक्ट करनी चाहिए।

फोटो सौजन्य- गूगल

Do these 4 exercises to get pregnant quickly

Pregnant: मां होने की फीलिंग्स हर महिला का सपना होता है। पर क्या को मालूम है कि मां बनने की प्लानिंग के बारे में सोचना जितना आसान होता है उतना मां बनने में नहीं। प्रेगनेंसी के समय हर महिलाओं को कई वजहों से जूझना पड़ता है। लेकिन इन सबके बीच आप शरीरिक रूप से फिट या फिर मजबूत नहीं हैं तो आपको प्रेगनेंसी के दौरान पीठ दर्द, पैर दर्द और अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में आपको शरीरिक रूप से खुद को फिट और मजबूत बनाना चाहिए। प्रेगनेंसी के दौरान खुद को फिट रखने के लिए आपको कुछ व्यायाम को अपने वर्कआउट में शामिल करना चाहिए, जो आपकी प्रेगनेंसी के सफर को सफल बना सके और आप एक स्वस्थ्य बच्चे को जन्म देने में हर तरह की चुनौतियां का सामना आसानी से कर सके। आइये जानते है उन एक्ससरसाइज के बारे में , जो आपकी प्रेगनेंसी की प्लानिंग को सफल बना सकते हैं।

कार्डियो एक्सरसाइज करें

Do these 4 exercises to get pregnant quickly

अगर आप प्रेगनेंसी की प्लानिंग बना रही हैं तो आपके लिए कार्डियो एक्सरसाइज आपके लिए अत्छा विकल्प साबित हो सकता है। अक्सर प्रेगनेंसी के दौरान ब्लड सर्कुलेशन में खून का तेजी से सर्कुलेट होना, अचानक ह्रदय गति का बढ़ जाना आदि समस्याएं उत्पन्न होने लगती हैं जो कि गर्भापात का कारण भी बन सकती हैं। ऐसे में अगर आप नियमित तौर पर इस एक्सरसाइज को करती हैं तो आप इन सभी बीमारियों से छुटकारा पा सकती हैं। अलावा इसके यह तनाव, डिप्रेशन आदि समस्याओं से भी राहत पहुंचा सकता है।

एरोबिक एक्सरसाइज करें

Do these 4 exercises to get pregnant quickly

अगर आप नियमित तौर पर थोड़ा वक्त एरोबिक एक्सरसाइज में निकालती हैं, तो आप प्रेगनन्सी के समय आने वाली सभी तरह की समस्याओं को कम कर सकती हैं। जी हां एरोबिक एक्सरसाइज जिनमें पैदल चलना, साइकलकिंग करना अदि शामिल होते हैं इन्हें करने से बच्चे को जन्म देते वक्त होने वाले दर्द से राहत मिल सकती है।

पेल्विक फ्लोर को करें ऐसे मजबूत

Do these 4 exercises to get pregnant quickly

प्रेग्नेंसी जैसे-जैसे में पेल्विक हिस्से पर ज्यादा तनाव महसूस होता है। इसलिए इस हिस्से का मजबूत होना बेहद जरूरी होता है, नहीं तो इससे कई तरह की असुविधाओं का सामान करना पड़ सकता है। इसके लिए आप क्विक फ्लिक केगल्स, हील स्लाइड, हैप्पी बेबी पोज़, लंग्स और स्क्वैट्स जैसी एक्सरसाइज कर सकती हैं।

कोर की मासंपेशियों के लिए करें पिलाटे एक्सरसाइजप्रेगनेंसी के स्टेज आगे बढ़ते हैं, तो उस दौरान गर्भाशय और पेट के निचले हिस्से में तेजी से विकास होने लगता है। ऐसे में कोर की मांसपेशियों का हेल्दी होना बहुत जरूरी होता है। क्योंकि यह आपके बढ़े हुए पेट को लचीला बनाने में मदद करती हैं। कोर की मासंपेशियों को मजबूत करने के लिए आप पिलाटे एक्सरसाइज का सहारा ले सकती हैं।

फोटो सौजन्य-  गूगल

Stress in women can affect scientific and physical health

Tension in Women: महिलाओं में टेंशन उनके भावनात्मक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। आप क्रोध, चिड़चिड़ापन, क्रोध, अवसाद, चिंता, मनोबल में बदलाव और हताशा जैसे संकेतों को पहचानती होंगी। पर यह आपके इनर्जी लेवल, भूख, मेमोरी और एकाग्रता को भी प्रभावित कर सकता है। टेंशन से राहत पाने के लिए कई अलग-अलग उपाय उपलब्ध हैं।

क्या होता है महिलाओं में टेंशन?

तनाव जीवन का एक स्वाभाविक हिस्सा है लेकिन महिलाओं के लिए , जिन पर दूसरों की ज़रूरतों का ध्यान रखने का अधिक दबाव होता है, तनाव प्रेरक और साथ ही साथ अत्यधिक बोझिल भी हो सकता है। यह जागरूकता बढ़ा सकता है और ध्यान केंद्रित करने में मदद कर सकता है या फिर यह चिंता और थकावट का कारण बन सकता है। कई महिलाएं इतनी व्यस्त रहती हैं कि उन्हें यह पता भी नहीं हो पाता कि तनाव उन पर कितना हावी होता है।

जब तनाव लंबे समय तक चलने वाला प्रतीत होने लगता है, तो यह सामान्य लगने लगता है। समय के साथ, यह आपके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है।

घर पर तनाव को नियंत्रित करने के लिए आप कुछ कदम उठा सकते हैं। या फिर अधिक सहायता के लिए आप किसी स्वास्थ्य सेवा प्रदाता से संपर्क कर सकते हैं।

महिलाओं में तनाव पुरुषों में तनाव से किस तरह अगल होता है?

