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Author Archives: Zahid Abbas

Rudrabhishek has to be done on the third Monday of Sawan

SAWAN की पावन महीना भगवान भोलेनाथ तो समर्पित होता है। इस माह में भगवान भोले बाबा और मां पार्वती की पूजा की जाती है। बाबा भोलेनाथ की पूजा आराधना करने में रुद्राभिषेक और जलाभिषेक किया जाता है। माना जाता है कि सावन के महीने में जो श्रद्धालु रुद्राभिषेक करते हैं उनका बड़ा से बड़ा कष्ट समाप्त हो जाता है। अगर रुद्राभिषेक सोमवार के दिन शुभ मुहूर्त में किया जाए तो और भी बड़ा फल की प्राप्ति होती है। सावन सोमवार के दिन रुद्राभिषेक के लिए जानें क्या है शुभ मुहूर्त ?

क्या कहते हैं प्रसिद्ध महादेव मंदिर के पंडित जितेंद्र तिवारी जी

मुजफ्फरपुर के साहू पोखर महादेव मंदिर के पंडित जितेंद्र तिवारी जी ने संवाददाता जाहिद अब्बास से बातचीत करते हुए बताया कि सावन की तीसरी सोमवारी कल है। इसके साथ ही तीसरी सोमवारी के दिन अद्भुत संयोग भी बनने जा रहा है। उस दिन विनायकी गणेश चतुर्थी है यानी भगवान शिव के साथ-साथ गणपति की भी पूजा अवश्य करनी चाहिए। ऐसा खास संयोग बड़े ही संयोग से मिलता है। अगर सावन की तीसरी सोमवारी के दिन रुद्राभिषेक कर लें तो बड़ा से बड़ा कष्ट खत्म हो जाएगा और जीवन में सुख समृद्धि की बढ़ोतरी होगी।

रुद्राभिषेक के क्या हैं शुभ मुहूर्त

पंडित जी बताते हैं कि रुद्राभिषेक हमेशा शुभ मुहूर्त में करनी चाहिए। अगर आप भी सावन के तीसरे सोमवारी के दिन रुद्राभिषेक करना चाहते है तो ब्रह्म मुहूर्त में सुबह सुबह 4 बजकर 11 मिनट से लेकर 05 बजकर 33 मिनट तक करना बेहतर है। इसके साथ ही सुबह 10 बजकर 11 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 33 मिनट तक अमृतकाल रहने वाला है। इस मुहूर्त में भी रुद्राभिषेक करने पर पुण्यदायी फल हासिल होगा।

फोटो सौजन्य- गूगल

Bring glow to your face in Korean way and say goodbye to wrinkles

Korean Glowing Style: अगर आप भी अपना चेहरा देखते हुए मन ही मन सोचते हैं कि काश मेरा चेहरा पहले जैसा चमकदार और बिना झुर्रियों वाला होता तो..। आजकल फास्ट लाइफस्टाइल, गलत खानपान, दबाव और नींद की कमी के कारण चेहरे पर जल्दी झुर्रियां दिखने लगती हैं और त्वचा बेजान सी होने लगती है। ऐसे में हम महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स और ट्रीटमेंट की मदद लेने लगते हैं पर इन सब में केमिकल्स का प्रयोग होता है जो कई बार साइड इफेक्ट भी कर जाते हैं। ऐसे में क्यों ना हम उन उपायों की ओर बढ़े जो नेचुरल भी है और फायदेमंद भी। कोरिया की महिलाएं अपनी खूबसूरती और चमकती स्किन के लिए दुनिया भर में जानी जाती हैं। उनकी स्किन इतनी क्लियर और टाइट रहती है कि उम्र का असर दिखाई ही नहीं देता। वहां कुछ ऐसे ब्यूटी सीक्रेट्स हैं जो वहां की संस्कृति में पीढ़ी दर पीढ़ी चले आ रहें हैं। खास बात यह है कि आप भी इन्हें अपने रूटीन में शामिल कर सकती हैं और अपनी त्वचा को यंग और ग्लोइंग बना सकती हैं।

क्या हैं कोरियन ब्यूटी का राज?

Bring glow to your face in Korean way and say goodbye to wrinkles

कोरियन महिलाओं की खूबसूरती का सीक्रेट उनके नेचुरल रेमेडीज और लाइफस्टाइल में छुपा है। वे बहुत अधिक पानी का सेवन करती हैं और सबसे खास उनकी स्किन केयर रूटीन में ऐसे प्राकृतिक तरीके शामिल हैं जो त्वचा की गहराई से सफाई करके उसे टाइट और ग्लोइंग बनाते हैं। उनमें से एक तरीका है राइस वॉटर यानी चावल के पानी का सटीक इस्तेमाल।

चावल के पानी का जादुआई कमाल

चावल में विटामिन-B,E, मिनरल्स और अमीनो एसिड्स होते हैं जो स्किन को पोषण देते हैं। चावल का पानी स्किन की इलास्टिसिटी बढ़ाता है जिससे झुर्रियां कम दिखने लगती हैं। यह स्किन को हल्का गोरा भी करता है और दाग-धब्बे मिटाता है। कोरिया में सदियों से महिलाएं अपने चेहरे को चावल के पानी से धोती आई हैं। इससे उनकी त्वचा टाइट रहती है और उसमें जबरदस्त ग्लो आता है।

ये है बनाने की विधि

  • सबसे पहले चावल को अच्छे से धो लें ताकि उस पर लगी धूल और गंदगी हट जाए।
  • फिर इसे दो कप पानी में डालकर 30 मिनट के लिए भिगोकर रख दें।
  • बीच-बीच में चावल को हाथ से मसलें ताकि उसके सारे पोषक तत्व पानी में आ जाएं।
  • अब इस पानी को छानकर अलग कर लें, यही चावल का पानी आपके चेहरे के लिए अमृत है।

