Makar Sankranti:
मकर संक्रांति के अवसर पर पूरे देश में तिल-गुड़ और खिचड़ी खाने और खिलाने का रिवाज है। लेकिन हमारे देश में एक हिस्सा ऐसा भी है जहां पर मकर संक्रांति के दिन दही-चुड़ा खाया जाता है। मकर संक्रांति पर क्यों खाया जाता है? भारत के हर हिस्से में मकर संक्रांति का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस साल मकर संक्रांति का त्योहार 14 और 15 जनवरी को मनाया जा रहा है। मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे उत्तरायण कहा जाता है।मकर संक्रांति के खास दिन तिल और गुड़ के लड्डू, खिचड़ी, पूरन पोली, गजक और उंधियू जैसे पकवान बहुत ही चाव से खाए जाते हैं। मकर संक्रांति के दिन तिल-गुड़ तो हर हिस्से में खाया जाता है। लेकिन भारत का एक हिस्सा ऐसा भी है जहां पर मकर संक्रांति के दिन दही-चूड़ा खाया जाता है। मिथिला में मकर संक्रांति के दिन खाया जाता है दही और चूड़ा
मिथिला में मकर संक्रांति केवल एक त्योहार नहीं बल्कि आस्था, परंपरा, सामाजिक एकता और स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ उत्सव है। इस दिन सबसे विशेष रूप से दही-चूड़ा खाया ही जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दही को हिंदू धर्म में शुद्ध और सात्विक माना गया है। वहीं, चावल को अन्न का राजा कहा जाता है। मकर संक्रांति पर सात्विक भोजन करने का विधान है। इसलिए मिथिला में मकर संक्रांति के दिन दही-चूड़ा खाया जाता है।
दही -चूड़ा खाने के फायदे
आयुर्वेद के मुताबिक चूड़ा कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होता है और दही शरीर में गर्मी को बनाए रखता है। मकर संक्रांति का त्योहार सर्दियों में मनाया जाता है। दही- चूड़ा को एक साथ खाने से सर्दियों में शरीर को अंदर से गर्म बनाए रखने में मदद मिलती है। ये कॉम्बो शरीर को बीमारियों से लड़ने की ताकत अंदर से देता है।
पाचन तंत्र को करता है मजबूत
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन पर प्रकाशित रिसर्च के अनुसार दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स होते हैं। दही खाने से पेट में गुड़ बैक्टीरिया बढ़ते हैं। इससे कब्ज, गैस और अपच की परेशानी दूर होती है। वहीं, चूड़ा पचाने में आसान होता है। जब आप दही और चूड़ा को एक साथ खाते हैं तो इससे मल नरम होता है। इससे सुबह पेट अच्छे से साफ होता है और पाचन तंत्र को मजबूत बनती है।
इम्यूनिटी स्ट्रांग करता है दही-चूड़ा
दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। मकर संक्रांति के खास मौके पर दही- चूड़ा खाने से शरीर की सर्दी में कम होने वाली इम्यूनिटी बढ़ती है। इससे सर्दी, खांसी और जुकाम की समस्या घटती है। जिन लोगों की इम्यूनिटी काफी कमजोर हैं, उन्हें मकर संक्रांति के दिन दोपहर के खाने में दही- चूड़ा जरूर खाना चाहिए।
हड्डियों और दांतों के लिए फायदेमंद
बता दें कि दही में कैल्शियम और फॉस्फोरस होता है। जबकि चूड़ा आयरन, फाइबर व प्रोटीन का अच्छा सोर्स है। जब आप दही- चूड़ा को एक साथ खाते हैं तो ये शरीर की हड्डियों और दांतों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। दही-चूड़ा खाने से शरीर को कैल्शियम मिलता है। इससे हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद मिलती है।