Stress in women can affect scientific and physical health

हालांकि हर कोई तनाव का अनुभव करता है, लेकिन यह महिलाओं और पुरुषों को अलग-अलग तरह से प्रभावित कर सकता है। जैसे कि, अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन के 2023 के ‘स्ट्रेस इन अमेरिका’ रिसर्च में निम्नलिखित निष्कर्ष निकले-

  1. महिलाओं ने पुरुषों की तुलना में तनाव का औसत स्तर अधिक बताया।
  2. पुरुषों की तुलना में महिलाओं के यह कहने की संभावना अधिक थी कि उन्हें अधिक भावनात्मक समर्थन की आवश्यकता हो सकती थी।
  3. पुरुषों की तुलना में महिलाएं वित्तीय चिंताओं से अधिक “परेशान” महसूस करती हैं।
  4. महिलाओं में पुरुषों की तुलना में पारिवारिक जिम्मेदारियों और रिश्तों को अपने जीवन में प्रमुख तनाव के कारकों के रूप में मानने की संभावना अधिक थी।
  5. शोधकर्ताओं का मानना ​​है कि जैविक कारक (जैसे हार्मोन ) इस बात को प्रभावित कर सकते हैं कि प्रत्येक लिंग तनाव का अनुभव अलग-अलग तरीके से कैसे करता है। सामाजिक प्रभाव (जैसे समर्थन या परित्याग) भी तनाव को प्रभावित कर सकते हैं।

महिलाओं में तनाव के लक्षण क्या हैं?

तनाव के कई लक्षण होते हैं। हर व्यक्ति तनाव पर अलग-अलग तरह से प्रतिक्रिया करता है। महिलाओं में तनाव के सामान्य लक्षणों में शामिल हैं:

शारीरिक लक्षण : सिरदर्द , नींद आने में कठिनाई , मांसपेशियों में तनाव, दर्द (अक्सर पीठ और गर्दन में), अधिक खाना/कम खाना, त्वचा संबंधी समस्याएं, नशीली दवाओं और शराब का दुरुपयोग , ऊर्जा की कमी, पेट या आंतों में गड़बड़ी, यौन संबंध या अन्य चीजों में रुचि कम होना जिनका आप पहले आनंद लेते थे।

भावनात्मक : चिंता, अवसाद , क्रोध, उदासी, चिड़चिड़ापन, नियंत्रण से बाहर होने की भावना, मनोदशा में उतार-चढ़ाव , हताशा

मानसिक लक्षण : भूलने की बीमारी, चिंता, निर्णय लेने में असमर्थता, नकारात्मक सोच, ध्यान केंद्रित करने में कमी, ऊब, जिन चीजों में आमतौर पर आनंद आता है उनमें रुचि का अभाव, प्रेरणा की कमी, जीवन में अर्थ का अभाव, खालीपन, क्षमा न कर पाना, संदेह, अपराधबोध, निराशा

व्यावसायिक : काम का बोझ, तनाव , लंबे समय तक काम करना, तनावपूर्ण संबंध, एकाग्रता में कमी

सामाजिक : कम घनिष्ठता, अलगाव, पारिवारिक समस्याएं, अकेलापन

महिलाओं में तनाव के क्या कारण होते हैं?
तनाव के कुछ सबसे सामान्य कारण निम्नलिखित हैं:

  • फाइनेंस
  • हेल्थ
  • रिलेशन
  • स्कूल या काम

कई महिलाओं का कहना है कि बच्चों, माता-पिता और घर के कामों जैसी पारिवारिक जिम्मेदारियों से तनाव और अस्वस्थता बढ़ती है। अक्सर महिलाएं अपना ध्यान रखने की बजाय दूसरों की जरूरतों को पूरा करने में अधिक समय व्यतीत करती हैं। हर काम में अच्छा प्रदर्शन करने की चाह रखना स्वाभाविक है। और कभी-कभी, समय या ऊर्जा की कमी होने पर भी “ना” कहना मुश्किल हो जाता है। इससे तनाव के लक्षण भी उत्पन्न हो सकते हैं।

तनाव मेरे स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करता है?

Stress Effects

जब आप लंबे समय तक तनाव महसूस करते हैं, तो इसे दीर्घकालिक तनाव कहा जाता है। इससे कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं, जैसे:

गंभीर या बार-बार होने वाले सिरदर्द ( तनावग्रस्त सिरदर्द और माइग्रेन )
हृदय संबंधी समस्याएं ( उच्च रक्तचाप , हृदय रोग और दिल का दौरा )
चिड़चिड़ा आंत्र सिंड्रोम (आईबीएस)
मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं ( पैनिक डिसऑर्डर , सामान्यीकृत चिंता विकार , गंभीर अवसाद)
मांसपेशियों में तनाव और दर्द
मोटापा (तनाव के कारण वजन बढ़ना)
आघात
कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली (बीमारी के बाद ठीक होने में कठिनाई)
किसी स्वास्थ्य सेवा प्रदाता के मार्गदर्शन में, तनाव का प्रबंधन करने से आपको इन जटिलताओं को रोकने में मदद मिल सकती है।

महिलाएं तनाव को बेहतर तरीके से कैसे प्रबंधित कर सकती हैं?