ऐसे करें इसका इस्तेमाल-

रोज सुबह चेहरा साफ करने के बाद इस चावल के पानी को कॉटन की मदद से पूरे चेहरे और गर्दन पर लगाएं। चाहें तो इस पानी को स्प्रे बोतल में डालकर दिन में दो-तीन बार चेहरे पर स्प्रे भी कर सकती हैं। इसे 15-20 मिनट तक ऐसे ही रहने दें फिर सादे पानी से धो लें। हफ्ते में कम से कम 04-05 बार ऐसा करने से आपको असर दिखने लगेगा।

कुछ और कोरियन टिप्स जवां त्वचा के लिए-

Bring glow to your face in Korean way and say goodbye to wrinkles

जमकर पानी पिएं, कोरियन महिलाएं दिनभर में कम से कम 2-3 लीटर पानी पीती हैं जिससे उनकी स्किन हाइड्रेट रहती है। फलों और सब्जियों का ज्यादा सेवन करें। खासकर उन चीजों का जिनमें विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट्स ज्यादा हों। रात को सोने से पहले चेहरे को अच्छे से क्लीन करें ताकि दिनभर की धूल-मिट्टी और ऑयल साफ हो जाए। चेहरे की हल्की-हल्की मसाज करें, इससे ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है और स्किन टाइट रहती है।

क्यों करें कोरियन तरीका का इस्तेमाल?

इसमें कोई केमिकल नहीं होता, पूरी तरह प्राकृतिक है। ज्यादा महंगा भी नहीं पड़ता। सबसे बड़ी बात यह है कि लंबे वक्त तक स्किन हेल्दी और जवां बनी रहती है। धीरे-धीरे दाग-धब्बे, पिगमेंटेशन और झुर्रियां कम होने लगती हैं।

फोटो सौजन्य- गूगल

Did anti-aging medicines become the cause of Shefali Jariwala's death?

Shefali Jariwala: अभिनेत्री शेफाली जरीवाला का 27 जून को देर रात निधन हो गया। उन्होंने 42 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया। शेफाली के अचानक मौत की खबर से पूरी इंडस्ट्री में शोक की लहर है। जिसने भी येखबर सुनी वो स्तब्ध है और साथ ही यह सवाल भी पूछा जा रहा है कि आखिर शेफाली को हुआ क्या? कैसे हुई इतनी कम उम्र में मौत? पुलिस टीम की जांच में इससे जुड़ी कुछ बातें सामने आईं हैं। आइये जानते हैं क्या हैं वो बातें-

क्या शेफाली की कार्डियक अरेस्ट से गई जान?

शेफाली जरीवाला के निधन की वजह कार्डियक अरेस्ट बताई जा रही है। अभी तक की पुलिस जांच में भी एक बड़ी वजह कार्डियक अरेस्ट होने की सामने आई है। जांच में सामने आया है कि शुक्रवार रात करीब 10-11 बजे उनकी बॉडी अचानक से कांपने लगी और वो नीचे गिर गईं। इसके बाद उन्हें तुरंत अस्पताल लेकर जाया गया। उस समय घर में शेफाली, उनके पति पराग और शेफाली की मां के अलावा कुछ अन्य लोग मौजदू थे।

एंटी एजिंग दवाओं से हो सकता है कनेक्शन?

जांच में यह भी सामने आया है कि शेफाली पिछले कई वर्षों से हर महीने एंटी एजिंग दवाईयां ले रही थीं। एंटी एजनिंग और विटामिन की दवाईयां लेने की सलाह शेफाली ने करीब 7-8 साल पहले एक डॉक्टर से ली थी। इसके बाद वे लगातार हर महीने यह दवा ले रहीं थीं।

शुक्रवार को था शेफाली का व्रत

Did anti-aging medicines become the cause of Shefali Jariwala's death?

शुक्रवार 27 जून को शेफाली ने व्रत रखा था। जांच में सामने आया है कि घर में पूजा होने की वजह से शेफाली ने व्रत रखा था। इसके बावजूद उन्होंने अपनी एंटी एजिंग दवा को दोपहर में इंजेक्ट किया था। पुलिस की एफएसएल (FSL) टीम ने शेफाली के घर से बहुत सारी दवाईयों सीज की हैं। इनमें एंटी एजिंग मेडिसिन, विटामिन और गैस्ट्रिक से जुड़ी गोलियां शामिल हैं।

पुलिस ने दर्ज किया कई लोगों के बयान

अब तक इस मामले में करीब 08 लोगों का बयान पुलिस ने दर्ज किया है। इसमें परिवार के लोग, नौकर और बेलेवूए अस्पताल के डॉक्टर शामिल हैं। फिलहाल अब तक की जांच में किसी भी तरह के विवाद की बात सामने नहीं आई है।

फोटो सौजन्य- गूगल

If you look old then drink coffee every day

Benefits of Coffee: ज्यादातर लोग दिनभर इनरजेटिक रहने के मकसद से दिन की शुरुआत कॉफी के साथ करते हैं। बता दें कि इसके सेवन से शरीर को मिलने वाले एंटीऑक्सीडेंट्स जहां इनर्जी का लेवल बनाए रखते हैं, तो वहीं स्किन पर लगाने से भी कई फायदे होते हैं। इससे UV रेज का बढ़ता असर कम हो जाता है। हालांकि गर्मी मेंम स्किन को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अगर आप भी स्किन की चमक को बढ़ाकर एजिंग से बचना चाहते हैं तो इस तरह से करें कॉफी का प्रयोग-

