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Breastfeeding plays a crucial role in a child's nutrition

Breast Feeding’s Importance: महिलाओं को कहा जाता है कि बच्चे को जन्म के 06 महीने तक मां का दूध पिलाना बहुत आवश्यक होता है। तो क्या उसके बाद बच्चे के लिए मां के दूध का महत्व नहीं रहता है? विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिस लगभग 06 महीने तक सिर्फ स्तनपान और उसके बाद पूरक आहार के साथ 02 साल या उससे ज्यादा वक्त तक स्तनपान कराने की सलाह देते हैं।

बच्चे की जिंदगी के शुरुआती 02 साल शारीरिक विकास, दिमाग के विकास और इम्यून सिस्टम के लिए बेहद अहम होते हैं। ऐसे में मां का दूध इस पूरे समय बच्चे के पोषण और संक्रमण से बचाव में योगदान देता रहता है। आइए हम डॉक्टर से जानते हैं कि ब्रेस्टफीटिंग कैसे बच्चे की सेहत को जिंदगी भर के लिए बेहतर बनाती है।

बच्चे के लिए ब्रेस्टफीडिंग कितना अहम

Breastfeeding plays a crucial role in a child's nutrition

डॉक्टर बताते हैं कि बच्चे की जिंदगी के शुरुआती 1000 दिन, यानी गर्भधारण से लेकर दो साल की उम्र तक का समय, उसके विकास और बढ़ने के लिए बहुत अहम होता है। इस दौरान दिमाग तेजी से विकसित होता है, शरीर के अंग मैच्योर होते हैं और इम्यून सिस्टम भी मजबूत होता है।

अच्छे पोषण का बच्चे की शारीरिक सेहत, सीखने की क्षमता और कुल मिलाकर उसकी भलाई पर बहुत बडा असर पड़ता है। ब्रेस्टफीडिंग से बच्चे को जरूरी पोषण मिलता है। मां का दूध बच्चों को संक्रमण से बचाता है और उनके हेल्दी डेवलपमेंट में मदद करता है।

क्या 6 महीने के बाद मां का दूध खराब हो जाता है?

डॉक्टर कहते हैं, “देखें, ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। 6 महीने पूरे होने के बाद बच्चे की पोषण संबंधी जरूरतें बढ़ने लगती हैं। इसलिए इस उम्र में सिर्फ स्तनपान से बच्चे का पेट नहीं भर पाता है। बच्चे को उम्र के अनुसार सुरक्षित व पौष्टिक आहार देना जरूरी हो जाता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मां के दूध की जरूरत खत्म हो गई।

WHO के अनुसार, 6 से 12 महीने के बीच मां का दूध बच्चे की ऊर्जा संबंधी जरूरतों का आधा या उससे अधिक हिस्सा पूरा कर सकता है। 12 से 24 महीने की उम्र में भी यह औसतन करीब एक-तिहाई ऊर्जा की जरूरत पूरी कर सकता है। यानी 6 महीने के बाद स्तनपान खाने का विकल्प नहीं, बल्कि पौष्टिक आहार के साथ एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

ब्रेस्टफीडिंग से बच्चे के शरीर को कैसे फायदा होता है?

Breast Feeding

डॉक्टर बताते हैं कि ब्रेस्टफीडिंग में प्रोटीन, हेल्दी फैट, विटामिन, मिनरल और एंटीबॉडी का सही संतुलन होता है, जिनकी बढ़ते बच्चे को जरूरत होती है। जो बच्चे ब्रेस्टफीडिंग करते हैं, उनमें डायरिया, कान के संक्रमण और सांस की बीमारियों का जोखिम कम हो सकता है। DHA और अन्य हेल्दी फैट जैसे जरूरी पोषक तत्व दिमाग और नर्वस सिस्टम के विकास में मदद करते हैं, जिससे आगे चलकर सीखने और सोचने-समझने की क्षमता बेहतर हो सकती है।

ब्रेस्टफीडिंग करवाने से कई बीमारियों से बचता है बच्चा

डॉक्टर बंसल बताते हैं कि ब्रेस्टफीडिंग बच्चों की सेहत के लिए जरूरी है और यह बच्चों के बड़े होने पर मोटापा, टाइप 2 डायबिटीज और कुछ तरह की एलर्जी के जोखिम को कम करने में भी मदद करती है। यह बचपन में वजन को सही ढंग से बढने में मदद करती है और खाने की अच्छी आदतें विकसित करने में मदद करती है।

ब्रेस्टफीडिंग कराने से माताओं को क्या फायदे होते हैं?