महिलाएं स्वस्थ आत्म-देखभाल रणनीतियों को प्राथमिकता देकर और उनका अभ्यास करके तनाव को नियंत्रित कर सकती हैं। शुरुआत करने के लिए यहां कुछ सुझाव दिए गए हैं:

संज्ञानात्मक पुनर्परिभाषित करना (यह कहने के बजाय कि “मुझे यह करना है,” यह कहना कि “मुझे यह करने का अवसर मिल रहा है”)
संतुलित आहार लें (जैसे भूमध्यसागरीय आहार )।
प्रकृति का आनंद लें (टहलने जाएं और कुछ देर के लिए भाग-दौड़ भरी जिंदगी से दूर हो जाएं)।
व्यायाम करें या ऐसी शारीरिक गतिविधि में भाग लें जिससे आपका शरीर हिलता-डुलता रहे।
पर्याप्त नींद लें (प्रति रात सात से नौ घंटे)।
विश्राम की तकनीकों का अभ्यास करें (जैसे योग , ध्यान , गहरी सांस लेना)।
कृतज्ञता का अभ्यास करें
अपनी पसंद की गतिविधियों/शौकों के लिए समय निकालें।
दोस्तों और परिवार के साथ समय बिताएं और मेलजोल बढ़ाएं।
डायरी लिखना शुरू करें

इसके बाद, आप अपने मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित करने वाले कुछ सुझावों का पालन कर सकते हैं:

अपने तनाव के स्रोतों को पहचानें। दिन भर आप कैसा महसूस करते हैं और क्या करते हैं, उसे लिख लें। आप कार्यों को बाँटने या ज़रूरत पड़ने पर मदद मांगने के लिए कार्य योजनाएँ बना सकते हैं। विनम्रतापूर्वक लेकिन दृढ़ता से “ना” कहना और अपने लिए सीमाएँ निर्धारित करना महत्वपूर्ण है ।

10 तक गिनें- अगर आप किसी स्थिति से नाराज़ हैं, तो वहां से दूर जाकर 10 तक गिनने की कोशिश करें। तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय कुछ गहरी सांसें लें और रुकें।

जैसे आप दूसरों का ख्याल रखते हैं, वैसे ही खुद का भी ख्याल रखें । आप दूसरों के प्रति दयालु हैं, इसलिए खुद के प्रति भी दयालु रहें। याद रखें, किसी और की मदद करने से पहले आपको खुद को ऑक्सीजन देनी होगी।

सामाजिक सहयोग प्राप्त करें । जरूरत के समय मदद मांगना मुश्किल हो सकता है। कई महिलाओं को मुश्किल समय में किसी ऐसे व्यक्ति का साथ मददगार लगता है जिस पर वे भरोसा कर सकें।

डिजिटल/सोशल मीडिया से कुछ समय के लिए दूरी बनाएं । जब भी संभव हो, स्क्रीन से ब्रेक लें ।

मदद लें- जरूरत पड़ने पर किसी स्वास्थ्य सेवा प्रदाता से बात करना ठीक है। वे तनाव से निपटने में आपकी मदद करने के लिए थेरेपी जैसे विभिन्न संसाधनों की सलाह दे सकते हैं ।

फोटो सौजन्य- गूगल

Shab-e-Barat is the night of worship, mercy, forgiveness and virtues

इस्लाम में Shab-E-Barat त्योहार की इस्लाम में बहुत अहमियत है। इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक शाबान महीने की 15वीं तारीख की रात में शब-ए-बारात मनाई जाती है जो मंगलवार को देश भर में मनाई गई। शब-ए-बारात इबादत, रहमत, मगफिरत और फजीलतों की रात के तौर पर मानी जाती है। जिसे लेकर मुस्लिम समुदाय के सभी लोग पूरी रात अल्लाह से अपने किए गए गुनाहों की माफी मांगते हैं।

Shab-e-Barat is the night of worship, mercy, forgiveness and virtues

खुदा की इबादत का यह दिन बहुत ही खास और पवित्र तरीके से मनाते हैं। शब-ए-बारात के मौके पर मस्जिद और कब्रिस्तानों को खास तरीके के सजाया जाता है। कब्रिस्तान में चारों तरफ रोशनी की जाती है, साथ-साथ कब्रों पर चिराग जलाकर मगफिरत की दुआएं मांगी जाती है। लोग मस्जिदों और कब्रिस्तानों में जाकर अपने पूर्वजों के लिए अल्लाह की इबादत करते हैं। इसे चार मुकद्दस रातों में से एक मानते हैं जिसमें पहली आशूरा की रात, दूसरी शब-ए-मेराज, तीसरी शब-ए-बारात और चौथी शब-ए-कद्र की रात होती है।

Shab-e-Barat is the night of worship, mercy, forgiveness and virtues

मुस्लिम में शिया समुदाय शब-ए-बारात को इमाम-ए-जमाना हजरत मेहदी की पैदाइश की खुशी में मनाते हैं उनका मानना है कि अल्लाह इमाम-ए-जमाना के जन्मदिन की खुशी में अपनी रहमतें बरसाते हैं। इसलिए इस्लाम के सभी समुदाय के लोग रात भर जागकर नमाज़ और कुरान की तिलावत करते हैं। इमाम-ए-जमाना की पैदाइश के मौके पर शिया समुदाय जगह-जगह महफिलों भी करते हैं।

बता दें कि शब-ए-बारात पर घरों को विशेष रूप से सजाते हैं और लजीज पकवान जैसे- बिरयानी, हलवा और हलीम आदि बनाया जाता है और इबादत के बाद गरीबों में भी बांटा जाता है।