कॉस्मेटिक डर्मेटोलॉजिस्ट के मुताबिक कॉफी एंटीऑक्सीडेंट का एक मुख्य स्रोत है जो त्वचा को कई तरह से लाभ पहुँचाता है। इससे स्किन को एक्सफोलिएट करने से लेकर ऑयली त्वचा की समस्या को हल किया जा सकता है। इससे स्किन सेल्स बूस्ट होते है, जिससे त्वचा की इलास्टीसिटी मेंटेन रहती है अैर त्वचा की नमी को भी रीसटोर किया जा सकता है।

कॉफी स्किन के लिए इस तरह है फायदेमंद

If you look old then drink coffee every day

1. स्किन को करे एक्सफोलिएट

कॉफी त्वचा पर बढ़ने वाली डेड स्किन सेल्स की समस्या हल हो जाती है और त्वचा को एक्सफोलिएट करने में मदद मिलती है। इसकी मदद से त्वचा की कोशिकाओं को धीरे धीरे एक्सफोलिएट करने में मदद मिलती है और अतिरिक्त ऑयल को दूर किया जा सकता है।

2. ग्लो करे मेंटेन

कॉफी मास्क की मदद से स्किन इंफ्लामेशन को कम करके ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाने में मदद मिलती है। इससे स्किन का ग्लो मेंटेन रहता है और स्किन संबधी समस्याओं को हल किया जा सकता है। ये थकान के लक्षणों को भी कम करने में मददगार साबित होती है।

3. एजिंग को बढ़ने से रोके

इसमें मौजूद फिनोल जैसे एंटीऑक्सीडेंट मुक्त कणों से लड़ने और त्वचा को नुकसान से बचाने में मदद करते हैं। इसके चलते महीन रेखाएं, झुर्रियाँ और ढीली त्वचा से बचा जा सकता है। कॉफी में मौजूद गुण मुंहासों से लड़ने और कोलेजन के निर्माण को बढ़ाने का काम करते हैं।

4. काले घेरों को करे दूर

अगर आप 22 से 3 बार कॉफी का स्क्रब इस्तेमाल करने से त्वचा का लचीलापन बना रहता है और डार्क सर्कल्स की समस्या हल होने लगती है। अलावा इसके आखों के नीचे बढ़ने वाली सूजन की समस्या भी हल हो जाती है। इससे स्किन पर मौजूद डक्ट पार्टिकल्स को भी हटाया जा सकता है।

Skin के लिए कॉफी का उपयोग इन तरीकों से करें

If you look old then drink coffee every day

1. कॉफी फेस मास्क

स्किन के चलीलेपन को बनाने के लिए कॉफी फेस मास्क बेहतरीन विकल्प है। इसके लिए एक कटोरी में दो चम्मच पिसी हुई कॉफी और दो चम्मच एलोवेरा जेल डालें। इसे अच्छी तरह से मिलाएँ और पेस्ट तैयार कर लें। 15 से 20 मिनट तक लगा रहने दें और फिर ठंडे पानी से धो लें।

2. कॉफी फेस स्क्रब

एजिंग के लक्षणों से राहत पाने के लिए कॉफी स्क्रब काफी फायदेमंद साबित होता है। इसे बनाने के लिए 01 चम्मच ऑलिव ऑयल और 02 चम्मच पिसी हुई कॉफी को मिलाकर एक गाढ़ा पेस्ट बना लें। अब इस स्क्रब को अपने चेहरे और गर्दन पर लगाएं। 05 मिनट तक गोलाकार गति में मालिश करें। मास्क को 30 मिनट तक लगा रहने दें और फिर गुनगुने पानी से साफ कर लें।

3. कॉफी आई मास्क

आंखों के नीचे काले घेरों को दूर करने के लिए कॉफी को राइस वाटर में मिलाकर आंखों के नीचे धीरे-धीरे से थपथपाएं और लगभग 10 मिनट तक लगा रहने दें। हफ्ते में 02 से 03 बार आंखों के चीने इस्तेमाल करने से आई पफ्फीनेस और डार्क सर्कल्स की समस्या हल होने लगती है।

4. कॉफी बॉडी स्क्रब

एक्सफोलिएटिंग गुणों से भरपूर कॉफी में चीनी, नींबू और पानी को मिलाकर पेस्ट बना लें। अब इस स्क्रब का प्रयोग पूरे शरीर पर करें। स्क्रब करते समय हल्के गोलाकार गति का इस्तेमाल करना जरूर याद रखें। इसे 05 से 10 मिनट के लिए छोड़ दें और फिर धो लेंं

फोटो सौजन्य- गूगल

Why is Eid-ul-Azha celebrated and what is its importance?

बकरीद को EID UL ADHA, जिसके नाम से भी जाना जाता है, इस्लाम धर्म का बहुत ही अहम त्योहार है। इस साल भारत में ईद उल अजहा का पर्व 7 जून यानी कल मनाया जाएगा। इस्लाम धर्म में बकरीद का विशेष महत्व है, इसे कुर्बानी का त्योहार भी कहा जाता है। इस पर्व को दुनियाभर में इस्लाम धर्म को मानने वाले लोग बहुत ही अकीदत और हर्षोल्लास से मनाते हैं। आइये जानते हैं कि ईद उल अजहा क्यों मनाया जाता है, इसका क्या है मुसलमानों में महत्व?

रमजान के इतने दिनों बाद मनाते हैं ईद उल अजहा

Importance of Eid Milad-Un-Nabi in Islam and its history

भारत में बकरीद की तारीख सऊदी अरब में चांद दिखने के आधार पर तय की जाती है। इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक 12वें महीने जुअल-हिज्जा की 10 तारीख को बकरीद मनाई जाती है। यह तारीख रमजान के पवित्र महीने के खत्म होने के लगभग 70 दिनों के बाद आती है।

किस देश में कब है बकरीद?