ब्रेस्टफीडिंग माताओं के लिए भी फायदेमंद है। यह बच्चे के जन्म के बाद गर्भाशय को उसके सामान्य आकार में वापस लाने में मदद करती है, डिलीवरी के बाद ब्लीडिंग कम करती है और ब्रेस्ट व ओवेरियन कैंसर के जोखिम को कम कर सकती है। ब्रेस्टफीडिंग त्वचा से त्वचा के करीबी संपर्क के जरिए बच्चे के साथ एक मजबूत भावनात्मक जुड़ाव बनाती है।

सफल ब्रेस्टफीडिंग के लिए खास टिप्स

जब भी संभव हो, जन्म के पहले घंटे के भीतर ब्रेस्टफीडिंग शुरू करें और डॉक्टर की सलाह के बिना इसे बंद न करें। शुरुआती छह महीनों तक सिर्फ स्तनपान कराएं और डॉक्टर की सलाह के बिना पानी या कोई और खाना न दें। पर्याप्त मात्रा में दूध बनने में मदद के लिए संतुलित आहार लें।

किसी सख्त रूटीन का पालन करने के बजाय, जब भी बच्चा भूख के संकेत दे, उसे जरूर खिलाएं। दूध बनने में मदद के लिए संतुलित आहार लें, पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ पिएं और भरपूर आराम करें। अगर स्तनपान में कोई परेशानी आए, तो डॉक्टर या लैक्टेशन कंसल्टेंट से मदद लें। इसलिए, इन सुझावों का पालन करें और बच्चे को सही तरीके से स्तनपान कराना सुनिश्चित करें।

Breastfeeding

Breast Feeding को लेकर कुछ जरूरी बातें हमें मालूम नहीं होती, जिससे मां और शिशु दोनों को नुकसान होता है। मां का दूध बच्चे के लिए न्यूट्रीशन से भरा वो आहार है जो उसकी समूचे ग्रोथ में मददगार साबित होता है। ब्रेस्टफीडिंग मां और बच्चे दोनों की सेहत के लिए फायदेमंद है। वैसे तो शिशु के लिए पैदा होने के 06 माह तक ब्रेस्टफीडिंग की सलाह दी जाती है लेकिन कई बार गलत तरीके से फीडिंग मां को तो थका देती ही है साथ-साथ बच्चे को भी कई तरह की समस्याएं होने लगती हैं।

ब्रेस्टफीडिंग के वक्त कुछ बातों का अमल करना जरूरी है ताकि मां और बच्चे का स्वास्थ्य बिल्कुल सही रहे। आइये जानते हैं ब्रेस्टफीडिंग के दौरान मां को किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए-

ब्रेस्टफीडिंग क्यों है ज़रूरी-

breastfeeding

इस बारे में विशेषज्ञ की राय हैं कि ब्रेस्टफीडिंग मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए अहम है। मां के दूध से नवजात शिशु को सभी जरूरी पोषण मिल जाते हैं, जिससे बच्चे की ग्रोथ में मदद मिलती है। अलावा इसके शिशु को पर्याप्त ब्रेस्टफीडिंग कराने वाली महिलाओं में स्तन कैंसर का खतरा भी कम हो जाता है। पर ब्रेस्टफीडिंग के दौरान कुछ खास बातों का ख्याल रखना भी आवश्यक है।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के मुताबिक ब्रेस्ट मिल्क में इम्युनोग्लोबुलिन या एंटीबॉडी पाई जाती हैं। इससे मिलने वाला प्रोटीन बच्चे की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में मदद करते हैं। अलावा इसके बच्चों में टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज़ का जोखिम भी कम हो जाता है। वहीं, ब्रेस्टफीडिंग करवाने से ब्रेस्ट और ओवरी कैंसर का खतरा भी कम हो जाता है।