फोचो सौजन्य- गूगल

Why did Arijit Singh say goodbye to playback singing at the peak of his career

जब से मशहूर प्लेबैक सिंगर Arijit Singh ने फिल्मों में गायकी से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है, जिसके बाद ये खबर लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। इस ऐलान के बाद करोड़ों फैंस का दिल टूट गया है। संगीत और फिल्म जगत में तरह-तरह के अफवाह उड़ाए जा रहे हैं। हालांकि सोशल मीडिया के जरिए अरिजीत ने स्प्षट कर दिया कि वह संगीत नहीं छोड़ रहे हैं, बल्कि सिर्फ फिल्मों के लिए गाना बंद कर रहे हैं। पर इस फैसले के पीछे केवल थकान ही वजह नहीं मानी जारी है।

अरिजीत ने सलमान खान की फिल्म ‘बैटल ऑफ गलवान’ में भी गाना गाया है ‘मातृभूमि’, जिसे हाल ही रिलीज किया गया। वहीं, ‘बॉर्डर 2’ में ‘घर कब आओगे’ गाना गाया। जहां फैंस भावुक हो गए, वहीं हर कोई यह भी जानना चाहता है कि आखिर अरिजीत सिंह ने क्यों प्लेबैक सिंगिंग छोड़ने और इससे संन्यास लेने का फैसला किया? ऐसी क्या वजह रही कि उन्हें इतनी कम उम्र में ही सिंगिंग से संन्यास के बारे में सोचना पड़ा?

इस साल लाइन में कई बड़े प्रोजेक्ट्स हैं और यकीनन अरिजीत सिंह के पास भी कई प्रोजेक्ट और गाने होंगे, लेकिन सिंगर ने साफ-साफ कह दिया कि वह अब और कोई प्रोजेक्ट साइन नहीं करेंगे। उन्होंने अपना फैसला अपने X अकाउंट पर 27 जनवरी को सुनाया। बाद में इंस्टाग्राम पर एक स्टेटमेंट जारी किया। अरिजीत सिंह के फैसले से लोग काफी हैरान हैं और सिंगर से अपील कर रहे हैं कि वो प्लेबैक सिंगिंग से संन्यास के अपने फैसले पर दोबारा सोचें। पर साथ ही जानना चाह रहे हैं कि वो चीज क्या है, जिसके कारण अरिजीत ने ऐसा फैसला लिया?

अरिजीत सिंह ने खुद बताया क्यों लिया संन्यास

अरिजीत सिंह ने इसका जवाब अपने ट्वीट में ही दे दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि न तो यह फैसला जल्दबाजी में लिया है और ना ही यह किसी एक घटना की वजह लिया गया है। उन्होंने लिखा, ‘इसका सिर्फ एक कारण नहीं है, इसके कई पहलू हैं, और मैं काफी समय से इस पर विचार कर रहा था। आखिरकार, मैंने हिम्मत जुटा ली।’

‘मेरी दिलचस्पी जल्दी खत्म हो जाती है, मैं थक गया हूं’

अरिजीत सिंह ने आगे लिखा, ‘इसका एक कारण बहुत ही सीधा और सिंपल है, और वो ये कि मेरी दिलचस्पी जल्दी ही खत्म हो जाती है, इसीलिए मैं अकसर अपने गानों की धुन बदलता रहता हूं और उन्हें लाइव प्रेजेंट करता हूं। तो, सच्चाई यह है कि मैं थक गया हूं। मुझे आगे बढ़ने के लिए अलग-अलग तरह के म्यूजिक को आजमाना होगा।’

अरिजीत नए आर्टिस्टों को मौका देना चाहते हैं

 

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अरिजीत सिंह ने यह भी लिखा कि वह आगे आने वाले समय में नए आर्टिस्टों के लिए जगह बनाना चाहते हैं, और प्लेबैक सिंगिंग से संन्यास लेने का उनका एक कारण यह भी है। उन्होंने लिखा, ‘एक और कारण यह है कि मैं नए सिंगर्स को सुनने के लिए उत्सुक हूं जो मुझे वास्तव में इंस्पायर कर सकें।’

बताता चलूं कि बहुत कम लोगों को पता है कि अरिजीत सिंह की दिलचस्पी फिल्म निर्देशन में भी है।

अरिजीत ने आगे लिखा कि इतने सालों तक आपने मुझे जो प्यार और सम्मान दिया, उसका दिल से धन्यवाद। मुझे यह बताने में बहुत खुशी हो रही है कि मैं अब प्लेबैक सिंगर के तौर पर कोई नए असाइनमेंट्स नहीं लूंगा। मैं इस चैप्टर को यहीं खत्म कर रहा हूं। ये सफर शानदार रहा।’

अरिजीत सिंह का करियर और स्टारडम

अरिजीत सिंह के करियर की बात करें, तो वह साल 1987 में पश्चिम बंगाल के जीयागंज में पैदा हुए थे। उनकी मां क्लासिकल सिंगर थीं और मौसी तबला वादक, तो इस नाते उन्हें म्यूजिक विरासत में मिला। बाद में अरिजीत ने क्लासिकल म्यूजिक की ट्रेनिंग लेनी शुरू कर दी। फिर साल 2005 में उन्होंने रियलिटी शो ‘फेम गुरुकुल’ में हिस्सा लिया। अरिजीत सिंह यह शो नहीं जीत पाए, पर जजों और लोगों का दिल जरूर जीत लिया। फिर अरिजीत सिंह ने ’10 के 10 ले गए दिल’ जीता। अरिजीत सिंह के बॉलीवुड करियर में सबसे बड़ा ट्विस्ट ‘आशिकी 2’ के गाने ‘तुम ही हो’ के बाद आया, जिसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