सऊदी अरब, ओमान और इंडोनेशिया में बकरीद का त्योहार 6 जून, 2025 को मनाया जाएगा। वहीं, भारत, नाइजीरिया, मोरक्को, बांग्लादेश, मलेशिया और न्यूजीलैंड में बकरीद 7 जून, 2025 को मनाई जाएगी।

क्यों मनाया जाता है बकरीद का त्योहार?

इस्लामिक धार्मिक मान्यता के अनुसार पैगंबर मोहम्मद इब्राहिम के द्वारा ही कुर्बानी देने की परंपरा शुरू हुई थी। माना जाता है कि अल्लाह ने एक बार पैगंबर मोहम्मद इब्राहिम से कहा था कि वे अपनी श्रद्धा और विश्वास को साबित करने के लिए अपनी सबसे अमूल्य चीज को त्याग दें। तब उन्होंने अल्लाह के प्रति अपना समर्पण दिखाते हुए अपने बेटे इस्माइल को कुर्बान करने का फैसला किया था। पैगंबर हजरत इब्राहिम ने अपने इकलौते बेटे की कुर्बानी अल्लाह की रजामंदी (सहमति) के लिए जैसे ही अपने बेटे की कुर्बानी देने वाले थे। उसी समय अल्लाह ने अपने फरिश्ते को भेजकर बेटे की जगह एक बकरे से बदल दिया था। अल्लाह को हजरत इब्राहिम के इस त्याग और समर्पण का अमल इतना पसंद आया कि कुर्बानी इस्लाम धर्म में इब्राहिम की सुन्नत करार दी गई। तभी से बकरीद अल्लाह में पैगंबर इब्राहिम के विश्वास को याद करने के लिए मनाई जाती है।

यह बलिदान का त्योहार पवित्र शहर मक्का की वार्षिक हज यात्रा के अंत का प्रतीक है जोकि इस्लामिक कैलेंडर के 12वें और आखिरी महीने की 10वीं तारीख को बकरीद के तौर पर मनाई जाती है। इसे माह-ए-जुलहिज्जा कहा जाता है।

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Miss World 2025: After winning the title of Miss World

72वें Miss World 2025 का भव्य समापन शनिवार को हैदराबाद के हाईटेक्स एग्जीबिशन सेंटर में हुआ। थाईलैंड की 21 वर्षीय मॉ
डल ओपल सुचाता चुआंगसरी ने मिस वर्ल्ड 2025 का खिताब पर कब्जा जमाया। इस सौंदर्य प्रगियोगिता में 108 मुल्कों की हसीनाओं ने हिस्सी लिया लेकिन भारत की नंदिनी गुप्ता टॉप 8 में जगह नहीं बना पाईं। इथियोपिया की हस्सेट डेरेज अदमासु को रनर-अप घोषित किया गया। बता दें कि भारत की सुंदरी नंदिनी गुप्ता मिस वर्ल्ड की प्रबल दावेदार मानी जा रही थीं। थाईलैंड की रहने वाली सुचाता ने पहली बार इस खिताब को जीत अपने देश का गौरव बढ़ाया। जीत के बाद विनर ने मीडिया से बातचीत में अपने विचार रखे-

खुद पर और अपनी टीम पर है गर्व

मिस वर्ल्ड का ताज पहनने के बाद ओपल सुचाता ने मीडिया से बातचीत में कहा कि थाईलैंड में सभी लोग 72 साल से पहली बार मिस वर्ल्ड का खिताब जीतने का इंतजार कर रहे थे। साथ ही उन्होंने बताया कि उन्हें इस ताज को पहनने के बाद यकीन नहीं हो रहा था कि वह अपना पहला खिताब अपने देश लेकर जाएंगी। अलावा इसके मिस वर्ल्ड विनर ने कहा कि उन्हें खुद पर और अपनी टीम पर भी बहुत गर्व है, क्योंकि उन्हीं की वजह से वो यहां तक पहुंचीं हैं।

भारत को हमेशा याद रखेंगी 

मिस वर्ल्ड विजेता ओपल सुचाता ने आगे बातचीत में कहा कि मैं अभी अपने दोस्तों से बात कर रही थी कि मैं इस जगह को छोड़ना नहीं चाहती। इसका कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि यहां के लोग, यहां का खानपान और हर चीज लाजवाब है। वह यहां आकर बेहद खुश हुईं। उनकी भारत की यात्रा बेहद शानदार थी और उन्होंने यहां बहुत सारे खुशनुमा पलों को जिया, जिसे वो संजोकर रखना चाहती हैं।

महिलाओं के स्वास्थ्य पर कर रही काम

आगे बातचीत में उन्होंने कहा कि मेरा प्रोजेक्ट स्तन कैंसर जागरूकता और महिलाओं के स्वास्थ्य पर केंद्रित है लेकिन अब मैं मिस वर्ल्ड हूं, इसलिए मेरे पास अन्य प्रोजेक्ट्स का समर्थन करने का अधिक अवसर है। मैं चुनाव नहीं करना चाहती, अगर मुझे सभी का समर्थन करने का मौका मिले, तो मैं सभी का समर्थन करना चाहती हूं।

भारत ऐसे चुका मिस वर्ल्ड का खिताब

मिस वर्ल्ड 2025 में भारत की तरफ से शामिल रहीं नंदिनी गुप्ता ने शानदार टक्कर दिया। खिताब के बहुत करीब आकर नंदिनी अंतिम 08 की सूची में जगह बनाने से चूक गई। अभी तक भारत छह बार मिस वर्ल्ड का ताज अपने नाम कर चुका है।