शरीर को देता है ऊर्जा
मकर संक्रांति के दिन अक्सर लोग सुबह जल्दी स्नान आदि करके पूजा, पाठ और दान करते हैं। इस प्रक्रिया को अपनाने के बाद शरीर को एनर्जी की जरूरत होती है। दही- चूड़ा खाने से शरीर को तुरंत एनर्जी मिलती है। खाने के बाद दही- चूड़ा तुरंत ग्लूकोज में बदल जाता है। इससे शरीर को ताजगी व एनर्जी मिलती है।
मकर संक्रांति के दिन कब खाएं दही-चूड़ा
परंपरा के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन दही -चूड़ा नाश्ते में तिलकुट, गुड़, सब्जी, अचार और चटनी के साथ खाया जाता है। कुछ लोग दोपहर के खाने में भी दही चूड़ा खाते हैं। आप अपनी हिसाब से मकर संक्रांति के दिन दही-चूड़ा खाने का मजा सकते हैं। ध्यान रहे कि किसी भी परिस्थिति में दही-चूड़ा रात को ना खाएं।
फोटो सौजन्य- गूगल
Thyroid Affects:आजकल के गलत खानपान और खराब लाइफस्टाइल की वजह से थायराइड प्रॉब्लम लोगों में आम बात हो गई है। बता दें कि थायराइड एक तितली के साइज की ग्रंथि होती है, जो गर्दन के भीतर मौजूद होती है। यह ग्लैंड थायरोक्सिन हार्मोन का उत्पादन करती है, जो शरीर के मेटाबॉलिक रेट और एनर्जी लेवल को नियंत्रित करता है। जब थायराइड ग्लैंड अपना काम ठीक से करना बंद कर देती है, हाइपोथायरायडिज्म और हाइपरथायराइडिज्म की समस्या होती है। थायराइड की बीमारी होने पर कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसकी वजह से तेजी से वजन में बदलाव, कमजोरी, चिड़चिड़ापन, मूड स्विंग्स, मसल्स में दर्द, कब्ज, स्किन ड्राई होना और बाल गिरने जैसी समस्याएं हो सकती है। अलावा इसके थायराइड की समस्या का असर सेक्स लाइफ पर भी पड़ता सकता है। आइए जानते हैं थायराइड के कारण सेक्स लाइफ कैसे प्रभावित होती है-
कैसे प्रभावित करता है महिलाओं की सेक्स लाइफ को थायराइड-
हाइपोथायरायडिज्म या कम सक्रिय थायरॉयड के कारण अक्सर थकान, अवसाद और कमजोरी जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं। अत्यधिक थकान या कमजोरी के कारण महिला की सेक्स ड्राइव प्रभावित हो सकती है। इससे यौन इच्छा में बदलाव हो सकता है और यौन क्रिया में कमी भी आ सकती है। अलावा इसके, हाइपोथायरायडिज्म के कारण योनि में सूखापन हो सकता है। दरअसल, थायराइड की समस्या की वजह से वजाइनल ल्युब्रीकेंट कम हो जाता है। यह यौन गतिविधि को असुविधाजनक या यहां तक कि दर्दनाक बना सकता है।
वहीं दूसरी तरफ, हाइपरथायरायडिज्म या अतिसक्रिय थायराइड के कारण चिंता, बेचैनी, एंग्जायटी और सोने में कठिनाई जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इन सभी समस्याओं का सेक्स लाइफ पर बुरा असर पड़ता है। इसके कारण यौन इच्छा में कमी आ सकती है और इंटिमेसी भी प्रभावित होती है। जब आप थायरॉयड विकार से पीड़ित होते हैं, तो आपके टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम हो सकता है। यह आपकी कामेच्छा को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है।
क्या है इलाज?