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Say goodbye to unwanted grey hair

Natural Hair Dye: बचपन में जब हम बालों को लहराते घूमा करते थे और हमें अपने बालों की कोई फिक्र नहीं रहती थी। ऐसा लगता था मानों सबसे खूबसूरत बाल हमारे ही हैं। और आज याद करते हैं कि काश वो बेफिक्री, वो चमक वो खुशी, वो एहसास काश कोई लौटा दे, क्योंकि आजकल कम उम्र में सफेद होते बाल और उनका रुखापन, बेजान होकर झड़ना एक आम बात बन चुकी है। सफेद बालों को तो केमिकल हेयर डाई बालों को तुरंत रंग तो देती है पर लंबे वक्त तक इसका इस्तेमाल करने से नुकसान भी पहुंचाती है। ऐसे में केमिकल हेयर डाई की जगह क्यों ना दादी-नानी के नुस्खे को आजमाया जाए, जो कि भरोसेमंद भी है। वर्षों से अपनाए जाने वाला आंवला नुस्खा जो एक अच्छा प्राकृतिक उपाय है, जो बालों को गहरा रंग देने के साथ-साथ उन्हें मजबूत और चमकदार भी बनाता है। बता दें कि सही तरीके से प्रयोग करने पर यह बालों को नेचुरल ब्लैक टोन देने में मदद भी करता है।

ये है बालों के लिए आंवला के फायदे

Say goodbye to unwanted grey hair

कई शोध इस बात को साबित करते हैं कि आंवला विटामिन- C, एंटीऑक्सीडेंट और मिनरल्स से भरपूर होता है। साथ ही बालों में इसका इस्तेमाल करने से बालों की जड़ों को जबरदस्त मजबूती मिलती है, हेयर फॉल कम करता है और समय से पहले बालों के सफेद होने वाली समस्या कम हो जाती है। साथ ही इसके नियमित उपयोग से बालों में प्राकृतिक चमक आती है और स्कैल्प हेल्दी रहने लगते हैं। यही वजह है कि आंवला को नेचुरल हेयर डाई के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है।

नेचुरल आंवला डाई बनाने का आसान तरीका

आमला से नेचुरल हेयर डाई बनाने के लिए सबसे पहले आपको कुछ नेचुरल चीजों की जरूरत होगी जैसे 4,5 चम्मच आंवला पाउडर, 2 चम्मच मेहंगी, 1 चम्मच कॉफी पाउडर और जरूरत के अनुसार पानी। जब आप इन सभी चीजों को सही मात्रा में तैयार कर लेते हैं, तो उसके बाद आपको ये सभी चीजें एक कटोरे में डालनी हैं और एक गाढ़ा पेस्ट तैयार कर लेना है। अब आप इसको 30 मिनट के लिए ढककर रख दें, ताकि सारे तत्व अच्छी तरह एक्टिव हो जाएं और बालों को सही पोषण प्रदान कर सके।

सही तरह से लगाएं नेचुरल डाई

Consuming fenugreek in coconut oil will solve 5 hair problems

इस नेचुरल डाई को लगाने के लिए पहले बालों को हल्का गीला कर लें। अब तैयार पेस्ट को ब्रश या हाथों से बालों की जड़ों तक लगाएं। कोशिश करें कि आपके पूरे बाल कवर हो जाएं। अब कुछ देर के लिए शॉवर कैप पहन लें। इसे करीब एक घंटे तक सिर पर लगाएं। अब आप इसे सादे पानी से धो लें। हां, शैंपू न करें, वरना सारे जरूरी पोषक तत्व खत्म हो जाएंगे।

बेहतर रिजल्ट के लिए जरूरी टिप्स

आप हफ्ते में सिर्फ एक बार इसका इस्तेमाल करें, ज्यादा इस्तेमाल बालों को नुकसान पहुंचा सकता है लेकिन आप पहले पैच टेस्ट जरूर करें, ताकि बालों को किसी भी तरह के नुकसान से बचाया जा सके। साथ ही डाई लगाने के बाद 24 घंटे तक शैंपू न करें, इससे बालों को पोषक तत्वों के अवशोषण का समय मिल जाएगा। वही जब आप इसका नियमित उपयोग करेंगे तो रंग और असर दोनों बेहतरीन हो जाएंगे।

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The festival of Makar Sankranti is associated with faith, tradition, social unity and health

Makar Sankranti:

मकर संक्रांति के अवसर पर पूरे देश में तिल-गुड़ और खिचड़ी खाने और खिलाने का रिवाज है। लेकिन हमारे देश में एक हिस्सा ऐसा भी है जहां पर मकर संक्रांति के दिन दही-चुड़ा खाया जाता है।

मकर संक्रांति पर क्यों खाया जाता है?