फोटो सौजन्य- गूगल

Water of celery and cumin seeds makes the fat stored in the body disappear

Health Tips: अनहेल्दी जीवन शैली और अनियमित खानपान वेटगेन का मुख्य कारण साबित होता है। ऐसे में वर्क आउट के लिए कुछ ऐसी चीज लेनी चाहिए जो स्वास्थ्य के लिए अहम हो, इसमें जो नाम सबसे ऊपर आता है वो है अजवाइन और जीरे का पानी, जोकि आपके वजन को नियंत्रित रखता है। इसमें मौजूद गुणों का भंडार वजन को कम करने के अलावा पेट फूलने की समस्या से छुटकारा दिलाने में भी मदद करते हैं। अजवाइन और जीरे में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा और एंटी इंफ्लामेटरी गुण स्वास्थ्य के लिए काफी लाभदायक होता है। आइये जानते हैं वजन नियंत्रित करने के लिए किस तरह से इन दोनों का मिश्रण फायदेमंद होता है-

अजवाइन और जीरे के बीज क्यों हैं खास

इस बारे में डायटीशियन का कहना है कि अजवाइन का सेवन करने से शरीर को डाइजेस्टिव एंजाइम की प्राप्ति होती है। इसमें मौजूद फाइबर, विटामिन और मिनरल शरीर के पाचन में सुधार करके मेटाबॉलिज्म को बढ़ाने में मदद करते हैं। इन बीजों से पेट फूलनाए गैस और अपच को कम किया जा सकता है। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के मुताबिक इसमें थाइमोल और कार्वाक्रोल जैसे दो एक्टिव कंपाउड पाए जाते हैं, जो बैक्टीरिया और फंगस के विकास को रोकते हैं।

वहीं, जीरा में एंटीऑक्सीडेंट गुणों के अलावा डाइजेस्टिव एंजाइम मौजूद हैं, जो पाचन में सहायता करने में मदद करते है। वे भूख बढ़ाने, सूजन को कम करने और वजन प्रबंधन में सहायता करते हैं। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार जीरा लीवर से पित्त यानी बाइल के स्राव को भी बढ़ाता है। पित्त पेट में वसा और कुछ पोषक तत्वों को पचाने में मदद करता है। शोध के अनुसार आईबीएस के 57 रोगियों ने दो हफ्ते तक जीरे का सेवन किया। इससे लक्षणों में सुधार देखने को मिला।

अजवाइन और जीरे के महत्वपूर्ण फायदे

1. पाचन में लाए सुधार

इंटरनेशनल जर्नल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च एंड हेल्थ साइंसेज की रिपोर्ट के मुताबिक जीरा गैस्ट्रिक जूस के स्राव को उत्तेजित करके पाचन में सुधार करने में मदद करता है। वहीं, अजवाइन में कार्मिनेटिव गुण होते हैं जो सूजन और गैस को कम करने में मदद करते हैं। इन्हें पानी के साथ मिलाए जाने पर पोषण अवशोषण में सुधार आने लगता है।

2. एसिडिटी से दिलाए राहत

Water of celery and cumin seeds makes the fat stored in the body disappear

जीरा और अजवाइन का पानी पेट के मौजूद ACID को कम करके एसिडिटी से राहत दिलाने में मदद कर सकता है। इसकी मदद से गैस्ट्रिक जूस को एसिडिक होने से रोका जा सकता है। बायोकेमिस्ट्री रिसर्च इंटरनेशनल के अनुसार अजवाइन के बीज गैस और सूजन को कम करने में मदद कर सकते हैं।

3. मेटाबॉलिज्म को करता है बूस्ट

इससे चयापचय को उत्तेजित करने में मदद मिलती हैं, जिससे अधिक कैलोरी को बर्न किया जा सकता है। इनमें मौजूद फाइबर की मात्रा भूख को कम करके शरीर में कैलोरी को स्टोर होने से राकते हैं। इससे ओवरइटिंग और बार बार भूख लगने की समस्या को कम किया जा सकता है। साथ ही शरीर में दिनभर एक्टिव बना रहता है।

4. डिटॉक्सिफाइंग गुणों का खजाना

इस पानी का सेवन करने से विषाक्त पदार्थों और वॉटर रिटेंशन को खत्म करने में मदद मिलती हैंं। इससे बॉडी फंक्शनिंग उचित बनी रहती है। साथ ही बार बार भूख लगने की समस्या को भी हल किया जा सकता है। इसके सेवन से पाचनतंत्र को मज़बूती मिलती है।

ऐसे तैयार किया जाता है अजवाइन और जीरे का पानी

अजवाइन और जीरे का पानी एक पारंपरिक भारतीय पेय पदार्थ है जिसे पानी में अजवाइन और जीरे को उबालकर बनाया जाता है। मिश्रण का सेवन अक्सर इसके पाचन और स्वास्थ्य लाभों के लिए किया जाता है। व्यंजनों को तैयार करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले अजवाइन और जीरा में औषधीय गुण पाए जाते हैं। जब ​​इन्हें पानी में उबाला जाता है, तो उससे नेचुरल ऑयल और एक्टिव कंपाउड मिलते हैं, जिससे शरीर को कई अहम फायदे मिलते हैं।

फोटो सौजन्य- गूगल

COVID CASES: Corona knocks again in India

COVID CASES: भारत समेत दुनिया के कई देशों में कोरोना वायरस ने एक बार फिर से पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। भारत में भी कोविड-19 के मामलों में लगातर बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। महाराष्ट्र में शुक्रवार को कोविड-19 के 45 केस सामने आए। इसमें सबसे अधिक मुंबई में 35, पुणे में 04, रायगढ़ में 02, कोल्हापुर में 02 और ठाणे तथा लातूर में एक नए मरीज मिले हैं। मुंबई में अब तक कोरोना के कुल मरीजों की तादाद 183 हो गई है। वहीं, महाराष्ट्र में पॉजिटिव मामले 210 तक पहुंच गए हैं।