अगर कोई लेडी इन समस्याओं का सामना कर रही है, तो उसे डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है। दवाओं और उचित उपचार से थायरॉयड के लक्षणों को कम करने में मदद मिल सकती है। संतुलित आहार और नियमित व्यायाम से हार्मोनल संतुलन बनाए रखा जा सकता है और ऊर्जा के स्तर में सुधार किया जा सकता है। इसके अलावा, अपनी भावनाओं और समस्याओं के बारे में अपने साथी के साथ खुलकर बात करें। इससे आपका रिश्ता मजबूत होगा और आपका पार्टनर उपचार प्रक्रिया के दौरान आपको भावनात्मक समर्थन प्रदान कर सकता है। ध्यान रखें कि थायराइड का समय पर इलाज किया जाए और इसे दवाओं से कंट्रोल में रखा जाए, तो लगभग सभी सेक्स प्रॉब्लम आसानी से दूर हो सकती हैं।
फोटो सौजन्य- गूगल
New Year Party Makeup: नया साल दस्तक दे रहा है ऐसे में पार्टी सीजन में सबसे स्टाइलिश और खूबसूरत दिखने के लिए लड़कियां पहले से कपड़ो से लेकर फुटवियर और ज्वेलरी तक की खरीदारी कर लेती हैं। लेकिन नए साल पर सिर्फ कपड़ों से कोई खास प्रभाव नहीं हो पाता, इसके लिए फेस पर ग्लो भी अहम रोल अदा करता है। मेकअप आपका आत्मविश्वास बढ़ाता है, आपकी सुंदरता में चार चांद लगाता है और पार्टी में आपको अलग व खास बना सकता है। न्यू ईयर पार्टी के लिए जाना है तो तैयार होने के लिए कुछ मेकअप टिप्स को फॉलो करें। जरूरी है ऐसा मेकअप, जो आपकी रियल खूबसूरती को उभार दे।
हालांकि ज्यादा मेकअप चेहरे को ढक देता है, जबकि सही मेकअप चेहरे के एक्सप्रेशन को और निखार देता है। अगर आप चाहती हैं कि लोग आपके लुक की जमकर तारीफ करें तो नए साल की पार्टी के लिए इस तरह के मेकअप गाइड को अपनाएं।
नया साल पर पार्टी मेकअप गाइड स्टेप्स
स्टेप- 1. मेकअप के लिए स्किन को करें तैयार
पार्टी मेकअप से पहले फेस अच्छी तरह क्लीन करें। स्किन टाइप के मुताबिक मॉइस्चराइज़र जरूर लगाएं। हल्का प्राइमर लगाकर बेस को स्मूद बनाएं। ध्यान रखें, मेकअप तभी अच्छा दिखता है, जब स्किन हेल्दी हो।
स्टेप 2- बेस मेकअप
बेस मेकअप कम लगाएं पर सही लगाएं। फाउंडेशन की जगह बीबी या सीसी क्रीम बेहतर विकल्प है। कंसीलर सिर्फ डार्क सर्कल और दाग पर लगाएं। ज़्यादा पाउडर लगाने से बचें, वरना चेहरा फ्लैट दिखेगा।
स्टेप 3- ऐसे करें आई मेक अप्लाई
ये पार्टी लुक को इन्हेंस करता है। सॉफ्ट शिमर आई मेकअप अपना सकते हैं। पार्टी के लिए ब्रॉन्ज, गोल्ड या पीच आईशैडो को अप्लाई करें। पतली विंग्ड आईलाइनर और मस्कारा आपकी आंखों को खूबसूरत बना सकता है। भारी नकली लैश से बचें, नेचुरल ही प्यारा लगता है।
स्टेप 4- ब्लश और हाइलाइट
ये चेहरे में जान डाल देते हैं। इसके लिए पीच या रोज ब्लश लगाएं। गालों के अपर बोन पर हल्का सा हाइलाइटर लगाएं। ज़्यादा चमक से बचें, नहीं तो फोटो खराब आएंगी।
स्टेप 5- लिपस्टिक लगाने लगाते वक्त रखें ध्यान
ऐसी लिपस्टिक लगाएं जो आपकी पर्सनैलिटी को जाहिर करें। पार्टी में न्यूड पिंक, बेरी या सॉफ्ट रेड शेड लिपस्टिक लगाएं। बहुत डार्क लिपस्टिक तभी अप्लाई करें, जब आई मेकअप हल्का हो। ग्लॉस सिर्फ़ सेंटर में लगाएं।