भारत के हर हिस्से में मकर संक्रांति का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस साल मकर संक्रांति का त्योहार 14 और 15 जनवरी को मनाया जा रहा है। मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे उत्तरायण कहा जाता है।मकर संक्रांति के खास दिन तिल और गुड़ के लड्डू, खिचड़ी, पूरन पोली, गजक और उंधियू जैसे पकवान बहुत ही चाव से खाए जाते हैं। मकर संक्रांति के दिन तिल-गुड़ तो हर हिस्से में खाया जाता है। लेकिन भारत का एक हिस्सा ऐसा भी है जहां पर मकर संक्रांति के दिन दही-चूड़ा खाया जाता है।

मिथिला में मकर संक्रांति के दिन खाया जाता है दही और चूड़ा

The festival of Makar Sankranti is associated with faith, tradition, social unity and health

मिथिला में मकर संक्रांति केवल एक त्योहार नहीं बल्कि आस्था, परंपरा, सामाजिक एकता और स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ उत्सव है। इस दिन सबसे विशेष रूप से दही-चूड़ा खाया ही जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दही को हिंदू धर्म में शुद्ध और सात्विक माना गया है। वहीं, चावल को अन्न का राजा कहा जाता है। मकर संक्रांति पर सात्विक भोजन करने का विधान है। इसलिए मिथिला में मकर संक्रांति के दिन दही-चूड़ा खाया जाता है।

दही -चूड़ा खाने के फायदे

आयुर्वेद के मुताबिक चूड़ा कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होता है और दही शरीर में गर्मी को बनाए रखता है। मकर संक्रांति का त्योहार सर्दियों में मनाया जाता है। दही- चूड़ा को एक साथ खाने से सर्दियों में शरीर को अंदर से गर्म बनाए रखने में मदद मिलती है। ये कॉम्बो शरीर को बीमारियों से लड़ने की ताकत अंदर से देता है।

पाचन तंत्र को करता है मजबूत

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन पर प्रकाशित रिसर्च के अनुसार दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स होते हैं। दही खाने से पेट में गुड़ बैक्टीरिया बढ़ते हैं। इससे कब्ज, गैस और अपच की परेशानी दूर होती है। वहीं, चूड़ा पचाने में आसान होता है। जब आप दही और चूड़ा को एक साथ खाते हैं तो इससे मल नरम होता है। इससे सुबह पेट अच्छे से साफ होता है और पाचन तंत्र को मजबूत बनती है।

इम्यूनिटी स्ट्रांग करता है दही-चूड़ा

दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। मकर संक्रांति के खास मौके पर दही- चूड़ा खाने से शरीर की सर्दी में कम होने वाली इम्यूनिटी बढ़ती है। इससे सर्दी, खांसी और जुकाम की समस्या घटती है। जिन लोगों की इम्यूनिटी काफी कमजोर हैं, उन्हें मकर संक्रांति के दिन दोपहर के खाने में दही- चूड़ा जरूर खाना चाहिए।

हड्डियों और दांतों के लिए फायदेमंद

बता दें कि दही में कैल्शियम और फॉस्फोरस होता है। जबकि चूड़ा आयरन, फाइबर व प्रोटीन का अच्छा सोर्स है। जब आप दही- चूड़ा को एक साथ खाते हैं तो ये शरीर की हड्डियों और दांतों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। दही-चूड़ा खाने से शरीर को कैल्शियम मिलता है। इससे हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद मिलती है।

शरीर को देता है ऊर्जा

मकर संक्रांति के दिन अक्सर लोग सुबह जल्दी स्नान आदि करके पूजा, पाठ और दान करते हैं। इस प्रक्रिया को अपनाने के बाद शरीर को एनर्जी की जरूरत होती है। दही- चूड़ा खाने से शरीर को तुरंत एनर्जी मिलती है। खाने के बाद दही- चूड़ा तुरंत ग्लूकोज में बदल जाता है। इससे शरीर को ताजगी व एनर्जी मिलती है।

मकर संक्रांति के दिन कब खाएं दही-चूड़ा

परंपरा के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन दही -चूड़ा नाश्ते में तिलकुट, गुड़, सब्जी, अचार और चटनी के साथ खाया जाता है। कुछ लोग दोपहर के खाने में भी दही चूड़ा खाते हैं। आप अपनी हिसाब से मकर संक्रांति के दिन दही-चूड़ा खाने का मजा सकते हैं। ध्यान रहे कि किसी भी परिस्थिति में दही-चूड़ा रात को ना खाएं।

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First Time Sex

Thyroid Affects:आजकल के गलत खानपान और खराब लाइफस्टाइल की वजह से थायराइड प्रॉब्लम लोगों में आम बात हो गई है। बता दें कि थायराइड एक तितली के साइज की ग्रंथि होती है, जो गर्दन के भीतर मौजूद होती है। यह ग्लैंड थायरोक्सिन हार्मोन का उत्पादन करती है, जो शरीर के मेटाबॉलिक रेट और एनर्जी लेवल को नियंत्रित करता है। जब थायराइड ग्लैंड अपना काम ठीक से करना बंद कर देती है, हाइपोथायरायडिज्म और हाइपरथायराइडिज्म की समस्या होती है। थायराइड की बीमारी होने पर कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसकी वजह से तेजी से वजन में बदलाव, कमजोरी, चिड़चिड़ापन, मूड स्विंग्स, मसल्स में दर्द, कब्ज, स्किन ड्राई होना और बाल गिरने जैसी समस्याएं हो सकती है। अलावा इसके थायराइड की समस्या का असर सेक्स लाइफ पर भी पड़ता सकता है। आइए जानते हैं थायराइड के कारण सेक्स लाइफ कैसे प्रभावित होती है-

कैसे प्रभावित करता है महिलाओं की सेक्स लाइफ को थायराइड-

A Strong relationship needs regular sex

हाइपोथायरायडिज्म या कम सक्रिय थायरॉयड के कारण अक्सर थकान, अवसाद और कमजोरी जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं। अत्यधिक थकान या कमजोरी के कारण महिला की सेक्स ड्राइव प्रभावित हो सकती है। इससे यौन इच्छा में बदलाव हो सकता है और यौन क्रिया में कमी भी आ सकती है। अलावा इसके, हाइपोथायरायडिज्म के कारण योनि में सूखापन हो सकता है। दरअसल, थायराइड की समस्या की वजह से वजाइनल ल्युब्रीकेंट कम हो जाता है। यह यौन गतिविधि को असुविधाजनक या यहां तक ​​कि दर्दनाक बना सकता है।