ब्रेस्टफीडिंग कराते समय इन बातों का रखें ध्यान

1. बच्चे की जरूरत का रखें ध्यान

 

Breast feeding

बच्चे को जब भी भूख लगे उसे स्तनपान करवाएं। अपनी तरफ से समय निर्धारित करने का प्रयास न करें। बार-बार स्तनपान कराने से दूध पर्याप्त मात्रा में बनता है और बच्चे को पूरा पोषण मिल पाता है। साथ ही किसी तरह के ब्लॉकेज या थक्का बनने का खतरा भी नहीं रहता। अगर वर्किंग मॉम हैं, तो ब्रेस्ट पंपिंग के जरिये दूध निकालकर भी बच्चे को पिलाया जा सकता है। बच्चा जब बड़ा होने लगे, तब अचानक स्तनपान बंद न करें। फीडिंग धीरे-धीरे छुड़ाने से आपके शरीर को ढलने का समय मिल जाता है और किसी तरह की परेशानी नहीं होती है।

2. क्लीनिंग पर ध्यान देना जरूरी

फीडिंग के समय हाइजीन का ख्याल रखना सबसे महत्वपूर्ण है। ब्रेस्ट फीडिंग के दौरान रोज नहाना, कपड़ों की साफ सफाई और नियमित रूप से कपड़े बदलना जरूरी है। ब्रेस्ट फीडिंग के लिए कपड़े ढीले पहनें और उनकी बनावट ऐसी हो, जिससे बच्चे को आसानी से स्तनपान कराया जा सके। स्तनों पर बार-बार हाथ लगाने से बचें। हाथ लगाने से संक्रमण का खतरा रहता है। अगर स्तनों की सफाई के लिए वाइप्स का इस्तेमाल करती हैं, तो ध्यान रहे कि वाइप्स में किसी तरह के रसायन का प्रयोग न हुआ हो।

3. सही पोश्चर में कराएं ब्रेस्टफीडिंग

breastfeeding

कुछ महिलाएं जब बच्चा लेटा हुआ होता है, तभी स्तनपान करवाने लगती हैं। ये पोश्चर बच्चे के लिए सही नहीं है। प्रयास करें कि बच्चे को करवट कराते हुए या गोद में लेकर सही तरह से उसे अपने स्तनों के पास लाएं। इससे मां और बच्चे दोनों का पोश्चर सही रहता है। जिससे कई तरह की शारीरिक परेशानियों से बचा जा सकता है। बच्चे को बारी-बारी से दोनों स्तनों से स्तनपान कराएं।

4. स्वयं को हाइड्रेटेड रखें

वॉटर इनटेक का ध्यान ब्रेस्टफीडिंग के दौरान रखना आवश्यक है। इससे शरीर हाइड्रेट रहता है और दूध न आने की समस्या हल हो जाती है। स्तनपान के दौरान पानी, जूस, शेक्स, हेल्दी सूप और अन्य तरल पदार्थों का सेवन करे। इससे शरीर में मिनरल्स की कमी पूरी हो जाती है। अलावा इसके शरीर एक्टिव और हेल्दी रहता है।

5. अपने खानपान का रखें ख्याल

हेल्दी और संतुलित आहार करना हमेशा जरूरी होता है। विशेषरूप से स्तनपान के समय यह और भी आवश्यक हो जाता है, क्योंकि मां से ही बच्चे को पोषण मिलता है। खानपान पर ध्यान देते हुए यह समझें कि अगर आपके कुछ खाने से बच्चे को परेशानी होती है, तो ऐसी चीजों से दूर रहें। बहुत भारी और मुश्किल से पचने वाले आहार की तुलना में सुपाच्य आहार ग्रहण करना सही रहता है। पानी भी पर्याप्त मात्रा में पीना चाहिए।

फोटो सौजन्य – गूगल