हेयर स्टाइल
मेकअप और पूरे लुक को पूरा करने के लिए हेयर स्टाइल पर भी फोकस करना जरूरी है। ओपन वेव्स और सॉफ्ट मेकअप सबसे सेफ विकल्प है। हाई बन बना रही हैं तो बोल्ड लिप एलिगेंट लुक देगा।
पार्टी मेकअप में ऐसी गलतियां से बचें
- पार्टी से ठीक पहले कोई नया प्रोडक्ट ट्राय न करें।
- मेकअप करते समय बहुत मोटा फाउंडेशन न लगाएं।
- मेकअप के पहले या बाद में स्किन केयर को भूले नहीं।
- आंख और होंठ दोनों को मेकअप से बहुत बोल्ड न करें। अगर हैवी हाई मेकअप है तो लिप्स शेड हल्का होना चाहिए।
- अक्सर लोग चेहरे पर फाउंडेशन या मेकअप अप्लाई करते हैं लेकिन गर्दन पर नहीं। जिससे गर्दन और चेहरे का शेड मैच नहीं होता है।
Libido: कामेच्छा की कमी आधुनिक जीवनशैली में कई लोगों की समस्या बन चुकी है। लोगों की लाइफस्टाइल में तनाव, एंग्जायटी, अनहेल्दी इटिंग और लगातार भागदौड़ के बीच उनकी फिजिकल और मेंटल हेल्थ के साथ-साथ सेक्सुअल लाइफ पर भी प्रभाव पड़ता है और आहिस्ता-आहिस्ता लोगों में सेक्स करने की इच्छा में कमी आने लगती है। लंबे वक्त तक कमेच्छा में कमी की समस्या की वजह से लोगों की शादीशुदा जिंदगी पर भी असर पड़ सकता है और इससे रिश्तों में गैप बढ़ जाता है। हालांकि, कई बार लोग कमेच्छा बढ़ाने के लिए दवाओं का सहारा भी लेते हैं। पर, इन दवाओं के दुष्प्रभाव होते हैं जो लंबे वक्त तक दिखायी दे सकते हैं।
ऐसे में दवाओं के बिना नेचुरली कामेच्छा बढ़ाने के लिए क्या करना चाहिए और किस तरह की सावधानियां बरतने से कामेच्छा की कमी दूर हो सकती है।
नेचुरली कामेच्छा बढ़ाने के उपाय क्या हैं?
सेक्स जीवन का एक अहम हिस्सा है और हेल्दी सेक्स लाइफ के लिए कामेच्छा काफी अहम है। अगर आपकी कामेच्छा कम है और आप इसे बढ़ाना चाहते हैं तो आपको खास कर तीन स्टेजेस पर काम करना होगा। ये स्टेज हैं शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्तर।
शारीरिक स्तर पर कामेच्छा बढ़ाने के लिए डाइट में बदलाव जरूरी
अच्छी डाइट हेल्दी शरीर और हेल्दी लिबिडो लेवल के लिए भी जरूरी है। आप अपनी कम कमेच्छा की समस्या से राहत पाना चाहते हैं तो आप अपनी डाइट में बदलाव करें। अपनी डेली डाइट में बदलाव करें। आप जिंक और एल-आर्जिनिन जैसे तत्वों से भरपूर फूड्स जैसे- बींस, सीड्स, लॉब्स्टर्स और प्याज जैसी चीजों का सेवन करें।
कामेच्छा बढ़ाने के लिएआप चॉकलेट, अनार, एवोकाडो, ग्रीन टी, पम्पकिन सीड्स और तरबूज जैसे फूड्स का सेवन कर सकते हैं।
इन सबके साथ आप प्रोसेस्ड फूड्स से परहेज करें क्योंकि, प्रोसेस्ड फूड्स आपके शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं और लिबिडो भी कम करते हैं।
रोजाना करें एक्सरसाइज
रोजाना हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करें। आप मसल्स स्ट्रेंथनिंग एक्सरसाइज, कार्डियाक एक्सरसाइज करें। आप रोजाना योगाभ्यास कर सकते हैं और मेडिटेशन का भी अभ्यास करें। इससे आपको कामेच्छा बढ़ाने में मदद मिलेगी।
नींद की कमी ना होने दें