वहीं दूसरी तरफ, हाइपरथायरायडिज्म या अतिसक्रिय थायराइड के कारण चिंता, बेचैनी, एंग्जायटी और सोने में कठिनाई जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इन सभी समस्याओं का सेक्स लाइफ पर बुरा असर पड़ता है। इसके कारण यौन इच्छा में कमी आ सकती है और इंटिमेसी भी प्रभावित होती है। जब आप थायरॉयड विकार से पीड़ित होते हैं, तो आपके टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम हो सकता है। यह आपकी कामेच्छा को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है।

क्या है इलाज?

अगर कोई लेडी इन समस्याओं का सामना कर रही है, तो उसे डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है। दवाओं और उचित उपचार से थायरॉयड के लक्षणों को कम करने में मदद मिल सकती है। संतुलित आहार और नियमित व्यायाम से हार्मोनल संतुलन बनाए रखा जा सकता है और ऊर्जा के स्तर में सुधार किया जा सकता है। इसके अलावा, अपनी भावनाओं और समस्याओं के बारे में अपने साथी के साथ खुलकर बात करें। इससे आपका रिश्ता मजबूत होगा और आपका पार्टनर उपचार प्रक्रिया के दौरान आपको भावनात्मक समर्थन प्रदान कर सकता है। ध्यान रखें कि थायराइड का समय पर इलाज किया जाए और इसे दवाओं से कंट्रोल में रखा जाए, तो लगभग सभी सेक्स प्रॉब्लम आसानी से दूर हो सकती हैं।

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If you want to look stylish in New Year Party

New Year Party Makeup: नया साल दस्तक दे रहा है ऐसे में पार्टी सीजन में सबसे स्टाइलिश और खूबसूरत दिखने के लिए लड़कियां पहले से कपड़ो से लेकर फुटवियर और ज्वेलरी तक की खरीदारी कर लेती हैं। लेकिन नए साल पर सिर्फ कपड़ों से कोई खास प्रभाव नहीं हो पाता, इसके लिए फेस पर ग्लो भी अहम रोल अदा करता है। मेकअप आपका आत्मविश्वास बढ़ाता है, आपकी सुंदरता में चार चांद लगाता है और पार्टी में आपको अलग व खास बना सकता है। न्यू ईयर पार्टी के लिए जाना है तो तैयार होने के लिए कुछ मेकअप टिप्स को फॉलो करें। जरूरी है ऐसा मेकअप, जो आपकी रियल खूबसूरती को उभार दे।

हालांकि ज्यादा मेकअप चेहरे को ढक देता है, जबकि सही मेकअप चेहरे के एक्सप्रेशन को और निखार देता है। अगर आप चाहती हैं कि लोग आपके लुक की जमकर तारीफ करें तो नए साल की पार्टी के लिए इस तरह के मेकअप गाइड को अपनाएं।

नया साल पर पार्टी मेकअप गाइड स्टेप्स

स्टेप- 1. मेकअप के लिए स्किन को करें तैयार

If you want to look stylish in New Year Party

पार्टी मेकअप से पहले फेस अच्छी तरह क्लीन करें। स्किन टाइप के मुताबिक मॉइस्चराइज़र जरूर लगाएं। हल्का प्राइमर लगाकर बेस को स्मूद बनाएं। ध्यान रखें, मेकअप तभी अच्छा दिखता है, जब स्किन हेल्दी हो।

स्टेप 2- बेस मेकअप

बेस मेकअप कम लगाएं पर सही लगाएं। फाउंडेशन की जगह बीबी या सीसी क्रीम बेहतर विकल्प है। कंसीलर सिर्फ डार्क सर्कल और दाग पर लगाएं। ज़्यादा पाउडर लगाने से बचें, वरना चेहरा फ्लैट दिखेगा।

स्टेप 3- ऐसे करें आई मेक अप्लाई

ये पार्टी लुक को इन्हेंस करता है। सॉफ्ट शिमर आई मेकअप अपना सकते हैं। पार्टी के लिए ब्रॉन्ज, गोल्ड या पीच आईशैडो को अप्लाई करें। पतली विंग्ड आईलाइनर और मस्कारा आपकी आंखों को खूबसूरत बना सकता है। भारी नकली लैश से बचें, नेचुरल ही प्यारा लगता है।

स्टेप 4- ब्लश और हाइलाइट

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ये चेहरे में जान डाल देते हैं। इसके लिए पीच या रोज ब्लश लगाएं। गालों के अपर बोन पर हल्का सा हाइलाइटर लगाएं। ज़्यादा चमक से बचें, नहीं तो फोटो खराब आएंगी।

स्टेप 5- लिपस्टिक लगाने लगाते वक्त रखें ध्यान

ऐसी लिपस्टिक लगाएं जो आपकी पर्सनैलिटी को जाहिर करें। पार्टी में न्यूड पिंक, बेरी या सॉफ्ट रेड शेड लिपस्टिक लगाएं। बहुत डार्क लिपस्टिक तभी अप्लाई करें, जब आई मेकअप हल्का हो। ग्लॉस सिर्फ़ सेंटर में लगाएं।