कोरोना के ना केवल संक्रमितों की संख्या बढ़ रही है, बल्कि अस्पताल में भर्ती होने वालों की संख्या भी बढ़ रही है। यानी लक्षण गंभीर हो रहे हैं। भारत में केरल, महाराष्ट्र सहित 257 से अधिक मामले सक्रिय हैं। जबकि मुंबई में दो लोगों की कोविड से मौत हो चुकी है। विशेषज्ञों ने अभी से सावधानी बरतने की सलाह दी है और अनुमान लगाया है कि अगले तीन सप्ताह और भी अधिक संवेदनशील हो सकते हैं।

कोविड का नया वेरिएंट और ताज़ा आंकड़े 

सिंगापुर, थाईलैंड और हांगकांग में संक्रमितों की जांच के आंकड़ों में सामने आया है कि इस बार संक्रमण का कारण ओमिक्रोन का सब वेरिएंट JN.1 संक्रमण फैला रहा है। इससे कई एशियाई देशों में लोग हल्के से गंभीर लक्षणों के शिकार हो रहे हैं।

अप्रैल के आखिरी और मई के पहले सप्ताह में ही कोविड संक्रमितों की संख्या 14 हजार के पार पहुंच गई है। इनमें सर्वाधिक खराब हालात सिंगापुर और हांगकांग के हैं, जहां हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दी गई है। जापान में भी सार्स कोविड के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।

भारत में COVID के सक्रिय मामले

COVID CASES: Corona knocks again in India

कोविड के प्रसार का तरीका पहले जैसा है, जिसने साल 2019 के अंत से मार्च-अप्रैल 2020 तक दुनिया भर में कहर बरपाया था। भारत के बड़े शहरों, जो अंतर्राष्ट्रीय यात्राओं से सीधे जुड़े हैं, वहां सबसे ज्यादा कोविड के सक्रिय मामले देखे जा रहे हैं। इनमें केरल और मुंबई में सबसे ज्यादा लोग कोविड के सब वेरिएंट जेएन.1 से संक्रमित हुए हैं।

क्या इस वेरिएंट से घबराने की जरूरत है?

कोरोनावायरस के बढ़ते मामलों और मुंबई में हुई 2 मौतों के बाद लोगों में डर का माहौल है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी तत्काल सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ का कहना है कि एशिया के कई देशों में कोविड-19 के मामलों में स्पष्ट वृद्धि देखी जा रही है, जिससे स्वास्थ्य अधिकारियों की चिंता बढ़ गई है। बदलते हुए वायरस वेरिएंट और कम होती रोग प्रतिरोधक क्षमता इस मौजूदा लहर को बढ़ावा दे रही है। इस समय जब लोगों की आवाजाही और सेहत के प्रति लापरवाही भी बढ़ी है।

ओमिक्रॉन स्ट्रेन का नया सबवेरिएंट्स, JN.1 मौजूदा हेल्थ जोखिमों के लिए जिम्मेदार है। यह सबवेरिएंट अत्यधिक संक्रामक है और पहले की तुलना में बेहतर तरीके से रोग प्रतिरोधक क्षमता को चकमा देने में कामयाब है।

विशेषज्ञ आगे कहते हैं कि हालांकि, यह अधिक घातक नहीं है। इसके तेज़ी से फैलने के कारण कुल मामलों की संख्या में वृद्धि हो रही है। जो लोग पहले से वैक्सीनेटेड हैं, उनमें लक्षण हल्के ही पाए जा रहे हैं।

बूस्टर डोज लेना हो सकता है बचाव का उपाय

विशेषज्ञ के मुताबिक रोग प्रतिरोधक क्षमता समय के साथ कम हो जाती है। इसलिए कई देशों ने बूस्टर डोज लेने की सलाह दी है। एशिया के अधिकांश लोगों ने एक साल से भी पहले अपनी वैक्सीन की खुराक ली थी। समय पर बूस्टर न मिलने के कारण प्रतिरक्षा क्षमता घट जाती है, जिससे बुज़ुर्गों और वे लोग जो अन्य किसी बीमारी से पहले ही ग्रस्त हैं, उनमें संक्रमण का जोखिम और ज्यादा बढ़ जाता है।

महामारी के समय के नियमों में ढील ने समस्या को और गंभीर बना दिया है। लोग अब सामान्य जीवन में लौट आए हैं, मास्क पहनना, सामाजिक दूरी बनाए रखना और स्वच्छता जैसे उपायों को काफी हद तक छोड़ दिया गया है। सार्वजनिक समारोहों और अंतरराष्ट्रीय यात्रा के फिर से शुरू हो जाने से वायरस को फैलने का भरपूर मौका मिल गया है।

अगले तीन हफ्ते हैं बेहद संवेदनशील

मौजूदा लहर को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है और लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए ताकि संक्रमण से बचा जा सके। अगले तीन हफ्ते इन मामलों में तेजी देखी जा सकती है। फ्यूचर में किसी भी नए म्यूटेशन का समय रहते पता लगाने के लिए निगरानी जारी रखना लाभकारी हो सकता है। इसके अलावा, सतर्कता और जिम्मेदार व्यवहार वायरस को नियंत्रित रखने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

चढ़ते-उतरते मौसम भी इसमें भूमिका निभा रहे हैं। ज्यादातर लोग घरों के अंदर रहने लगे हैं, जहां वेंटिलेशन की कमी होती है और संक्रमण का खतरा अधिक होता है। अलावा इसके अब टेस्टिंग भी कम हो गई है, जिससे केसों की सही संख्या रिपोर्ट नहीं हो पा रही है। असली आंकड़े रिपोर्ट किए गए मामलों से कहीं अधिक हो सकते हैं।