इन सबके अलावा रोजाना 6-7 घंटे की गहरी नींद सोएं। इससे आपका तनाव कम होगा और कामेच्छा बढ़ाने में भी आसानी होगी।
अपनी बीमारियों को करें मैनेज
अगर आपको हाइपटेंशन, मोटापा या अन्य किसी प्रकार की पुरानी स्वास्थ्य समस्या या क्रोनिक डिजिज है तो उसे मैनेज करें और नियंत्रित रखने के लिए जरूरी उपाय करें।
इन आदतों से बचें
अल्कोहल का सेवन करते हैं तो उसे धीरे-धीरे बंद कर दें। इसी तरह स्मोकिंग से भी कामेच्छा कम होती है इसीलिए, आप अपनी धूम्रपान की आदत छोड़ दें।
इंटीमेसी के लिए निकालें कीमती समय
अपनी व्यस्त जीवनशैली के बीच अपने पार्टनर के लिए समय जरूर निकालें। अपने पार्टनर के साथ क्वालिटी टाइम बिताएं और अपनी रिलेशनशिप की अच्छी बातों को याद करें। इससे आपकी रिलेशनशिप में नयी जान आएगी और आपको अपने पार्टनर से इमोशनली कनेक्ट कर पाने में भी मदद होगी।
फोटो सौजन्य- गूगल
नेचुरल इंग्रीडिएंट के इस्तेमाल से निखरती है खूबसूरती
Tamanna Bhatia दक्षिण फिल्म इंडस्ट्री में मिल्की ब्यूटी के नाम से जानी जाती है। इसके कारण तमन्ना की सॉफ्ट और ग्लोइंग त्वचा। तमन्ना की त्वचा क्लिन और हेल्दी ग्लो वाली है। अपनी स्किन को हेल्दी रखने के लिए तमन्ना अपने स्किन केयर रूटीन का बहुत ज्यादा ख्याल रखती हैं। तमन्ना केमिकलयुक्त प्रॉडक्ट्स और ट्रीटमेंट से दूर रहते हुए नेचुरल इंग्रीडिएंट का प्रयोग करती हैं। नेचुरल इंग्रीडिएंट्स हैं पसंद
घर में मिलने वाली आम चीजों की मदद से फेस पैक बनाती हैं तमन्ना और अपनी स्किन पर उन्हें इस्तेमाल करती हैं। बता दें कि ये नेचुरल इंग्रीडिएंट कई पीढ़ियों से भारतीय महिलाओं की पहली पसंद रही हैं और उन्हें इन इंग्रीडिएंट्स पर काफी विश्वास रहा है। आइये जानते हैं कि तमन्ना भटिया अपनी स्किन पर कौन सी चीजें अप्लाई करती हैं-
बेसन का फेस पैक
दो चम्मच बेसन, दो चम्मच गुलाब जल और एक चम्मच दही मिलाएं। सभी चीजों को मिक्स करके फेस पैक बना लें। फिर इस पैक को अपनी गर्दन और चेहरे पर लगाएं। जब फेस पैक सूख जाता है तो अपना चेहरा ठंडे पानी से धो लें।
कॉफी-चंदन का फेस पैक
इस फेस पैक को बनाने के लिए 02 चम्मच चंदन पाउडर, 2 चम्मच कॉफी पाउडर और 2 चम्मच शहद की जरूरत पड़ती है। इन सभी चीजों को मिक्स करके फेस पैक बनाएं। इस फेस पैक को आप अपने चेहरे और गर्दन पर लगाएं। 20-25 मिनट के बाद आप इसे चेहरे से साफ कर दें।
स्किन के लिए बेसन के फायदे
बेसन चने के आटे से तैयार होता है। इसमें चने के गुण पाए जाते हैं। बेसन लगाने से स्किन पर निखार आता है। यह पिम्पल्स की समस्या से आराम दिलाता है और स्किन टैनिंग को भी साफ करता है।
स्किन को सॉफ्ट और ग्लोइंग के लिए तमन्ना का हेल्दी डाइट
स्किन को सॉफ्ट और ग्लोइंग रखने के लिए तमन्ना अपनी डाइट पर खास ध्यान देती हैं। वे ब्रोकोली का सलाद खाती हैं और एवोकाडो भी उनकी डाइट में रहता ही है। इन सबके साथ तमन्ना को रोजाना 8-10 गिलास पानी पीने की आदत है।
फोटो सौजन्य- गूगल