हेयर स्टाइल

मेकअप और पूरे लुक को पूरा करने के लिए हेयर स्टाइल पर भी फोकस करना जरूरी है। ओपन वेव्स और सॉफ्ट मेकअप सबसे सेफ विकल्प है। हाई बन बना रही हैं तो बोल्ड लिप एलिगेंट लुक देगा।

पार्टी मेकअप में ऐसी गलतियां से बचें

  1. पार्टी से ठीक पहले कोई नया प्रोडक्ट ट्राय न करें।
  2. मेकअप करते समय बहुत मोटा फाउंडेशन न लगाएं।
  3. मेकअप के पहले या बाद में स्किन केयर को भूले नहीं।
  4. आंख और होंठ दोनों को मेकअप से बहुत बोल्ड न करें। अगर हैवी हाई मेकअप है तो लिप्स शेड हल्का होना चाहिए।
  5. अक्सर लोग चेहरे पर फाउंडेशन या मेकअप अप्लाई करते हैं लेकिन गर्दन पर नहीं। जिससे गर्दन और चेहरे का शेड मैच नहीं होता है।

 

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Libido: 3 home remedies to increase libido without medication

Libido: कामेच्छा की कमी आधुनिक जीवनशैली में कई लोगों की समस्या बन चुकी है। लोगों की लाइफस्टाइल में तनाव, एंग्जायटी, अनहेल्दी इटिंग और लगातार भागदौड़ के बीच उनकी फिजिकल और मेंटल हेल्थ के साथ-साथ सेक्सुअल लाइफ पर भी प्रभाव पड़ता है और आहिस्ता-आहिस्ता लोगों में सेक्स करने की इच्छा में कमी आने लगती है। लंबे वक्त तक कमेच्छा में कमी की समस्या की वजह से लोगों की शादीशुदा जिंदगी पर भी असर पड़ सकता है और इससे रिश्तों में गैप बढ़ जाता है। हालांकि, कई बार लोग कमेच्छा बढ़ाने के लिए दवाओं का सहारा भी लेते हैं। पर, इन दवाओं के दुष्प्रभाव होते हैं जो लंबे वक्त तक दिखायी दे सकते हैं।

ऐसे में दवाओं के बिना नेचुरली कामेच्छा बढ़ाने के लिए क्या करना चाहिए और किस तरह की सावधानियां बरतने से कामेच्छा की कमी दूर हो सकती है।

नेचुरली कामेच्छा बढ़ाने के उपाय क्या हैं?

Libido: 3 home remedies to increase libido without medication

सेक्स जीवन का एक अहम हिस्सा है और हेल्दी सेक्स लाइफ के लिए कामेच्छा काफी अहम है। अगर आपकी कामेच्छा कम है और आप इसे बढ़ाना चाहते हैं तो आपको खास कर तीन स्टेजेस पर काम करना होगा। ये स्टेज हैं शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्तर।

शारीरिक स्तर पर कामेच्छा बढ़ाने के लिए डाइट में बदलाव जरूरी

अच्छी डाइट हेल्दी शरीर और हेल्दी लिबिडो लेवल के लिए भी जरूरी है। आप अपनी कम कमेच्छा की समस्या से राहत पाना चाहते हैं तो आप अपनी डाइट में बदलाव करें। अपनी डेली डाइट में बदलाव करें। आप जिंक और एल-आर्जिनिन जैसे तत्वों से भरपूर फूड्स जैसे- बींस, सीड्स, लॉब्स्टर्स और प्याज जैसी चीजों का सेवन करें।

कामेच्छा बढ़ाने के लिएआप चॉकलेट, अनार, एवोकाडो, ग्रीन टी, पम्पकिन सीड्स और तरबूज जैसे फूड्स का सेवन कर सकते हैं।

इन सबके साथ आप प्रोसेस्ड फूड्स से परहेज करें क्योंकि, प्रोसेस्ड फूड्स आपके शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं और लिबिडो भी कम करते हैं।

रोजाना करें एक्सरसाइज

रोजाना हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करें। आप मसल्स स्ट्रेंथनिंग एक्सरसाइज, कार्डियाक एक्सरसाइज करें। आप रोजाना योगाभ्यास कर सकते हैं और मेडिटेशन का भी अभ्यास करें। इससे आपको कामेच्छा बढ़ाने में मदद मिलेगी।

नींद की कमी ना होने दें

Libido: 3 home remedies to increase libido without medication

इन सबके अलावा रोजाना 6-7 घंटे की गहरी नींद सोएं। इससे आपका तनाव कम होगा और कामेच्छा बढ़ाने में भी आसानी होगी।

अपनी बीमारियों को करें मैनेज

अगर आपको हाइपटेंशन, मोटापा या अन्य किसी प्रकार की पुरानी स्वास्थ्य समस्या या क्रोनिक डिजिज है तो उसे मैनेज करें और नियंत्रित रखने के लिए जरूरी उपाय करें।

इन आदतों से बचें

अल्कोहल का सेवन करते हैं तो उसे धीरे-धीरे बंद कर दें। इसी तरह स्मोकिंग से भी कामेच्छा कम होती है इसीलिए, आप अपनी धूम्रपान की आदत छोड़ दें।

इंटीमेसी के लिए निकालें कीमती समय

अपनी व्यस्त जीवनशैली के बीच अपने पार्टनर के लिए समय जरूर निकालें। अपने पार्टनर के साथ क्वालिटी टाइम बिताएं और अपनी रिलेशनशिप की अच्छी बातों को याद करें। इससे आपकी रिलेशनशिप में नयी जान आएगी और आपको अपने पार्टनर से इमोशनली कनेक्ट कर पाने में भी मदद होगी।

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