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BEL SHARBAT: Bel Sharbat works as a heat protection

BEL SHARBAT: गर्मी के मौसम में तरह-तरह की स्पेशल फूड्स फेमस है उनमें से एक है बेल। पूरे देश में गर्मी के मौसम में बेल का शरबत लोग जमकर पीते हैं ताकि शरीर गर्मी से लड़ने के लिए पूरी तरह से तैयार रहे बेल एक बेहद फायदेमंद और कूलिंग फ्रूट है, जो विशेष रूप से गर्मी के मौसम में फायदेमंद माना जाता है। आप आसानी से घर बेल का शरबत तैयार कर सकती हैं। इनमें कई अहम पोषक तत्वों की गुणवत्ता और प्रॉपर्टीज पाई जाती है, जो सेहत के लिए भिन्न रूपों में फायदेमंद साबित हो सकती है। अगर आपने अभी तक इस उम्दा फल का आजमाया नहीं है तो इस गर्मी इसे जरूर आजमाएं।

आपके लिए हम इसकी काफी आसान रेसिपी लेकर आए हैं, जिसे आप 10 मिनट में तैयार कर सकती हैं। यह रिफ्रेशिंग ड्रिंक आपको पूरे दिन फ्रेश रखने का काम करता है, एनर्जेटिक और हाइड्रेटेड रहने में मदद करता है। इस तरह आप गर्मी से निजात पाते हैं। आइये जानते हैं बेल का शरबत तैयार करने की रेसिपी-

बेल शरबत की रेसिपी

BEL SHARBAT: Bel Sharbat works as a heat protection

बेल शरबत बनाने के लिए जरूरी समान

1 बड़ा बेल
4 बड़ा चम्मच चीनी (जरूरत अनुसार)
1 लीटर पानी
पुदीने की पत्तियां
बर्फ के टुकड़े
एक चुटकी नमक

इस तरह तैयार करें बेल का शरबत

  • बेल को बेलन से तोड़ें और फिर चम्मच की मदद से गूदा निकाल लें।
  • अपनी उंगलियों का उपयोग करें और गूदे को मसलें, फिर इनमें से सारे बीज निकाल लें।
  • बीज काफी कड़वे होते हैं, इसलिए सुनिश्चित करें कि कोई भी बीज जूस में न छुटे, अन्यथा मुंह का स्वाद बिगड़ सकता है।
  • गुदे में ठंडा पानी डालें और इसे वापस से अच्छी तरह से मसलें।
  • अब इसे छननी में डालें और लकड़ी के चम्मच का उपयोग करके छलनी पर दबाएं।
  • इसमें से जितना हो सके उतना गूदा निकालें, बड़े रेशों को छोड़ दें।
  • अगर आपको ज्यादा मिठास चाहिए तो चीनी डालें, या मिठास के लिए शहद जैसे हेल्दी विकल्प भी इस्तेमाल कर सकती हैं।
  • एक बड़े कंटेनर में बर्फ के टुकड़े, कुचले हुए पुदीने के पत्ते डालें और ऊपर से शर्बत डालें।
  • अच्छी तरह मिलाएं और ठंडा शराब सर्व करें।
  • आप चाहें तो एक चुटकी नमक भी मिला कर सकती हैं, ये पूरी तरह से वैकल्पिक है।

 

जानें बेल का शरबत पीने के क्या है फायदे

1. पाचन में करता है सुधार

बेल जैसे सुपरफूड में डाइट्री फाइबर और पेक्टिन की मात्रा मौजूद होती है, जो मल त्याग को बढ़ावा देने और स्वस्थ पाचन को बढ़ावा देने में आपको मदद करती है। यह एक प्राकृतिक रेचक के रूप में कार्य करता है, जिससे कब्ज की स्थिति उत्पन्न नहीं होती, वहीं यह समग्र पाचन स्वास्थ्य में सुधार करता है।

2. शरीर को रखता है ठंडा

बेल आपके शरीर को अंदर से ठंडा रखने में मदद करता है, और गर्मी से संबंधित सभी समस्याओं से राहत प्रदान करता है। इसकी कूलिंग प्रॉपर्टीज शरीर की गर्मी कम करती है और आपको तरोताजा महसूस करने में मदद करती है। यह गर्मी से होने वाली परेशानी से राहत पाने का एक प्रभावी विकल्प है।

3. इम्यूनिटी को करता है बुस्ट

बेल विटामिन-C और A के साथ-साथ अन्य एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है। ये पोषक तत्व व्हाइट ब्लड सेल्स के उत्पादन को उत्तेजित करते हैं और शरीर को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से लड़ने के लिए तैयार करते हैं। इस तरह शरीर संक्रमण तथा बीमारियों के चपेट में नहीं आती।

4. ब्लड शुगर मैनेजमेंट में अहम रोल अदा करता है

बेल के रस में फेरुलिक एसिड और रुटिन जैसे कंपाउंड पाए जाते हैं, जो ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने में मदद करती है। ये कंपाउंड इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार करते हैं और रक्त शर्करा के स्तर को कम करते हैं। डायबिटीज के मरीज भी बेल शरबत का आनंद ले सकते हैं, पर उन्हें इसमें चीनी जैसे मिठास के विकल्प को नहीं मिलना चाहिए।

5. हाइड्रेशन रखता है मेंटेन

बेल का जूस प्राकृतिक रूप से प्यास बुझाने में भी मददगार साबित होता है। ये शरीर को गर्म मौसम में पूरी तरह से हाइड्रेटेड रखता है, जिससे डिहाइड्रेशन के लक्षणों से राहत मिलती है। डिहाईड्रेशन थकान, कमजोरी और चक्कर आने जैसे परेशानी पैदा कर सकता है।