CHHATH PUJA: देशभर में लोक आस्था का महापर्व छठ पूरे हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। सोमवार शाम को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने के लिए बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखांड समेत देश के कई हिस्सों में नदियों के घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।
दिल्ली में भी यमुना तट पर पारंपरिक गीतों और पूजा के बीच माहौल आस्थामय दिखा। इस अवसर पर ना सिर्फ आम लोगों के साथ ही नेतागण और भोजपुरी इंडस्ट्री के कलाकार भी भक्ति में लीन नजर आए। घाटों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और प्रशासन ने व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष टीम तैनात की थी। छठ पूजा की खासियत यह रही कि लोग सुबह से ही तैयारी में जुटे रहे और शाम होते ही सूर्य को अर्घ्य देने के लिए घाटों पर पहुंचे। सोमवार को इस पर्व के तीसरे दिन व्रती महिलाओं ने डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया।
बिहार में छठ ना सिर्फ आस्था का पर्व है, बल्कि इस बार चुनावी मौसम ने इसमें राजनीति का रंग भी जोड़ दिया है। विधानसभा चुनाव के कारण कई उम्मीदवार घाटों पर पहुंच रहे हैं और श्रद्धालुओं से जनसंपर्क करते नजर आए।
फोटो सौजन्य- गूगल
Chhath Puja: महापर्व छठ का आगाज 25 अक्टूबर को हो चुका है। चार दिनों तक चलने वाले छठ पर्व का समापन 29 अक्टूबर को उगते सूर्य को अर्घ्य देकर होगा। पहले दिन नाहय-खाय और आज यानी 26 अक्टूबर को छठ पर्व के दूसरे दिन खरना मनाया जाता है। खरना का भी अपना विशेष महत्व है। छठ में सूर्य देवता के साथ ही छठी मैया की भी पूजा की जाती है। यह त्योहार बिहार का विशेष त्योहार है जिसे झारखंड, उत्तर प्रदेश में रहने वाले लोग बड़े ही आस्था के साथ मनाते हैं। खरना को लोहंडा भी कहा जाता है। खरना पर खास प्रसाद बनाया जाता है जिसका अपना अलग महत्व है। इसी खास प्रसाद को व्रती खाते हैं।
खरना पर प्रसाद में क्या बनता है?
खरना 26 अक्टूबर को है। इस दिन गुड़ वाली खीर और रोटी बनती है। यह खीर मिट्टी का नया चूल्हा बनाकर तैयार किया जाता है। वह भी आम की लकड़ी जलाकर बनाने की प्रथा है। दूसरी लकड़ी का इस्तेमाल इसमें वर्जित माना गया है। व्रती पूजा के बाद प्रसाद के तौर पर इसका ही सेवन करते हैं।
खरना प्रसाद का महत्व ?
खरना वाले दिन व्रती पूरे दिन उपवास रखते हैं। शाम के समय जब मिट्टी का चूल्हा बनाया जाता है, तो उस पर गुड़ की खीर, रोटी बनाई जाती है। आप इसे पीतल या मिर्टी के बर्तन में बना सकते हैं। साथ ही गेहूं की रोटी या फिर पूड़ी बनाई जाती है। शाम में सूर्य देव को पूजा-आराधना करके इस प्रसाद को ग्रहण करते हैं।
आम की लकड़ी ही क्यों किया जाता है इस्तेमाल?
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक आम का पेड़ छठी मइया को प्रिय है। आम की लकड़ी शुद्ध, सात्विक होता है। मान्यता है कि आम की लकड़ी पर पके भोजन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। साथ ही इसका धुआं वातावरण को शुद्ध करता है।
खरना का क्या है महत्व?
खरना छठ पर्व के दूसरे दिन पड़ता है और यहीं से 36 घंटे वाला निर्जला व्रत शुरू होता है। खीर और रोटी खाने के बाद व्रती अन्न और जल ग्रहण नहीं करते हैं। खरना के दिन बनने वाली गुड़ की खीर खाने से छठी मइया का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह सेहत, सुख-समृद्धि, संतान सुख भी देता है। व्रती जब सूर्य देव को अर्घ्य दे देते हैं तो इस प्रसाद का सेवन किया जाता है। उसके बाद ही घर के अन्य सदस्य भी इसे खाते हैं। यहां से शुरू होता है व्रती का 36 घंटे का निर्जला व्रत 27 अक्टूबर को संध्या अर्घ्य और 28 को उगते सूरज को अर्घ्य देकर पूजा का पारण होता है।
खरना प्रसाद गुड़ की खीर बनाने की विधि
इसके लिए मिट्टी या पीतल के बर्तन में दूध डालकर उबालें। इसमें चावल को तीन-चार बार साफ पानी से धोकर डालें। जब चावल पक जाए तो उसमें गुड़ डालकर पकाएं, आंच को कम ही रखें, आप इसमें थोड़ा सा शुद्ध घी भी मिला सकते हैं। अपना पसंदीदा ड्राई फ्रूट्स, इलाचयी पाउडर भी डाल दें।
फोटो सौजन्य- गूगल
Narak Chaturdashi: सनातन परंपरा में कार्तिक मास के कृष्णापक्ष की चतुर्दशी तिथि को छोटी दीपावली या फिर नरक चतुर्दशी, रूप चतुर्दशी और हनुमान पूजा के नाम के तौर पर मनाते हैं। यह पर्व दिवाली से ठीक एक दिन पहले मनाया जाता है। हिंदू मान्यता के मुताबिक नरक चतुर्दशी के दिन ही भगवान कृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का वध करके 16,000 महिलाओं को उसकी कैद से मुक्त कराया था। इस दिन सुबह के समय शरीर में उबटन लगाकर अभ्यंग स्नान की भी परंपरा है।
नरक चतुर्दशी को हनुमान पूजा के नाम से भी जाना जाता है, इसलिए इस दिन हनुमान जी की विधि विधान से पूजा की जाती है। छोटी दीपावली या फिर नरक चतुर्दशी के दिन शाम के समय यम देवता के लिए विशेष रूप से दीया जलाया जाता है। आइये जानते हैं कि आज किस समय और किस दिशा में दीया जलाने से हमें पुण्यफल की प्राप्ति होती है।
छोटी दिवाली पर कहां जलाए दीया
हिंदू मान्यता के मुताबिक आज के दिन यम देवता के लिए विशेष रूप से दीया जलाया जाता है। मान्यता है कि आज के दिन यम देवता के लिए दीया जलाने से नरक में जाने से मुक्ति मिलती है। हिंदू मान्यता के मुताबिक आज प्रदोषकाल में यम देवता के लिए दीया जलाने के साथ 14 दीया जलाना शुभ माना गया है। जिसे घर के विभिन्न स्थानों जैसे आंगन, बालकनी, छत, दरवाजे के बाहर आदि जगह पर रखना चाहिए। छोटी दिवाली के दिन सरसों के तेल का दीया जलाना चाहिए।
नरक चतुर्दशी पर दीया जलाने का मुहूर्त
पंचांग के अनुसार आज नरक चतुर्दशी या फिर कहें छोटी दिवाली पर गोधूलि मुहूर्त 5 बजकर 47 मिनट से लेकर 6 बजकर 13 मिनट तक रहेगा। अलावा इसके आप सायाह्न संध्या के समय यानि सायंकाल 5 बजकर 47 से 7 बजकर 03 मिनट तक बजे के बीच का समय भी दीपदान के लिए उचित रहेगा।
छोटी दिवाली के लिए ये है महाउपाय
छोटी दिवाली के दिन गाय के गोबर से बनाए हुए दीये जलाने की परंपरा है। मान्यता है कि इस उपाय को करने से यम की यातना से मुक्ति मिलती है। आज यम देवता के लिए उनके मंत्र का जप करते हुए चार बाती वाला दीया प्रदोषकाल में जलाना चाहिए। मान्यता है कि इस उपाय को करने से व्यक्ति को यम और प्रेत बाधा का भय नहीं रहता है। दिवाली के पंचपर्व में यम देवता का पूजा विशेष रूप से होता है। गौरतलब है कि दिवाली के पांच पर्वों में न सिर्फ नरक चतुर्दशी बल्कि भैया दूज का पर्व भी यम देवता और यमुना माता से जुड़ा हुआ है।
छोटी दिवाली में दीये का महत्व
हिंदू मान्यता के अनुसार बड़ी दिवाली के मुकाबले आज घरों में जो दीपमालिकाएं बनाई जाती हैं, वो कुछ छोटी होती हैं। मान्यता है कि छोटी दिवाली के दिन जलाए जाने वाले दीये नकारात्मकता को दूर करके सकारात्मकता लाते हैं। छोटी दिवाली पर जलाए जाने वाले ये दीये इस पर्व की पवित्रता के प्रतीक हैं।
फोटो सौजन्य- गूगल