6. ऊर्जा शक्ति को रखें बरकरार

गर्मी में अत्यधिक पसीना निकलने की वजह से शरीर जल्दी थक जाती है, ऐसे में हर दिन बेल का जूस पीने से आपके शरीर में ऊर्जा शक्ति का संचार बना रहता है और आप लंबे समय तक एनर्जेटिक रहती हैं। फल में मौजूद पोषक तत्वों का अद्भुत संयोजन ऊर्जा के स्तर को बढ़ाने और गर्मियों में सुस्ती को कम करने में मदद करता है।

7. हेल्दी स्किन के लिए फायदेमंद होता है

इस सुपरफूड में एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन्स की गुणवत्ता पाई जाती है जो त्वचा को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाती है और कोलेजन के उत्पादन को बढ़ावा देती है। इस प्रकार स्किन इलास्टिसिटी में सुधार होता है और प्रीमेच्योर एजिंग का खतरा कम हो जाता है।

8. बॉडी को डिटॉक्सीफाई करता है

इस कूलिंग शरबत में बॉडी टॉक्सिंस को बाहर निकालने की क्षमता होती है। यह एक प्राकृतिक डिटॉक्सिफायर के रूप में कार्य करता है। इसकी उच्च फाइबर सामग्री पाचन तंत्र के माध्यम से टॉक्सिक उत्पादों को खत्म करने में सहायता करती है। इस प्रकार पाचन क्रिया, त्वचा स्वस्थ सहित समग्र सेहत को बढ़ावा मिलता है।

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Does having sex during pregnancy really make normal delivery easier?

Pregnancy में सेक्स कितना सही है? ये बहस काफी पुरानी है। घर के बड़े-बुजुर्ग प्रेगनेंसी में सेक्स को सख्ती से मना करते हैं जबकि डॉक्टर इसे पूरी तरह सुरक्षित मानते हैं। ज्यादातर स्त्री रोग विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर प्रेगनेंसी में कोई दिक्कत नहीं है, तो सेक्स करने में कोई बुराई नहीं है। बल्कि यह प्रेगनेंसी में आपके मू़ड और रिश्ते को बेहतर बनाए रखने में मददगार साबित हो सकता है। स्त्री रोग एक्पर्ट इसे नॉर्मल डिलीवरी के लिए भी फायदेमंद मानती हैं। क्या वाकई प्रेगनेंसी में सेक्स नॉर्मल डिलीवरी में महत्वपूर्ण रोल अदा करता है? आइये समझते हैं इसे विस्तार से-

प्रेगनेंसी में सेक्स पर जानें विशेषज्ञ की राय

These symptoms of pregnancy start appearing only 3 to 4 days after conceiving, pregnancy is confirmed even before the period is missed

विशेषज्ञ ने प्रेगनेंसी में सेक्स करने पर जोर दिया है। वे इसे नॉर्मल डिलीवरी के लिए मददगार मानती है। अपनी पोस्ट में उन्होंने घरों में काम करने वाली उन महिलाओं का जिक्र करते हुए बताया है कि कैसे इन महिलाओं में ज्यादातर की नॉर्मल डिलीवरी होती है। जबकि शहरी-कामकाजी महिलाओं में सी सेक्शन के मामले अधिक देखने को मिलते हैं।

इसके लिए वे उनके गर्भावस्था के पूरे 09 महीने शारीरिक रूप से सक्रिय होने को सबसे बड़ा कारण बताती हैं। एक्सपर्ट की माने तो जो महिलाएं अपनी गर्भावस्था में शारीरिक रूप से सक्रिय रहती हैं, उनके लिए नॉर्मल डिलीवरी आसान हो जाती है। जबकि फिजिकली एक्टिव ना रहने वाली महिलाओं में सी सेक्शन डिलीवरी की संभावना बढ़ जाती है।

इंडियन टॉयलेट सीट का इस्तेमाल है फायदेमंद

गांव की औरतों का उदाहरण देते हुए डॉ अरुणा कालरा कहती हैं, कि इंडियन स्टाइल की टॉयलेट सीट का इस्तेमाल करते हुए आप स्क्वाट पॉजीशन में बैठते हैं, जिससे पेल्विक मसल्स को संकुचित होने और फैलने में मदद मिलती है। यह मुद्रा शरीर के इस हिस्से के लिए एक स्वभाविक व्यायाम है।

सेक्स कैसे करता है नॉर्मल डिलीवरी में योगदान

फिजिकली एक्टिव रहने और इंडियन टॉयलेट सीट के प्रयोग के अलावा प्रेगनेंसी में किया गया सेक्स भी नॉर्मल डिलीवरी को आसान बना देता है। डॉक्टर के मुताबिक पुरुषों के सीमन में एक प्रोस्टाग्लैंडीन नाम का तत्व होता है। जो नॉर्मल डिलीवरी में मदद करता है। डॉक्टर का कहना है कि अगर आप प्रेगनेंसी में सेक्स करने से डरती हैं, तो 9वां महीना शुरू होने के बाद सेक्स करना जरूर शुरू करें ताकि वेजाइनल मसल्स मजबूत हो सकें और योनि प्रसव आसानी से हो सके।

एक्सपर्ट के मुताबिक वे इस बात से पूरी तरह सहमत हैं कि प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में सेक्स करना नॉर्मल वेजाइनल डिलीवरी को आसान बना देता है। यह गर्भाशय के निचले हिस्से की मांसपेशियों को नर्म और लचीला बनाता है, ऑक्सीटॉसिन रिलीज करवाता है और आप दोनों को फीलगुड भी करवाता है। अब घबराने की जरूरत नहीं, अपनी डॉक्टर से सलाह लें और गर्भावस्था में सेक्स को पूरी तरह से एनजॉय करें।